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आज की उम्र व जन्म वर्ष को जोड़ो2019 आयेगा यह जादू हजार वर्ष मे ही होता है 
उदाहरण 
मेरा जन्म वर्ष 1972
मेरा वर्ष         +47
जोड़             2019
आप भी आजमाये
शुभ रात्रि मित्रों

 

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ईश्वर कि अद्भभुत रचना
"किन्नर"

🙏🌹ईश्वर की अद्भभुत रचना "किन्नर"🌹🙏
************************************
ईश्वर ने स्त्री को रचा, कोमलता, सुघड़ता, प्रेम, कला के रंग भरे पर कुछ था जो छूट सा गया...
फ़िर ईश्वर ने पुरुष को रचा, कठोरता, जटिलता, पौरुष भरते हुए कठोर से रंग भरे पर अब नृत्य, संगीत जैसे आयाम पीछे छूट गए.बड़ा परेशान था सृजनहार,
इन विपरीतगामी रंगों को कैसे संग संग लाए...
हाथों में सृजन तूलिका लिए बैठा परेशान था, कि मां अरिष्टा और कश्यप ऋषि ने ब्रह्म के पैर के अंगूठे की छाया में कुछ नवीन रचा.जिसमें पुरुषत्व के गहरे रंग तो थे ही पर, प्रेम और कला का समागम भी था जिसमे,
कोमलता, कठोरता के कठोर आवरण में यूँ छुपी थी
ज्यूँ नारियल पानी को छुपाकर सहेजता है और
जटिलता, सुघड़ता के साथ उसी तरह प्रवाहमान थी
ज्यूँ तीखे मोड़ों पर भी नदी आराम से गुजर जाती है
अहहाआ... यही तो, यही तो ईश्वर अब चित्रपटल पर उकेर रहे थे.और ईश्वर खुशी से नाच उठे.और कहा कि जहां भी मंगल कार्य होंगें वहां यह नवाकृति नृत्य कला के रूप में मेरा आशीर्वाद पहुंचाएगी और उन्होने इस नवीन सृजन को नाम दिया "मंगलामुखी"परंतु.मां अरिष्टा और कश्यप ऋषि चुप से थे, उदास से थे कि, मंगलामुखी प्रजनन क्षमता विहीन कृति थी,अर्थात, स्वप्रतिकृति को जन्म देने की काबिलियत रहित.तो ईश्वर ने मुस्कुरा कर कहा."यह तो प्रकृति के नियमानुकूल ही है" स्त्री व पुरुष के आकर्षण की मुख्य वजह, उन दोनों की अपूर्णता है...
जो उन्हे मिल कर पूर्ण होने को आकर्षित करती है कयुकि नवसृजन, स्त्री व पुरुष दोनों के गुणधर्मों से पूर्ण है, तो यह निश्चित रूप से इस आकर्षण से ऊपर ही होगा,
और जो इस आकर्षण से ऊपर हो, उसकी नियति,
आकर्षण जनित प्रजनन से विहीन अवश्यमभावी होगी...
अतैव किं+नर अर्थात स्त्री+पुरुष के गुणोंयुक्‍त मंगलामुखी, मेरे अर्धनारीश्वर रूप का ही परिलक्षण होगा.अस्तु.परंतु तभी किन्नर बोल पड़ा, हे देव,
मानता हूँ कि मैं आकर्षण की सीमाओं से परे सृजित हुआ हूँ, परंतु इच्छाओं का दास तो मैं भी रहूंगा ही,और आपने मेरे इस सृजन रूप में, विवाह बगैर असंपूर्ण रहने की अग्नि से जलने को श्रापित कर दिया है.तदैव,
इस दुख से किन्नर को परे रखने को, स्वयं अरावन देव ने हर वर्ष एक दिन के लिए, किन्नर से विवाह करने की इजाजत मांगी.और साथ ही कहा, कि हर वर्ष वो एक दिन को सुहागन रहेगा और, विवाह के अगले दिन अरावन देव की मृत्यु के साथ ही, बाकी वर्ष मंगलामुखी के वैधव्य को निर्धारित हुआ.इस वैधव्य की वजह से ही
जो मंगलामुखी, मंगल कार्यों हेतु सृजित हुआ, उसने स्वयं के जीवन के मंगल कार्यों को भी त्याग दिया.इसीलिए आज भी सभी किन्नर,अन्य नवजात के जन्‍म पर मंगल गाकर ईश्वरीय आशीष हमें देते हैं परन्तु, कंही भी नवकिन्नर के जन्म पर रोते हैं और, किन्नर की मृत्यु पर मंगलगान करते हैं मैं जब भी इन्हे देखती हूँ, इक अजीब सी सोच में डूब जाती हूँ, कि आख़िर किस तरह से सृजनहार इन्हे संचालित करता है, कि, इन वैधव्य श्रापित उबलते तेल के दियों के कंठ से सदैव, हर आंगन में,
मंगल-गीतों के रूप में गंगाजल ही प्रवाहित होता रहता है
और, जब जब मैं ऐसे सोचती हूँ, इनके प्रति सदैव पहले से अधिक श्रद्धा से मेरा दिल ❤भर उठता हे...✍

