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Best राजस्थानी_कविता Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"लोग केह मिनखपणो मोटी रकम है । पण में लोगा रा नजरिया भागवानी लारे बदळता देख्या हूँ।। गाँव रे नशेड़ी काळ्ये ने दो नम्बर रे धन्धे लारे काळुजी हुता देख्यो हूँ।। टेलेंट री कदर है!, किताबां मे चोखी लागे । बारे तो रिप्या कि वाह - वाह हुता देखी हूँ।। टाबरपणे री चखराळी दोस्ती ने । बुलट लारे मोट्यारपणे में रुळता देखी हूँ।। मै (बरसात) मे नागा साथे नाहता हा । आज ड्रेसिंग सेन्स में संगळी भणता देखी हूँ।। लोग केह मिनखपणो मोटी रकम है। पण में गाँवा आळी महफ़िल में रिप्या आळी खोैज न चौधर करता देखी हूँ।। बठै में पियाळी मूछ ने विशिष्ट अतिथि भणता देखी।। संता री बाता बढज्ञानी है!, केवण मे चोखी लागे । गुवाड मे तो काळुजी री गपा माते हुंकारा भरता देख्या हूँ।। बुड्ढा बडेरा री ईज्जत फिकी पड़ता देखी हू। धोळती ड्रेस सामी मोटी-मोटी मुछ्ंया लुळता देखी हूँ।। अब कठे मिनखीचारो ऐ बाता हर लाचार आंख में देखी हूँ मिनखपणो मोटी रकम है आ बात काल बोदी किताब में देखी हूँ ✍रघुवीर सोऊ"

लोग केह मिनखपणो मोटी रकम है । 
पण में लोगा रा नजरिया भागवानी लारे बदळता देख्या हूँ।। 
गाँव रे नशेड़ी काळ्ये ने दो नम्बर रे धन्धे लारे काळुजी हुता देख्यो हूँ।। 
टेलेंट री कदर है!, किताबां मे चोखी लागे । 
बारे तो रिप्या कि वाह - वाह हुता देखी हूँ।। 
टाबरपणे री चखराळी दोस्ती ने । 
बुलट लारे मोट्यारपणे में रुळता देखी हूँ।। 
मै (बरसात) मे नागा साथे नाहता  हा । 
आज ड्रेसिंग सेन्स में संगळी भणता देखी हूँ।। 
 लोग केह मिनखपणो मोटी रकम है। 
पण में गाँवा आळी महफ़िल में
रिप्या आळी खोैज न चौधर करता देखी हूँ।। 
बठै में पियाळी मूछ ने विशिष्ट अतिथि भणता देखी।।
संता री बाता बढज्ञानी है!, केवण मे चोखी लागे । 
गुवाड मे तो काळुजी री गपा माते हुंकारा भरता देख्या हूँ।। 
बुड्ढा बडेरा री ईज्जत फिकी पड़ता देखी हू। 
धोळती ड्रेस सामी मोटी-मोटी मुछ्ंया लुळता देखी हूँ।। 
अब कठे मिनखीचारो ऐ बाता हर लाचार आंख में देखी हूँ
मिनखपणो मोटी रकम है आ बात काल बोदी किताब में देखी हूँ
✍रघुवीर सोऊ

#Mylanguage #मिनखपणो#राजस्थानी_कविता#raghuveerwrits

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"देखो थाणी आखड़लिया मारी मारो नैणा नीर बह ग्यो, मै रोउ मनड़े उबी आँगन क्यूँ रे म्हारो पियो परदेसी हो ग्यो। थाणी याद में कळपती काया मारी होगयी केश, पिया मारी बात सुणो थे क्यूँ बैठा परदेस। पगलिया री सुण म्हे वाज वो, दौड़ी आई आंगणे पिया म्हारा वो, हिवड़ो गणो म्हारौ उकसायो, जद परदेसी तू आंगणे नइ आयो। सखी सहेली पूछे माने कद आवे भरतार जी, कुण समझावे इणने पिया होग्या परदेसी जी। जोगण बणगी म्हे ज्यूँ ही मीरा बाई वो, थे मत बणो जोगी म्हारा पिया परदेसी ओ। थारा सु मिलण री आस ही मारी, क्यूँ तोड़ी थे आस पिया मारी, उबि उबि थाने उडीकु धोरे माथे वो, कद आवेलो पियो परदेसी मारो वो| याद थाणी माने गणी आवे, परदेश पियो क्यूँ जावे, मनड़ो हो ग्यो उदास जद, परदेशी म्हारे देश आवेलो कद। म्हारी काया कळपी थाने कुण समझावे, "पारासरिया" सगळी बात बतावें।"

देखो थाणी आखड़लिया मारी मारो नैणा नीर बह ग्यो,
मै रोउ मनड़े उबी आँगन क्यूँ रे म्हारो पियो परदेसी हो ग्यो।
थाणी याद में कळपती काया मारी होगयी केश,
पिया मारी बात सुणो थे क्यूँ बैठा परदेस।
पगलिया री सुण म्हे वाज वो,
दौड़ी आई आंगणे पिया म्हारा वो,
हिवड़ो गणो म्हारौ उकसायो,
जद परदेसी तू आंगणे नइ आयो।
सखी सहेली पूछे माने कद आवे भरतार जी,
कुण समझावे इणने पिया होग्या परदेसी जी।
जोगण बणगी म्हे ज्यूँ ही मीरा बाई वो,
थे मत बणो जोगी म्हारा पिया परदेसी ओ।
थारा सु मिलण री आस ही मारी,
क्यूँ तोड़ी थे आस पिया मारी,
उबि उबि थाने उडीकु धोरे माथे वो,
कद आवेलो पियो परदेसी मारो वो|
याद थाणी माने गणी आवे,
परदेश पियो क्यूँ जावे,
मनड़ो हो ग्यो उदास जद,
परदेशी म्हारे देश आवेलो कद।
म्हारी काया कळपी थाने कुण समझावे,
"पारासरिया" सगळी बात बतावें।

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शीर्षक - पिया म्हारा परदेसी !

देखो थाणी आखड़लिया मारी मारो नैणा नीर बह ग्यो,

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