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कहीं भजन कीर्तन की चर्चा पढ़ता कहीं अजान , अल्ला को ललकार रहे हैं कहीं वीर हनुमान , राजनीति के इस दलदल में कैसा उलट-पुलट है , नेताओं की मस्ती कटती व्याकुल हर इंसान ! अशांत (पटना) ©Ramshloksharmaashant

#blindtrust  कहीं भजन कीर्तन की चर्चा
पढ़ता  कहीं अजान ,
अल्ला  को  ललकार  रहे हैं
कहीं   वीर  हनुमान ,
राजनीति के  इस दलदल में
कैसा उलट-पुलट है ,
नेताओं   की   मस्ती  कटती
व्याकुल  हर  इंसान !

अशांत (पटना)

©Ramshloksharmaashant

कविता #blindtrust

10 Love

मनुष्य का जीवन एक अभी विराम यात्रा है इस यात्रा में वही गंतव्य तक पहुंच पाता है जो निरंतर यात्रा पथ पर चलता रहता है इस जीवन में यात्रा में अपने पद पाते और गंतव्य तीनों के प्रति श्रद्धा अत्यंत आवश्यक है यह श्रद्धा पाठक को अपने पथ पर चल रही बनाने के लिए महत्वपूर्ण है वास्तव में श्रद्धा अपने सद्विचार पर बुद्धि के स्थिर रखने का दूसरा नाम है किसी भी जीवन लक्ष्य को पाने के बहुत सारे रास्ते हो सकते हैं पर सद्विचार द्वारा स्वयं सहित रास्ते पर पूरी श्रद्धा के साथ चलना रहना आवश्यक है भारतीय अध्यात्मिक दर्शन में भक्ति केनो प्रकाश स्वर्ण कीर्तन सवर्ण पद अश्विन आचार्य वंदना से संख्या और अति निवेदन बताए गए हैं निवेदक भी कहते ©Ek villain

#श्रद्धा #shaadi  मनुष्य का जीवन एक अभी विराम यात्रा है इस यात्रा में वही गंतव्य तक पहुंच पाता है जो निरंतर यात्रा पथ पर चलता रहता है इस जीवन में यात्रा में अपने पद पाते और गंतव्य तीनों के प्रति श्रद्धा अत्यंत आवश्यक है यह श्रद्धा पाठक को अपने पथ पर चल रही बनाने के लिए महत्वपूर्ण है वास्तव में श्रद्धा अपने सद्विचार पर बुद्धि के स्थिर रखने का दूसरा नाम है किसी भी जीवन लक्ष्य को पाने के बहुत सारे रास्ते हो सकते हैं पर सद्विचार द्वारा स्वयं सहित रास्ते पर पूरी श्रद्धा के साथ चलना रहना आवश्यक है भारतीय अध्यात्मिक दर्शन में भक्ति केनो प्रकाश स्वर्ण कीर्तन सवर्ण पद अश्विन आचार्य वंदना से संख्या और अति निवेदन बताए गए हैं निवेदक भी कहते

©Ek villain

#श्रद्धा और दृढ़ता #shaadi

10 Love

#रतिसुख‌  🩸💧रति-कामना,छवि-लोचन💧🩸
बहुत सुंदर अनुपम कृति प्रदर्शन
जीवन का एकमात्र सफल दर्शन
सबका दिल देखने को करता है नर्तन
नीरस जीवन का शाश्वत परिवर्तन
देखके मन शीतल हो जाता चन्दन
तेरे-मेरे दिल की  बढ़ जाती है धड़कन
सत्य सनातन लौकिक प्रेम स्पंदन
मन करता है छवि देखन को कीर्तन
EVERYONE WANTS TO SEE 
ALWAYS AGAIN AND AGAIN
But mostly CONDEMNED IT and hide their affection, thoughts and wishes to deceive others to become a
 NOBLE AND GENTLEMAN in everyone EYES.
What a shameful and jockey nature!
Beauty is an exsis where everyone revolve like a BEE TO COLLECT NECTOR TO QUENCH OUR THIRST OF UNIVERSEL NEED-SEX.
BECAUSE It's a theme of successful life.
It is a soothe place where Our Mind and Our Heart taking peace and rest.
 Without it Life is boring and dull.

©RAMESH CHANDRA "ANUPAM"

         जय श्री राम यह कैसा अनमोल पल है आया , सजा अयोध्या धाम है सारा। बरसों बाद अयोध्या नगरी में, राम लला का घर सजाया । राम-नाम का ध्वज फहरता। जय श्री राम का नारा गूंजता। हर्षोउल्लास से मनता उत्सव, राम नाम हर कोई है भजता। पूर्ण श्रृगांर से दरबार शुशोभित। राम लला हैं अब विराजित । धूप दीप से महकता मंदिर, भजन कीर्तन के स्वर हैं गूंजता । राम लला की कृपा बरसती। खुशियों की बगिया है खिलती। स्वपन हुआ साकार है अब तो, मानव पीड़ा है हरती ।      रश्मि वत्स      मेरठ(उत्तर प्रदेश) ©Rashmi Vats

#कविता #जय           जय श्री राम

यह कैसा अनमोल पल है आया ,
सजा अयोध्या धाम है सारा।
बरसों बाद अयोध्या नगरी में,
राम लला का घर सजाया ।

राम-नाम का ध्वज फहरता।
जय श्री राम का नारा गूंजता।
हर्षोउल्लास से मनता उत्सव,
राम नाम हर कोई है भजता।

पूर्ण श्रृगांर से दरबार शुशोभित।
राम लला हैं अब विराजित ।
धूप दीप से महकता मंदिर,
भजन कीर्तन के स्वर हैं गूंजता ।

राम लला की कृपा बरसती।
खुशियों की बगिया है खिलती।
स्वपन हुआ साकार है अब तो,
 मानव पीड़ा है हरती ।

     रश्मि वत्स
     मेरठ(उत्तर प्रदेश)

©Rashmi Vats

#जय श्री राम

8 Love

राम नाम का बोले बोलो ईस शुद्ध नाम का कीर्तन करो । जीवन में सब धर्म निभाके, आत्मा परमात्मा से मिलालो । 🙏Jai shree Ram🙏 ©Sneha MS

#ramleela  राम नाम का बोले बोलो 
ईस शुद्ध नाम का कीर्तन करो ।
जीवन में सब धर्म निभाके,
आत्मा परमात्मा से  मिलालो ।

🙏Jai shree Ram🙏

©Sneha MS

#ramleela

5 Love

एक 'पेड़' के दो टहनियों जैसे हैं हमारे रिश्ते जड़ें छोड़ नहीं सकते, जुदा हो नहीं पाते एक 'सांस' के निरंतर चलने जैसे होता है तुम्हारा एहसास, जिनके थमने से जीवन नाराज़ हो जाते हैं एक नदी के दो छोर से हैं हम दोनों की 'देह' के रिश्ते, टकराते रोज़ हैं मिलते कभी भी नहीं एक पलक के झपकने भर जितना रह गया है लोगों पे 'विश्वास', फिर रिश्ते टूट जाते हैं और अपने छूट जाते हैं, . एक दिन इस सृष्टि का और इंसान का नाश इंसान ख़ुद करेगा, एक दिन वो 'पेड़' जाला दिए जाएंगे, एक दिन वो 'देह' राख हो जाएंगी, एक दिन वो 'सांसें' सिरा दी जाएंगी, एक दिन सब 'विश्वास' फ़िर डगमगाएंगे, . एक दिन तुम्हारा विरह योगी का कीर्तन हो जाएगा, एक दिन तुम्हारा बोलना मुर्दे का स्वर लगेगा, एक दिन तुम्हारा चुम्बन शिव का विष हो जाएगा, एक दिन हमारा साथ शिव की तीसरी नेत्र हो जाएगा, उस दिन मैं शायद आज़ाद हो जाऊंगा। ©Shivam Nahar

#कविता #hindipoetry #kavita  एक 'पेड़' के दो टहनियों जैसे हैं हमारे रिश्ते
जड़ें छोड़ नहीं सकते, जुदा हो नहीं पाते

एक 'सांस' के निरंतर चलने जैसे होता है तुम्हारा एहसास,
जिनके थमने से जीवन नाराज़ हो जाते हैं

एक नदी के दो छोर से हैं हम दोनों की 'देह' के रिश्ते,
टकराते रोज़ हैं मिलते कभी भी नहीं

एक पलक के झपकने भर जितना रह गया है लोगों पे 'विश्वास',
फिर रिश्ते टूट जाते हैं और अपने छूट जाते हैं,
.
एक दिन इस सृष्टि का और इंसान का नाश
इंसान ख़ुद करेगा,
एक दिन वो 'पेड़' जाला दिए जाएंगे,
एक दिन वो 'देह' राख हो जाएंगी,
एक दिन वो 'सांसें' सिरा दी जाएंगी,
एक दिन सब 'विश्वास' फ़िर डगमगाएंगे,
.
एक दिन तुम्हारा विरह योगी का कीर्तन हो जाएगा,
एक दिन तुम्हारा बोलना मुर्दे का स्वर लगेगा,
एक दिन तुम्हारा चुम्बन शिव का विष हो जाएगा,
एक दिन हमारा साथ शिव की तीसरी नेत्र हो जाएगा,
उस दिन मैं शायद आज़ाद हो जाऊंगा।

©Shivam Nahar

#Love #Thoughts #hindipoetry #kavita

25 Love

जीवित रहते हुए ही मोक्ष प्राप्त कर लेना वास्तविक जीवन मुक्ति हमारे धर्म शास्त्रों ने चार पुरुषार्थ मैं मोक्ष को अंतिम पड़ाव माना है जिसे सामान्य रूप से मृत्यु पश्चात स्थित माना जाता है इसका तात्पर्य है कि इस भवसागर में जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर सभी दुखों से छुटकारा पा लेना आते मुख की इच्छा सभी मन में होती है जो कि यह मृत्यु के बाद की स्थिति है तो कोई इसका अनुभव नहीं बता सकता इसके विपरीत यदि मनुष्य चाहे तो वह जीवन ही मुक्त होकर एक विलक्षण आनंद की अनुभूति कर सकता है फिर उस संसार की दुख भी पीड़ित नहीं करते यही जीवन मुक्ति दशा है जीवन में इस दशा के लिए द्वार खुले हुए हैं परंतु उन्हें हमें स्वयं ही बंद कर रखा है इन्हें उद्घाटित करने के लिए धर्म ग्रंथों मैं उपाय बताए गए हैं जैसे संसार में रहते हुए भी मनुष्य यदि स्वार्थी और अहंकारी को त्याग कर स्वयं को सांसारिक परी पंचों से मुक्त कर ले तो वे जीवन मुक्त हो सकता है यद्यपि यह आसान नहीं है पर इतना कठिन भी नहीं है गीता के अनुसार सुख दुख लाभ हानि आदि अवस्था में सम्मिलित बुद्धि से काम करते हुए मनुष्य जो अपने सभी कर्म और फल परमात्मा को अर्पित कर देता है तब वह उनसे जनित सुख-दुख समस्त भाव से मुक्त हो जाता है ऐसी स्थिति में उसे ना तो कीर्तन का अभिमान रहता है और ना ही फल की चिंता ©Ek villain

#जीवन #Connection  जीवित रहते हुए ही मोक्ष प्राप्त कर लेना वास्तविक जीवन मुक्ति हमारे धर्म शास्त्रों ने चार पुरुषार्थ मैं मोक्ष को अंतिम पड़ाव माना है जिसे सामान्य रूप से मृत्यु पश्चात स्थित माना जाता है इसका तात्पर्य है कि इस भवसागर में जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर सभी दुखों से छुटकारा पा लेना आते मुख की इच्छा सभी मन में होती है जो कि यह मृत्यु के बाद की स्थिति है तो कोई इसका अनुभव नहीं बता सकता इसके विपरीत यदि मनुष्य चाहे तो वह जीवन ही मुक्त होकर एक विलक्षण आनंद की अनुभूति कर सकता है फिर उस संसार की दुख भी पीड़ित नहीं करते यही जीवन मुक्ति दशा है जीवन में इस दशा के लिए द्वार खुले हुए हैं परंतु उन्हें हमें स्वयं ही बंद कर रखा है इन्हें उद्घाटित करने के लिए धर्म ग्रंथों मैं उपाय बताए गए हैं जैसे संसार में रहते हुए भी मनुष्य यदि स्वार्थी और अहंकारी को त्याग कर स्वयं को सांसारिक परी पंचों से मुक्त कर ले तो वे जीवन मुक्त हो सकता है यद्यपि यह आसान नहीं है पर इतना कठिन भी नहीं है गीता के अनुसार सुख दुख लाभ हानि आदि अवस्था में सम्मिलित बुद्धि से काम करते हुए मनुष्य जो अपने सभी कर्म और फल परमात्मा को अर्पित कर देता है तब वह उनसे जनित सुख-दुख समस्त भाव से मुक्त हो जाता है ऐसी स्थिति में उसे ना तो कीर्तन का अभिमान रहता है और ना ही फल की चिंता

