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Best दीपक Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"अजब क़िस्से सुनाते फिर रहे हैं,. हक़ीक़त को छुपाते फिर रहे हैं। ज़रा पापों का पश्चाताप देखो, वो अब गंगा नहाते फिर रहे हैं। कि ख़ुद भी दूध के धोए न होंगे,. हँसी सबकी उड़ाते फिर रहे हैं। बदन की झुर्रियाँ सच बोल देंगी, कहाँ ज़ुल्फें रंगाते फिर रहे हैं। अगर मुझसे नहीं है काम कोई,. तो फिर क्यों दुम हिलाते फिर रहे हैं। बुझे दीपक जलाने थे जिन्हें वो, जले दीपक बुझाते फिर रहे हैं।"

अजब क़िस्से सुनाते फिर रहे हैं,.                                                              
हक़ीक़त को छुपाते फिर रहे हैं।                                                               
                                                                  ज़रा पापों का पश्चाताप देखो,
                                                                  वो अब गंगा नहाते फिर रहे हैं।
  कि ख़ुद भी दूध के धोए न होंगे,.                                                                 
हँसी सबकी उड़ाते फिर रहे हैं।                                                                    
                                                              बदन की झुर्रियाँ सच बोल देंगी,
                                                            कहाँ ज़ुल्फें रंगाते फिर रहे हैं।
अगर मुझसे नहीं है काम कोई,.                                                            
तो फिर क्यों दुम हिलाते फिर रहे हैं।                                                        
                                                                बुझे दीपक जलाने थे जिन्हें वो,
                                                                  जले दीपक बुझाते फिर रहे हैं।

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18 Love
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"शायद, मैं इश्क़ का वो बदनसीब दीपक हूँ, जिसको जरूरत पड़ी उसने प्यार का नाम लेकर जला दिया और जिसका दिल भर गया, उसने बेवफ़ा का नाम देकर बुझा दिया"

शायद, 
मैं इश्क़ का वो बदनसीब दीपक हूँ, 
जिसको जरूरत पड़ी 
उसने प्यार का नाम लेकर जला दिया
और जिसका दिल भर गया, 
उसने बेवफ़ा का नाम देकर बुझा दिया

#शायद #इश्क़ #बदनसीब #दीपक #जरूरत #प्यार #नाम #जला #दिया #दिल #बेवफ़ा

17 Love

"कोई नही आयेगा जगाने तुम्हें, यदि अन्दर से तुम टूट चुके | इस जगत कि आपा धापी मे, यदि तुम खुद हि खुद को भूल चुके | तो स्वंय अपना विवेक विस्तार करो,प्रचण्ड सागर से बनो | अग्निपथ पर चल कर तुम सूर्य सा प्रकाश बनो | तुम अपने दीपक आप बनो....| माना कि राज व्याप्त है कलियुग में, द्वेष, अज्ञान,हिंसा और कुटिलता का | पर तुम स्वंय के द्वांदो से लड़ कर,सरोवर से तुम शांत बनो | पग पग पर जल कर तुम दीप से परोपकारी बनो | तुम अपने दीपक आप बनो....| राहो में है कण्कड बिखरे हुए,तो क्या हुआ? विघनो में राही तो हंसते हंसते चलता है | कालचक्र के संघषो में पिस कर हि तो कोयले से हीरा बनता है | ज्ञान - विज्ञान का भण्डर है तुम में है भरा पड़ा, बस अपनी श्रमताओ का तुम भान करो | वेदो के तुम ज्ञान बनो,कालो में तुम महाकाल बनो | स्वंय को करलो विस्तृत इतना अखिल अनंत परिमाप बनो | संघर्षो में गरलपीडा पीता है जो,उस साधक सा निष्पाप बनो | तुम अपने दीपक आप बनो....|"

कोई नही आयेगा जगाने तुम्हें,
यदि अन्दर से तुम टूट चुके |
इस जगत कि आपा धापी मे,
यदि तुम खुद हि खुद को भूल चुके |
तो स्वंय अपना विवेक विस्तार करो,प्रचण्ड सागर से बनो |
अग्निपथ पर चल कर तुम सूर्य सा प्रकाश बनो |
तुम अपने दीपक आप बनो....|

माना कि राज व्याप्त है कलियुग में,
द्वेष, अज्ञान,हिंसा और कुटिलता का |
पर तुम स्वंय के द्वांदो से लड़ कर,सरोवर से तुम शांत बनो |
पग पग पर जल कर तुम दीप से परोपकारी बनो |
तुम अपने दीपक आप बनो....|

राहो में है कण्कड बिखरे हुए,तो क्या हुआ?
विघनो में राही तो हंसते हंसते चलता है |
कालचक्र के संघषो में पिस कर हि तो
कोयले से हीरा बनता है |
ज्ञान - विज्ञान का भण्डर है तुम में है भरा पड़ा,
बस अपनी श्रमताओ का तुम भान करो |
वेदो के तुम ज्ञान बनो,कालो में तुम महाकाल बनो |
स्वंय को करलो विस्तृत इतना अखिल अनंत परिमाप बनो |
संघर्षो में गरलपीडा पीता है जो,उस साधक सा निष्पाप बनो |
तुम अपने दीपक आप बनो....|

तुम अपने दीपक आप बनो

18 Love

"मन के सांझ में तेरी यादों का #दीपक फिर से जला है... वक़्त बे वक़्त की #बारिश ये मौसम या बला है... #Ashu"

मन के सांझ में तेरी यादों का #दीपक फिर से जला है...

वक़्त बे वक़्त की #बारिश ये मौसम या बला है...
#Ashu

साँझ

20 Love

"मैं कोई मोम नहीं, जो तुरंत जलकर खाक हो जाऊं, मैं एक दीपक हूँ, देर से जलूंगा, मगर देर तक जलूंगा"

मैं कोई मोम नहीं, जो तुरंत जलकर खाक हो जाऊं,

मैं एक दीपक हूँ, देर से जलूंगा, मगर देर तक जलूंगा

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34 Love
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