tags

Best अजयकुमारव्दिवेदी Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

Find the Best अजयकुमारव्दिवेदी Shayari, Status, Quotes from top creators only on Nojoto App. Also find trending photos & videos.

  • 1 Followers
  • 89 Stories
  • Popular
  • Latest
  • Video

""

"शीर्षक - बचपन के वो निराले दिन। भीड़ है मेरे चारों ओर, पर मैं बहुत अकेला हूँ। यारों मैं एक आदमी, इस दुनियां में अलबेला हूँ। नयी जगह हैं नये लोग, नयी-नयी सब बातें हैं। पर कैसे सबको समझाऊं, तन्हा तन्हा ये रातें है। छोटी-छोटी बातों की भी, चिन्ता मुझे सताती है। अक्सर किसी की यादें मुझको, अकारण ही रूलातीं है। छोड़ गया जो बरसों पहले, अब भी मुझे सताता है। कभी-कभी नैनों में मेरे, आंसू बनकर आ जाता है। हूँ सोचता की भुला दूं उसको, पर भूल नहीं मैं पाता हूँ। उसकी यादों में अक्सर, जाने क्यूँ उलझ जाता हूँ। साथ गुजारे थे उसके, जो बचपन के वो प्यारे दिन। ऊलझलूल सी बातों वालें, बचपन के वो सारे दिन। खेल कबड्डी वाला हो या, हो गिल्ली डण्डे वाला खेल। बचपन में मस्त चलाते थे हम, छूक-छूक करके अपनी रेल। पर रेल उतर गयी पटरी से, वो मुझे छोड़कर चला गया। जो मिलकर देखें थे सपनें, सबको मिट्टी मिला गया। अब कटते नहीं जवानी के, मुझसे ये बेकारे दिन। यादें बनकर तड़पातें है, बचपन के वो निराले दिन। अजय कुमार द्विवेदी"

शीर्षक - बचपन के वो निराले दिन। 

भीड़ है मेरे चारों ओर, पर मैं बहुत अकेला हूँ।
यारों मैं एक आदमी, इस दुनियां में अलबेला हूँ।
नयी जगह हैं नये लोग, नयी-नयी सब बातें हैं।
पर कैसे सबको समझाऊं, तन्हा तन्हा ये रातें है।
छोटी-छोटी बातों की भी, चिन्ता मुझे सताती है।
अक्सर किसी की यादें मुझको, अकारण ही रूलातीं है।
छोड़ गया जो बरसों पहले, अब भी मुझे सताता है।
कभी-कभी नैनों में मेरे, आंसू बनकर आ जाता है।
हूँ सोचता की भुला दूं उसको, पर भूल नहीं मैं पाता हूँ।
उसकी यादों में अक्सर, जाने क्यूँ उलझ जाता हूँ।
साथ गुजारे थे उसके, जो बचपन के वो प्यारे दिन।
ऊलझलूल सी बातों वालें, बचपन के वो सारे दिन।
खेल कबड्डी वाला हो या, हो गिल्ली डण्डे वाला खेल।
बचपन में मस्त चलाते थे हम, छूक-छूक करके अपनी रेल।
पर रेल उतर गयी पटरी से, वो मुझे छोड़कर चला गया।
जो मिलकर देखें थे सपनें, सबको मिट्टी मिला गया।
अब कटते नहीं जवानी के, मुझसे ये बेकारे दिन।
यादें बनकर तड़पातें है, बचपन के वो निराले दिन।
अजय कुमार द्विवेदी

#अजयकुमारव्दिवेदी बचपन के वो निराले दिन।

27 Love
1 Share

""

"#KisanDiwas पढ़ लिख कर हैं घर में बैठे, मिलता न रोजगार। रान परोसी ताना मारे, कहते हैं बेरोजगार। मोदीजी धीरे-धीरे करेंगे बेड़ा पार, मोदीजी धीरे-धीरे। कहीं पे जनता भूख से मरती, कहीं कोई बीमारी से। महंगाई के चलतें हो गई, जनता अब लाचार। मोदीजी धीरे-धीरे करेंगे बेड़ा पार, मोदीजी धीरे-धीरे। विकास की राह पे चलते-चलते, डूब गई जी नैया। छोटे व्यापारी का भी, अब बन्द हुआ व्यापार। मोदीजी धीरे-धीरे करेंगे बेड़ा पार, मोदीजी धीरे-धीरे। बेरोजगारी के चलते, पहलें ही कड़की छाई है। उस पर बढ़ गई महंगाई, हुई प्याज सवा सौ पार। मोदीजी धीरे-धीरे करेंगे बेड़ा पार, मोदीजी धीरे-धीरे। त्राहि-त्राहि करती अब जनता, दिखता नहीं विकास। फिर भी छाती चौड़ी करके, बोल रही सरकार। मोदीजी धीरे-धीरे करेंगे बेड़ा पार, मोदीजी धीरे-धीरे। अजय कुमार व्दिवेदी"