©Ek villain

#जीवन मुक्ति का द्वार है #Connection

10 Love

*Twelve golden sentences :* *1 Heavy rains remind us of challenges in life. Never ask for a lighter rain, just pray for a better umbrella. That is Attitude.* *2 When flood comes, fish eats ants and when flood recedes, ants eat fish. Only time matters. Just hold on. God gives opportunity to every one.* *3 In a theatre when drama plays, you opt for front seats. When film is screened, you opt for rear seats. Your position in life is only relative. Not absolute.* *4 For making soap, oil is required. But to clean oil, soap is required. This is the irony of life.* *5 Life is not about finding the right person. But creating the right relationship.* *6 It's not how we care in the beginning. But how much we care till the end.* *7 Every problem has (N+1) solutions: where N is the number of solutions that you have tried and 1 is that you have not tried.* *8 When you are in problem, don't think it's the End. It is only a Bend in life.* *9 Difference between Man and God is God gives, gives and forgives. Man gets, gets and forgets.* *10 Only two category of people are happy in life-The Mad and the Child. Be Mad to achieve a goal. Be a Child to enjoy what you achieved.* *11 Never play with the feelings of others. You may win. But lose the person for lifetime.* *12 There is NO Escalator to success. ONLY STEPS!!!* विष्णु सहस्रनाम(एक हजार नाम) आज 921 से 932 नाम 921 वीतभयः जिनका संसारिकरूप भय बीत(निवृत्त हो) गया है 922 पुण्यश्रवणकीर्तनः जिनका श्रवण और कीर्तन पुण्यकारक है 923 उत्तारणः संसार सागर से पार उतारने वाले हैं 924 दुष्कृतिहा पापनाम की दुष्क्रितयों का हनन करने वाले हैं 925 पुण्यः अपनी स्मृतिरूप वाणी से सबको पुण्य का उपदेश देने वाले हैं 926 दुःस्वप्ननाशनः दुःस्वप्नों को नष्ट करने वाले हैं 927 वीरहा संसारियों को मुक्ति देकर उनकी गतियों का हनन करने वाले हैं 928 रक्षणः तीनों लोकों की रक्षा करने वाले हैं 929 सन्तः सन्मार्ग पर चलने वाले संतरूप हैं 930 जीवनः प्राणरूप से समस्त प्रजा को जीवित रखने वाले हैं 931 पर्यवस्थितः विश्व को सब ओर से व्याप्त करके स्थित है 932 अनन्तरूपः जिनके रूप अनंत हैं 🙏बोलो मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 ©Vikas Sharma Shivaaya'

#समाज  *Twelve golden sentences :*

*1 Heavy rains remind us of challenges in life. Never ask for a lighter rain, just pray for a better umbrella. That is Attitude.*

*2 When flood comes, fish eats ants and when flood recedes, ants eat fish. Only time matters. Just hold on. God gives opportunity to every one.*

*3 In a theatre when drama plays, you opt for front seats. When film is screened, you opt for rear seats. Your position in life is only relative. Not absolute.*

*4 For making soap, oil is required. But to clean oil, soap is required. This is the irony of life.*

*5 Life is not about finding the right person. But creating the right relationship.*

*6 It's not how we care in the beginning. But how much we care till the end.*

*7 Every problem has (N+1) solutions: where N is the number of solutions that you have tried and 1 is that you have not tried.*

*8 When you are in problem, don't think it's the End. It is only a Bend in life.*

*9 Difference between Man and God is God gives, gives and forgives. Man gets, gets and forgets.*

*10 Only two category of people are happy in life-The Mad and the Child. Be Mad to achieve a goal. Be a Child to enjoy what you achieved.*

*11 Never play with the feelings of others. You may win. But lose the person for lifetime.*

*12 There is NO Escalator to success. ONLY STEPS!!!*

विष्णु सहस्रनाम(एक हजार नाम) आज 921 से 932 नाम 
921 वीतभयः जिनका संसारिकरूप भय बीत(निवृत्त हो) गया है
922 पुण्यश्रवणकीर्तनः जिनका श्रवण और कीर्तन पुण्यकारक है
923 उत्तारणः संसार सागर से पार उतारने वाले हैं
924 दुष्कृतिहा पापनाम की दुष्क्रितयों का हनन करने वाले हैं
925 पुण्यः अपनी स्मृतिरूप वाणी से सबको पुण्य का उपदेश देने वाले हैं
926 दुःस्वप्ननाशनः दुःस्वप्नों को नष्ट करने वाले हैं
927 वीरहा संसारियों को मुक्ति देकर उनकी गतियों का हनन करने वाले हैं
928 रक्षणः तीनों लोकों की रक्षा करने वाले हैं
929 सन्तः सन्मार्ग पर चलने वाले संतरूप हैं
930 जीवनः प्राणरूप से समस्त प्रजा को जीवित रखने वाले हैं
931 पर्यवस्थितः विश्व को सब ओर से व्याप्त करके स्थित है
932 अनन्तरूपः जिनके रूप अनंत हैं

🙏बोलो मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹

©Vikas Sharma Shivaaya'

*Twelve golden sentences :* *1 Heavy rains remind us of challenges in life. Never ask for a lighter rain, just pray for a better umbrella.

8 Love

एक दिन इश्वर ने पूछा ये क्या जिसे मुझसे भी ज्यादा अहमियत दिये जा रहे हो! क्या है जिसकी इतनी जतन किये जा रहे हो! सुबह -सवरे ,शाम- दोपहर, भजन कीर्तन भूल गये तुम। अरे ये क्या है जिसे रस्मों - रिवाज से ज्यादा निभाये जा रहे हो! मेरा उत्तर - जिम्मेदारीयां, जो तूम हर दिन बढ़ाये जा रहे हो। ©Priyanka Mazumdar

#जिम्मेदारीयांतुम्हारी  एक दिन इश्वर ने पूछा 
ये क्या जिसे मुझसे भी ज्यादा अहमियत दिये जा रहे हो! 
क्या है जिसकी इतनी जतन किये जा रहे हो! 
सुबह -सवरे ,शाम- दोपहर, भजन कीर्तन भूल गये तुम। 
अरे ये क्या है जिसे रस्मों - रिवाज से ज्यादा निभाये जा रहे हो! 
मेरा उत्तर - जिम्मेदारीयां, जो तूम हर दिन बढ़ाये जा रहे हो।

©Priyanka Mazumdar

न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ, मैं तेरे काम आऊँगी, जो दुनिया में आऊँगी। तेरी क्रीम पाउडर काजल, हार झुमके चूड़ी पायल। सिंदूर लाली महावर मेहंदी, अंगिया साड़ी लहंगा चुनरी से सज जाऊँगी, मैं तेरी छवि पाऊँगी, जो दुनिया में आऊँगी। न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ। तेरे बर्तन कपड़े चौका, सिलाई कढ़ाई झाड़ू पोछा। खीर हलवा सब्जी पूरी, अचार चटनी पापड़ बरी सीख जाऊँगी। मैं तेरा हाथ बटाऊँगी, जो दुनिया में आऊँगी। न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ। तेरे व्रत, तीज-त्योहार, देव -देवी, पूजा-पाठ। भजन कीर्तन सत्य-कर्म, दान पुण्य और धर्म सब...... मनाऊँगी, तेरी हर रीत निभाऊँगी,जो दुनिया में आऊँगी. न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ। ©Rupa Sharma

#Life_experience #समाज #save_girls #nojohindi #Women  न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ,
मैं तेरे काम आऊँगी, जो दुनिया में आऊँगी।

तेरी क्रीम पाउडर काजल, 
हार  झुमके  चूड़ी  पायल। 
सिंदूर लाली महावर मेहंदी,
अंगिया साड़ी लहंगा चुनरी से सज जाऊँगी,
मैं तेरी छवि पाऊँगी, जो दुनिया में आऊँगी।

न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ।

तेरे   बर्तन   कपड़े  चौका, 
सिलाई कढ़ाई झाड़ू पोछा।
खीर   हलवा  सब्जी  पूरी, 
अचार  चटनी  पापड़  बरी सीख जाऊँगी।
मैं तेरा हाथ बटाऊँगी, जो दुनिया में आऊँगी।

न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ।

तेरे  व्रत,   तीज-त्योहार,
देव -देवी,      पूजा-पाठ।
भजन कीर्तन सत्य-कर्म,
दान  पुण्य  और  धर्म  सब...... मनाऊँगी,
तेरी हर रीत निभाऊँगी,जो दुनिया में आऊँगी.

न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ।

©Rupa Sharma

एक प्रसिद्ध लेखक पत्रकार और राजनयिक जो बेहद ही हंसमुख स्वभाव और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी है। उनकी पत्रकारिता देश ही नहीं अपितु विदेश में भी प्रसिद्ध है। उन्होंने वैसे जगह पर भी पत्रकारिता की है जहां अन्य पत्रकारों के लिए संभव नहीं है।उनकी हसमुख प्रवृत्ति और हाजिर जवाब का कोई सानी नहीं है। एक समय की बात है वह एक सभा को संबोधित कर रहे थे , सभा में जनसैलाब उमड़ा था , लोग उन्हें सुनने के लिए दूर-दूर से आए हुए थे। जब वह अपना भाषण समाप्त कर बाहर निकले , तब उनकी ओर भीड़ ऑटोग्राफ के लिए बढ़ी। तभी एक नौजवान उस भीड़ से उनके सामने आया उस नौजवान ने उनसे कहा -” मैं आपका बहुत बड़ा श्रोता और प्रशंसक हूं , मैं साहित्य प्रेमी हूं , जिसके कारण मुझे आपकी लेखनी बेहद रुचिकर लगती है। इस कारण आप मेरे सबसे प्रिय लेखक भी हैं। मैंने आपकी सभी पुस्तकें पढ़ी है और आपके व्यक्तित्व को अपने जीवन में उतारना चाहता हूं। किंतु मैं ऐसा क्या करूं जिससे मैं एक अलग पहचान बना सकूं। आपकी तरह ख्याति पा सकूं।” ऐसा कहते हुए उस नौजवान ने अपनी पुस्तिका ऑटोग्राफ के लिए उनकी ओर बढ़ाई। उन्होंने उस समय कुछ नहीं कहा और उसकी पुस्तिका में कुछ शब्द लिखें और ऑटोग्राफ देकर उस नौजवान को पुस्तिका वापस कर दी। इस पुस्तिका में यह लिखा हुआ था – ” आप अपना समय स्वयं को पहचान दिलाने के लिए लगाएं , किसी दूसरे के ऑटोग्राफ से आपकी पहचान नहीं बनेगी। जो समय आप दूसरे लोगों को लिए देते हैं वह समय आप स्वयं के लिए दें। “ नौजवान इस जवाब को पढ़कर बेहद प्रसन्न हुआ और उसने उन्हें धन्यवाद कहा कि – “मैं आपका यह वचन जीवन भर याद रखूंगा और अपनी एक अलग पहचान बना कर दिखाऊंगा। “ उन्होंने उस नौजवान को धन्यवाद दिया और सफलता के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं भी दी। Moral of the story:- Create your own unique personality and identity instead of following others. The one who follows will always have to remain under the shadow of the topper. The biggest thing in life is respect and uniqueness you have for which people remember you. So stop following. Start creating followers. विष्णु सहस्रनाम(एक हजार नाम)आज 670 से 681 नाम :- 670 ब्राह्मणप्रियः जो ब्राह्मणों को प्रिय हैं 671 महाक्रमः जिनका डग महान है 672 महाकर्मा जगत की उत्पत्ति जैसे जिनके कर्म महान हैं 673 महातेजा जिनका तेज महान है 674 महोरगः जो महान उरग (वासुकि सर्परूप) है 675 महाक्रतुः जो महान क्रतु (यज्ञ) है 676 महायज्वा महान हैं और लोक संग्रह के लिए यज्ञानुष्ठान करने से यज्वा भी हैं 677 महायज्ञः महान हैं और यज्ञ हैं 678 महाहविः महान हैं और हवि हैं 679 स्तव्यः जिनकी सब स्तुति करते हैं लेकिन स्वयं किसीकी स्तुति नहीं करते 680 स्तवप्रियः जिनकी सभी स्तुति करते हैं 681 स्तोत्रम् वह गुण कीर्तन हैं जिससे उन्ही की स्तुति की जाती है 🙏बोलो मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय🌹 ©Vikas Sharma Shivaaya'

#समाज  एक प्रसिद्ध लेखक पत्रकार और राजनयिक जो बेहद ही हंसमुख स्वभाव और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी है। उनकी पत्रकारिता देश ही नहीं अपितु विदेश में भी प्रसिद्ध है। उन्होंने वैसे जगह पर भी पत्रकारिता की है जहां अन्य पत्रकारों के लिए संभव नहीं है।उनकी हसमुख प्रवृत्ति और हाजिर जवाब का कोई सानी नहीं है। 

एक समय की बात है वह एक सभा को संबोधित कर रहे थे , सभा में जनसैलाब उमड़ा था , लोग उन्हें सुनने के लिए दूर-दूर से आए हुए थे।

जब वह अपना भाषण समाप्त कर बाहर निकले , तब उनकी ओर भीड़ ऑटोग्राफ के लिए बढ़ी। तभी एक नौजवान उस भीड़ से  उनके सामने आया उस नौजवान ने उनसे कहा -” मैं आपका बहुत बड़ा श्रोता और प्रशंसक हूं , मैं साहित्य प्रेमी हूं , जिसके कारण मुझे आपकी लेखनी बेहद रुचिकर लगती है। इस कारण आप मेरे सबसे प्रिय लेखक भी हैं। मैंने आपकी सभी पुस्तकें पढ़ी है और आपके व्यक्तित्व को अपने जीवन में उतारना चाहता हूं। किंतु मैं ऐसा क्या करूं जिससे मैं एक अलग पहचान बना सकूं। आपकी तरह ख्याति पा सकूं।”

ऐसा कहते हुए उस नौजवान ने अपनी पुस्तिका ऑटोग्राफ के लिए उनकी ओर बढ़ाई।

उन्होंने उस समय कुछ नहीं कहा और उसकी पुस्तिका में कुछ शब्द लिखें और ऑटोग्राफ देकर उस नौजवान को पुस्तिका वापस कर दी।

इस पुस्तिका में यह लिखा हुआ था  –

” आप अपना समय स्वयं को पहचान दिलाने के लिए लगाएं ,

किसी दूसरे के ऑटोग्राफ से आपकी पहचान नहीं बनेगी।

जो समय आप दूसरे लोगों को लिए देते हैं

वह समय आप स्वयं के लिए दें। “

नौजवान इस जवाब को पढ़कर बेहद प्रसन्न हुआ और उसने उन्हें धन्यवाद कहा कि –

“मैं आपका यह वचन जीवन भर याद रखूंगा और अपनी एक अलग पहचान बना कर दिखाऊंगा। “

उन्होंने उस नौजवान को धन्यवाद दिया और सफलता के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं भी दी।

Moral of the story:-

Create your own unique personality and identity instead of following others.

