tags

Best लेखन Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

Find the Best लेखन Shayari, Status, Quotes from top creators only on Nojoto App. Also find trending photos & videos.

  • 27 Followers
  • 92 Stories
  • Popular Stories
  • Latest Stories

आप सबका अंनत धन्यवाद..😊🙏🙏
#शुक्रिया #4liner #लेखन #नवाज़िश #फिजूल #writer #लेखक #Nojoto #nojotohindi @Satyaprem Upadhyay

23 Love
3 Share

"अपने हालात लिखती हूं कुछ सवालात लिखती हूं ज्यादा नहीं बस मैं अपने, चंद ख्यालात लिखती हूं तेरे लिए है जो दिल में मैं वो जज्बात लिखती हूं"

अपने हालात लिखती हूं
कुछ सवालात लिखती हूं
ज्यादा नहीं बस मैं अपने,
चंद ख्यालात लिखती हूं
तेरे लिए है जो दिल में
मैं वो जज्बात लिखती हूं

#लेखन#Nojoto#nojotohindi#shayri#Khyaal

122 Love
2 Share

"हिंदी दिवस हिंदी को भी रहने दो बोलो कोई भी भाषा तुम और किसी में लिखने दो। बोलचाल व लेखन में तुम हिंदी को भी रहने दो।। हिंदी है मातृ भाषा हमारी यह तो माता समान है। और भाषाओं के सन्मुख क्यों इसका करते अपमान हैं? झूठा सम्मान पाने को देते अंग्रेज़ी उत्कोच है। क्यों उससे मस्तक ऊँचा क्यों हिंदी से संकोच है? अंग्रेजी है मेहमान सरिस मेहमान को वही बस रहने दो। बोलचाल व लेखन में तुम हिंदी को भी रहने दो।। जैसे जैसे उपयोगिता यहाँ अब हिंदी की घटी है। वैसे वैसे ही संस्कृति की पूर्व सुगन्ध हटी है।। देशी भाषा त्याग के सब विदेशी लगे अपनाने। सम्मुख खड़ी कामधेनु तज गदही लगे दुहाने।। वह तुमसे कुछ कहना चाहती उसको भी कुछ कहने दो। बोलचाल व लेखन में तुम हिंदी को भी रहने दो।। त्याग के हीरा टुकड़ा काँच का रखने का यह कृत्य क्या? हिंदी के बिन कैसा काव्य क्या है अर्थ साहित्य का? जैसे ललाट सुहागिन का है अपूर्ण बिन बिंदी। वैसे ही है रचना अपूर्ण है बिन मृदुभाषा हिंदी।। बहुत सहा है भेदभाव अब इसे और न सहने दो। बोलचाल व लेखन में तुम हिंदी को भी रहने दो।। बोलो कोई भी भाषा तुम और किसी में लिखने दो। बोलचाल व लेखन में तुम हिंदी को भी रहने दो।। ✍️अवधेश कनौजिया©"

हिंदी दिवस  हिंदी को भी रहने दो

बोलो कोई भी भाषा तुम
और किसी में लिखने दो।
बोलचाल व लेखन में तुम
हिंदी को भी रहने दो।।

हिंदी है मातृ भाषा हमारी
यह तो माता समान है।
और भाषाओं के सन्मुख क्यों
इसका करते अपमान हैं?
झूठा सम्मान पाने को देते
अंग्रेज़ी उत्कोच है।
क्यों उससे मस्तक ऊँचा 
क्यों हिंदी से संकोच है?
अंग्रेजी है मेहमान सरिस
मेहमान को वही बस रहने दो।
बोलचाल व लेखन में तुम
हिंदी को भी रहने दो।।

जैसे जैसे उपयोगिता यहाँ
अब हिंदी की घटी है।
वैसे वैसे ही संस्कृति की
पूर्व सुगन्ध हटी है।।
देशी भाषा त्याग के सब
विदेशी लगे अपनाने।
सम्मुख खड़ी कामधेनु तज
गदही लगे दुहाने।।
वह तुमसे कुछ कहना चाहती
उसको भी कुछ कहने दो।
बोलचाल व लेखन में तुम
हिंदी को भी रहने दो।।

त्याग के हीरा टुकड़ा काँच का
रखने का यह कृत्य क्या?
हिंदी के बिन कैसा काव्य
क्या है अर्थ साहित्य का?
जैसे ललाट सुहागिन का
है अपूर्ण बिन बिंदी।
वैसे ही है रचना अपूर्ण है
बिन मृदुभाषा हिंदी।।
बहुत सहा है भेदभाव अब
इसे और न सहने दो।
बोलचाल व लेखन में तुम
हिंदी को भी रहने दो।।

बोलो कोई भी भाषा तुम
और किसी में लिखने दो।
बोलचाल व लेखन में तुम
हिंदी को भी रहने दो।।

✍️अवधेश कनौजिया©

#हिंदी_दिवस

हिंदी को भी रहने दो

बोलो कोई भी भाषा तुम
और किसी में लिखने दो।
बोलचाल व लेखन में तुम
हिंदी को भी रहने दो।।

17 Love

"#OpenPoetry ♡कलम और जुबां♡ लोगो की परवाह तु मत कर वीर तु बढता चल कलम और जुबां की ताकत पे तु रह अटल जबतलक ये धरा है और है जबतलक गगन रोक न पायेगा तुझको कोई चाहे करले जितना यतन वाचन लेखन करते रहे यही कर रहा हू निवेदन आपके लेखन से बहुतों कर रहे है नवसृजन चेहरा के किताब की यह जो परिवार है आप जैसों के बिना भैया ये सब।बेकार है कृपा कर विचलित न हो लिखते रहे दिखते रहे हम साथ है आपके बस यु ही कलम घिसते रहे ।।"

#OpenPoetry ♡कलम और जुबां♡

लोगो की परवाह तु मत कर वीर तु बढता चल
कलम और जुबां की ताकत पे तु रह अटल 
जबतलक ये धरा है और है जबतलक गगन
रोक न पायेगा तुझको कोई चाहे करले जितना यतन
वाचन लेखन करते रहे यही कर रहा हू निवेदन
आपके लेखन से बहुतों कर रहे है नवसृजन
चेहरा के किताब की यह जो परिवार है
आप जैसों के बिना भैया ये सब।बेकार है
कृपा कर विचलित न हो लिखते रहे दिखते रहे
हम साथ है आपके बस यु ही कलम घिसते रहे ।।

 

14 Love
1 Share

कलम से कड़ी के कलमकार हैं- शरद जोशी
#Kalamse #SharadJoshi
जन्मदिन मुबारक़- शरद जोशी ( 21 मई 1931 - 5 सितम्बर 1991)
शरद जोशी का जन्म उज्जैन, मध्य प्रदेश में हुआ था। इन्होने इंदौर में रहते हुए ही समाचार पत्रों और रेडियो के लिए लेखन कार्य किया है। शरद जोशी हिंदी के व्यंग लेखक के तौर पर स्थापित हुए। जोशी जी ने कई व्यंग लेखन की है और उसके साथ=साथ फिल्म लेखक व धारावाहिक लेखक के तौर पर भी काफ़ी लोकप्रिय हुए। 1990 में जोशी जी को पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया और साथ ही इनके नाम पर शरद जोशी सम्मान आरम्भ

110 Love
8 Share