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Best लाठी Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"इत्तु-सी हँसी इत्तु सी हँसी, बचपन की मस्ती, जवानी की आशिकी, बुढ़ापे की लाठी, जून की गर्मी, दिसंबर की सर्दी, समुंदर की गहरायी, बेस्टी की शादी, चेहरे की सादगी, शायर की शायरी, चाय की चुस्की, कोयल की वाणी, क्लास में फस्ट आने की खुशी,दोस्तों की यारी, मंदिर की सीढी, शिव पार्वती की जोड़ी, ईद की ईदी, दिवाली की रोशनी, सावन की बदरी, फूलों की क्यारी स्कूल की डायरी, कॉलेज की क्रश, कानों की बाली, होठों की लाली, बहुत खास होती हैं..."

इत्तु-सी हँसी   इत्तु सी हँसी, बचपन की मस्ती,
जवानी की आशिकी, बुढ़ापे की लाठी,
जून की गर्मी, दिसंबर की सर्दी,
समुंदर की गहरायी, बेस्टी की शादी,
चेहरे की सादगी, शायर की शायरी,
चाय की चुस्की, कोयल की वाणी,
 क्लास में फस्ट आने की खुशी,दोस्तों की यारी,
 मंदिर की सीढी, शिव पार्वती की जोड़ी,
ईद की ईदी, दिवाली की रोशनी,
सावन की बदरी, फूलों की क्यारी
स्कूल की डायरी, कॉलेज की क्रश,
कानों की बाली, होठों की लाली,
बहुत खास होती हैं...

#laughter #बहुत #खास #होती #है
#हँसी #बचपन #मस्ती #जवानी #आशिकी #बुढ़ापा #लाठी #जून #गर्मी #दिसंबर #सर्दी #समुंदर #गहरायी #बेस्टी #शादी #चेहरा #सादगी #शायर #शायर
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108 Love

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"किस रास्ते है जाना, खुद का फैसला खुद ढूंढ रास्ता तेरा धुंधली सी है राहे मिट्टी की जमीन है पहुंचेगा कहीं तो कर फैसला ना दूसरों के हिसाब से भटक गया तो इल्जाम उन पर डालेगा तेरी जिंदगी है फैसला भी तेरा ही हो मंजिल की तलाश में दर-दर भटक तुझे औरों का रास्ता काटना ना पड़े किस राह जाना है खुद को काबिल बना इतना किसी और पर निर्भर न रहना पड़े मुसाफिर कई मिलेंगे पल भर के राहगीर होंगे चलना तो अकेले हैं खुद की पहचान बनानी है अगर तो सहारा तो खुद का बन धूप भी होगी कहीं छांव भी होगी वक्त का तकाजा साथ लिए चलना है लाठी को साथ लिए कितने दिन जाना है बीना लाठी कैसे चलना है अब फैसला तेरा हो किस रास्ते हैं जाना"

किस रास्ते है जाना,  खुद का फैसला खुद ढूंढ रास्ता तेरा
धुंधली सी है राहे मिट्टी की जमीन है
पहुंचेगा कहीं तो कर फैसला
 ना दूसरों के हिसाब से
भटक गया तो इल्जाम उन पर डालेगा
 तेरी जिंदगी है फैसला भी तेरा ही हो
मंजिल की तलाश में दर-दर भटक तुझे औरों का रास्ता काटना ना पड़े
किस राह जाना  है 
खुद को काबिल बना इतना किसी और पर निर्भर न रहना पड़े
मुसाफिर कई मिलेंगे पल भर के राहगीर होंगे
चलना तो अकेले हैं
 खुद की पहचान बनानी है अगर तो सहारा तो खुद का बन
धूप भी होगी कहीं छांव भी होगी 
वक्त का तकाजा साथ लिए चलना है
लाठी को साथ लिए कितने दिन जाना है
बीना लाठी कैसे चलना है
अब फैसला तेरा हो किस रास्ते हैं जाना