The one who follows will always have to remain under the shadow of the topper.

The biggest thing in life is respect and uniqueness you have for which people remember you.

So stop following. Start creating followers.

विष्णु सहस्रनाम(एक हजार नाम)आज 670  से 681 नाम :-
670 ब्राह्मणप्रियः जो ब्राह्मणों को प्रिय हैं
671 महाक्रमः जिनका डग महान है
672 महाकर्मा जगत की उत्पत्ति जैसे जिनके कर्म महान हैं
673 महातेजा जिनका तेज महान है
674 महोरगः जो महान उरग (वासुकि सर्परूप) है
675 महाक्रतुः जो महान क्रतु (यज्ञ) है
676 महायज्वा महान हैं और लोक संग्रह के लिए यज्ञानुष्ठान करने से यज्वा भी हैं
677 महायज्ञः महान हैं और यज्ञ हैं
678 महाहविः महान हैं और हवि हैं
679 स्तव्यः जिनकी सब स्तुति करते हैं लेकिन स्वयं किसीकी स्तुति नहीं करते
680 स्तवप्रियः जिनकी सभी स्तुति करते हैं
681 स्तोत्रम् वह गुण कीर्तन हैं जिससे उन्ही की स्तुति की जाती है

🙏बोलो मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय🌹

©Vikas Sharma Shivaaya'

एक प्रसिद्ध लेखक पत्रकार और राजनयिक जो बेहद ही हंसमुख स्वभाव और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी है। उनकी पत्रकारिता देश ही नहीं अपितु विदेश में भी

7 Love

कर्म किए बिना भक्ति भक्ति नहीं होती, ईश्वर दर्शन नहीं होते, ध्यान, जप कर्म है, उनका नामगुण कीर्तन भी है और दान-यज्ञ यह सब भी कर्म ही हैं । ©Shubham Gautam

#WritersSpecial  कर्म किए बिना भक्ति भक्ति नहीं होती, ईश्वर दर्शन नहीं होते, ध्यान, जप कर्म है, उनका नामगुण कीर्तन भी है और दान-यज्ञ यह सब भी कर्म ही हैं ।

©Shubham Gautam

भजन कीर्तन

भजन कीर्तन

Wednesday, 16 February | 12:30 pm

39 Bookings

Expired

भगवान के नाम पे ये दरबार सजाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं ये चोला दो धारी,मत पहन के यूँ घूमों दरबार में बीजेपी कर कर के मत झुमों ये राम की आड़ में बस,ख़ुद को चमकाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं रुपयों लेकर लाखों,ये बुकिंग को करते हैं भेंटों की जगह कीर्तन में झाँकियाँ भरते हैं लोगों को करें गुमराह,जेबें भर जाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं कहीं डूब मरो जाकर,कुछ शर्म करो लोगों दरबार में झुक जाओ,सत कर्म करो लोगों सच लिखे सचिन जब भी,उसको धमकाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं भगवान के नाम पे ये दरबार सजाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं © सचिन गोयल गन्नौर शहर सोनीपत हरियाणा ©sachin goel

 भगवान के नाम पे ये दरबार सजाते हैं
लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं

ये चोला दो धारी,मत पहन के यूँ घूमों
दरबार में बीजेपी कर कर के मत झुमों
ये राम की आड़ में बस,ख़ुद को चमकाते हैं
लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं

रुपयों लेकर लाखों,ये बुकिंग को करते हैं
भेंटों की जगह कीर्तन में झाँकियाँ भरते हैं
लोगों को करें गुमराह,जेबें भर जाते हैं
लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं


कहीं डूब मरो जाकर,कुछ शर्म करो लोगों
दरबार में झुक जाओ,सत कर्म करो लोगों
सच लिखे सचिन जब भी,उसको धमकाते हैं
लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं

भगवान के नाम पे ये दरबार सजाते हैं
लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं

© सचिन गोयल
गन्नौर शहर
सोनीपत हरियाणा

©sachin goel

भगवान के नाम पे ये दरबार सजाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं ये चोला दो धारी,मत पहन के यूँ घूमों दरबार में बीजेपी कर कर के मत झुमों ये राम की आड़ में बस,ख़ुद को चमकाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं रुपयों लेकर लाखों,ये बुकिंग को करते हैं भेंटों की जगह कीर्तन में झाँकियाँ भरते हैं लोगों को करें गुमराह,जेबें भर जाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं कहीं डूब मरो जाकर,कुछ शर्म करो लोगों दरबार में झुक जाओ,सत कर्म करो लोगों सच लिखे सचिन जब भी,उसको धमकाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं भगवान के नाम पे ये दरबार सजाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं © सचिन गोयल गन्नौर शहर सोनीपत हरियाणा ©sachin goel

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भक्ति क्या है? भक्ति से क्या लाभ है? * भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी॥ मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा॥ भावार्थ:-जो प्राणी उसे प्रेम के साथ खोजता है, वह सब सुखों की खान इस भक्ति रूपी मणि को पा जाता है। हे प्रभो! मेरे मन में तो ऐसा विश्वास है कि श्री रामजी के दास श्री रामजी से भी बढ़कर हैं॥ भक्ति की भावना से ही हम इस सत्य को अनुभव करते हैं, कि ईश्वर ने हमे कितना कुछ दिया है।वह हमारे प्रति कितना उदार है। इससे हमें अपनी लघुता और उसकी महानताका बोध होता है, अपनी इच्छाओं और इंद्रियों पर नियंत्रण की शक्ति प्राप्त होती है ,और दूसरे जीवों के प्रति प्रेम काभाव पैदा होता है। भक्ति कैसे की जाती है? शास्त्रों में हमें अनेक प्रकार के भक्ति मार्गों का वर्णन मिलेगा।हमारे श्रीरूप गोस्वामी जी ने भक्ति के 64 तरीके बताए हैं। प्रहलाद ने श्रीमद््भागवत में भगवान को प्रसन्न करनेके 9 तरीके बताए हैं। ये हैं श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन व दास्य भाव आदि। श्री चैतन्य चरितामृतमें भगवान के ही मुख से कहलायागया है कि मैं पाँच तरह से बहुत प्रसन्न होता हूँ। ये हैं साधु-संग, नाम-कीर्तन, भगवत्-श्रवण, तीर्थ वास औरश्रद्धा के साथ श्रीमूर्ति सेवा। वे आगेकहते हैं कि इन पांचों में से यदि किसीमार्ग का अवलंबन श्रद्धा के साथ कियाजाए तो वह हृदय में भगवत प्रेमउत्पन्न करेगा। इस विषय में महाप्रभुकहते हैं कि नवधा भक्ति के नौ अंगों में से किसी एक अंग का भी आचरणकरने से भगवत-प्रेम की प्राप्ति होसकती है। परन्तु इन नौ अंगों में भीश्रवण, कीर्तन व स्मरण रूप श्रेष्ठ है। इन सभी मार्गों में श्रेष्ठ भक्ति मार्ग कौन सा है? सरल भक्त-जीवन मेंकेवल नामाश्रय ही सर्वोत्तम साधन हैभगवान की प्राप्ति का। नवधा भक्ति मेंभी श्रीनाम के जाप और स्मरण कोसर्वश्रेष्ठ बताया गया है। यदि निश्छलभाव से हरिनाम का कीर्तन किया जाएतो अल्प समय में ही प्रभु की कृपाप्राप्त होगी। नाम संकीर्तन करना हीभगवान् को प्रसन्न करने का सर्वोत्तमतरीका है, यही सर्वोत्तम भजन है। जिसयुग में हम रह रहे हैं, इस में तोभवसागर पार जाने का यही एक उपायहै। शास्त्र तो कहते हैं कि कलिकाल मेंएकमात्र हरिनाम संकीर्तन के द्वारा हीभगवान की आराधना होती है। नाम संकीर्तन का सुझाव किन ग्रंथों में दिया गया है? श्रीमद्भागवत कहता है कि कलियुग में श्रीहरिनाम-संकीर्तनयज्ञ के द्वारा ही आराधना करनाशास्त्रसम्मत है। वे लोग बुद्धिमान हैं जोनाम संकीर्तन रूपी यज्ञ के द्वारा कृष्णकी आराधना करते हैं। रामचरित मानसमें भी कहा गया है कि कलियुग में भवसागर पार करने के लिए राम नामछोड़ कर और कोई आधार नहीं है। कलियुग समजुग आन नहीं, जो नरकर विश्वास। गाई राम गुण गनविमल, भव तर बिनहिं प्रयास। पावन पर्बत बेद पुराना। राम कथा रुचिराकर नाना॥ मर्मी सज्जन सुमति कुदारी। ग्यान बिराग नयन उरगारी॥ भावार्थ:-वेद-पुराण पवित्र पर्वत हैं। श्री रामजी की नाना प्रकार की कथाएँ उन पर्वतों में सुंदर खानें हैं। संत पुरुष (उनकी इन खानों के रहस्य को जानने वाले) मर्मी हैं और सुंदर बुद्धि (खोदने वाली) कुदाल है। हे गरुड़जी! ज्ञान और वैराग्य ये दो उनके नेत्र हैं॥ नाम संकीर्तन में कथा श्रवण काक्या महत्व है? जीवन में ऐसाअक्सर देखने को मिलता कि किसीव्यक्ति या स्थान को हमने देखा तकनहीं होता, परन्तु उनके बारे में समाचारपत्रों व पत्रिकाओं में पढ़ने से हमें काफीआनंद मिलता है। ठीक इसी प्रकारभगवद धाम, आनन्द धाम, वहाँ केवातावरण या प्रभु की लीलाओं के बारेमें सुन कर हमें आनंद प्राप्त होता है, हमारा चित्त स्थिर होता है और चंचलमन भटकने से रुकता है। ये कथाएंहमारे वेद-शास्त्रों में वर्णित हैं, जिन्हेंपढ़ने या सुनने से हमें भगवान केविषय में कुछ जानकारी भी प्राप्त होतीहै। भजन -कीर्तन करने से क्याहोता है और इसे किस प्रकार करनाचाहिए? गोस्वामी जी कहते हैं किआप भक्ति का कोई भी मार्ग अपनाएं, उसे श्रीनाम कीर्तन के संयोग से हीकरें। इसका फल अवश्य प्राप्त होता हैऔर शीघ्र प्राप्त होता है। सब कहते हैंकि भगवान का भजन करो.....भजनकरो! तो क्या करें हम भगवान काभजन करने के लिए? सच्चे भक्तों केसंग हरिनाम संकीर्तन करना ही सर्वोत्तम भगवद भजन है। सच्चे भक्तों के साथमिलकर, उनके आश्रय में रहकर नाम-संकीर्तन करने से एक अद्भुत प्रसन्नताहोती है, उसमें सामूहिकता होती है, व्यक्तिगत अहंकार नहीं होता और उतनीप्रसन्नता अन्य किसी भी साधन सेनहीं होती, इसीलिए इसे सर्वोत्तमहरिभजन माना गया है। ||आचार्य डॉ0 विजय शंकर मिश्र:|| ©Surbhi Gau Seva Sanstan

#समाज #BookLife  भक्ति क्या है? भक्ति से क्या लाभ है?

* भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी॥
मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा॥

भावार्थ:-जो प्राणी उसे प्रेम के साथ खोजता है, वह सब सुखों की खान इस भक्ति रूपी मणि को पा जाता है। हे प्रभो! मेरे मन में तो ऐसा विश्वास है कि श्री रामजी के दास श्री रामजी से भी बढ़कर हैं॥

भक्ति की भावना से ही हम इस सत्य को अनुभव करते हैं, कि ईश्वर ने हमे कितना कुछ दिया है।वह हमारे प्रति कितना उदार है। इससे हमें अपनी लघुता और उसकी महानताका बोध होता है, अपनी इच्छाओं और इंद्रियों पर नियंत्रण की शक्ति प्राप्त होती है ,और दूसरे जीवों के प्रति प्रेम काभाव पैदा होता है।

भक्ति कैसे की जाती है? 

