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Best THARA_BHAI_KERAPA Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"तेरे जिस्मा दि भुख मने खा गई रे , कै करू तेरे पाछे ढा गई रे,,,,,,,,,,, प्यार विना ना किता तने किता ना प्रेम रे , झूटी तने खाई सौगन्ध झुटा थारा नैम रे , सुथरी सी छोरी सु जाणे सारा कूलबा पर तेरे पाछे घर ते नाट आई रे तेरे जिस्मा दि.....................पाछे ढा गई रे । ना मांगे कदे गिफ्ट ना मांगे कदे पीसा रे , फैर कीत्ते सोच लिया मने ओरो जिसा रे , जीत्ते वी बुलाया ऊत्ते चली आई रे कदे वी ना सोचा कै वा बात खा गई रे तेरे जिस्मा दि........................पाछे ढा गई रे । पेहली बार मने यो दुर ते दिखा रे ,झ लाग रहा सा चाँद पर ग्रहण नाही दिखा रे , केरापा दी बात सुणने टाइम हुन्दे ही मै तो जा गई रे तेरे जिस्मा दि.........................पाछे ढा गई रे। गीतकार - सुनसा केरापा"

तेरे जिस्मा दि भुख मने खा गई रे , 
कै करू तेरे पाछे ढा गई रे,,,,,,,,,,,

प्यार विना ना किता तने किता ना प्रेम रे ,
झूटी तने खाई सौगन्ध झुटा थारा नैम रे ,
सुथरी सी छोरी सु जाणे सारा कूलबा 
पर तेरे पाछे घर ते नाट आई रे
तेरे जिस्मा दि.....................पाछे ढा गई रे ।

ना मांगे कदे गिफ्ट ना मांगे कदे पीसा रे ,
फैर कीत्ते सोच लिया मने ओरो जिसा रे ,
जीत्ते वी बुलाया ऊत्ते चली आई रे 
कदे वी ना सोचा कै वा बात खा गई रे
तेरे जिस्मा दि........................पाछे ढा गई रे ।

पेहली बार मने यो दुर ते दिखा रे ,झ
लाग रहा सा चाँद पर ग्रहण नाही दिखा रे ,
केरापा दी बात सुणने 
टाइम हुन्दे ही मै तो जा गई रे
तेरे जिस्मा दि.........................पाछे ढा गई रे।

                               गीतकार - सुनसा केरापा

जिस्म से खेलना है तो किसी कोटे पे जाया करो
किसी के दिल से खेलके ऊसकी इज्जत को ना हराया करो
#THARA_BHAI_KERAPA


तेरे जिस्मा दि भुख मने खा गई रे , कै करू तेरे पाछे ढा गई रे

प्यार विना ना किता तने किता ना प्रेम रे ,
झूटी तने खाई सौगन्ध झुटा थारा नैम रे ,

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"किसे सुनाऊं मैं अपनी कहानी , हुई बारिश पर बरसा ना पानी , मेरी पहचान अब मुझसे दूर है , तेरे नाम से धड़कन मशहूर है , पतझड़ का मौसम जो टूटे हैं पत्ते दिल भी निभा रहा ये रीत पुरानी किसे सुनाऊं..............ना पानी । खिलती है छाया खिलती है धुप , ऐसे ही तुने बदला था रूप , सदियों से तेरा ही होना मैं चाहया - पर मेरी चाहत ना हुई पुरानी किसे सुनाऊं..............ना पानी । चलता अकेला हूं कोई मेरा सफर नहीं , मंजिल क्या ढुंढे केरापा खुद की खबर नहीं , गुफ्तगु यु खुद से हुई जो सांसे भी लगती है मुझको अनजानी किसे सुनाऊं..............ना पानी । गीतकार - सुनसा केरापा"

किसे सुनाऊं मैं अपनी कहानी , 
हुई बारिश पर  बरसा ना पानी ,

मेरी पहचान अब मुझसे दूर है ,
तेरे नाम से  धड़कन मशहूर है , 
पतझड़ का मौसम जो टूटे हैं पत्ते  
दिल भी निभा रहा ये रीत पुरानी
किसे सुनाऊं..............ना पानी ।

खिलती है छाया खिलती है धुप , 
ऐसे ही तुने बदला था रूप ,
सदियों से तेरा ही होना मैं चाहया - 
पर मेरी चाहत ना हुई पुरानी
किसे सुनाऊं..............ना पानी ।

चलता अकेला हूं कोई मेरा सफर नहीं , 
मंजिल क्या ढुंढे केरापा खुद की खबर नहीं ,
गुफ्तगु यु खुद से हुई जो  
सांसे भी लगती है मुझको अनजानी
किसे सुनाऊं..............ना पानी ।

               गीतकार - सुनसा केरापा

#THARA_BHAI_KERAPA #ektarfapyar


किसे सुनाऊं मैं अपनी कहानी , हुई बारिश पर बरसा ना पानी

मेरी पहचान अब मुझसे दूर है ,तेरे नाम से मेरी धड़कन मशहूर है ,
पतझड़ का मौसम जो टूटे हैं पत्ते - दिल भी निभा रहा ये रीत पुरानी
किसे सुनाऊं.........................................................ना पानी ।

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