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Best बच्चे Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"India quotes गाँव खेत खलिहानों में, जीवन देते किसानों में अडिग खड़े हिमालय में, और गंगा के मैदानों में उन केसर के बागानों में, जान लुटाते जवानों में विधवाओं के अरमानों में, शहीदों की संतानों में हिम्मत देती मिसाइलों में रक्षा करते जलयानों में सच्चे सपूतों अटल बिहारी अब्दुल कलामों में मंदिर वाले भगवानों में, मस्जिद की अजानों में हिन्दू मुस्लिम सिख ईसा, बच्चे बच्चे इंसानों में चप्पे चप्पे कण कण और माटी माटी में बिंधा है हर इक दिल के कोने कोने में देश हमारा जिंदा है । " नीर " #NojotoQuote"

India quotes  गाँव  खेत  खलिहानों में, जीवन देते किसानों में
अडिग खड़े हिमालय में, और गंगा के मैदानों में
उन  केसर के बागानों में, जान लुटाते जवानों में 
विधवाओं के अरमानों में, शहीदों  की संतानों में

हिम्मत देती मिसाइलों में रक्षा करते जलयानों में
सच्चे  सपूतों  अटल  बिहारी  अब्दुल कलामों में
मंदिर  वाले  भगवानों में, मस्जिद की अजानों में
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसा, बच्चे  बच्चे  इंसानों  में

चप्पे चप्पे  कण  कण और माटी माटी में बिंधा है
हर इक दिल के कोने कोने में देश हमारा जिंदा है ।

" नीर " #NojotoQuote

चप्पे चप्पे कण कण और माटी माटी में बिंधा है
हर इक दिल के कोने कोने में देश हमारा जिंदा है ।

[ गणतंत्र दिवस की बहुत शुभकामनाएं
और बधाई । देश को जिंदा बनाये रखिये । ❤️]

" नीर "

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मेरे #बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं.
बिस्तरों पर अब #सलवटें नहीं पड़ती

ना ही #इधर #उधर छितराए हुए कपड़े हैं
रिमोट के लिए भी अब झगड़ा नहीं होता
ना ही #खाने की नई नई फरमाइशें हैं
मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम #अकेले हो गए हैं.

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"ये बच्चे मुझसे कुछ सीखते नही। मेरी तरह बारिशों में भीगते नही। मेरा बदला पूरा नही होता। मेरी गली के बच्चे चीखते नहीं। -अमूल्य मिश्रा"

ये बच्चे मुझसे कुछ सीखते नही।
मेरी तरह बारिशों में भीगते नही।

मेरा  बदला  पूरा  नही  होता।
मेरी गली के बच्चे चीखते नहीं।
-अमूल्य मिश्रा

 

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"बचपन और बारिश कविता देखो चमकी दामिनी चम -चम परिंदों के पंख भी चमके चमकीले पवन ले आयी झोंका आंधी का झूम रहे सरसों के फूल पीले धीमे धीमे गिरीं जो बूंदें मन बर्षा संग लहराया देखो हरियाली का नजारा बच्चों के मन को भाया बाग बगीचे पवन संग देखो कैसे झूम रहे हैं एक गुट बनाकर बच्चे देखो कैसे बर्षा मे भीग रहे हैं बच्चों अपने वस्त्र तो देखो हो गये सारे गीले सारे गलियारों मे बस्ती के बर्षा का पानी भरा हुआ है बच्चे छम छम करते दौड़ रहे हैं कागज की नाव बनाकर देखो पानी में छोड़ रहे हैं बच्चों के ये दिन भी हैं,कितने रंगीले मारुफ आलम"

बचपन और बारिश कविता
देखो चमकी दामिनी चम -चम
परिंदों के पंख भी चमके चमकीले
पवन ले आयी झोंका आंधी का
झूम रहे सरसों के फूल पीले
धीमे धीमे गिरीं जो बूंदें
मन बर्षा संग लहराया
देखो हरियाली का नजारा
बच्चों के मन को भाया
बाग बगीचे पवन संग
देखो कैसे झूम रहे हैं
एक गुट बनाकर बच्चे
देखो कैसे बर्षा मे भीग रहे हैं
बच्चों अपने वस्त्र तो देखो 
हो गये सारे गीले
सारे गलियारों मे बस्ती के
बर्षा का पानी भरा हुआ है
बच्चे छम छम करते दौड़ रहे हैं
कागज की नाव बनाकर 
देखो पानी में छोड़ रहे हैं
बच्चों के ये दिन भी हैं,कितने रंगीले

मारुफ आलम

बचपन और बारिश/कविता

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समय चला, पर कैसे चला…पता ही नहीं चला…
ज़िन्दगी की आपाधापी में, कब निकली उम्र हमारी, यारों
पता ही नहीं चला.
कंधे पर चढ़ने वाले बच्चे, कब कंधे तक आ गए,
पता ही नहीं चला.
किराये के घर से शुरू हुआ था सफर अपना
कब अपने घर तक आ गए,
पता ही नहीं चला.

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