शास्त्रों में हमें अनेक प्रकार के भक्ति मार्गों का वर्णन मिलेगा।हमारे श्रीरूप गोस्वामी जी ने भक्ति के 64 तरीके बताए हैं। प्रहलाद ने श्रीमद््भागवत में भगवान को प्रसन्न करनेके 9 तरीके बताए हैं। 

ये हैं श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन व दास्य भाव आदि। श्री चैतन्य चरितामृतमें भगवान के ही मुख से कहलायागया है कि मैं पाँच तरह से बहुत प्रसन्न होता हूँ। ये हैं साधु-संग, नाम-कीर्तन, भगवत्-श्रवण, तीर्थ वास औरश्रद्धा के साथ श्रीमूर्ति सेवा। 

वे आगेकहते हैं कि इन पांचों में से यदि किसीमार्ग का अवलंबन श्रद्धा के साथ कियाजाए तो वह हृदय में भगवत प्रेमउत्पन्न करेगा। इस विषय में महाप्रभुकहते हैं कि नवधा भक्ति के नौ अंगों में से किसी एक अंग का भी आचरणकरने से भगवत-प्रेम की प्राप्ति होसकती है। परन्तु इन नौ अंगों में भीश्रवण, कीर्तन व स्मरण रूप श्रेष्ठ है।

इन सभी मार्गों में श्रेष्ठ भक्ति मार्ग कौन सा है?

सरल भक्त-जीवन मेंकेवल नामाश्रय ही सर्वोत्तम साधन हैभगवान की प्राप्ति का। नवधा भक्ति मेंभी श्रीनाम के जाप और स्मरण कोसर्वश्रेष्ठ बताया गया है। यदि निश्छलभाव से हरिनाम का कीर्तन किया जाएतो अल्प समय में ही प्रभु की कृपाप्राप्त होगी। नाम संकीर्तन करना हीभगवान् को प्रसन्न करने का सर्वोत्तमतरीका है, यही सर्वोत्तम भजन है। जिसयुग में हम रह रहे हैं, इस में तोभवसागर पार जाने का यही एक उपायहै। शास्त्र तो कहते हैं कि कलिकाल मेंएकमात्र हरिनाम संकीर्तन के द्वारा हीभगवान की आराधना होती है।

नाम संकीर्तन का सुझाव किन ग्रंथों में दिया गया है? 

श्रीमद्भागवत कहता है कि कलियुग में श्रीहरिनाम-संकीर्तनयज्ञ के द्वारा ही आराधना करनाशास्त्रसम्मत है। वे लोग बुद्धिमान हैं जोनाम संकीर्तन रूपी यज्ञ के द्वारा कृष्णकी आराधना करते हैं। 

रामचरित मानसमें भी कहा गया है कि कलियुग में भवसागर पार करने के लिए राम नामछोड़ कर और कोई आधार नहीं है।

कलियुग समजुग आन नहीं, जो नरकर विश्वास।
गाई राम गुण गनविमल, भव तर बिनहिं प्रयास।

पावन पर्बत बेद पुराना। राम कथा रुचिराकर नाना॥
मर्मी सज्जन सुमति कुदारी। ग्यान बिराग नयन उरगारी॥

भावार्थ:-वेद-पुराण पवित्र पर्वत हैं। श्री रामजी की नाना प्रकार की कथाएँ उन पर्वतों में सुंदर खानें हैं। संत पुरुष (उनकी इन खानों के रहस्य को जानने वाले) मर्मी हैं और सुंदर बुद्धि (खोदने वाली) कुदाल है। हे गरुड़जी! ज्ञान और वैराग्य ये दो उनके नेत्र हैं॥

नाम संकीर्तन में कथा श्रवण काक्या महत्व है? 

जीवन में ऐसाअक्सर देखने को मिलता कि किसीव्यक्ति या स्थान को हमने देखा तकनहीं होता, परन्तु उनके बारे में समाचारपत्रों व पत्रिकाओं में पढ़ने से हमें काफीआनंद मिलता है।

 ठीक इसी प्रकारभगवद धाम, आनन्द धाम, वहाँ केवातावरण या प्रभु की लीलाओं के बारेमें सुन कर हमें आनंद प्राप्त होता है, हमारा चित्त स्थिर होता है और चंचलमन भटकने से रुकता है। ये कथाएंहमारे वेद-शास्त्रों में वर्णित हैं, जिन्हेंपढ़ने या सुनने से हमें भगवान केविषय में कुछ जानकारी भी प्राप्त होतीहै।

भजन -कीर्तन करने से क्याहोता है और इसे किस प्रकार करनाचाहिए? 

गोस्वामी जी कहते हैं किआप भक्ति का कोई भी मार्ग अपनाएं, उसे श्रीनाम कीर्तन के संयोग से हीकरें। इसका फल अवश्य प्राप्त होता हैऔर शीघ्र प्राप्त होता है। सब कहते हैंकि भगवान का भजन करो.....भजनकरो! तो क्या करें हम भगवान काभजन करने के लिए? 

सच्चे भक्तों केसंग हरिनाम संकीर्तन करना ही सर्वोत्तम भगवद भजन है। सच्चे भक्तों के साथमिलकर, उनके आश्रय में रहकर नाम-संकीर्तन करने से एक अद्भुत प्रसन्नताहोती है, उसमें सामूहिकता होती है, व्यक्तिगत अहंकार नहीं होता और उतनीप्रसन्नता अन्य किसी भी साधन सेनहीं होती, इसीलिए इसे सर्वोत्तमहरिभजन माना गया है।

||आचार्य डॉ0 विजय शंकर मिश्र:||

©Surbhi Gau Seva Sanstan

#BookLife भक्ति क्या है? भक्ति से क्या लाभ है? * भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी॥ मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक

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कीर्तन क्या है? ©Biikrmjet Sing

#कीर्तन #ਗਿਆਨ  कीर्तन क्या है?

©Biikrmjet Sing

Hothon mein ganga ho!!💞🇮🇳 दौलत ना अता करना मौला, शोहरत ना अता करना मौला बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मौला शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो बस एक सदा ही सुनें सदा बर्फ़ीली मस्त हवाओं में बस एक दुआ ही उठे सदा जलते-तपते सेहराओं में जीते-जी इसका मान रखें मर कर मर्यादा याद रहे हम रहें कभी ना रहें मगर इसकी सज-धज आबाद रहे जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो गीता का ज्ञान सुने ना सुनें, इस धरती का यशगान सुनें हम सबद-कीर्तन सुन ना सकें भारत मां का जयगान सुनें परवरदिगार,मैं तेरे द्वार पर ले पुकार ये आया हूं चाहे अज़ान ना सुनें कान पर जय-जय हिन्दुस्तान सुनें जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो ©Abhishek Raj

 Hothon mein ganga ho!!💞🇮🇳
दौलत ना अता करना मौला, शोहरत ना अता करना मौला
बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मौला
शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

बस एक सदा ही सुनें सदा बर्फ़ीली मस्त हवाओं में
बस एक दुआ ही उठे सदा जलते-तपते सेहराओं में
जीते-जी इसका मान रखें
मर कर मर्यादा याद रहे

हम रहें कभी ना रहें मगर
इसकी सज-धज आबाद रहे
जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

गीता का ज्ञान सुने ना सुनें, इस धरती का यशगान सुनें
हम सबद-कीर्तन सुन ना सकें भारत मां का जयगान सुनें
परवरदिगार,मैं तेरे द्वार
पर ले पुकार ये आया हूं

चाहे अज़ान ना सुनें कान
पर जय-जय हिन्दुस्तान सुनें
जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

©Abhishek Raj

celebrating 73 rd Republic day

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1. बैसनो सो जिस ऊपर सुप्रसन बिसन की माया ते होये भिन्न।। काहू फल की इच्छा नहीं बाचै केवल भगत कीर्तन सँग राच्य।। 2. तीर्थ बरत अर दान कर मन में धरे गुमान।। नानक नेहफल जात तह जेओ कुंचर ईषनान।। 3. तज मान मोह विकार मिथिआ जप राम राम राम।। अर्थ:- गुरु साहिब जी फ़रमान कर रहे हैं कि अगर जो मास नहीं खाता वह शरीरिक वैष्णो हुआ पर असल वैष्णव वह है जिस पर खुद परमात्मा प्रसन्न हो जाये और जो सब से बड़ी विष्णु भगवान की माया यानी सतोगुण से भी खुद को अलग कर ले यानी पाठ पूजा, दान पुण्य, व्रत, तीर्थ:-भृमण, ईषनान आदि से खुद को अलग करके सिर्फ मन को हरिनाम में जोड़े। अगर कोई पाठ दान पुण्य करता है तो यह न कहे मन में की मैने किया है और मुझे अब इसके बदले में वडिआई फल स्वरूप मिलेगी तो ऐसे फल की मन इच्छा न करे यानी आसक्ति न करे पर भगत केवल हरिसंतो द्वारा की परमात्मा की कीर्ति यानी नाम का कथन व हरिकथा में मन लगाए।।2. तीर्थ यात्राएं व तीर्थ ईषनान व तीर्थ स्थान पर जाना व्रत व दान पुण्य करके मन सोचे कि आहा! मैंने तोह बहुत पुण्य कमा लिया! बड़ी सेवा कर ली, यानी मन में अभी भी मैं है गुमान है तो गुरु जी कहते हे नानक यह सब करना वेस्ट है जैसे हाथी नहाने के बाद बदन पर मिट्टी डाल लेता है तो उसका नहाना वेस्ट हो जाता है।।3. गुरु जी कहते कि मन के मान मोह और मन के विकार छोड़ो और राम नाम का कथन यानी हरिकथा को मन सुने जिसमें हरिनाम का हरिसंतो द्वारा कथन हो अकथ कथा में।। ©Biikrmjet Sing

#असल_वैष्णव #ਗਿਆਨ  1. बैसनो सो जिस ऊपर सुप्रसन बिसन की माया ते होये भिन्न।। काहू फल की इच्छा नहीं बाचै केवल भगत कीर्तन सँग राच्य।। 2. तीर्थ बरत अर दान कर मन में धरे गुमान।। नानक नेहफल जात तह जेओ कुंचर ईषनान।। 3. तज मान मोह विकार मिथिआ जप राम राम राम।।

अर्थ:- गुरु साहिब जी फ़रमान कर रहे हैं कि अगर जो मास नहीं खाता वह शरीरिक वैष्णो हुआ पर असल वैष्णव वह है जिस पर खुद परमात्मा प्रसन्न हो जाये और जो सब से बड़ी विष्णु भगवान की माया यानी सतोगुण से भी खुद को अलग कर ले यानी पाठ पूजा, दान पुण्य, व्रत, तीर्थ:-भृमण, ईषनान आदि से खुद को अलग करके सिर्फ मन को हरिनाम में जोड़े। अगर कोई पाठ दान पुण्य करता है तो यह न कहे मन में की मैने किया है और मुझे अब इसके बदले में वडिआई फल स्वरूप मिलेगी तो ऐसे फल की मन इच्छा न करे यानी आसक्ति न करे पर भगत केवल हरिसंतो द्वारा की परमात्मा की कीर्ति यानी नाम का कथन व हरिकथा में मन लगाए।।2. तीर्थ यात्राएं व तीर्थ ईषनान व तीर्थ स्थान पर जाना व्रत व दान पुण्य करके मन सोचे कि आहा! मैंने तोह बहुत पुण्य कमा लिया! बड़ी सेवा कर ली, यानी मन में अभी भी मैं है गुमान है तो गुरु जी कहते हे नानक यह सब करना वेस्ट है जैसे हाथी नहाने के बाद बदन पर मिट्टी डाल लेता है तो उसका नहाना वेस्ट हो जाता है।।3. गुरु जी कहते कि मन के मान मोह और मन के विकार छोड़ो और राम नाम का कथन यानी हरिकथा को मन सुने जिसमें हरिनाम का हरिसंतो द्वारा कथन हो अकथ कथा में।।

©Biikrmjet Sing
#DecemberCreator #समाज #nojotohindi #Motivation #Devotional

प्रभु बिन नहीं कोई जीवन ज्योत जले तन मन में ,बहे प्रेम की अविरल धारा || मानस प्रीत बढ़ा कर जीता, ना अपना ना कोई बेगाना || प्रभु का कीर्तन ह

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1.साध की धूड़ करो ईषनान साध ऊपर जाईये कुर्बान।। 2.साध सेवा वडभागी पॉइये साध संग हर कीर्तन गाईये।। 3.साध की सेवा नाम ध्याईये।। 4. अमृत बचन साधु की बानी।। अर्थ:- साधु की धूड यानी बचनों का हमें अनुसरण करके मन का ईषनान कराना है।। जो ऐसा कर्म हमे कराते हैं उन पर मन को कुर्बान जाना है।। साध की सेवा क्या है, नाम ध्याना! जो वड्डे भागो से हमें यह सेवा मिलती है ऐसे साधुओ के संग हमे परमात्मा की कीर्ति यानी गुण गायन करने चाहिए यानी हरि की कथा करनी चाहिए।। अमृत क्या है साधु के बचन जिसमे वह परमात्मा के नाम का व्यख्यान करते हैं।। ©Biikrmjet Sing

#ਗਿਆਨ #साधू  1.साध की धूड़ करो ईषनान साध ऊपर जाईये कुर्बान।। 2.साध सेवा वडभागी पॉइये साध संग हर कीर्तन गाईये।। 
3.साध की सेवा नाम ध्याईये।।
4. अमृत बचन साधु की बानी।।

अर्थ:- साधु की धूड यानी बचनों का हमें अनुसरण करके मन का ईषनान कराना है।। जो ऐसा कर्म हमे कराते हैं उन पर मन को कुर्बान जाना है।। साध की सेवा क्या है, नाम ध्याना! जो वड्डे भागो से हमें यह सेवा मिलती है ऐसे साधुओ के संग हमे परमात्मा की कीर्ति यानी गुण गायन करने चाहिए यानी हरि की कथा करनी चाहिए।। अमृत क्या है साधु के बचन जिसमे वह परमात्मा के नाम का व्यख्यान करते हैं।।

©Biikrmjet Sing

कहीं भजन कीर्तन की चर्चा पढ़ता कहीं अजान , अल्ला को ललकार रहे हैं कहीं वीर हनुमान , राजनीति के इस दलदल में कैसा उलट-पुलट है , नेताओं की मस्ती कटती व्याकुल हर इंसान ! अशांत (पटना) ©Ramshloksharmaashant

#blindtrust  कहीं भजन कीर्तन की चर्चा
पढ़ता  कहीं अजान ,
अल्ला  को  ललकार  रहे हैं
कहीं   वीर  हनुमान ,
राजनीति के  इस दलदल में
कैसा उलट-पुलट है ,
नेताओं   की   मस्ती  कटती
व्याकुल  हर  इंसान !

