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Best विवाह Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"प्यारी माँ, दीदी और भाभी:- अब हमें भी चाहिए कोई झुल्फों का पानी छिड़क कर उठाने वाली, रोज़ रोज़ अलार्म की आवाज़ से अब उठा नहीं जाता ।।।"

प्यारी माँ, दीदी और भाभी:-


अब हमें भी चाहिए कोई 
                          झुल्फों का पानी छिड़क कर उठाने वाली,
                                   रोज़ रोज़ अलार्म की आवाज़ से
                                             अब उठा नहीं जाता ।।।

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""कविता" एक विवाह ऐसा भी chapter-1 -------------------- a short story read in discription"

"कविता"
एक विवाह ऐसा भी
chapter-1
--------------------
a short story
read in discription

कविता को आज कॉलेज पूरा किए 4 साल हो चुके हैं 24 वर्षीय कविता के लिए इन 4 सालों में कई रिश्ते आए मगर कुछ तो कविता के सांवले होने के कारण और कुछ तो दहेज़ न दे पाने के कारण बात आगे नहीं बढ़ी।अब तो कविता को भी लगने लगा था कि वह अपने घर वालों पर बोझ बन चुकी है।आज बड़े अरसे बाद कविता के लिए एक रिश्ता आया था लड़के के परिवार वालों ने कविता को देखा बात किया और उन्हें कविता पसंद आ गई।कविता थोड़ी देर की बात चीत के बाद अपने कमरे में चली गई उसे आज बहुत दिनों बाद अच्छा महसूस हो रहा था।कविता के पिता लडके वालों

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"Happy Janmashtami श्री योगी राज कृष्ण की एक पत्नी थी जो थी माता रुकमणी और उनके अलावा उन्होंने किसी स्त्री को ना प्रेमिका बनाए और ना ही विवाह रचाया और योग के बहुत बड़े ज्ञानी थे, वे वेदों के भी ज्ञाता थे इसके लिए उन्होंने अर्जुन को गीता के रूप में ज्ञान दिए जो वेद के ही ज्ञान थे, उन्होंने ब्रह्मचर्य का 48 वर्ष तक पालन किया उनके ब्रह्मचर्य के रहते हुए उनकी विवाह रुकमणी से हुई थी तो उन्होंने विवाह पश्चात 18 वर्ष ब्रह्मचर्य पूर्ण की, उनकी गुणगान जितनी की जाए कम है और ऐसा कोई गुण नहीं जिसको अपनाया ना जाए।"

Happy Janmashtami श्री योगी राज कृष्ण की एक पत्नी थी जो थी माता रुकमणी और उनके अलावा उन्होंने किसी स्त्री को ना प्रेमिका बनाए और ना ही विवाह रचाया और योग के बहुत बड़े ज्ञानी थे, वे वेदों के भी ज्ञाता थे इसके लिए उन्होंने अर्जुन को गीता के रूप में ज्ञान दिए जो वेद के ही ज्ञान थे, उन्होंने ब्रह्मचर्य का 48 वर्ष तक पालन किया उनके ब्रह्मचर्य के रहते हुए उनकी विवाह रुकमणी से हुई थी तो उन्होंने विवाह पश्चात 18 वर्ष ब्रह्मचर्य पूर्ण की, उनकी गुणगान जितनी की जाए कम है और ऐसा कोई गुण नहीं जिसको अपनाया ना जाए।

श्री योगी राज कृष्ण की एक पत्नी थी जो थी माता रुकमणी और उनके अलावा उन्होंने किसी स्त्री को ना प्रेमिका बनाए और ना ही विवाह रचाया और योग के बहुत बड़े ज्ञानी थे, वे वेदों के भी ज्ञाता थे इसके लिए उन्होंने अर्जुन को गीता के रूप में ज्ञान दिए जो वेद के ही ज्ञान थे, उन्होंने ब्रह्मचर्य का 48 वर्ष तक पालन किया उनके ब्रह्मचर्य के रहते हुए उनकी विवाह रुकमणी से हुई थी तो उन्होंने विवाह पश्चात 18 वर्ष ब्रह्मचर्य पूर्ण की, उनकी गुणगान जितनी की जाए कम है और ऐसा कोई गुण नहीं जिसको अपनाया ना जाए।

