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Best womanempowerment Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"हाँ हूँ मैं अबला। आओ मैं तुम्हे सुनाऊँ एक औरत की कहानी, जिसके साथ दुनिया ने हमेशा की है बेईमानी। हूँ मैं गुड़िया, हूँ मैं चिड़ियाँ ,हूँ मैं बिटियां, तो हूँ कभी मैं लक्ष्मी। अब इतना भी ना डराओ की, मैं डरना भूल जाऊ। अब इतना भी ना दबाओ की , मैं लड़ना सिख जाऊ। हाँ हूँ मैं अबला, पर मैं भी जरा आगे बढ़ना सिख जाऊँ। हूँ मैं प्रेमिका, हूँ मैं हमसफर, हूँ मैं देवी ,तो कभी मैं दुर्गा। अब इतना भी ना दिल दुखाओ की, मैं प्यार करना भूल जाऊँ। अब इतना भी न रुलाओ की , मैं पलट वार करना सीख जाऊँ। हाँ हूँ मैं अबला, पर मैं भी जरा आगे बढ़ना सिख जाऊँ। हूँ मैं नारी , हूँ मैं प्यारी, हूँ मैं तुलसी , तो हूँ कभी मैं सबला। अब इतना भी न बंदी बनाओ की , मैं पिंजरा तोर उड़ना सिख जाऊँ। हाँ हूँ मैं अबला , पर मैं भी जरा आगे बढ़ना सिख जाऊँ।"

हाँ हूँ मैं अबला।

आओ मैं तुम्हे सुनाऊँ एक औरत की कहानी, जिसके साथ दुनिया ने हमेशा की है बेईमानी।

हूँ मैं गुड़िया, हूँ मैं चिड़ियाँ ,हूँ मैं बिटियां, तो हूँ कभी मैं लक्ष्मी।
अब इतना भी ना डराओ की, मैं डरना भूल जाऊ।
अब इतना भी ना दबाओ की , मैं लड़ना सिख जाऊ। 
हाँ हूँ मैं अबला, पर मैं भी जरा आगे बढ़ना सिख जाऊँ।

हूँ मैं प्रेमिका, हूँ मैं हमसफर, हूँ मैं देवी ,तो कभी मैं दुर्गा।
अब इतना भी ना दिल दुखाओ की, मैं प्यार करना भूल जाऊँ।
अब इतना भी न रुलाओ की , मैं पलट वार करना सीख जाऊँ। 
हाँ हूँ मैं अबला, पर मैं भी जरा आगे बढ़ना सिख जाऊँ।

हूँ मैं नारी , हूँ मैं प्यारी, हूँ मैं तुलसी , तो हूँ कभी मैं सबला।
अब इतना भी न बंदी बनाओ की , मैं पिंजरा तोर उड़ना सिख जाऊँ।
हाँ हूँ मैं अबला , पर मैं भी जरा आगे बढ़ना सिख जाऊँ।

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"रिश्तों की आड़ में,औरत को कितना दबाओगे? समाज वालों!अब तो रुक जाओ कितना सताओगे?अब तो रुक जाओ। सपनों को उसके कुचलकर, बंधन की बेड़ियां पहना दी। बहू बेटियां घर की इज्जत हैं, घर में ही उनकी खुशियां दफना दी। अरे!इक तरफा पुरूषत्व लेकर कौन सा समाज रचाओगे? अब तो रुक जाओ समाज वालों ! अब तो रुक जाओ कितना सताओगे? अब तो रुक जाओ किसी अनजान मर्द से बोले तो चरित्रहीन, कहकर पवित्र समाज रचाते हो। फिर किसी अनजान के ही हाथों, उसका जीवन थमाते हो। रीत परम्परा की आड़ में कितना रुलाओगे? समाज वालों! अब तो रुक जाओ कितना सताओगे?अब तो रुक जाओ सामाजिक रथ के दो पहिए, स्त्री और पुरूष। एक पहिए को तोड़कर,क्या इक पहिए पे समाज चला पाओगे? अब तो रुक जाओ। समाज वालों!अब तो रुक जाओ।।"