अशांत (पटना)

©Ramshloksharmaashant

कविता #blindtrust

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मनुष्य का जीवन एक अभी विराम यात्रा है इस यात्रा में वही गंतव्य तक पहुंच पाता है जो निरंतर यात्रा पथ पर चलता रहता है इस जीवन में यात्रा में अपने पद पाते और गंतव्य तीनों के प्रति श्रद्धा अत्यंत आवश्यक है यह श्रद्धा पाठक को अपने पथ पर चल रही बनाने के लिए महत्वपूर्ण है वास्तव में श्रद्धा अपने सद्विचार पर बुद्धि के स्थिर रखने का दूसरा नाम है किसी भी जीवन लक्ष्य को पाने के बहुत सारे रास्ते हो सकते हैं पर सद्विचार द्वारा स्वयं सहित रास्ते पर पूरी श्रद्धा के साथ चलना रहना आवश्यक है भारतीय अध्यात्मिक दर्शन में भक्ति केनो प्रकाश स्वर्ण कीर्तन सवर्ण पद अश्विन आचार्य वंदना से संख्या और अति निवेदन बताए गए हैं निवेदक भी कहते ©Ek villain

#श्रद्धा #shaadi  मनुष्य का जीवन एक अभी विराम यात्रा है इस यात्रा में वही गंतव्य तक पहुंच पाता है जो निरंतर यात्रा पथ पर चलता रहता है इस जीवन में यात्रा में अपने पद पाते और गंतव्य तीनों के प्रति श्रद्धा अत्यंत आवश्यक है यह श्रद्धा पाठक को अपने पथ पर चल रही बनाने के लिए महत्वपूर्ण है वास्तव में श्रद्धा अपने सद्विचार पर बुद्धि के स्थिर रखने का दूसरा नाम है किसी भी जीवन लक्ष्य को पाने के बहुत सारे रास्ते हो सकते हैं पर सद्विचार द्वारा स्वयं सहित रास्ते पर पूरी श्रद्धा के साथ चलना रहना आवश्यक है भारतीय अध्यात्मिक दर्शन में भक्ति केनो प्रकाश स्वर्ण कीर्तन सवर्ण पद अश्विन आचार्य वंदना से संख्या और अति निवेदन बताए गए हैं निवेदक भी कहते

©Ek villain

#श्रद्धा और दृढ़ता #shaadi

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#रतिसुख‌  🩸💧रति-कामना,छवि-लोचन💧🩸
बहुत सुंदर अनुपम कृति प्रदर्शन
जीवन का एकमात्र सफल दर्शन
सबका दिल देखने को करता है नर्तन
नीरस जीवन का शाश्वत परिवर्तन
देखके मन शीतल हो जाता चन्दन
तेरे-मेरे दिल की  बढ़ जाती है धड़कन
सत्य सनातन लौकिक प्रेम स्पंदन
मन करता है छवि देखन को कीर्तन
EVERYONE WANTS TO SEE 
ALWAYS AGAIN AND AGAIN
But mostly CONDEMNED IT and hide their affection, thoughts and wishes to deceive others to become a
 NOBLE AND GENTLEMAN in everyone EYES.
What a shameful and jockey nature!
Beauty is an exsis where everyone revolve like a BEE TO COLLECT NECTOR TO QUENCH OUR THIRST OF UNIVERSEL NEED-SEX.
BECAUSE It's a theme of successful life.
It is a soothe place where Our Mind and Our Heart taking peace and rest.
 Without it Life is boring and dull.

©RAMESH CHANDRA "ANUPAM"

         जय श्री राम यह कैसा अनमोल पल है आया , सजा अयोध्या धाम है सारा। बरसों बाद अयोध्या नगरी में, राम लला का घर सजाया । राम-नाम का ध्वज फहरता। जय श्री राम का नारा गूंजता। हर्षोउल्लास से मनता उत्सव, राम नाम हर कोई है भजता। पूर्ण श्रृगांर से दरबार शुशोभित। राम लला हैं अब विराजित । धूप दीप से महकता मंदिर, भजन कीर्तन के स्वर हैं गूंजता । राम लला की कृपा बरसती। खुशियों की बगिया है खिलती। स्वपन हुआ साकार है अब तो, मानव पीड़ा है हरती ।      रश्मि वत्स      मेरठ(उत्तर प्रदेश) ©Rashmi Vats

#कविता #जय           जय श्री राम

यह कैसा अनमोल पल है आया ,
सजा अयोध्या धाम है सारा।
बरसों बाद अयोध्या नगरी में,
राम लला का घर सजाया ।

राम-नाम का ध्वज फहरता।
जय श्री राम का नारा गूंजता।
हर्षोउल्लास से मनता उत्सव,
राम नाम हर कोई है भजता।

पूर्ण श्रृगांर से दरबार शुशोभित।
राम लला हैं अब विराजित ।
धूप दीप से महकता मंदिर,
भजन कीर्तन के स्वर हैं गूंजता ।

राम लला की कृपा बरसती।
खुशियों की बगिया है खिलती।
स्वपन हुआ साकार है अब तो,
 मानव पीड़ा है हरती ।

     रश्मि वत्स
     मेरठ(उत्तर प्रदेश)

©Rashmi Vats

#जय श्री राम

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राम नाम का बोले बोलो ईस शुद्ध नाम का कीर्तन करो । जीवन में सब धर्म निभाके, आत्मा परमात्मा से मिलालो । 🙏Jai shree Ram🙏 ©Sneha MS

#ramleela  राम नाम का बोले बोलो 
ईस शुद्ध नाम का कीर्तन करो ।
जीवन में सब धर्म निभाके,
आत्मा परमात्मा से  मिलालो ।

🙏Jai shree Ram🙏

©Sneha MS

#ramleela

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एक 'पेड़' के दो टहनियों जैसे हैं हमारे रिश्ते जड़ें छोड़ नहीं सकते, जुदा हो नहीं पाते एक 'सांस' के निरंतर चलने जैसे होता है तुम्हारा एहसास, जिनके थमने से जीवन नाराज़ हो जाते हैं एक नदी के दो छोर से हैं हम दोनों की 'देह' के रिश्ते, टकराते रोज़ हैं मिलते कभी भी नहीं एक पलक के झपकने भर जितना रह गया है लोगों पे 'विश्वास', फिर रिश्ते टूट जाते हैं और अपने छूट जाते हैं, . एक दिन इस सृष्टि का और इंसान का नाश इंसान ख़ुद करेगा, एक दिन वो 'पेड़' जाला दिए जाएंगे, एक दिन वो 'देह' राख हो जाएंगी, एक दिन वो 'सांसें' सिरा दी जाएंगी, एक दिन सब 'विश्वास' फ़िर डगमगाएंगे, . एक दिन तुम्हारा विरह योगी का कीर्तन हो जाएगा, एक दिन तुम्हारा बोलना मुर्दे का स्वर लगेगा, एक दिन तुम्हारा चुम्बन शिव का विष हो जाएगा, एक दिन हमारा साथ शिव की तीसरी नेत्र हो जाएगा, उस दिन मैं शायद आज़ाद हो जाऊंगा। ©Shivam Nahar

#कविता #hindipoetry #kavita  एक 'पेड़' के दो टहनियों जैसे हैं हमारे रिश्ते
जड़ें छोड़ नहीं सकते, जुदा हो नहीं पाते

एक 'सांस' के निरंतर चलने जैसे होता है तुम्हारा एहसास,
जिनके थमने से जीवन नाराज़ हो जाते हैं

एक नदी के दो छोर से हैं हम दोनों की 'देह' के रिश्ते,
टकराते रोज़ हैं मिलते कभी भी नहीं

एक पलक के झपकने भर जितना रह गया है लोगों पे 'विश्वास',
फिर रिश्ते टूट जाते हैं और अपने छूट जाते हैं,
.
एक दिन इस सृष्टि का और इंसान का नाश
इंसान ख़ुद करेगा,
एक दिन वो 'पेड़' जाला दिए जाएंगे,
एक दिन वो 'देह' राख हो जाएंगी,
एक दिन वो 'सांसें' सिरा दी जाएंगी,
एक दिन सब 'विश्वास' फ़िर डगमगाएंगे,
.
एक दिन तुम्हारा विरह योगी का कीर्तन हो जाएगा,
एक दिन तुम्हारा बोलना मुर्दे का स्वर लगेगा,
एक दिन तुम्हारा चुम्बन शिव का विष हो जाएगा,
एक दिन हमारा साथ शिव की तीसरी नेत्र हो जाएगा,
उस दिन मैं शायद आज़ाद हो जाऊंगा।

©Shivam Nahar

#Love #Thoughts #hindipoetry #kavita

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जीवित रहते हुए ही मोक्ष प्राप्त कर लेना वास्तविक जीवन मुक्ति हमारे धर्म शास्त्रों ने चार पुरुषार्थ मैं मोक्ष को अंतिम पड़ाव माना है जिसे सामान्य रूप से मृत्यु पश्चात स्थित माना जाता है इसका तात्पर्य है कि इस भवसागर में जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर सभी दुखों से छुटकारा पा लेना आते मुख की इच्छा सभी मन में होती है जो कि यह मृत्यु के बाद की स्थिति है तो कोई इसका अनुभव नहीं बता सकता इसके विपरीत यदि मनुष्य चाहे तो वह जीवन ही मुक्त होकर एक विलक्षण आनंद की अनुभूति कर सकता है फिर उस संसार की दुख भी पीड़ित नहीं करते यही जीवन मुक्ति दशा है जीवन में इस दशा के लिए द्वार खुले हुए हैं परंतु उन्हें हमें स्वयं ही बंद कर रखा है इन्हें उद्घाटित करने के लिए धर्म ग्रंथों मैं उपाय बताए गए हैं जैसे संसार में रहते हुए भी मनुष्य यदि स्वार्थी और अहंकारी को त्याग कर स्वयं को सांसारिक परी पंचों से मुक्त कर ले तो वे जीवन मुक्त हो सकता है यद्यपि यह आसान नहीं है पर इतना कठिन भी नहीं है गीता के अनुसार सुख दुख लाभ हानि आदि अवस्था में सम्मिलित बुद्धि से काम करते हुए मनुष्य जो अपने सभी कर्म और फल परमात्मा को अर्पित कर देता है तब वह उनसे जनित सुख-दुख समस्त भाव से मुक्त हो जाता है ऐसी स्थिति में उसे ना तो कीर्तन का अभिमान रहता है और ना ही फल की चिंता ©Ek villain

#जीवन #Connection  जीवित रहते हुए ही मोक्ष प्राप्त कर लेना वास्तविक जीवन मुक्ति हमारे धर्म शास्त्रों ने चार पुरुषार्थ मैं मोक्ष को अंतिम पड़ाव माना है जिसे सामान्य रूप से मृत्यु पश्चात स्थित माना जाता है इसका तात्पर्य है कि इस भवसागर में जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर सभी दुखों से छुटकारा पा लेना आते मुख की इच्छा सभी मन में होती है जो कि यह मृत्यु के बाद की स्थिति है तो कोई इसका अनुभव नहीं बता सकता इसके विपरीत यदि मनुष्य चाहे तो वह जीवन ही मुक्त होकर एक विलक्षण आनंद की अनुभूति कर सकता है फिर उस संसार की दुख भी पीड़ित नहीं करते यही जीवन मुक्ति दशा है जीवन में इस दशा के लिए द्वार खुले हुए हैं परंतु उन्हें हमें स्वयं ही बंद कर रखा है इन्हें उद्घाटित करने के लिए धर्म ग्रंथों मैं उपाय बताए गए हैं जैसे संसार में रहते हुए भी मनुष्य यदि स्वार्थी और अहंकारी को त्याग कर स्वयं को सांसारिक परी पंचों से मुक्त कर ले तो वे जीवन मुक्त हो सकता है यद्यपि यह आसान नहीं है पर इतना कठिन भी नहीं है गीता के अनुसार सुख दुख लाभ हानि आदि अवस्था में सम्मिलित बुद्धि से काम करते हुए मनुष्य जो अपने सभी कर्म और फल परमात्मा को अर्पित कर देता है तब वह उनसे जनित सुख-दुख समस्त भाव से मुक्त हो जाता है ऐसी स्थिति में उसे ना तो कीर्तन का अभिमान रहता है और ना ही फल की चिंता