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*🔱अष्टमी व नवमी तिथि ने बनाया महा संयोग।🔱*

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*🗣इस नवरात्रि कन्या पूजन कर कैसे करें माँ दुर्गा को प्रसन्न, साथ ही पढ़ें रामनवमी पर होने वाले धार्मिक कर्म और पूजा विधि!*

*इस वर्ष चैत्र नवरात्रि में शनिवार और रविवार यानि 13-14 अप्रैल 2019 को अष्टमी और नवमी पूजन की तिथि पड़ रही है, जिसका मतलब इस बार अष्टमी और नवमी दोनों ही शुभ दिनों के पूजन में थोड़ा संशय देखा जाएगा। दरअसल, इस वर्ष सप्तमी के साथ अष्टमी तिथि का मिलाप होने से अष्टमी और नवमी पर होने वाले सभी धार्मिक कर्म 13 और 14 अप्रैल 2019 को ही संपन्न किये जाएंगे।*

*हिन्दू शास्त्रों अनुसार नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि क्रमशः माता महागौरी और मॉं सिद्धिदात्री के पूजन के लिए शुभ मानी जाती हैं। इसी लिए जो भी भक्त माता महागौरी जो बेहद दयालु होती हैं उनका पूजन सही तरीके से मुहूर्त अनुसार करता है, तो माँ उस भक्त की हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं। इसके साथ ही मॉं सिद्धिदात्री भी अपने सच्चे भक्तों को आध्यात्मिक सिद्धि प्रदान करती हैं और बुराइयों का नाश करके उन्हें आशीर्वाद के रूप में सदगुण प्रदान करती हैं।*

*अष्टमी और नवमी पूजन*

*नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी के पूजन का विशेष महत्व होता है। इन दिनों होने वाली मुख्य पूजा के साथ ही नवरात्रि का समापन होता है। ऐसे में अष्टमी और नवमी के पूजन का विधान अपनी-अपनी कुल परंपरा के अनुसार ही किया जाना अनिवार्य होता है, इसलिए हर परिवार में इन दोनों दिनों की पूजा अलग-अलग प्रकार से होती है। अतः इस दिन हमें अपनी कुल परंपरा को मानते व उसे आगे बढ़ाते हुए ही देवी गौरी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए।*