#KisanDiwas  पढ़ लिख कर हैं घर में बैठे, मिलता न रोजगार।
रान परोसी ताना मारे, कहते हैं बेरोजगार। 
मोदीजी धीरे-धीरे करेंगे बेड़ा पार, मोदीजी धीरे-धीरे।
कहीं पे जनता भूख से मरती, कहीं कोई बीमारी से।
महंगाई के चलतें हो गई, जनता अब लाचार।
मोदीजी धीरे-धीरे करेंगे बेड़ा पार, मोदीजी धीरे-धीरे।
विकास की राह पे चलते-चलते, डूब गई जी नैया।
छोटे व्यापारी का भी, अब बन्द हुआ व्यापार।
मोदीजी धीरे-धीरे करेंगे बेड़ा पार, मोदीजी धीरे-धीरे।
बेरोजगारी के चलते, पहलें ही कड़की छाई है।
उस पर बढ़ गई महंगाई, हुई प्याज सवा सौ पार।
मोदीजी धीरे-धीरे करेंगे बेड़ा पार, मोदीजी धीरे-धीरे।
त्राहि-त्राहि करती अब जनता, दिखता नहीं विकास।
फिर भी छाती चौड़ी करके, बोल रही सरकार।
मोदीजी धीरे-धीरे करेंगे बेड़ा पार, मोदीजी धीरे-धीरे।
अजय कुमार व्दिवेदी

#अजयकुमारव्दिवेदी मोदीजी धीरे-धीरे।

20 Love
5 Share

""

"और भाई सेक्युलर हिन्दूओं कहो जबाब कहाँ से लाओगे। हेड कांस्टेबल रतनलाल की मौत का जिम्मेदार किसे बताओगे। क्या अब भी मोदी को गाली दोगे या अमित शाह को कोसोंगे। तुम रतनलाल के रोते बीबी बच्चों को कैसे समझाओगे। अजय कुमार व्दिवेदी"

और भाई सेक्युलर हिन्दूओं कहो जबाब कहाँ से लाओगे।
हेड कांस्टेबल रतनलाल की मौत का जिम्मेदार किसे बताओगे।
क्या अब भी मोदी को गाली दोगे या अमित शाह को कोसोंगे।
तुम रतनलाल के रोते बीबी बच्चों को कैसे समझाओगे।

अजय कुमार व्दिवेदी

#अजयकुमारव्दिवेदी दिल्ली हिंसा

14 Love
6 Share

""

"उत्तरी पूर्वी दिल्ली को श्मशान बनाने वालों। गोद में जिसके खेलें थे घर उन्हीं का जलाने वालों। क्या लगता है हुड़दंग मचाने से सीएए हट जाएगा। शूरवीर रतनलाल को मौत की नींद सुलाने वालों। तीन महीने से तुमने रस्ता रोक कर रख्खा है। धरने के नाम पर तुमनें मजाक बना कर रख्खा है। जो नौकरी पेशे वालें है और जो पढ़ने वालें बच्चे है। उन सबको तुम लोगों ने बंधक बना कर रख्खा है। क्या समझते हो तुम की हम डर कर चुप रह जाते हैं। अरे तुमको अपना मानते हैं हम इसीलिए समझाते हैं। हमारी इस खामोशी को कमजोरी नहीं समझना तुम। अरे हम हिन्दू है आदत है हमारी हम सर्पों को दूध पिलाते हैं। शाहीन बाग के मंच से प्रतिदिन आग उगलते रहते हो। हम पंद्रह करोड़ सौ करोड़ पर भारी ऐसी बातें कहतें हो। पूरी दिल्ली को क्या अपनी खाला का घर समझा है। जहाँ भी देखों धरने पर तुम रोड़ जाम कर बैठें हो। देखों ये सब ठीक नहीं ये देश तुम्हारा भी तो है। सीएए में क्या गलत है सीएए एनआरसी ठीक तो है। तुम तो भारत के वासी हो सीएए से तुम्हें कोई नुकसान नहीं। कोई आतंकी हमारे घर में न आये ये फैसला ठीक तो है। हम ईद तुम्हारे साथ मनाएं तुम होली के दिवाली साथ रहो। यदि तुम्हें कुछ कहना है तो सही ढंग से अपनी बात कहो। सरकार सुनेगी हम भी सुनेंगे बात तुम्हारी ध्यान से। किसी से कुछ कहने के लायक तुम कम से कम इंसान बनों। अब और नहीं समझा सकता मैं समझाने की एक सीमा है। मैं शीष नहीं झुका सकता हूँ मेरी भी एक गरिमा है। अगर समझ गए तो अच्छा है वरना अंजाम खुद भोगोगे। ये तो तुम्हारी मर्जी है तुम करों तुम्हें जो करना है। अजय कुमार व्दिवेदी"

