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Best सामाजिक Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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#जंजीरें #सामाजिक मान मर्यादा और संस्कार

#MyTopics #nojoto #nojotoapp #nojotohindi
drsantosh Tripathi @Adhury Hayat @Manak desai Asha...#anu @Priya dubey @J P Lodhi. @Priya Gour @Chandramukhi Mourya Bhagat @Sudha Tripathi

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#सामाजिक कठपुतलियां #puppet# Anshula Thakur

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"#सामाजिक मुद्दे बंटवारा"

#सामाजिक मुद्दे बंटवारा

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Antima Jain Ruchika Priya Gour Priya dubey vks Siyag ROHIN HODKASIA B Ravan Bhawna Mishra chandra_the_unique dil ki baat bas dil tak D Er. Ambesh Kumar Falguni Shah© goldi yadav (Raunak) Govind Pandram GuruJi Gopal Barupal Hiyan Chopda H.k Hariom Rana H.k Hemant.Bahuguna. Harlal Mahato indu singh Jugaadi Jat Jyoti Singh Singh Krrish 🖤 Neha Pant Nupur Neha sharma Namita Chauhan OM BHAKAT "MOHAN,(कलम मेवाड़ की) pdmaram Pragati Jain poet Vinod Rajpu

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"2 Years of Nojoto लोगों के पहले जैसे अब ख़ुशनुमा मिज़ाज नही होते , लगता जैसे अब एक दूजे के संग ताल्लुक़ात नही होते ! दिलों के अफ़साने रख देते थे लोग लोगो के सामने पहले शायद अब नव युग मे लोग दूसरे के मदतगार नही होते !! नही होते यंहा अब बेनकाबी चेहरे अब खुली किताबो से , अरमानों का गला घोंटते सब है, अपने अपनी ही बातों से ! जमाना वो था लोग बिन कहे दिल के जज़्बात समझ लेते थे , बिना आंसुओ के लोग एक दूसरे के सुख दुःख भांप लेते थे ! रिश्ता ,लगाव और दिल के तार जुड़े थे उनसे इसकदर साहिब जब जाते तन्हा छोड़कर हमे,हृदय भी तर बतर कर देते थे !! महबूब के प्यारे संदेशो में इक गज़ब का अहसास होता था , कब आएंगे प्रीतम के ख़त इसका इंतजार ख़ास होता था ! तकिये के नीचे उनकी यादों का एक मेला लगा होता था , उनसे मिलने के ख़ुशी में डगर पे नजरो का पहरा होता था ! अब आ गयी है नई तकनीकें बहुत करीब तो हम आ गए , पर आज हम सभी जज्बातों की पहुँच से कोशो दूर हो गए ! जहाँ दिल से काम लेना था ,आज वही दिमाग आ गया , इंसानियत क्या.. इंसान ही इंसान की जड़ो को खा गया ! विदेशी सभ्यता अपनाकर दम्भो का ऊंचा मकान हो गया , जिस बाप का सब कुछ था आज वही कर्जदार हो गया ! भाई ने ही भाई से वाद के सलीक़े में विवाद कर लिया , करके उपवन के टुकड़े,खुद ही बंधनो से अलगाव कर लिया ! खोये है इस कदर जिंदगी की तरक़्क़ी और अहंकारों में , डुबोकर मानवता की पगड़ी खुद सर पर ताज रख लिया !! जो बेटियां देवी थी आज आधुनिकता का अवतार ले लिया , अच्छे भले समाज को मात्र परिवर्तन का नाम दे दिया ! न अब वो बात रही शिष्यों और गुरुओं में आजकल साहिब, शिक्षा मांगने लगी है भीख ,स्कूलों को सबने व्यापार कर लिया !! न परी,न कथाएँ,न कविताएँ रही चुटकुलों की भरमार हो गया, पक्के हो गए मकान सभी के ,पर इंसान तो पत्थर हो गया ! पनप गया लोगो मे रोष,ईर्ष्या,द्वेष मित्र गले का नाप ले गया , चलते हुए नव्य की सतहों पर कैसे पांव घायल हो गया !! जिंदगी की इस दौड़भाग में मशीनों से भी बद्तर हो गए राहुल , किसको खबर की हम पतन की ओर इक कदम अग्रसर हो गए !!"

