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"माना जीवन का हिस्सा है, सांसो का सरकार नहीं है। सबका अपना है उसूल, थोपे नियम हकदार नहीं है। जाति-पाति मजहब हैं एक, ये तेरा व्यापार नहीं है। बंद करो ये सोतेलापन, एक रहो दरकार यही है। सबको दो जीने का अवसर, बस तुमसे इजहार यही है। बेटी-बेटा रखो समान, कोई भी बेकार नही है। कुछ भी कहदो सब माने हम, अब अंधभक्त विचार नहीं है। ए समाज के ठेकेदारों कानून तुम्हारे हो सकते हैं। पर ये मेरे संस्कार नहीं है।"

माना जीवन का हिस्सा है, 
 सांसो का सरकार नहीं है। 
सबका अपना है उसूल,
थोपे नियम हकदार नहीं है। 
जाति-पाति मजहब हैं एक, 
ये तेरा व्यापार नहीं है। 
बंद करो ये सोतेलापन, 
एक रहो दरकार यही है। 
सबको दो जीने का अवसर, 
बस तुमसे इजहार यही है। 
बेटी-बेटा रखो समान, 
कोई भी बेकार नही है। 
 कुछ भी कहदो सब माने हम,
अब अंधभक्त विचार नहीं है। 
ए समाज के ठेकेदारों कानून तुम्हारे हो सकते हैं। 
पर ये मेरे संस्कार नहीं है।

#samaj

18 Love

"मुझ पर उंगली उठा रहे हो अपने आप को राजा बता रहे हो"

मुझ पर उंगली उठा रहे हो 
अपने आप को राजा बता रहे हो

#samaj

69 Love

"बहुत गुरुर था छत को अपने छत होने की, एक और मंज़िल क्या बन गया, छत एक पल में फर्श बन गया।।। 🙏🙏🙏 हम इंसानों में कुछ ऐसा ही गुरुर है। कब छत से फर्श बन जाते हैं पता भी नहीं चलता है, और जब बन जाते हैं तो अफ़सोस और पछतावा होता है। 🙏🙏🙏🙏🙏 शुप्रभात"

बहुत गुरुर था छत को अपने छत होने की,
एक और मंज़िल क्या बन गया,
छत एक पल में फर्श बन गया।।।
🙏🙏🙏
हम इंसानों में कुछ ऐसा ही गुरुर है।
कब छत से फर्श बन जाते हैं पता भी नहीं चलता है,
और जब बन जाते हैं तो अफ़सोस और 
पछतावा होता है।
🙏🙏🙏🙏🙏
शुप्रभात

#samaj #Society #people #Log

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32 Love

"✒समाज के लिए आईना✒ जो हँसकर के सहता है हर गम, फ़र्क उसे भी पड़ता है। जिसे पागल कहती है ये दूनियाँ , असल में वो ही सब कुछ समझता है। यूँ तो चिराग रौशन करता है जग सारा, पर स्वयं तले ही तमस को रखता है। चाहे कोई ख़ुदको सौ बार शरीफ़ कहे, पर उसका हृदय गवाही भरता है। चाहे लोहा कितना भी पावक से डरे, पर तपकर ही वो तलवार बनता है। लोगों को समझना आसान नहीं, एक-दो छड़ की ये बात नहीं। किसी को भी चरित्र-प्रमाणपत्र देने से पहले, विश्लेशण करना तो करना बनता है। -Rekha Sharma"

✒समाज के लिए आईना✒

जो हँसकर के सहता है हर गम, 
 फ़र्क उसे भी पड़ता है।
जिसे पागल कहती है ये दूनियाँ ,
 असल में वो ही सब कुछ समझता है।
यूँ तो चिराग रौशन करता है जग सारा, 
पर स्वयं तले ही तमस को रखता है।
चाहे कोई ख़ुदको सौ बार शरीफ़ कहे,
 पर उसका हृदय गवाही भरता है।
चाहे लोहा कितना भी पावक से डरे, 
पर तपकर ही वो तलवार बनता है।
लोगों को समझना आसान नहीं, 
एक-दो छड़ की ये बात नहीं।
किसी को भी चरित्र-प्रमाणपत्र देने से पहले,
 विश्लेशण करना तो करना बनता है। 
                       -Rekha Sharma

#samaj #समाज के लिए आईना

46 Love

"समाज के ठेकेदारों के जब अपने घर का इंसान कुछ भी करे तो सब ठीक है... पर जब समाज के कोई भी आम इंसान की एक जरा सी गलती पर उसे सामाजिक पाठ पढ़ाते हैं,उन पर अत्याचार करते हैं.... तब ऐसा लगता इन ठेकेदारों को .... उसी आग में धकेल दे....।।"

समाज के ठेकेदारों के जब अपने घर का इंसान कुछ भी करे तो सब ठीक है...
पर जब समाज के कोई भी आम इंसान की
एक जरा सी गलती पर उसे सामाजिक पाठ पढ़ाते हैं,उन पर अत्याचार करते हैं....
तब ऐसा लगता इन ठेकेदारों को ....
उसी आग में धकेल दे....।।

#samaj

44 Love