©Ek villain

#जीवन मुक्ति का द्वार है #Connection

10 Love

*Twelve golden sentences :* *1 Heavy rains remind us of challenges in life. Never ask for a lighter rain, just pray for a better umbrella. That is Attitude.* *2 When flood comes, fish eats ants and when flood recedes, ants eat fish. Only time matters. Just hold on. God gives opportunity to every one.* *3 In a theatre when drama plays, you opt for front seats. When film is screened, you opt for rear seats. Your position in life is only relative. Not absolute.* *4 For making soap, oil is required. But to clean oil, soap is required. This is the irony of life.* *5 Life is not about finding the right person. But creating the right relationship.* *6 It's not how we care in the beginning. But how much we care till the end.* *7 Every problem has (N+1) solutions: where N is the number of solutions that you have tried and 1 is that you have not tried.* *8 When you are in problem, don't think it's the End. It is only a Bend in life.* *9 Difference between Man and God is God gives, gives and forgives. Man gets, gets and forgets.* *10 Only two category of people are happy in life-The Mad and the Child. Be Mad to achieve a goal. Be a Child to enjoy what you achieved.* *11 Never play with the feelings of others. You may win. But lose the person for lifetime.* *12 There is NO Escalator to success. ONLY STEPS!!!* विष्णु सहस्रनाम(एक हजार नाम) आज 921 से 932 नाम 921 वीतभयः जिनका संसारिकरूप भय बीत(निवृत्त हो) गया है 922 पुण्यश्रवणकीर्तनः जिनका श्रवण और कीर्तन पुण्यकारक है 923 उत्तारणः संसार सागर से पार उतारने वाले हैं 924 दुष्कृतिहा पापनाम की दुष्क्रितयों का हनन करने वाले हैं 925 पुण्यः अपनी स्मृतिरूप वाणी से सबको पुण्य का उपदेश देने वाले हैं 926 दुःस्वप्ननाशनः दुःस्वप्नों को नष्ट करने वाले हैं 927 वीरहा संसारियों को मुक्ति देकर उनकी गतियों का हनन करने वाले हैं 928 रक्षणः तीनों लोकों की रक्षा करने वाले हैं 929 सन्तः सन्मार्ग पर चलने वाले संतरूप हैं 930 जीवनः प्राणरूप से समस्त प्रजा को जीवित रखने वाले हैं 931 पर्यवस्थितः विश्व को सब ओर से व्याप्त करके स्थित है 932 अनन्तरूपः जिनके रूप अनंत हैं 🙏बोलो मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 ©Vikas Sharma Shivaaya'

#समाज  *Twelve golden sentences :*

*1 Heavy rains remind us of challenges in life. Never ask for a lighter rain, just pray for a better umbrella. That is Attitude.*

*2 When flood comes, fish eats ants and when flood recedes, ants eat fish. Only time matters. Just hold on. God gives opportunity to every one.*

*3 In a theatre when drama plays, you opt for front seats. When film is screened, you opt for rear seats. Your position in life is only relative. Not absolute.*

*4 For making soap, oil is required. But to clean oil, soap is required. This is the irony of life.*

*5 Life is not about finding the right person. But creating the right relationship.*

*6 It's not how we care in the beginning. But how much we care till the end.*

*7 Every problem has (N+1) solutions: where N is the number of solutions that you have tried and 1 is that you have not tried.*

*8 When you are in problem, don't think it's the End. It is only a Bend in life.*

*9 Difference between Man and God is God gives, gives and forgives. Man gets, gets and forgets.*

*10 Only two category of people are happy in life-The Mad and the Child. Be Mad to achieve a goal. Be a Child to enjoy what you achieved.*

*11 Never play with the feelings of others. You may win. But lose the person for lifetime.*

*12 There is NO Escalator to success. ONLY STEPS!!!*

विष्णु सहस्रनाम(एक हजार नाम) आज 921 से 932 नाम 
921 वीतभयः जिनका संसारिकरूप भय बीत(निवृत्त हो) गया है
922 पुण्यश्रवणकीर्तनः जिनका श्रवण और कीर्तन पुण्यकारक है
923 उत्तारणः संसार सागर से पार उतारने वाले हैं
924 दुष्कृतिहा पापनाम की दुष्क्रितयों का हनन करने वाले हैं
925 पुण्यः अपनी स्मृतिरूप वाणी से सबको पुण्य का उपदेश देने वाले हैं
926 दुःस्वप्ननाशनः दुःस्वप्नों को नष्ट करने वाले हैं
927 वीरहा संसारियों को मुक्ति देकर उनकी गतियों का हनन करने वाले हैं
928 रक्षणः तीनों लोकों की रक्षा करने वाले हैं
929 सन्तः सन्मार्ग पर चलने वाले संतरूप हैं
930 जीवनः प्राणरूप से समस्त प्रजा को जीवित रखने वाले हैं
931 पर्यवस्थितः विश्व को सब ओर से व्याप्त करके स्थित है
932 अनन्तरूपः जिनके रूप अनंत हैं

🙏बोलो मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹

©Vikas Sharma Shivaaya'

*Twelve golden sentences :* *1 Heavy rains remind us of challenges in life. Never ask for a lighter rain, just pray for a better umbrella.

8 Love

एक दिन इश्वर ने पूछा ये क्या जिसे मुझसे भी ज्यादा अहमियत दिये जा रहे हो! क्या है जिसकी इतनी जतन किये जा रहे हो! सुबह -सवरे ,शाम- दोपहर, भजन कीर्तन भूल गये तुम। अरे ये क्या है जिसे रस्मों - रिवाज से ज्यादा निभाये जा रहे हो! मेरा उत्तर - जिम्मेदारीयां, जो तूम हर दिन बढ़ाये जा रहे हो। ©Priyanka Mazumdar

#जिम्मेदारीयांतुम्हारी  एक दिन इश्वर ने पूछा 
ये क्या जिसे मुझसे भी ज्यादा अहमियत दिये जा रहे हो! 
क्या है जिसकी इतनी जतन किये जा रहे हो! 
सुबह -सवरे ,शाम- दोपहर, भजन कीर्तन भूल गये तुम। 
अरे ये क्या है जिसे रस्मों - रिवाज से ज्यादा निभाये जा रहे हो! 
मेरा उत्तर - जिम्मेदारीयां, जो तूम हर दिन बढ़ाये जा रहे हो।

©Priyanka Mazumdar

न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ, मैं तेरे काम आऊँगी, जो दुनिया में आऊँगी। तेरी क्रीम पाउडर काजल, हार झुमके चूड़ी पायल। सिंदूर लाली महावर मेहंदी, अंगिया साड़ी लहंगा चुनरी से सज जाऊँगी, मैं तेरी छवि पाऊँगी, जो दुनिया में आऊँगी। न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ। तेरे बर्तन कपड़े चौका, सिलाई कढ़ाई झाड़ू पोछा। खीर हलवा सब्जी पूरी, अचार चटनी पापड़ बरी सीख जाऊँगी। मैं तेरा हाथ बटाऊँगी, जो दुनिया में आऊँगी। न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ। तेरे व्रत, तीज-त्योहार, देव -देवी, पूजा-पाठ। भजन कीर्तन सत्य-कर्म, दान पुण्य और धर्म सब...... मनाऊँगी, तेरी हर रीत निभाऊँगी,जो दुनिया में आऊँगी. न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ। ©Rupa Sharma

#Life_experience #समाज #save_girls #nojohindi #Women  न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ,
मैं तेरे काम आऊँगी, जो दुनिया में आऊँगी।

तेरी क्रीम पाउडर काजल, 
हार  झुमके  चूड़ी  पायल। 
सिंदूर लाली महावर मेहंदी,
अंगिया साड़ी लहंगा चुनरी से सज जाऊँगी,
मैं तेरी छवि पाऊँगी, जो दुनिया में आऊँगी।

न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ।

तेरे   बर्तन   कपड़े  चौका, 
सिलाई कढ़ाई झाड़ू पोछा।
खीर   हलवा  सब्जी  पूरी, 
अचार  चटनी  पापड़  बरी सीख जाऊँगी।
मैं तेरा हाथ बटाऊँगी, जो दुनिया में आऊँगी।

न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ।

तेरे  व्रत,   तीज-त्योहार,
देव -देवी,      पूजा-पाठ।
भजन कीर्तन सत्य-कर्म,
दान  पुण्य  और  धर्म  सब...... मनाऊँगी,
तेरी हर रीत निभाऊँगी,जो दुनिया में आऊँगी.

न मार मुझको अम्मा, न मार मुझको माँ।

©Rupa Sharma

एक प्रसिद्ध लेखक पत्रकार और राजनयिक जो बेहद ही हंसमुख स्वभाव और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी है। उनकी पत्रकारिता देश ही नहीं अपितु विदेश में भी प्रसिद्ध है। उन्होंने वैसे जगह पर भी पत्रकारिता की है जहां अन्य पत्रकारों के लिए संभव नहीं है।उनकी हसमुख प्रवृत्ति और हाजिर जवाब का कोई सानी नहीं है। एक समय की बात है वह एक सभा को संबोधित कर रहे थे , सभा में जनसैलाब उमड़ा था , लोग उन्हें सुनने के लिए दूर-दूर से आए हुए थे। जब वह अपना भाषण समाप्त कर बाहर निकले , तब उनकी ओर भीड़ ऑटोग्राफ के लिए बढ़ी। तभी एक नौजवान उस भीड़ से उनके सामने आया उस नौजवान ने उनसे कहा -” मैं आपका बहुत बड़ा श्रोता और प्रशंसक हूं , मैं साहित्य प्रेमी हूं , जिसके कारण मुझे आपकी लेखनी बेहद रुचिकर लगती है। इस कारण आप मेरे सबसे प्रिय लेखक भी हैं। मैंने आपकी सभी पुस्तकें पढ़ी है और आपके व्यक्तित्व को अपने जीवन में उतारना चाहता हूं। किंतु मैं ऐसा क्या करूं जिससे मैं एक अलग पहचान बना सकूं। आपकी तरह ख्याति पा सकूं।” ऐसा कहते हुए उस नौजवान ने अपनी पुस्तिका ऑटोग्राफ के लिए उनकी ओर बढ़ाई। उन्होंने उस समय कुछ नहीं कहा और उसकी पुस्तिका में कुछ शब्द लिखें और ऑटोग्राफ देकर उस नौजवान को पुस्तिका वापस कर दी। इस पुस्तिका में यह लिखा हुआ था – ” आप अपना समय स्वयं को पहचान दिलाने के लिए लगाएं , किसी दूसरे के ऑटोग्राफ से आपकी पहचान नहीं बनेगी। जो समय आप दूसरे लोगों को लिए देते हैं वह समय आप स्वयं के लिए दें। “ नौजवान इस जवाब को पढ़कर बेहद प्रसन्न हुआ और उसने उन्हें धन्यवाद कहा कि – “मैं आपका यह वचन जीवन भर याद रखूंगा और अपनी एक अलग पहचान बना कर दिखाऊंगा। “ उन्होंने उस नौजवान को धन्यवाद दिया और सफलता के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं भी दी। Moral of the story:- Create your own unique personality and identity instead of following others. The one who follows will always have to remain under the shadow of the topper. The biggest thing in life is respect and uniqueness you have for which people remember you. So stop following. Start creating followers. विष्णु सहस्रनाम(एक हजार नाम)आज 670 से 681 नाम :- 670 ब्राह्मणप्रियः जो ब्राह्मणों को प्रिय हैं 671 महाक्रमः जिनका डग महान है 672 महाकर्मा जगत की उत्पत्ति जैसे जिनके कर्म महान हैं 673 महातेजा जिनका तेज महान है 674 महोरगः जो महान उरग (वासुकि सर्परूप) है 675 महाक्रतुः जो महान क्रतु (यज्ञ) है 676 महायज्वा महान हैं और लोक संग्रह के लिए यज्ञानुष्ठान करने से यज्वा भी हैं 677 महायज्ञः महान हैं और यज्ञ हैं 678 महाहविः महान हैं और हवि हैं 679 स्तव्यः जिनकी सब स्तुति करते हैं लेकिन स्वयं किसीकी स्तुति नहीं करते 680 स्तवप्रियः जिनकी सभी स्तुति करते हैं 681 स्तोत्रम् वह गुण कीर्तन हैं जिससे उन्ही की स्तुति की जाती है 🙏बोलो मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय🌹 ©Vikas Sharma Shivaaya'

#समाज  एक प्रसिद्ध लेखक पत्रकार और राजनयिक जो बेहद ही हंसमुख स्वभाव और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी है। उनकी पत्रकारिता देश ही नहीं अपितु विदेश में भी प्रसिद्ध है। उन्होंने वैसे जगह पर भी पत्रकारिता की है जहां अन्य पत्रकारों के लिए संभव नहीं है।उनकी हसमुख प्रवृत्ति और हाजिर जवाब का कोई सानी नहीं है। 

एक समय की बात है वह एक सभा को संबोधित कर रहे थे , सभा में जनसैलाब उमड़ा था , लोग उन्हें सुनने के लिए दूर-दूर से आए हुए थे।

जब वह अपना भाषण समाप्त कर बाहर निकले , तब उनकी ओर भीड़ ऑटोग्राफ के लिए बढ़ी। तभी एक नौजवान उस भीड़ से  उनके सामने आया उस नौजवान ने उनसे कहा -” मैं आपका बहुत बड़ा श्रोता और प्रशंसक हूं , मैं साहित्य प्रेमी हूं , जिसके कारण मुझे आपकी लेखनी बेहद रुचिकर लगती है। इस कारण आप मेरे सबसे प्रिय लेखक भी हैं। मैंने आपकी सभी पुस्तकें पढ़ी है और आपके व्यक्तित्व को अपने जीवन में उतारना चाहता हूं। किंतु मैं ऐसा क्या करूं जिससे मैं एक अलग पहचान बना सकूं। आपकी तरह ख्याति पा सकूं।”

ऐसा कहते हुए उस नौजवान ने अपनी पुस्तिका ऑटोग्राफ के लिए उनकी ओर बढ़ाई।

उन्होंने उस समय कुछ नहीं कहा और उसकी पुस्तिका में कुछ शब्द लिखें और ऑटोग्राफ देकर उस नौजवान को पुस्तिका वापस कर दी।

इस पुस्तिका में यह लिखा हुआ था  –

” आप अपना समय स्वयं को पहचान दिलाने के लिए लगाएं ,

किसी दूसरे के ऑटोग्राफ से आपकी पहचान नहीं बनेगी।

जो समय आप दूसरे लोगों को लिए देते हैं

वह समय आप स्वयं के लिए दें। “

नौजवान इस जवाब को पढ़कर बेहद प्रसन्न हुआ और उसने उन्हें धन्यवाद कहा कि –

“मैं आपका यह वचन जीवन भर याद रखूंगा और अपनी एक अलग पहचान बना कर दिखाऊंगा। “

उन्होंने उस नौजवान को धन्यवाद दिया और सफलता के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं भी दी।

Moral of the story:-

Create your own unique personality and identity instead of following others.

