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Best फरेब Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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पल पल उसका साथ निभाते हम
एक
#इशारे पे #दुनिया छोड़ जाते हम
#समुन्द्र के बीच में पहुच कर #फरेब किया उसने
वो कहता तो #किनारे पर ही डूब जाते हम

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"खुश था वो, खुशियों को मुट्ठी में लिए हँसते गाते, ज़िन्दगी के सफर में चला जा रहा था। ठोकर लगते ही गिर पड़ा और खुल गई मुट्ठी, खाली देख उसे, वो कुछ समझ नही पा रहा था। जिन खुशियों को लेकर वो इतना इतरा रहा था, सब झूठ था, फरेब था, समय सच से उसे रूबरू करा रहा था।"

खुश था वो, खुशियों को मुट्ठी में लिए हँसते 
गाते, ज़िन्दगी के सफर में चला जा रहा था।

ठोकर लगते ही गिर पड़ा और खुल गई मुट्ठी, खाली देख उसे, वो कुछ समझ नही पा रहा था।

जिन खुशियों को लेकर वो इतना इतरा रहा था, सब झूठ था, फरेब था, समय सच से उसे रूबरू करा रहा था।

#खुशियाँ
#फरेब
#समय

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"बात बात पर वो अपनी मोहब्बत की कसमें खाया करते थे हमें तो पता ही ना चला आज़ तक कि उनकी कसमें झूठी थी या हमारी मोहब्बत की कोई कीमत ही नहीं थी..."

बात बात पर वो
अपनी मोहब्बत की कसमें खाया करते थे
हमें तो पता ही ना चला आज़ तक 
कि उनकी कसमें झूठी थी 
या हमारी मोहब्बत की कोई कीमत ही नहीं थी...

बात बात पर वो...

🖤🖤

बात बात पर वो
अपनी वफ़ा की दुहाई दिया करते थे
हमें तो पता ही ना चला आज़ तक
कि खोट उनकी वफ़ा में था

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"कागज़ कागज़ इस रंग बिरंगी दुनिया में फरेब के कितने पहलू निकले। माँ-बाप,भाई-बहन,पति-पत्नी, राजा -रंक, ईश्वर-भक्तजन। सभी के दिलोंमें थे शूल चुभे। जो बीज हमने बोये अपने आँगन में उनके वृक्षों की शाखाओं पर जो खिले। वो कागज के फूल निकले।। पारुल शर्मा"

कागज़ 
कागज़ इस रंग बिरंगी दुनिया में फरेब के कितने पहलू निकले।
माँ-बाप,भाई-बहन,पति-पत्नी, राजा -रंक, ईश्वर-भक्तजन।
सभी के दिलोंमें थे शूल चुभे।
जो बीज हमने बोये अपने आँगन में
उनके वृक्षों की शाखाओं पर जो खिले।
वो कागज के फूल निकले।।
पारुल शर्मा

इस रंग बिरंगी #दुनिया में #फरेब के कितने #पहलू निकले।
माँ-बाप,भाई-बहन,पति-पत्नी, राजा -रंक, ईश्वर-भक्तजन।
सभी के दिलोंमें थे #शूल चुभे।
जो #बीज हमने बोये अपने आँगन में
उनके वृक्षों की शाखाओं पर जो खिले।
वो कागज के #फूल निकले।
पारुल शर्मा
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"इश्क़ में हार-जीत के लिये कोई जगह नही होती जीते रहो इसे जीने की तरह इसमें सजा नही होती खामोश लफ्ज़ की जहाँ बात अगर ना समझे कोई तो वहाँ मोहब्बत की बात करना मुनासिब नही रहती अश्क़ न गिरे चाहत में रूठे सनम की रुसवाई में तो एहसास बीती रातों की तन्हाई की फिर कहाँ से होती मिल जाये वो शख़्स हमें चाहने भर से ही अगर तो पल-पल तड़पने की याद आज साथ नही रहती खुशियाँ बटोर ली होती आज झोली में सारी हमने तो फिर मायूसी सबके चेहरे पर आज कहाँ से होती सच्ची मोहब्बत सच में अगर सबके नसीब में होती तो आज बेवफाई की कहीं भला क्यों बात होती सपनों की भी अगर बात सच निकल जाती तो होंठों पर किसी के आज झूठी बात नही होती"

इश्क़ में हार-जीत के लिये कोई जगह नही होती
जीते रहो इसे जीने की तरह इसमें सजा नही होती

खामोश लफ्ज़ की जहाँ बात अगर ना समझे कोई
तो वहाँ मोहब्बत की बात करना मुनासिब नही रहती

अश्क़ न गिरे चाहत में रूठे सनम की रुसवाई में तो
एहसास बीती रातों की तन्हाई की फिर कहाँ से होती

मिल जाये वो शख़्स हमें चाहने भर से ही अगर तो
पल-पल  तड़पने की याद आज साथ नही रहती

खुशियाँ बटोर ली होती आज झोली में सारी हमने
तो फिर मायूसी सबके चेहरे पर आज कहाँ से होती

सच्ची मोहब्बत  सच में अगर सबके नसीब में होती 
तो आज बेवफाई की कहीं भला क्यों बात होती

सपनों की भी अगर बात सच निकल जाती 
 तो होंठों पर किसी के आज झूठी बात नही होती

#इश्क़#झूठ#फरेब#तनहाई#दिल#रिश्तें#अपनापन#वादे#साथ

#findingyourself

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