उत्तरी पूर्वी दिल्ली को श्मशान बनाने वालों।
गोद में जिसके खेलें थे घर उन्हीं का जलाने वालों।
क्या लगता है हुड़दंग मचाने से सीएए हट जाएगा।
शूरवीर रतनलाल को मौत की नींद सुलाने वालों।
तीन महीने से तुमने रस्ता रोक कर रख्खा है।
धरने के नाम पर तुमनें मजाक बना कर रख्खा है।
जो नौकरी पेशे वालें है और जो पढ़ने वालें बच्चे है।
उन सबको तुम लोगों ने बंधक बना कर रख्खा है।
क्या समझते हो तुम की हम डर कर चुप रह जाते हैं।
अरे तुमको अपना मानते हैं हम इसीलिए समझाते हैं।
हमारी इस खामोशी को कमजोरी नहीं समझना तुम।
अरे हम हिन्दू है आदत है हमारी हम सर्पों को दूध पिलाते हैं।
शाहीन बाग के मंच से प्रतिदिन आग उगलते रहते हो।
हम पंद्रह करोड़ सौ करोड़ पर भारी ऐसी बातें कहतें हो।
पूरी दिल्ली को क्या अपनी खाला का घर समझा है।
जहाँ भी देखों धरने पर तुम रोड़ जाम कर बैठें हो।
देखों ये सब ठीक नहीं ये देश तुम्हारा भी तो है।
सीएए में क्या गलत है सीएए एनआरसी ठीक तो है।
तुम तो भारत के वासी हो सीएए से तुम्हें कोई नुकसान नहीं।
कोई आतंकी हमारे घर में न आये ये फैसला ठीक तो है।
हम ईद तुम्हारे साथ मनाएं तुम होली के दिवाली साथ रहो।
यदि तुम्हें कुछ कहना है तो सही ढंग से अपनी बात कहो।
सरकार सुनेगी हम भी सुनेंगे बात तुम्हारी ध्यान से।
किसी से कुछ कहने के लायक तुम कम से कम इंसान बनों।
अब और नहीं समझा सकता मैं समझाने की एक सीमा है।
मैं शीष नहीं झुका सकता हूँ मेरी भी एक गरिमा है।
अगर समझ गए तो अच्छा है वरना अंजाम खुद भोगोगे।
ये तो तुम्हारी मर्जी है तुम करों तुम्हें जो करना है।
अजय कुमार व्दिवेदी

#अजयकुमारव्दिवेदी दिल्ली हिंसा

14 Love
6 Share

""

"जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं ढेरों बधाई दीशू बेटा। HAPPY BIRTHDAY TO YOU कामयाबी मिले हर कदम पर तुझे। है दुआ ये मेरी तु सलामत रहे। तेरे राहों में फूलों की ना कमी। देखूँ चेहरा तेरा तो शराफत मिले। मम्मी पापा का तू नाम रोशन करें। तुझको हर दिन नई एक शोहरत मिले। नाम अपना बड़ा तू जहाँ में करें। तुझको करना है जो उसकी मोहलत मिले। हो जन्मदिन तेरा ये मुबारक तुझे। चलें नेकी पे तू ऐसी सोहबत मिले। कामयाबी मिले हर कदम पर तुझे। है दुआ ये मेरी तु सलामत रहे। अजय कुमार व्दिवेदी"

जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं ढेरों बधाई दीशू बेटा।
HAPPY BIRTHDAY TO YOU 
कामयाबी मिले हर कदम पर तुझे।
है  दुआ  ये  मेरी  तु  सलामत  रहे।
तेरे  राहों  में  फूलों  की  ना कमी।
देखूँ चेहरा  तेरा तो शराफत मिले।
मम्मी  पापा  का  तू  नाम  रोशन  करें।
तुझको हर दिन नई एक शोहरत मिले।
नाम   अपना   बड़ा    तू   जहाँ    में   करें।
तुझको करना है जो उसकी मोहलत मिले।
हो   जन्मदिन   तेरा    ये   मुबारक   तुझे।
चलें   नेकी   पे   तू  ऐसी  सोहबत  मिले।
कामयाबी मिले हर कदम पर तुझे।
है  दुआ  ये  मेरी  तु  सलामत  रहे।
अजय कुमार व्दिवेदी

#अजयकुमारव्दिवेदी Happy Birthday Beta

13 Love
1 Share