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Best आराम Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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मेरे #बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं.
बिस्तरों पर अब #सलवटें नहीं पड़ती

ना ही #इधर #उधर छितराए हुए कपड़े हैं
रिमोट के लिए भी अब झगड़ा नहीं होता
ना ही #खाने की नई नई फरमाइशें हैं
मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम #अकेले हो गए हैं.

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"लौटे घर हम काम से, घर आकर फिर काम.. आराम बेचा,आराम के लिए, कहाँ मिला आराम.. @drvats #gif"

लौटे घर हम काम से, घर आकर फिर काम..
आराम बेचा,आराम के लिए, कहाँ मिला आराम..
                                                   @drvats #gif

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क्या जीवन में प्रेम ही सबकुछ है?
प्रेम एक मानवीय भावना है। इसके लिए आपको स्वर्ग जाने की जरूरत नहीं है। हृदय की मिठास को ही प्रेम कहते हैं।

मेरे लिए यह परीक्षा की घड़ी थी और उसी समय से मैं खुद से बिना किसी लाग-लपेट के सच बोलने की कोशिश करने लगी। सद्‌गुरु के साथ ईशा योग करने के बाद मैं यह जान सकी हूं कि इससे आप स्वयं को दर्पण की तरह साफ देखने लगते हैं।

मेरे मन में ये विचार उछल रहे थे तभी मैंने घड़ी पर नजर डाली। आधी रात का दो बीस बजा देख कर मैं चौंक गयी। हम अपने निजी टापू पर धधकती आग के पास साथ ब

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"इमारत लम्बी होती जा रही हैं, और इंसान की सोच छोटी होती जा रही हैं! सब कुछ पाने की लालसा में, सब कुछ खोता सा जा रहा है! आज इन्सान कितना छोटा होता जा रहा हैं, आराम कमाने के लिए आराम ही नहीं कर रहा हैं क्यों इन्सान इतनी जल्दी मैं होता जा रहा हैं।"

इमारत लम्बी होती जा रही हैं, 
और इंसान की सोच छोटी होती जा रही हैं! 
सब कुछ पाने की लालसा में, 
सब कुछ खोता सा जा रहा है!
आज इन्सान कितना छोटा होता जा रहा हैं, 
आराम कमाने के लिए आराम ही नहीं कर रहा हैं
क्यों इन्सान इतनी जल्दी मैं होता जा रहा हैं।

#इन्सान
किस बात की जल्दी हैं
क्यों भाग रहे हो

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"है रास्ता दर्द भरा लेकिन इसमें आराम काफी है ये मेरे ख़्वाबों की मंज़िल है... ऐशो आराम की जरुरत नहीं, मुझे रहत के पल सिर्फ 4 काफी है!! मेरे पाँव में छाले देख लोग पूछते है मुझसे!! ठहर क्यों नहीं जाती? मैं मुस्कुरा कर कहती हूं, की ठहरना मंज़ूर नहीं मूझको जब तक मै अपने घर नहीं जाती !!"

है रास्ता दर्द भरा लेकिन
इसमें आराम काफी है
ये मेरे ख़्वाबों की मंज़िल है...
ऐशो आराम की जरुरत नहीं,
मुझे रहत के पल
सिर्फ 4 काफी है!!

मेरे पाँव में छाले देख 
लोग पूछते है मुझसे!!
ठहर क्यों नहीं जाती?
मैं मुस्कुरा कर कहती हूं,
की ठहरना मंज़ूर नहीं मूझको
जब तक मै अपने घर नहीं जाती !!

#OpenPoetry #Poetry #Love #Dreams #khwab #manzil

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