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"नौ मिनट के लिए दिए की लौ जलाएं सारी दुनिया को अपनी एकता दिखाएं मोदीजी का साथ देकर देशभक्ति निभाएं करते हैं कोशिश मन का अंधेरा मिट जाये काली घनी मायूसी के बादल छट जाये वेदो और संस्कृति की ओर हम मूड़ जाये फिर से जीवन का उजाला हमसे जूड़ जाये"

नौ मिनट के लिए
दिए की लौ जलाएं

सारी दुनिया को अपनी एकता दिखाएं
मोदीजी का साथ देकर देशभक्ति निभाएं

करते हैं कोशिश मन का अंधेरा मिट जाये
काली घनी मायूसी के बादल छट जाये

वेदो और संस्कृति की ओर हम मूड़ जाये
फिर से जीवन का उजाला हमसे जूड़ जाये

#nojotohindi #hindinama #मीरां #hindipoetry #मोदीजी @Satyaprem Upadhyay

28 Love

"कुछ विरासतें कभी नहीं बदलती कुछ संस्कृतियां कभी नहीं मिटती"

कुछ विरासतें कभी नहीं बदलती
कुछ संस्कृतियां कभी नहीं मिटती

#nojotohindi #hindinama #hindiquotes #मीरां #दिया_जलाएं

23 Love

"कुछ दिल की मजबूरियाँ थी, कुछ किस्मत के मारे थे, साथ बो भी छोड़ गेय, जो जान से प्यारे थे🙄 Ashwani kumar✍️"

कुछ दिल की मजबूरियाँ थी,
कुछ किस्मत के मारे थे,
साथ बो भी छोड़ गेय,
जो जान से प्यारे थे🙄

Ashwani kumar✍️

#nojoto #hindinama #loveyou #feelings #muheart #kalpna

15 Love
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"बड़े दिनों बाद देखा था उसे, वही नैन-नक्श, वही मुस्कान, वही लंबे केश, वही कोमल हाथ, वही इंतज़ार, जो मुझसे मिलने का, उसे हमेशा होता था, इतने दिनों बाद देखा तो गले लग गयी, महसूस हुआ की शर्ट भीग गयी थी मेरी, मेरे काफी नज़दीक खड़ी थी वो, फ़िर भी आंखों में कहीं किसी अनन्त में, अब भी खोई हुई थी वो...... अजय नहीं आया, कबसे कहके गया था, कि माँ अभी कुछ दिनों की बात है, बस ६ महीने बाद आ जाऊंगा वापस विदेश से, दिवाली साथ मनाएंगे माँ.... ६ साल हो गए वो अब भी नहीं आया, ये बाहें आज भी उस प्यार भरे आलिंगन को, तलाश रहीं हैं, जिन्हें वो जल्दी जाने और जल्दी आने की, आस में वो अधूरा छोड़ गया था.... इस बीच दरवाज़े पर घंटी बजी, बोली जा देख के आ, शायद आज अजय आ गया हो बेटा, उस दिन अजय अपनी माँ से गले लग के, बिलख-२ के रोया...... आज उस आलिंगन में,वो नर्माहट नहीं थी, जो उस जल्दी आने और जल्दी वापस आने की आस में, अधूरी रह गयी....... इंसान अकसर सही समय पर, प्यार जताने में पीछे रह जाता है, नहीं....?? . . सोचता हूँ, माँ को एक फोन कर आज फ़िर कह दूँ, माँ मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ.....!!!! :- शिवम नाहर"

बड़े दिनों बाद देखा था उसे,
वही नैन-नक्श, वही मुस्कान,
वही लंबे केश, वही कोमल हाथ,
वही इंतज़ार, जो मुझसे मिलने का,
उसे हमेशा होता था,
इतने दिनों बाद देखा तो गले लग गयी,
महसूस हुआ की शर्ट भीग गयी थी मेरी,
मेरे काफी नज़दीक खड़ी थी वो, 
फ़िर भी आंखों में कहीं किसी अनन्त में,
अब भी खोई हुई थी वो......
अजय नहीं आया, कबसे कहके गया था,
कि माँ अभी कुछ दिनों की बात है,
बस ६ महीने बाद आ जाऊंगा वापस विदेश से,
दिवाली साथ मनाएंगे माँ....
६ साल हो गए वो अब भी नहीं आया,
ये बाहें आज भी उस प्यार भरे आलिंगन को,
तलाश रहीं हैं, 
जिन्हें वो जल्दी जाने और जल्दी आने की, 
आस में वो अधूरा छोड़ गया था....
इस बीच दरवाज़े पर घंटी बजी,
बोली जा देख के आ,
शायद आज अजय आ गया हो बेटा,
उस दिन अजय अपनी माँ से गले लग के,
बिलख-२ के रोया......
आज उस आलिंगन में,वो नर्माहट नहीं थी, 
जो उस जल्दी आने और जल्दी वापस आने की आस में,
अधूरी रह गयी.......
इंसान अकसर सही समय पर,
 प्यार जताने में पीछे रह जाता है, नहीं....??
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 सोचता हूँ, माँ को एक फोन कर आज फ़िर कह दूँ,
 माँ मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ.....!!!!
:- शिवम नाहर

#NAPOWRIMO #poem_1 #hindipoetry #प्यार #Love #nojoto #hindinama

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"हर हर्फ़ हर्फ़ से मिलता बिछड़ता है, हर अल्फ़ाज़ में कुछ नया बयां करता है, कुछ जज़्बात भीगे से तो कुछ सूखे से, आराइश ए हर्फ़ हिमाकत गज़ब नज़र है, बयां ए उन्स कितना कमबख़्त है, ग़म ए फ़ुर्क़त नवाज़िशें सुकून है, आब-ए-आइना धुंधला है साफ़ है, ए ज़िंदगी कब्र तक वक़्त गुजरता रहता है, प्रकृति है फज़र से शब, वक़्त हर हर्फ़ मुकर्रर है, हर हर्फ़ में वक़्त मिटता बनता रहता है|"

हर हर्फ़ हर्फ़ से मिलता बिछड़ता है,
हर अल्फ़ाज़ में कुछ नया बयां करता है,
कुछ जज़्बात भीगे से तो कुछ सूखे से,
आराइश ए हर्फ़ हिमाकत गज़ब नज़र है,
बयां ए उन्स कितना कमबख़्त है,
ग़म ए फ़ुर्क़त नवाज़िशें सुकून है,
आब-ए-आइना धुंधला है साफ़ है,
ए ज़िंदगी कब्र तक वक़्त गुजरता रहता है,
प्रकृति है फज़र से शब, वक़्त हर हर्फ़ मुकर्रर है,
हर हर्फ़ में वक़्त मिटता बनता रहता है|

"हर्फ़"
हर हर्फ़ हर्फ़ से मिलता बिछड़ता है,
हर अल्फ़ाज़ में कुछ नया बयां करता है,
कुछ जज़्बात भीगे से तो कुछ सूखे से,
आराइश ए हर्फ़ हिमाकत गज़ब नज़र है,
बयां ए उन्स कितना कमबख़्त है,
ग़म ए फ़ुर्क़त नवाज़िशें सुकून है,
आब-ए-आइना धुंधला है साफ़ है,

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