16 Love

"सिंदूरी माँग ,हाथों में चूड़ी, पीहर छोड़ यूँ मैं पिया से जुड़ी। अरमानों की डोली में हुई विदा, होकर अपने नसीब पर फ़िदा। स्वप्नलोक से जब धरती पे आई, ठोकर खाकर हक़ीक़त समझ मुझे आई।। कन्यादान कर माँ- बाप हुए मुक्त, अत्याचार को पिया उन्मुक्त। माँ ने नसीहत दी पत्नी धर्म निभाना, दिखाकर संस्कार कुल का मान बढ़ाना। शुरू हुआ यूँ अत्याचार का नया फ़साना, हर दिन बढ़ा सास का तिरस्कार दिखाना। तन के ज़ख्म कुछ देखे सभी ने, मन के घाव क्या जाने किसी ने ? समाज में झूठे शान और मान की खातिर, मैं घुटती रही और तड़पाते रहे वो शातिर। वो शोषण की हर सीमा लाँघ गये, मेरे सब्र का बांध तोड़ गये। रख लिया मान मैंने पीहर का, देकर अपने प्राण की आहुति। जब साथ निभाया नहीं किसी ने, अब जताना मत कोई सहानुभूति। निभाया धर्म मैंने हर रिश्ते का, पर ना हुए तृप्त ये लिंगभेदी। उन सात वचनों की थी संवेदी , चढ़ गई आज एक और बेटी बलिवेदी ।। मान रख पाओ ना ग़र बेटी का, तो भ्रूणहत्या ही सही। ऐसे ज़ालिम दुनिया में रहने से, मैं अजन्मी रहूँ ,यही सही।।"

सिंदूरी माँग ,हाथों में चूड़ी,
पीहर छोड़ यूँ मैं पिया से जुड़ी।
अरमानों की डोली में हुई विदा,
होकर अपने नसीब पर फ़िदा।
स्वप्नलोक से जब धरती पे आई,
ठोकर खाकर हक़ीक़त समझ मुझे आई।।
कन्यादान कर माँ- बाप हुए मुक्त,
अत्याचार को पिया उन्मुक्त।
माँ ने नसीहत दी पत्नी धर्म निभाना,
दिखाकर संस्कार कुल का मान बढ़ाना।
शुरू हुआ यूँ अत्याचार का नया फ़साना,
हर दिन बढ़ा सास का तिरस्कार दिखाना।
तन के ज़ख्म कुछ देखे सभी ने,
मन के घाव क्या जाने किसी ने ?
समाज में झूठे शान और मान की खातिर,
मैं घुटती रही और तड़पाते रहे वो शातिर।
वो शोषण की हर सीमा लाँघ गये,
मेरे सब्र का बांध तोड़ गये।
रख लिया मान मैंने पीहर का,
देकर अपने प्राण की आहुति।
जब साथ निभाया नहीं किसी ने,
अब जताना मत कोई सहानुभूति।
निभाया धर्म  मैंने हर रिश्ते का,
पर ना हुए तृप्त ये लिंगभेदी।
उन सात वचनों की थी संवेदी ,
चढ़ गई आज एक और बेटी बलिवेदी ।।
मान रख पाओ ना ग़र बेटी का,
तो भ्रूणहत्या ही सही।
ऐसे ज़ालिम दुनिया में रहने से,
मैं अजन्मी रहूँ ,यही सही।।

#अत्याचार #विवाह #उत्पीड़न #स्त्री #स्त्रीधर्म #nojoto #nojotohindi #kavyashala #Poetry

सिंदूरी माँग ,हाथों में चूड़ी,
पीहर छोड़ यूँ मैं पिया से जुड़ी।
अरमानों की डोली में हुई विदा,
होकर अपने नसीब पर फ़िदा।
स्वप्नलोक से जब धरती पे आई,
ठोकर खाकर हक़ीक़त समझ मुझे आई।।

15 Love
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"कलयुग का अन्त और कल्की अवतार।"

कलयुग का अन्त और कल्की अवतार।

जो काल , जो चीज घटित हो गई उसकी बातें करना, उस पर शोध करना, और उससे सम्बंधित निष्कर्ष पर पहुचना तो बहुत आसान हैं। मगर जो हुआ ही नही उसके बारे मे , आने वाले कल के बारे मे कैसे जाना जायें इसका कोई विकल्प विज्ञान के पास मौजूद नही हैं। मगर आध्यात्म ध्यान और योग के माध्यम से भविष्य को जानने का उदाहरण कई बार पेश कर चुका हैं। अब अगर उसे कल्पना भी माने तो भी एक प्रकार से वही काल्पनिक सोच जब तक तथ्योके साथ घटित होती हुई दिखती हैं, तो फिर उस आध्यात्म के उस शोध पर विश्वास होने लगता हैं की हाँ, शायद ऐसा हो

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