The one who follows will always have to remain under the shadow of the topper.

The biggest thing in life is respect and uniqueness you have for which people remember you.

So stop following. Start creating followers.

विष्णु सहस्रनाम(एक हजार नाम)आज 670  से 681 नाम :-
670 ब्राह्मणप्रियः जो ब्राह्मणों को प्रिय हैं
671 महाक्रमः जिनका डग महान है
672 महाकर्मा जगत की उत्पत्ति जैसे जिनके कर्म महान हैं
673 महातेजा जिनका तेज महान है
674 महोरगः जो महान उरग (वासुकि सर्परूप) है
675 महाक्रतुः जो महान क्रतु (यज्ञ) है
676 महायज्वा महान हैं और लोक संग्रह के लिए यज्ञानुष्ठान करने से यज्वा भी हैं
677 महायज्ञः महान हैं और यज्ञ हैं
678 महाहविः महान हैं और हवि हैं
679 स्तव्यः जिनकी सब स्तुति करते हैं लेकिन स्वयं किसीकी स्तुति नहीं करते
680 स्तवप्रियः जिनकी सभी स्तुति करते हैं
681 स्तोत्रम् वह गुण कीर्तन हैं जिससे उन्ही की स्तुति की जाती है

🙏बोलो मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय🌹

©Vikas Sharma Shivaaya'

एक प्रसिद्ध लेखक पत्रकार और राजनयिक जो बेहद ही हंसमुख स्वभाव और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी है। उनकी पत्रकारिता देश ही नहीं अपितु विदेश में भी

7 Love

कर्म किए बिना भक्ति भक्ति नहीं होती, ईश्वर दर्शन नहीं होते, ध्यान, जप कर्म है, उनका नामगुण कीर्तन भी है और दान-यज्ञ यह सब भी कर्म ही हैं । ©Shubham Gautam

#WritersSpecial  कर्म किए बिना भक्ति भक्ति नहीं होती, ईश्वर दर्शन नहीं होते, ध्यान, जप कर्म है, उनका नामगुण कीर्तन भी है और दान-यज्ञ यह सब भी कर्म ही हैं ।

©Shubham Gautam

भजन कीर्तन

भजन कीर्तन

Wednesday, 16 February | 12:30 pm

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Expired

भगवान के नाम पे ये दरबार सजाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं ये चोला दो धारी,मत पहन के यूँ घूमों दरबार में बीजेपी कर कर के मत झुमों ये राम की आड़ में बस,ख़ुद को चमकाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं रुपयों लेकर लाखों,ये बुकिंग को करते हैं भेंटों की जगह कीर्तन में झाँकियाँ भरते हैं लोगों को करें गुमराह,जेबें भर जाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं कहीं डूब मरो जाकर,कुछ शर्म करो लोगों दरबार में झुक जाओ,सत कर्म करो लोगों सच लिखे सचिन जब भी,उसको धमकाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं भगवान के नाम पे ये दरबार सजाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं © सचिन गोयल गन्नौर शहर सोनीपत हरियाणा ©sachin goel

 भगवान के नाम पे ये दरबार सजाते हैं
लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं

ये चोला दो धारी,मत पहन के यूँ घूमों
दरबार में बीजेपी कर कर के मत झुमों
ये राम की आड़ में बस,ख़ुद को चमकाते हैं
लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं

रुपयों लेकर लाखों,ये बुकिंग को करते हैं
भेंटों की जगह कीर्तन में झाँकियाँ भरते हैं
लोगों को करें गुमराह,जेबें भर जाते हैं
लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं


कहीं डूब मरो जाकर,कुछ शर्म करो लोगों
दरबार में झुक जाओ,सत कर्म करो लोगों
सच लिखे सचिन जब भी,उसको धमकाते हैं
लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं

भगवान के नाम पे ये दरबार सजाते हैं
लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं

© सचिन गोयल
गन्नौर शहर
सोनीपत हरियाणा

©sachin goel

भगवान के नाम पे ये दरबार सजाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं ये चोला दो धारी,मत पहन के यूँ घूमों दरबार में बीजेपी कर कर के मत झुमों ये राम की आड़ में बस,ख़ुद को चमकाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं रुपयों लेकर लाखों,ये बुकिंग को करते हैं भेंटों की जगह कीर्तन में झाँकियाँ भरते हैं लोगों को करें गुमराह,जेबें भर जाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं कहीं डूब मरो जाकर,कुछ शर्म करो लोगों दरबार में झुक जाओ,सत कर्म करो लोगों सच लिखे सचिन जब भी,उसको धमकाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं भगवान के नाम पे ये दरबार सजाते हैं लेकिन भजनों की जगह बीजेपी गाते हैं © सचिन गोयल गन्नौर शहर सोनीपत हरियाणा ©sachin goel

12 Love

भक्ति क्या है? भक्ति से क्या लाभ है? * भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी॥ मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा॥ भावार्थ:-जो प्राणी उसे प्रेम के साथ खोजता है, वह सब सुखों की खान इस भक्ति रूपी मणि को पा जाता है। हे प्रभो! मेरे मन में तो ऐसा विश्वास है कि श्री रामजी के दास श्री रामजी से भी बढ़कर हैं॥ भक्ति की भावना से ही हम इस सत्य को अनुभव करते हैं, कि ईश्वर ने हमे कितना कुछ दिया है।वह हमारे प्रति कितना उदार है। इससे हमें अपनी लघुता और उसकी महानताका बोध होता है, अपनी इच्छाओं और इंद्रियों पर नियंत्रण की शक्ति प्राप्त होती है ,और दूसरे जीवों के प्रति प्रेम काभाव पैदा होता है। भक्ति कैसे की जाती है? शास्त्रों में हमें अनेक प्रकार के भक्ति मार्गों का वर्णन मिलेगा।हमारे श्रीरूप गोस्वामी जी ने भक्ति के 64 तरीके बताए हैं। प्रहलाद ने श्रीमद््भागवत में भगवान को प्रसन्न करनेके 9 तरीके बताए हैं। ये हैं श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन व दास्य भाव आदि। श्री चैतन्य चरितामृतमें भगवान के ही मुख से कहलायागया है कि मैं पाँच तरह से बहुत प्रसन्न होता हूँ। ये हैं साधु-संग, नाम-कीर्तन, भगवत्-श्रवण, तीर्थ वास औरश्रद्धा के साथ श्रीमूर्ति सेवा। वे आगेकहते हैं कि इन पांचों में से यदि किसीमार्ग का अवलंबन श्रद्धा के साथ कियाजाए तो वह हृदय में भगवत प्रेमउत्पन्न करेगा। इस विषय में महाप्रभुकहते हैं कि नवधा भक्ति के नौ अंगों में से किसी एक अंग का भी आचरणकरने से भगवत-प्रेम की प्राप्ति होसकती है। परन्तु इन नौ अंगों में भीश्रवण, कीर्तन व स्मरण रूप श्रेष्ठ है। इन सभी मार्गों में श्रेष्ठ भक्ति मार्ग कौन सा है? सरल भक्त-जीवन मेंकेवल नामाश्रय ही सर्वोत्तम साधन हैभगवान की प्राप्ति का। नवधा भक्ति मेंभी श्रीनाम के जाप और स्मरण कोसर्वश्रेष्ठ बताया गया है। यदि निश्छलभाव से हरिनाम का कीर्तन किया जाएतो अल्प समय में ही प्रभु की कृपाप्राप्त होगी। नाम संकीर्तन करना हीभगवान् को प्रसन्न करने का सर्वोत्तमतरीका है, यही सर्वोत्तम भजन है। जिसयुग में हम रह रहे हैं, इस में तोभवसागर पार जाने का यही एक उपायहै। शास्त्र तो कहते हैं कि कलिकाल मेंएकमात्र हरिनाम संकीर्तन के द्वारा हीभगवान की आराधना होती है। नाम संकीर्तन का सुझाव किन ग्रंथों में दिया गया है? श्रीमद्भागवत कहता है कि कलियुग में श्रीहरिनाम-संकीर्तनयज्ञ के द्वारा ही आराधना करनाशास्त्रसम्मत है। वे लोग बुद्धिमान हैं जोनाम संकीर्तन रूपी यज्ञ के द्वारा कृष्णकी आराधना करते हैं। रामचरित मानसमें भी कहा गया है कि कलियुग में भवसागर पार करने के लिए राम नामछोड़ कर और कोई आधार नहीं है। कलियुग समजुग आन नहीं, जो नरकर विश्वास। गाई राम गुण गनविमल, भव तर बिनहिं प्रयास। पावन पर्बत बेद पुराना। राम कथा रुचिराकर नाना॥ मर्मी सज्जन सुमति कुदारी। ग्यान बिराग नयन उरगारी॥ भावार्थ:-वेद-पुराण पवित्र पर्वत हैं। श्री रामजी की नाना प्रकार की कथाएँ उन पर्वतों में सुंदर खानें हैं। संत पुरुष (उनकी इन खानों के रहस्य को जानने वाले) मर्मी हैं और सुंदर बुद्धि (खोदने वाली) कुदाल है। हे गरुड़जी! ज्ञान और वैराग्य ये दो उनके नेत्र हैं॥ नाम संकीर्तन में कथा श्रवण काक्या महत्व है? जीवन में ऐसाअक्सर देखने को मिलता कि किसीव्यक्ति या स्थान को हमने देखा तकनहीं होता, परन्तु उनके बारे में समाचारपत्रों व पत्रिकाओं में पढ़ने से हमें काफीआनंद मिलता है। ठीक इसी प्रकारभगवद धाम, आनन्द धाम, वहाँ केवातावरण या प्रभु की लीलाओं के बारेमें सुन कर हमें आनंद प्राप्त होता है, हमारा चित्त स्थिर होता है और चंचलमन भटकने से रुकता है। ये कथाएंहमारे वेद-शास्त्रों में वर्णित हैं, जिन्हेंपढ़ने या सुनने से हमें भगवान केविषय में कुछ जानकारी भी प्राप्त होतीहै। भजन -कीर्तन करने से क्याहोता है और इसे किस प्रकार करनाचाहिए? गोस्वामी जी कहते हैं किआप भक्ति का कोई भी मार्ग अपनाएं, उसे श्रीनाम कीर्तन के संयोग से हीकरें। इसका फल अवश्य प्राप्त होता हैऔर शीघ्र प्राप्त होता है। सब कहते हैंकि भगवान का भजन करो.....भजनकरो! तो क्या करें हम भगवान काभजन करने के लिए? सच्चे भक्तों केसंग हरिनाम संकीर्तन करना ही सर्वोत्तम भगवद भजन है। सच्चे भक्तों के साथमिलकर, उनके आश्रय में रहकर नाम-संकीर्तन करने से एक अद्भुत प्रसन्नताहोती है, उसमें सामूहिकता होती है, व्यक्तिगत अहंकार नहीं होता और उतनीप्रसन्नता अन्य किसी भी साधन सेनहीं होती, इसीलिए इसे सर्वोत्तमहरिभजन माना गया है। ||आचार्य डॉ0 विजय शंकर मिश्र:|| ©Surbhi Gau Seva Sanstan

#समाज #BookLife  भक्ति क्या है? भक्ति से क्या लाभ है?

* भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी॥
मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा॥

भावार्थ:-जो प्राणी उसे प्रेम के साथ खोजता है, वह सब सुखों की खान इस भक्ति रूपी मणि को पा जाता है। हे प्रभो! मेरे मन में तो ऐसा विश्वास है कि श्री रामजी के दास श्री रामजी से भी बढ़कर हैं॥

भक्ति की भावना से ही हम इस सत्य को अनुभव करते हैं, कि ईश्वर ने हमे कितना कुछ दिया है।वह हमारे प्रति कितना उदार है। इससे हमें अपनी लघुता और उसकी महानताका बोध होता है, अपनी इच्छाओं और इंद्रियों पर नियंत्रण की शक्ति प्राप्त होती है ,और दूसरे जीवों के प्रति प्रेम काभाव पैदा होता है।

भक्ति कैसे की जाती है? 

