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Best उठा Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"तु हो भले ही गरीब बडा , पर नसीब तेरा सोने का है तु भाग उठा के ज़ंजीरें ,ये वक्त नहीं रोने का है तु सदियो से था हार रहा , बस अभी तो लड़ना सिखा है वक्त इस हार कि रूखी मिट्टी पर, दरख़्त नया बोने का है तु दोड़ रहा है भुखा प्यासा , पर अभी दौड़ भी बाकि है उठ, अपनी पलकों का वज़न तु ढ़ो , ये वक्त नहीं सोने का है तु जला धूप में तन अपना , मंज़िल तक मुकर्रर भाग चल ये वक्त यु रूक के छांव में , जीत नहीं खोने का है गला के तलवे बर्फ में , तु हड्डियों के दम पर दौड़ा है यु देख के छाले अपने ही, कमजोर नहीं होने का है तु हो भले ही गरीब बडा , पर नसीब तेरा सोने का है तु भाग उठा के ज़ंजीरें ,ये वक्त नहीं रोने का है"

तु हो भले ही गरीब बडा , पर नसीब तेरा सोने का है 
तु भाग उठा के ज़ंजीरें ,ये वक्त नहीं रोने का है 

तु सदियो से था हार रहा , बस अभी तो लड़ना सिखा है 
वक्त इस हार कि रूखी मिट्टी पर, दरख़्त नया बोने का है 

तु दोड़ रहा है भुखा प्यासा , पर अभी दौड़ भी बाकि है 
उठ, अपनी पलकों का वज़न तु ढ़ो , ये वक्त नहीं सोने का है 

तु जला धूप में तन अपना , मंज़िल तक मुकर्रर भाग चल 
ये वक्त यु रूक के छांव में , जीत नहीं खोने का है 

गला के तलवे बर्फ में , तु हड्डियों के दम पर दौड़ा है 
यु देख के छाले अपने ही, कमजोर नहीं होने का है 

तु हो भले ही गरीब बडा , पर नसीब तेरा सोने का है 
तु भाग उठा के ज़ंजीरें ,ये वक्त नहीं रोने का है

तु हो भले ही गरीब बडा , पर नसीब तेरा सोने का है ।
तु भाग उठा के ज़ंजीरें ,ये वक्त नहीं रोने का है ।
#nojotohindi

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"दर्द उठा और इतना शदीद उठा । ख़ामोश रहकर भी मैं चीख उठा । azeem khan"

दर्द उठा और इतना शदीद उठा ।

ख़ामोश रहकर भी मैं चीख उठा ।

azeem khan

# खामोश रहकर भी मैं चीख उठा #

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"बूढी औरत -न्यायपालीका"

बूढी औरत -न्यायपालीका

..दो साल पहले मेरी गाड़ी से एक छोटा सा एक्सिडेंट हो गया था उस समय मै कार चलाना सीख ही रही थी , ज्यादा नुकसान भी नही हुअा था तो मामला निपटा लिया गया था पर ताकीद दे दी गईं थी की एक दो बार कोर्ट आना पड सकता है , मैं लगभग भूल ही चुकी थी सब पर दो साल के बाद कोर्ट से बुलावा आया और मै तय समय से कुछ पहले ही कोर्ट पहुच गयी और इंस्पेक्टर का इंतज़ार करने लगी ,मेरी नज़र पेड़ के नीचे बैठी एक महिला पर पड़ी ...काफ़ी बुजुर्ग थी फटे हुए कपड़े ..कमर झुकी हुई ..चेहरे पर झुर्रिंयाँ , आँखे अंदर तक धँसी हुई , टूट

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"उस अँधेरे के सन्नाटे में कोई पीछा कर रहा था। कृप्या कैप्शन में पढ़ें 🙏🏻"

उस अँधेरे के सन्नाटे में कोई पीछा कर रहा था।  कृप्या कैप्शन में पढ़ें 🙏🏻

"आज फिर वो माँ की डांट सुनकर गुस्से में, घर से बाहर निकल आया, आज फिर उसने सोच लिया कि अब कुछ भी हो घर नही जाऊगा.... भला ऐसा कोई करता है? मेरे सभी दोस्तों को आज़ादी है पर मुझे ही नही है.. सब अपनी ज़िंदगी जीते हैं पर.. मैं... मैं क्यों नही अपनी मर्जी से, खुल कर जी सकता हर समय, मम्मी की बंदिशें... घर जल्दी आया करो, रात को जल्दी सोया करो, स्कूल से सीधा घर आओ, ये नही कहना वो नही खाना, यहाँ नही जाना, इससे दोस्ती नही करनी, उससे नही बोलना.... उफ्फ ! कितनी बंदिशें..??
वो अपनी इसी सोच में उलझा चला जा रहा था

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"#2YearsOfNojoto इश्क की किताब से एक पन्ना फाड़ लाए चाहत की दुकां से कलम उठा लाए अब ऐसी ही दरकार थी ख्यालो की स्याही की आँखे बंद की और वही पूर्णिमा की रात के लम्हे उठा लाए"

#2YearsOfNojoto इश्क की किताब से एक पन्ना फाड़ लाए
चाहत की दुकां से कलम उठा लाए
अब ऐसी ही दरकार थी ख्यालो की स्याही की
आँखे बंद की और वही पूर्णिमा की रात के लम्हे उठा लाए

इश्क का रंगमंच😊😊

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