2 Years of Nojoto लोगों के पहले जैसे अब ख़ुशनुमा मिज़ाज नही होते ,
 लगता जैसे अब एक दूजे के संग ताल्लुक़ात नही होते !
दिलों के अफ़साने रख देते थे लोग लोगो के सामने पहले
शायद अब नव युग मे लोग दूसरे के मदतगार नही होते !!
नही होते यंहा अब बेनकाबी चेहरे अब खुली किताबो से ,
  अरमानों का गला घोंटते सब है, अपने अपनी ही बातों से !
 जमाना वो था लोग बिन कहे दिल के जज़्बात समझ लेते थे ,
बिना आंसुओ के लोग एक दूसरे के सुख दुःख भांप लेते थे !
रिश्ता ,लगाव और दिल के तार जुड़े थे उनसे इसकदर साहिब
जब जाते तन्हा छोड़कर हमे,हृदय भी तर बतर कर देते थे !!  
महबूब के प्यारे संदेशो में इक गज़ब का अहसास होता था ,
कब आएंगे प्रीतम के ख़त इसका इंतजार ख़ास होता था ! 
तकिये के नीचे उनकी यादों का एक मेला लगा होता था ,
उनसे मिलने के ख़ुशी में डगर पे नजरो का पहरा होता था !
अब आ गयी है नई तकनीकें बहुत करीब तो हम  आ गए ,
पर आज हम सभी जज्बातों की पहुँच से कोशो दूर हो गए !
जहाँ दिल से काम लेना था ,आज वही  दिमाग आ गया ,
इंसानियत क्या.. इंसान ही इंसान की जड़ो को खा गया !
विदेशी सभ्यता अपनाकर दम्भो का ऊंचा मकान हो गया ,
जिस बाप का सब कुछ था आज वही कर्जदार हो गया !
भाई ने ही भाई से वाद के सलीक़े में विवाद कर लिया ,
करके उपवन के टुकड़े,खुद ही बंधनो से अलगाव कर लिया !
खोये है इस कदर जिंदगी की तरक़्क़ी और अहंकारों में ,
डुबोकर मानवता की पगड़ी खुद सर पर ताज रख लिया !!
जो बेटियां देवी थी आज आधुनिकता का अवतार ले लिया ,
अच्छे भले समाज को मात्र परिवर्तन का नाम दे दिया !
न अब वो बात रही शिष्यों और गुरुओं में आजकल साहिब,
शिक्षा मांगने लगी है भीख ,स्कूलों को सबने व्यापार कर लिया !!
न परी,न कथाएँ,न कविताएँ रही चुटकुलों की भरमार हो गया,
पक्के हो गए मकान सभी के ,पर इंसान तो पत्थर हो गया !
पनप गया लोगो मे रोष,ईर्ष्या,द्वेष मित्र गले का नाप ले गया ,
चलते हुए नव्य की सतहों पर कैसे पांव घायल हो गया !!
जिंदगी की इस दौड़भाग में मशीनों से भी बद्तर हो गए राहुल ,
किसको खबर की हम पतन की ओर इक कदम अग्रसर हो गए !!

लोगों के पहले जैसे अब ख़ुशनुमा मिज़ाज नही होते ,
लगता जैसे अब एक दूजे के संग ताल्लुक़ात नही होते !
दिलों के अफ़साने रख देते थे लोग लोगो के सामने पहले
शायद अब नव युग मे लोग दूसरे के मदतगार नही होते !!
नही होते यंहा अब बेनकाबी चेहरे अब खुली किताबो से ,
अरमानों का गला घोंटते सब है, अपने अपनी ही बातों से !
जमाना वो था लोग बिन कहे दिल के जज़्बात समझ लेते थे ,
बिना आंसुओ के लोग एक दूसरे के सुख दुःख भांप लेते थे !

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"सामजिक दायरे में रहकर बात करूँ तो वो ठीक है शतप्रतिशत सटीक है क्योंकि कुछ बातों का विवाद व तिल का ताड़ बनते देर नहीं लगती है इसलिए मैं एक आम साधारण इंसान बनकर ही बात करूँ ना की पक्ष विपक्ष का खेल खेलू बल्कि एक राष्ट्र के जिम्मेदार नागरिक होने के अपने कर्तव्यों को समझू ना की किसी प्रकार की कोई राजनीति करूँ। -Sunil Kumar Sharma"

सामजिक दायरे में रहकर बात करूँ 
तो वो ठीक है शतप्रतिशत 
सटीक है क्योंकि कुछ बातों का विवाद 
व तिल का ताड़ बनते देर नहीं 
लगती है इसलिए मैं एक आम 
साधारण इंसान बनकर ही बात करूँ 
ना की पक्ष विपक्ष का खेल खेलू 
बल्कि एक राष्ट्र के जिम्मेदार नागरिक होने के 
अपने कर्तव्यों को समझू ना की किसी प्रकार की 
कोई राजनीति करूँ।

-Sunil Kumar Sharma

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