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बच्चों को सिखाएँ या उनसे सीखें

बचपन एक ऐसा दौर है जिसको हम बड़े प्यार से पीछे मुड़ कर देखा करते हैं। वो ऐसा वक्त होता है जब जिंदगी छोटी-छोटी खुशियों से भरी और जिम्मेदारियों से खाली होती है। मगर जरा गहराई से सोच कर देखिए कि क्या बच्चे सचमुच आजाद हैं?

बचपन एक ऐसा दौर है जिसको हम बड़े प्यार से पीछे मुड़ कर देखा करते हैं। वो ऐसा वक्त होता है जब जिंदगी छोटी-छोटी खुशियों से भरी और जिम्मेदारियों से खाली होती है। मगर जरा गहराई से सोच कर देखिए कि क्या बच्चे सचमुच आजाद हैं? या वो अपने परिवार के बड़े-बूढ़ों की

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हो सकता है मैं गलत होउ #बहु #माँ #बाप #परिवार #Family #उम्मीद #Nojoto #poem #बेटी #Feeling seema yadav Diksha Sardana कवयित्री सुनीता प्रजापत Pragati Jain @Jyoti Khatkar Anshu writer कवयित्री सुनीता प्रजापत @Jyoti Khatkar @Prabha Lakesh Shreya Gupta FeeLiNgS Of HearT @Prabha Lakesh @Jyoti Khatkar @Garima Grover @Tarani Nayak(disha Indian). @yashika

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"गैर थे आखिर सो मेरा घर जला कर भागने लगे हैरत तो तब हुई जब मेरे अपने हाथ तापने लगे एक ही चूल्हा चला जब तक चली सांसे उसकी बाप को दफ़नाते ही सब बेटे हिस्से बांटने लगे बड़े ज़ोश में उठाये मेरे खत उसने जलाने के लिए पहला पन्ना हाथ में लेते ही उसके हाथ कांपने लगे कल दिखाया था मैंने ही रस्ता जिस जिसको आज वो ही लोग देखो मेरा रस्ता काटने लगे एहतराम उम्र में बड़ो का, फकीर हो या हाकिम ऐसा नहीं करते कि मतलब से तलवे चाटने लगे मै नहीं हूं अमीर बाप की औलाद तो नहीं हूं इससे क्या फ़ायदा कि लम्बी लम्बी हांकने लगे"

गैर थे आखिर  सो मेरा घर जला कर भागने लगे 
हैरत तो तब हुई  जब मेरे अपने  हाथ तापने लगे 

एक ही चूल्हा चला  जब तक चली सांसे उसकी 
बाप को  दफ़नाते ही सब  बेटे हिस्से  बांटने लगे 

बड़े ज़ोश में उठाये मेरे खत उसने जलाने के लिए 
पहला पन्ना हाथ में लेते ही उसके हाथ कांपने लगे 

कल  दिखाया था  मैंने ही  रस्ता जिस जिसको 
आज  वो ही लोग  देखो  मेरा रस्ता  काटने लगे 

एहतराम उम्र में बड़ो का, फकीर हो  या हाकिम 
ऐसा नहीं  करते  कि मतलब  से  तलवे चाटने लगे 

मै नहीं  हूं  अमीर  बाप की  औलाद   तो नहीं हूं 
इससे  क्या फ़ायदा  कि  लम्बी लम्बी  हांकने लगे