#राह तेरी

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"माता पिता की सेवा करें,उनके बुढ़ापे की लाठी बनिए लाठी को तोड़ें नहीं। - BhawnaSharma..✍ #NojotoQuote"

माता पिता की सेवा करें,उनके बुढ़ापे की लाठी बनिए लाठी को तोड़ें नहीं। 
-  BhawnaSharma..✍
 #NojotoQuote

#BudhapeKaSahara#Seva #Kadar #matapita 🙏 #AajKaDaur #BhawnaSharma..✍ #Nojoto #NojotoHindi

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"गाँधी तेरी लाठी करती ये पुकार हो रहा है कितना देखो अत्याचार जात-धर्म से हो गए,सब यहाँ लाचार ईमान का भी हो रहा खूब व्यापार गाँधी तेरी लाठी करती ये पुकार लूट-पाट,दंगो की दुकानें चल रही बहू-बेटियों की अस्मिता लुट रही मंदिर-मस्ज़िद भी फल-फूल रही इन सबसे भरा हुआ है अख़बार गाँधी तेरी लाठी करती ये पुकार साम-दाम दंड भेद,गाँधी नाम रहे नैतिकता को अपने सब त्याग रहे गाँधी के वचन तो सबको याद रहे मनाते इसे जैसे हो कोई त्यौहार गाँधी तेरी लाठी करती ये पुकार करूणा अहिँसा तेरा रूप रहा अंग्रेज़ो के सामने तू न डिगा तेरे उसी रूप क़ी है दरकार गाँधी तेरी लाठी करती ये पुकार -आकिब जावेद"

गाँधी तेरी लाठी करती ये पुकार
हो रहा है कितना देखो अत्याचार
जात-धर्म से हो गए,सब यहाँ लाचार
ईमान का भी हो रहा खूब व्यापार
गाँधी तेरी लाठी करती ये पुकार

लूट-पाट,दंगो की दुकानें चल रही
बहू-बेटियों की अस्मिता लुट रही
मंदिर-मस्ज़िद भी फल-फूल रही
इन सबसे भरा हुआ है अख़बार
गाँधी तेरी लाठी करती ये पुकार

साम-दाम दंड भेद,गाँधी नाम रहे
नैतिकता को अपने सब त्याग रहे
गाँधी के वचन तो सबको याद रहे
मनाते इसे जैसे हो कोई त्यौहार
गाँधी तेरी लाठी करती ये पुकार

करूणा अहिँसा तेरा रूप रहा
अंग्रेज़ो के सामने तू न डिगा
तेरे उसी रूप क़ी है दरकार
गाँधी तेरी लाठी करती ये पुकार

-आकिब जावेद

गाँधी तेरी लाठी करती ये पुकार
हो रहा है कितना देखो अत्याचार
जात-धर्म से हो गए,सब यहाँ लाचार
ईमान का भी हो रहा खूब व्यापार
गाँधी तेरी लाठी करती ये पुकार

लूट-पाट,दंगो की दुकानें चल रही
बहू-बेटियों की अस्मिता लुट रही

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बापू, मुझे भगत बन जाने दो प्रिय बापू ,
आपको जन्मदिन की शुभकामनाएँ!

१५०वी जयंती है आपकी और १५० से भी ज़्यादा बातें बदल गईं हैं यहाँ।
आपने जो लाठी उठायी थी; देश के हित में, अब उसी लाठी का इस्तेमाल अहित में ज़्यादा होता दिख रहा है |

आपकी ही तस्वीर के नीचे आपकी तस्वीर लगी नोटों की तस्करी हो रही है, शायद कमी रह गयी कहीं न कहीं
अंग्रेज़ो को तो देश से भगा दिया लेकिन शायद उनकी सोच उनकी लाई गयी मानसिक गुलामी से आज़ाद नहीं करा पाए आप।

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