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Best काया Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"कसम की कसम है कसम से कसम की कसम है, कसम से कसम रख लेना। कमसिन की कोई कसक कभी कट न जाये। कमर मे कर से करधनी कसके कसती है।। कंचन सी काया न,काली कर जाये। कमल सी कोमल ये कुम्हला न जाये।। &&& #राजीव नामदेव "राना लिधौरी " संपादक 'आकांक्षा" पत्रिका टीकमगढ़ (म.प्र) मोबाइल 9893520965"

कसम की कसम है कसम से  कसम की कसम है,
कसम से कसम रख लेना।
कमसिन की कोई कसक कभी कट न जाये।
कमर मे कर से करधनी कसके कसती है।।
कंचन सी काया न,काली कर  जाये।
कमल सी कोमल ये कुम्हला न जाये।।
&&&
#राजीव नामदेव "राना लिधौरी "
संपादक 'आकांक्षा" पत्रिका
टीकमगढ़ (म.प्र)
मोबाइल 9893520965

#कसक #कमसिन #कमर #काया #राना_लिधौरी #राजीव_नामदेव #rajeev_namdeo #rana_lidhori #kasak #anupras_alankar #अनुप्रास_अलंकार

22 Love

"तुम मिलो तो बहुत बातें करेंगे... न शिकवा करेंगे न कोई शिकायत करेंगें, कर लेंगे दो काया को एक काया में, रखकर अपना सर तुम्हारी गोद मे...आजीवन हम सो जाएँगे।"

तुम मिलो तो बहुत बातें करेंगे...
न शिकवा करेंगे न कोई शिकायत करेंगें,
कर लेंगे दो काया को एक काया में,
रखकर अपना सर तुम्हारी गोद मे...आजीवन हम सो जाएँगे।

 

12 Love

"ये जन्म मुश्किल से मिले कोई साथी संग ना चले हे भज ले हरि का नाम ये माया संग ना चले-२ है वो कण कण में बसे ध्यान लगा वो सब सुनें चाहे कर ले जो जतन काया अग्नि बीच जले-२। तू करता है सब मेरा मेरा पर नहीं है यहां कुछ तेरा बटोर ले तू झूठी शुर्खियाँ अंत लगेगा मरघट में डेरा-२ ये जन्म मुश्किल से मिले। ये काया संग ना चले।"

ये जन्म मुश्किल से मिले
कोई साथी संग ना चले
हे भज ले हरि का नाम
ये माया संग ना चले-२

है वो कण कण में बसे
ध्यान लगा वो सब सुनें
चाहे कर ले जो जतन
काया अग्नि बीच जले-२।

तू करता है सब मेरा मेरा
पर नहीं है यहां कुछ तेरा
बटोर ले तू झूठी शुर्खियाँ
अंत लगेगा मरघट में डेरा-२

ये जन्म मुश्किल से मिले।
ये काया संग ना चले।

#Life #Die #work #worship #God

12 Love

"❤रहती हूँ , किराये की काया में... रोज़ सांसों को बेच कर किराया चूकाती हूँ... मेरी औकात है बस मिट्टी जितनी... बात , मैं महल मिनारों की कर जाती हूँ... जल जायेगी ये मेरी काया एक दिन.... फिर भी , इसकी खूबसूरती पर इतराती हूँ.... मुझे पता हेै, मैे खुद के सहारे श्मशान तक भी ना जा सकूंगी.. इसीलिए जमाने में दोस्त बनाती हूँ ...."

❤रहती हूँ , किराये की काया में...
रोज़ सांसों को बेच कर किराया चूकाती हूँ...
मेरी औकात है बस मिट्टी
जितनी...
बात , मैं महल मिनारों की कर जाती हूँ...
जल जायेगी ये मेरी काया 
एक दिन....
फिर भी , इसकी खूबसूरती
पर इतराती हूँ....
मुझे पता हेै, 
मैे खुद के सहारे श्मशान तक भी ना जा सकूंगी..
इसीलिए जमाने में दोस्त बनाती हूँ ....

 

15 Love
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"अंगार की पुकार सुन तू चल नई एक राह चुन, है प्रज्ज्वलित इतिहास की धारा विवेचित राग सुन। काया क्लेश मिटा के सब हर कांधे पर एक हांथ धर, तू जल तपिश की आग में संसार में यह रूप धर । ना होगी यह गाथा पुरानी वीरों के बलिदानों की , तू आज नई एक सोच रख काया पलट वर्तमान की । भुखमरी गरीबी जैसे शब्दों का भी अंत कर, तू रच नए समाज को जिसमें हो मुखरित देश भर। ये घूसखोरी का अंत कर तू अब नई एक रीति रख, भ्रष्टों का तख्ता पलटने का खुद में एक आक्रोश रख। वो जा चुके कई दशक जो थे अंधेरी रात के , अब आ गई है वो सदी जो है विवेचित प्रकाश में । माया के जाल को नष्ट कर तू रच नए स्वप्न को अब, जो चल रहा था आज तक मिटा दे उस जश्न को तब ।"

अंगार की पुकार सुन तू चल नई एक राह चुन,
है प्रज्ज्वलित इतिहास की धारा विवेचित राग सुन।
काया क्लेश मिटा के सब हर कांधे पर एक हांथ धर,
तू जल तपिश की आग में संसार में यह रूप धर ।
ना होगी यह गाथा पुरानी वीरों के बलिदानों की ,
तू आज नई एक सोच रख काया पलट वर्तमान की ।
भुखमरी गरीबी जैसे शब्दों का भी अंत कर,
तू रच नए समाज को जिसमें हो मुखरित देश भर।
ये घूसखोरी का अंत कर तू अब नई एक रीति रख,
भ्रष्टों का तख्ता पलटने का खुद में एक आक्रोश रख।
वो जा चुके कई दशक जो थे अंधेरी रात के ,
अब आ गई है वो सदी जो है विवेचित प्रकाश में ।
माया के जाल को नष्ट कर तू रच नए स्वप्न को अब,
जो चल रहा था आज तक मिटा दे उस जश्न को तब ।

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