रिश्तों की आड़ में,औरत को कितना दबाओगे?
समाज वालों!अब तो रुक जाओ
कितना सताओगे?अब तो रुक जाओ।
सपनों को उसके कुचलकर,
बंधन की बेड़ियां पहना दी।
बहू बेटियां घर की इज्जत हैं,
घर में ही उनकी खुशियां दफना दी।
अरे!इक तरफा पुरूषत्व लेकर कौन सा समाज रचाओगे? अब तो रुक जाओ
समाज वालों ! अब तो रुक जाओ
कितना सताओगे? अब तो रुक जाओ
किसी अनजान मर्द से बोले तो चरित्रहीन,
कहकर पवित्र समाज रचाते हो।
फिर किसी अनजान के ही हाथों,
उसका जीवन थमाते हो।
रीत परम्परा की आड़ में कितना रुलाओगे?
समाज वालों! अब तो रुक जाओ
कितना सताओगे?अब तो रुक जाओ
सामाजिक रथ के दो पहिए,
स्त्री और पुरूष।
एक पहिए को तोड़कर,क्या इक पहिए पे समाज चला पाओगे? अब तो रुक जाओ।
समाज वालों!अब तो रुक जाओ।।

#womanempowerment

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"मन मेरा, उन्मुक्त गगन सा, काले मेघा सा इतराए, तोड़ सारी बंदिशों को, परिंदे सा निर्बाध उड़ना चाहे। झूम उठूँ, सारे गमों को भूल, पवन के वेग सा बहती जाऊँ, रिश्ते - नातों को धता बता, तितलियों सा मैं बौराऊँ। गाऊँ ऐसे, कुहक – कुहक कर कोकिल सा, मिठास हवा में घोलती जाऊँ, रश्मों – रिवाजों का उतार कर चोला, स्वछंद विचरती जाऊँ| नाच उठूँ, हवा संग जैसे धान की बालियाँ सरसराये, कल की चिंता में क्यों रहूँ मैं? आज में जी लूँ ऐसे, प्रकृति और मैं एकरंग हो जाएँ | -कुमार भास्कर 💞"

मन मेरा, 
उन्मुक्त गगन सा,
काले मेघा सा इतराए,
तोड़ सारी बंदिशों को, 
परिंदे सा निर्बाध उड़ना  चाहे। 

झूम उठूँ, 
सारे गमों को भूल, 
पवन के वेग सा बहती जाऊँ, 
रिश्ते - नातों को धता बता, 
तितलियों सा मैं बौराऊँ।

गाऊँ ऐसे,
कुहक – कुहक कर कोकिल सा,
मिठास हवा में घोलती जाऊँ,
रश्मों – रिवाजों का उतार कर चोला,
स्वछंद विचरती जाऊँ| 

नाच उठूँ,
हवा संग जैसे धान की बालियाँ सरसराये, 
कल की चिंता में क्यों रहूँ मैं?
आज में जी लूँ ऐसे,
प्रकृति और मैं एकरंग हो जाएँ | 

-कुमार भास्कर 💞

स्वछंद मन

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24 Love

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"#सवाल वो बिकनी पेहननेवाली... Hot & Sexy कहलाती है, महिला शशक्तिकरण(Women empowerment) की संज्ञा(definition) बन जाती है... पर न जाने क्यों, मेरे गाँव की माँ बहनें साड़ी और घूंघट में.. दबी-कुछली-गँवार-देहाती कहलाती है...???"

#सवाल


वो बिकनी पेहननेवाली...
Hot & Sexy कहलाती है,
महिला शशक्तिकरण(Women empowerment) की संज्ञा(definition) बन जाती है...
पर न जाने क्यों,
मेरे गाँव की माँ बहनें साड़ी और घूंघट में..
दबी-कुछली-गँवार-देहाती कहलाती है...???

वो बिकनी पेहननेवाली...
Hot & Sexy कहलाती है,
महिला शशक्तिकरण(Women empowerment) की संज्ञा(definition) बन जाती है...
पर न जाने क्यों,
मेरे गाँव की माँ बहनें साड़ी और घूंघट में..
दबी-कुछली-गँवार-देहाती कहलाती है...
#Sawal #सवाल #questioninmind #प्रश्न #nojoto #nojotopoetry #nojotosawal #Womanempowerment #Woman #Feminism

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"To raise hand ,to beat them... to disrespect them, to cheat them.. are some of the parameters.. for some great men.. hopes their greatness soon comes over this world.. their male ego gets hurt... cuz their mind is filled of dirts.. But get these things in your mind dude... Greatness doesn't comes by gender.. but it comes... from what you do.. its a blunder if you think like that.. learn to behave yourself.. or be ready to get a slap. --mona--"

To raise hand ,to beat them...
to disrespect them, to cheat them..
are some of the parameters..
for some great men..
hopes their greatness soon comes over this world..
their male ego gets hurt...
cuz their mind is filled  of dirts..
But get these things in your mind dude...
Greatness doesn't comes by gender..
but it comes...
from what you do..
its a blunder if you think like that..
learn to behave yourself..
or be ready to get a slap.

--mona--

#womanempowerment

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