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Best z Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"मेरे अंदाज को आगाज बना लो मकसद पाने का के लिए सर पर कफ़न, और जुबान को तलवार बना लो"

मेरे अंदाज को आगाज बना लो
मकसद पाने का
के लिए सर पर कफ़न,
और जुबान को तलवार बना लो

instagram #Love #Friendship #z #n #R #g #uzbekistan #Video #zler #

16 Love

"तन्हा रहना तो मोहब्बत वालों की एक रस्म है..!! अगर फूल 🌹सिर्फ खुशी के लिए होते हैं, तो जनाजे पर न डाले जाते...!!"

तन्हा रहना तो मोहब्बत वालों की एक रस्म है..!! अगर फूल 🌹सिर्फ खुशी के लिए होते हैं, तो जनाजे पर न डाले जाते...!!

#z#Soch

32 Love

"कहते थे वो कि ,तुम मेरे सबसे करीब हो । धड़कन में तुम बसे हो,साँसों कर मीत हो । छोटी सी थी ख़ता ,वो ना माफ कर सके । बख्शीश (उपहार)दिए वो बाज़ ,मग़र दिल ना कर सके ।#z ईशान जब्बार "

कहते थे वो कि ,तुम मेरे सबसे करीब हो ।
धड़कन में तुम बसे हो,साँसों कर मीत हो ।
छोटी सी थी ख़ता ,वो ना माफ कर सके ।
बख्शीश (उपहार)दिए वो बाज़ ,मग़र दिल ना कर सके ।#z ईशान जब्बार

#लौटा कर सब मेरा दिल ना दे सके

12 Love
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"वो देखते नही,मग़र! दिल मे उतर जाते है । ख्वाबों के समंदर में ,आकर! ना जाने कितने गोते लगाते है । मग़र ये पल दो पल का इश्क़, होता है!ज़ीशान । वो उजाले की तरह आते है ,और! अंधेरे में फ़ना हो जाते है । #z ईशान जब्बार"

वो देखते नही,मग़र! दिल मे उतर जाते है ।
ख्वाबों के समंदर में ,आकर! ना जाने कितने गोते लगाते है ।
मग़र ये पल दो पल का इश्क़, होता है!ज़ीशान ।
वो उजाले की तरह आते है ,और! अंधेरे में फ़ना हो जाते है ।
                                              #z ईशान जब्बार

#पल दो पल का आकर्षण

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"माथे तिलक लगाकर हमने ,वतन तुझको गले लगाया था । वर माला ठुकराकर हमने ,फाँसी को गले चढ़ाया था । आने वाली नस्लो को ,ये सोचकर मुक्त कराया था । की ना होगा अन्याय कोई ,ना चीर हरण कोई होगा । अमर हु लेकिन कष्ट बहोत है ,बाकी हमारे ह्रदय में । हमने ना सोचा ,अशफ़ाक़ अलग हो । भगत गुरु के जोड़ो से । छुब्ध ह्रदय है ,मन में करुणा । कैसे ये दिन बीत रहे है । हमने क्या क्या सोच था ,कैसे रैन ये बीत रहे है । मा तू है आज़ाद मगर ,ह्रदय में आज़ादी है नही । भोली भाली जनता सारी ,शाम सवेरे लुटती रही । सुन लो मेरी बात तो अब ,भगत सिंह हु बोल रहा । आज़ादी दिलवाई है ,उसका सदुपयोग करो ।। बात गलत हो ,विरोध करो । और जीवन का उदघोष करो । #z ईशान जब्बार"

माथे तिलक लगाकर हमने ,वतन तुझको गले लगाया था ।
वर माला ठुकराकर हमने ,फाँसी को गले चढ़ाया था ।
आने वाली नस्लो को ,ये सोचकर मुक्त कराया था ।
की ना होगा अन्याय कोई ,ना चीर हरण कोई होगा ।
अमर हु लेकिन कष्ट बहोत है ,बाकी हमारे ह्रदय में ।
हमने ना सोचा ,अशफ़ाक़ अलग हो ।
भगत गुरु के जोड़ो से ।
छुब्ध ह्रदय है ,मन में करुणा ।
कैसे ये दिन बीत रहे है ।
हमने क्या क्या सोच था ,कैसे रैन ये बीत रहे है ।
मा तू है आज़ाद मगर ,ह्रदय में आज़ादी है नही ।
भोली भाली जनता सारी ,शाम सवेरे लुटती रही ।
सुन लो मेरी बात तो अब ,भगत सिंह हु बोल रहा ।
आज़ादी दिलवाई है ,उसका सदुपयोग करो ।।
बात गलत हो ,विरोध करो ।
और जीवन का उदघोष करो ।
#z ईशान जब्बार

#भगत सिंह मैं बोल रहा

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