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"(गुमसुम लड़की) बेबस लाचार हुए बैठी है ये गुमसुम सी लड़की मर के कई सवाल लिए बैठी है. जन्म से अंत तक कि कहानी का किये हिसाब बैठी है,बेटे के लालच में क़ातिल परिवार का सितम,कैसे कटी कोख़ में,घबरा के,खुद पे चली कैंची का हिसाब किये बैठी है. लिए जी रही थी कोख़ में जो हसीन दुनिया के ख्वाब,ये लिए उन सपनों की राख बैठी है. रोशन चाँद सा चमकना चाहती थी जो,घनी काली रात सा अंधेरा किये खाक बैठी है. जो खुद साफ करना चाहती थी दुनिया से नफ़रत,देख ख़ुदा वो ख़ुद कोख़ से ही साफ़ हुए बैठी है. ना रहा इसका कोई अपना जो माँ थी वही कलयुग का शैतान हुए बैठी है.कहे बाप किसको ये जो था बाप वही फेंक आया कचरे पे,देख आँखे खोल ख़ुदा आज ये कचरे के ढेर पे हुए लाश बैठी है,गुमसुम सी लड़की आज बडी उदास बैठी है. खा रहे कटा फटा जिस्म जानवर इसका किसलिए ये तेरे है शमशान कब्रिस्तान,आज तो तेरी भी इंसानियत जल दफ़न हुए बैठी है. ना आया फेंकने वाले को रेहम ना आया तुझे रेहम ये तेरे होने पे ही स्वाल लिये बैठी है। पूछती है खुदा से तेरे नरक में ही दे देता जगह क्यूं मेरी रूह इन भेड़ियों के लालच का बन शिकार बैठी है. तुं तो कहता रहा नही जला सकता कोई रूह,देख मेरे पास आ के कितने मेरी रूह आग के अंगार लिए बैठी है."

(गुमसुम लड़की)
बेबस लाचार हुए बैठी है ये गुमसुम सी लड़की मर के कई सवाल लिए बैठी है.
जन्म से अंत तक कि कहानी का किये हिसाब बैठी है,बेटे के लालच में क़ातिल परिवार का सितम,कैसे कटी कोख़ में,घबरा के,खुद पे चली कैंची का हिसाब किये बैठी है.
लिए जी रही थी कोख़ में जो हसीन दुनिया के ख्वाब,ये लिए उन सपनों की राख बैठी है.
रोशन चाँद सा चमकना चाहती थी जो,घनी काली रात सा अंधेरा किये खाक बैठी है.
जो खुद साफ करना चाहती थी दुनिया से नफ़रत,देख ख़ुदा वो ख़ुद कोख़ से ही साफ़ हुए बैठी है.
ना रहा इसका कोई अपना जो माँ थी वही कलयुग का शैतान हुए बैठी है.कहे बाप किसको ये जो था बाप वही फेंक आया कचरे पे,देख आँखे खोल ख़ुदा आज ये कचरे के ढेर पे हुए लाश बैठी है,गुमसुम सी लड़की आज बडी उदास बैठी है.
खा रहे कटा फटा जिस्म जानवर इसका किसलिए ये तेरे है शमशान कब्रिस्तान,आज तो तेरी भी इंसानियत जल दफ़न हुए बैठी है.
ना आया फेंकने वाले को रेहम ना आया तुझे रेहम ये तेरे होने पे ही स्वाल लिये बैठी है।
पूछती है खुदा से तेरे नरक में ही दे देता जगह क्यूं मेरी रूह इन भेड़ियों के लालच का बन शिकार बैठी है.
तुं तो कहता रहा नही जला सकता कोई रूह,देख मेरे पास आ के कितने मेरी रूह आग के अंगार लिए बैठी है.

🌹happy Daughters day🌹😣✍️
i hope log ye lines samjhenge . jo log bete k lalach mai ladkiyon ko kokh mai hi मार देते ye ek usi ladki ki आत्मा की कुछ झलक है जो मैंने लिखी ये में कल पूरी नहीं कर पाया था इसे अभी पूरा किया✍️😣.ये ladki ख़ुदा से पूछ रही उसकी जिंदगी से ऐसा खिलवाड़ क्यों.में इस से ज्यादा नहीं likh पाया its very emotionl😥😓😣😣and plz dont kill baby girls before her birth.ladkiyon ko जीने का अधिकार दीजिये.बेटा बेटी एक ही है दोनों भगवान का रूप🙏लड़कियां भी धरती की तरह है इनको ख़त्म करोगे तो रहोगे

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"धूप में बाप झुलसता है और चूल्हे पर माँ झुलसती है अरफ़ान तब कही जाकर घर पर औलादें पलती है"

धूप में बाप झुलसता है और चूल्हे पर माँ झुलसती है
अरफ़ान  तब  कही  जाकर घर पर औलादें पलती है

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