शास्त्रों में हमें अनेक प्रकार के भक्ति मार्गों का वर्णन मिलेगा।हमारे श्रीरूप गोस्वामी जी ने भक्ति के 64 तरीके बताए हैं। प्रहलाद ने श्रीमद््भागवत में भगवान को प्रसन्न करनेके 9 तरीके बताए हैं। 

ये हैं श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन व दास्य भाव आदि। श्री चैतन्य चरितामृतमें भगवान के ही मुख से कहलायागया है कि मैं पाँच तरह से बहुत प्रसन्न होता हूँ। ये हैं साधु-संग, नाम-कीर्तन, भगवत्-श्रवण, तीर्थ वास औरश्रद्धा के साथ श्रीमूर्ति सेवा। 

वे आगेकहते हैं कि इन पांचों में से यदि किसीमार्ग का अवलंबन श्रद्धा के साथ कियाजाए तो वह हृदय में भगवत प्रेमउत्पन्न करेगा। इस विषय में महाप्रभुकहते हैं कि नवधा भक्ति के नौ अंगों में से किसी एक अंग का भी आचरणकरने से भगवत-प्रेम की प्राप्ति होसकती है। परन्तु इन नौ अंगों में भीश्रवण, कीर्तन व स्मरण रूप श्रेष्ठ है।

इन सभी मार्गों में श्रेष्ठ भक्ति मार्ग कौन सा है?

सरल भक्त-जीवन मेंकेवल नामाश्रय ही सर्वोत्तम साधन हैभगवान की प्राप्ति का। नवधा भक्ति मेंभी श्रीनाम के जाप और स्मरण कोसर्वश्रेष्ठ बताया गया है। यदि निश्छलभाव से हरिनाम का कीर्तन किया जाएतो अल्प समय में ही प्रभु की कृपाप्राप्त होगी। नाम संकीर्तन करना हीभगवान् को प्रसन्न करने का सर्वोत्तमतरीका है, यही सर्वोत्तम भजन है। जिसयुग में हम रह रहे हैं, इस में तोभवसागर पार जाने का यही एक उपायहै। शास्त्र तो कहते हैं कि कलिकाल मेंएकमात्र हरिनाम संकीर्तन के द्वारा हीभगवान की आराधना होती है।

नाम संकीर्तन का सुझाव किन ग्रंथों में दिया गया है? 

श्रीमद्भागवत कहता है कि कलियुग में श्रीहरिनाम-संकीर्तनयज्ञ के द्वारा ही आराधना करनाशास्त्रसम्मत है। वे लोग बुद्धिमान हैं जोनाम संकीर्तन रूपी यज्ञ के द्वारा कृष्णकी आराधना करते हैं। 

रामचरित मानसमें भी कहा गया है कि कलियुग में भवसागर पार करने के लिए राम नामछोड़ कर और कोई आधार नहीं है।

कलियुग समजुग आन नहीं, जो नरकर विश्वास।
गाई राम गुण गनविमल, भव तर बिनहिं प्रयास।

पावन पर्बत बेद पुराना। राम कथा रुचिराकर नाना॥
मर्मी सज्जन सुमति कुदारी। ग्यान बिराग नयन उरगारी॥

भावार्थ:-वेद-पुराण पवित्र पर्वत हैं। श्री रामजी की नाना प्रकार की कथाएँ उन पर्वतों में सुंदर खानें हैं। संत पुरुष (उनकी इन खानों के रहस्य को जानने वाले) मर्मी हैं और सुंदर बुद्धि (खोदने वाली) कुदाल है। हे गरुड़जी! ज्ञान और वैराग्य ये दो उनके नेत्र हैं॥

नाम संकीर्तन में कथा श्रवण काक्या महत्व है? 

जीवन में ऐसाअक्सर देखने को मिलता कि किसीव्यक्ति या स्थान को हमने देखा तकनहीं होता, परन्तु उनके बारे में समाचारपत्रों व पत्रिकाओं में पढ़ने से हमें काफीआनंद मिलता है।

 ठीक इसी प्रकारभगवद धाम, आनन्द धाम, वहाँ केवातावरण या प्रभु की लीलाओं के बारेमें सुन कर हमें आनंद प्राप्त होता है, हमारा चित्त स्थिर होता है और चंचलमन भटकने से रुकता है। ये कथाएंहमारे वेद-शास्त्रों में वर्णित हैं, जिन्हेंपढ़ने या सुनने से हमें भगवान केविषय में कुछ जानकारी भी प्राप्त होतीहै।

भजन -कीर्तन करने से क्याहोता है और इसे किस प्रकार करनाचाहिए? 

गोस्वामी जी कहते हैं किआप भक्ति का कोई भी मार्ग अपनाएं, उसे श्रीनाम कीर्तन के संयोग से हीकरें। इसका फल अवश्य प्राप्त होता हैऔर शीघ्र प्राप्त होता है। सब कहते हैंकि भगवान का भजन करो.....भजनकरो! तो क्या करें हम भगवान काभजन करने के लिए? 

सच्चे भक्तों केसंग हरिनाम संकीर्तन करना ही सर्वोत्तम भगवद भजन है। सच्चे भक्तों के साथमिलकर, उनके आश्रय में रहकर नाम-संकीर्तन करने से एक अद्भुत प्रसन्नताहोती है, उसमें सामूहिकता होती है, व्यक्तिगत अहंकार नहीं होता और उतनीप्रसन्नता अन्य किसी भी साधन सेनहीं होती, इसीलिए इसे सर्वोत्तमहरिभजन माना गया है।

||आचार्य डॉ0 विजय शंकर मिश्र:||

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#BookLife भक्ति क्या है? भक्ति से क्या लाभ है? * भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी॥ मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक

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कीर्तन क्या है? ©Biikrmjet Sing

#कीर्तन #ਗਿਆਨ  कीर्तन क्या है?

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Hothon mein ganga ho!!💞🇮🇳 दौलत ना अता करना मौला, शोहरत ना अता करना मौला बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मौला शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो बस एक सदा ही सुनें सदा बर्फ़ीली मस्त हवाओं में बस एक दुआ ही उठे सदा जलते-तपते सेहराओं में जीते-जी इसका मान रखें मर कर मर्यादा याद रहे हम रहें कभी ना रहें मगर इसकी सज-धज आबाद रहे जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो गीता का ज्ञान सुने ना सुनें, इस धरती का यशगान सुनें हम सबद-कीर्तन सुन ना सकें भारत मां का जयगान सुनें परवरदिगार,मैं तेरे द्वार पर ले पुकार ये आया हूं चाहे अज़ान ना सुनें कान पर जय-जय हिन्दुस्तान सुनें जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो ©Abhishek Raj

 Hothon mein ganga ho!!💞🇮🇳
दौलत ना अता करना मौला, शोहरत ना अता करना मौला
बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मौला
शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

बस एक सदा ही सुनें सदा बर्फ़ीली मस्त हवाओं में
बस एक दुआ ही उठे सदा जलते-तपते सेहराओं में
जीते-जी इसका मान रखें
मर कर मर्यादा याद रहे

हम रहें कभी ना रहें मगर
इसकी सज-धज आबाद रहे
जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

गीता का ज्ञान सुने ना सुनें, इस धरती का यशगान सुनें
हम सबद-कीर्तन सुन ना सकें भारत मां का जयगान सुनें
परवरदिगार,मैं तेरे द्वार
पर ले पुकार ये आया हूं

चाहे अज़ान ना सुनें कान
पर जय-जय हिन्दुस्तान सुनें
जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

©Abhishek Raj

celebrating 73 rd Republic day

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1. बैसनो सो जिस ऊपर सुप्रसन बिसन की माया ते होये भिन्न।। काहू फल की इच्छा नहीं बाचै केवल भगत कीर्तन सँग राच्य।। 2. तीर्थ बरत अर दान कर मन में धरे गुमान।। नानक नेहफल जात तह जेओ कुंचर ईषनान।। 3. तज मान मोह विकार मिथिआ जप राम राम राम।। अर्थ:- गुरु साहिब जी फ़रमान कर रहे हैं कि अगर जो मास नहीं खाता वह शरीरिक वैष्णो हुआ पर असल वैष्णव वह है जिस पर खुद परमात्मा प्रसन्न हो जाये और जो सब से बड़ी विष्णु भगवान की माया यानी सतोगुण से भी खुद को अलग कर ले यानी पाठ पूजा, दान पुण्य, व्रत, तीर्थ:-भृमण, ईषनान आदि से खुद को अलग करके सिर्फ मन को हरिनाम में जोड़े। अगर कोई पाठ दान पुण्य करता है तो यह न कहे मन में की मैने किया है और मुझे अब इसके बदले में वडिआई फल स्वरूप मिलेगी तो ऐसे फल की मन इच्छा न करे यानी आसक्ति न करे पर भगत केवल हरिसंतो द्वारा की परमात्मा की कीर्ति यानी नाम का कथन व हरिकथा में मन लगाए।।2. तीर्थ यात्राएं व तीर्थ ईषनान व तीर्थ स्थान पर जाना व्रत व दान पुण्य करके मन सोचे कि आहा! मैंने तोह बहुत पुण्य कमा लिया! बड़ी सेवा कर ली, यानी मन में अभी भी मैं है गुमान है तो गुरु जी कहते हे नानक यह सब करना वेस्ट है जैसे हाथी नहाने के बाद बदन पर मिट्टी डाल लेता है तो उसका नहाना वेस्ट हो जाता है।।3. गुरु जी कहते कि मन के मान मोह और मन के विकार छोड़ो और राम नाम का कथन यानी हरिकथा को मन सुने जिसमें हरिनाम का हरिसंतो द्वारा कथन हो अकथ कथा में।। ©Biikrmjet Sing

#असल_वैष्णव #ਗਿਆਨ  1. बैसनो सो जिस ऊपर सुप्रसन बिसन की माया ते होये भिन्न।। काहू फल की इच्छा नहीं बाचै केवल भगत कीर्तन सँग राच्य।। 2. तीर्थ बरत अर दान कर मन में धरे गुमान।। नानक नेहफल जात तह जेओ कुंचर ईषनान।। 3. तज मान मोह विकार मिथिआ जप राम राम राम।।

अर्थ:- गुरु साहिब जी फ़रमान कर रहे हैं कि अगर जो मास नहीं खाता वह शरीरिक वैष्णो हुआ पर असल वैष्णव वह है जिस पर खुद परमात्मा प्रसन्न हो जाये और जो सब से बड़ी विष्णु भगवान की माया यानी सतोगुण से भी खुद को अलग कर ले यानी पाठ पूजा, दान पुण्य, व्रत, तीर्थ:-भृमण, ईषनान आदि से खुद को अलग करके सिर्फ मन को हरिनाम में जोड़े। अगर कोई पाठ दान पुण्य करता है तो यह न कहे मन में की मैने किया है और मुझे अब इसके बदले में वडिआई फल स्वरूप मिलेगी तो ऐसे फल की मन इच्छा न करे यानी आसक्ति न करे पर भगत केवल हरिसंतो द्वारा की परमात्मा की कीर्ति यानी नाम का कथन व हरिकथा में मन लगाए।।2. तीर्थ यात्राएं व तीर्थ ईषनान व तीर्थ स्थान पर जाना व्रत व दान पुण्य करके मन सोचे कि आहा! मैंने तोह बहुत पुण्य कमा लिया! बड़ी सेवा कर ली, यानी मन में अभी भी मैं है गुमान है तो गुरु जी कहते हे नानक यह सब करना वेस्ट है जैसे हाथी नहाने के बाद बदन पर मिट्टी डाल लेता है तो उसका नहाना वेस्ट हो जाता है।।3. गुरु जी कहते कि मन के मान मोह और मन के विकार छोड़ो और राम नाम का कथन यानी हरिकथा को मन सुने जिसमें हरिनाम का हरिसंतो द्वारा कथन हो अकथ कथा में।।

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#DecemberCreator #समाज #nojotohindi #Motivation #Devotional

प्रभु बिन नहीं कोई जीवन ज्योत जले तन मन में ,बहे प्रेम की अविरल धारा || मानस प्रीत बढ़ा कर जीता, ना अपना ना कोई बेगाना || प्रभु का कीर्तन ह

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1.साध की धूड़ करो ईषनान साध ऊपर जाईये कुर्बान।। 2.साध सेवा वडभागी पॉइये साध संग हर कीर्तन गाईये।। 3.साध की सेवा नाम ध्याईये।। 4. अमृत बचन साधु की बानी।। अर्थ:- साधु की धूड यानी बचनों का हमें अनुसरण करके मन का ईषनान कराना है।। जो ऐसा कर्म हमे कराते हैं उन पर मन को कुर्बान जाना है।। साध की सेवा क्या है, नाम ध्याना! जो वड्डे भागो से हमें यह सेवा मिलती है ऐसे साधुओ के संग हमे परमात्मा की कीर्ति यानी गुण गायन करने चाहिए यानी हरि की कथा करनी चाहिए।। अमृत क्या है साधु के बचन जिसमे वह परमात्मा के नाम का व्यख्यान करते हैं।। ©Biikrmjet Sing

#ਗਿਆਨ #साधू  1.साध की धूड़ करो ईषनान साध ऊपर जाईये कुर्बान।। 2.साध सेवा वडभागी पॉइये साध संग हर कीर्तन गाईये।। 
3.साध की सेवा नाम ध्याईये।।
4. अमृत बचन साधु की बानी।।

अर्थ:- साधु की धूड यानी बचनों का हमें अनुसरण करके मन का ईषनान कराना है।। जो ऐसा कर्म हमे कराते हैं उन पर मन को कुर्बान जाना है।। साध की सेवा क्या है, नाम ध्याना! जो वड्डे भागो से हमें यह सेवा मिलती है ऐसे साधुओ के संग हमे परमात्मा की कीर्ति यानी गुण गायन करने चाहिए यानी हरि की कथा करनी चाहिए।। अमृत क्या है साधु के बचन जिसमे वह परमात्मा के नाम का व्यख्यान करते हैं।।

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