*अष्टमी और नवमी कन्या पूजन विधि*

*अक्सर नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर लोगों में भ्रम देखा जाता है, जिसके चलते लोग पूजन को शुभ मुहूर्त पर नहीं संपन्न कर पाते हैं। इस वर्ष आपके इसी भ्रम पर पूर्ण विराम लगाते हुए हम अपने इस लेख में आपको अष्टमी और नवमी से जुड़ी हर जानकारी देंगे। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस बार नवरात्रि अष्टमी, नवमी और दशमी तिथि में कुछ संशय की स्थिति बनती प्रतीत हो रही है, परंतु ज्योतिष विशेषज्ञों की मानें तो सप्तमी तिथि गुरूवार, 11 अप्रैल को सुबह 14:42:58 मिनट से शुक्रवार, 12 अप्रैल 13:24:50 तक होने के कारण उसके बाद अष्टमी तिथि लग गई है, जो कि शुक्रवार 12 अप्रैल को सुबह 13:24:51 मिनट से शुरू होगी और शनिवार, 13 अप्रैल की सुबह 11:42:36 मिनट तक रहेगी। उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी।*

*अष्टमी और नवमी मुहूर्त*

*चूंकि सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि है अतः महाष्टमी का व्रत शनिवार 13 अप्रैल को ही रखना उचित रहेगा। वहीं नवमी तिथि की बात करें तो नवमी तिथि भी शनिवार सुबह 11:42:37 से लग जाएगी, जो कि रविवार, 14 अप्रैल 09:36:46 बजे तक रहेगी। उसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी, जो कि दूसरे दिन तक रहेगी। ऐसे में जिन भक्तों ने नवरात्रि में 9 दिनों का उपवास किया है, वे रविवार सुबह 09:36:46 बजे के बाद पारणा कर सकते हैं।*

*नवरात्रि पारणा महत्व*

*नवरात्रि पारणा, नौ दिनों के उपवास के संपूर्ण होने के बाद किया जाने वाला महत्वपूर्ण कर्म कांड है। यह नवमी अथवा दशमी तिथि को संपन्न किया जाता है। शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि नवरात्रि पारणा के पश्चात् ही व्रती को व्रत का फल प्राप्त होता है। मीमांसा के अनुसार पारणा दशमी को करना चाहिए, क्योंकि कई शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि नवमी को उपवास रखा जाता है, इसलिए इस दिन पारणा करना उचित नहीं है।*

*नवरात्रि पारणा का शुभ मुहूर्त*
*14 अप्रैल, 2019*

*09:36:46 के बाद से*

*नोट: चैत्र नवरात्रि पारणा का समय नई दिल्ली, भारत के लिए है जो कि 24 घंटे के प्रारूप में दिया गया है।*
*यदि पंचांग में नवमी तिथि दो दिन पड़ रही हो, तब उस स्थिति में पहले दिन उपवास रखा जाता है और दूसरे दिन पारणा विधि संपन्न की जाती है।*

*इस दिन कन्या पूजन का विधान है।*

*पूजा व विसर्जन के बाद ब्राह्मणों को फल, उपहार, वस्त्र, दान-दक्षिणा आदि (स्वेच्छानुसार) देना चाहिए।*

*इस दिन देवी दुर्गा की षोडषोपचार पूजा करके दशमी को विसर्जन किया जाना चाहिए।*

*नवरात्रि पर कन्या पूजन का महत्व*

*नवरात्रि पर कन्या पूजा का विशेष महत्व होता है। इसी लिए अष्टमी व नवमी पर विशेष रूप से कन्याओं की पूजा करने का विधान है। सनातन धर्म में इस ख़ास दिन 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की आयु वाली छोटी कन्याओं को अपने घर बुलाकर उनका पूजन कर उन्हें भोजन व दक्षिणा दी जाती है। मान्यता है कि ये छोटी कन्याएँ मॉं दुर्गा का रूप होती हैं जिनका अष्टमी व नवमी पर लोग पूजन कर देवी गौरी को प्रसन्न करते हैं और पुण्य फलों की प्राप्ति हेतु उनसे आशीर्वाद पाते हैं।*

*कैसे करें कन्‍या पूजन?*

*कन्‍या पूजन के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्‍नान करें और साफ़ कपड़े पहनकर भगवान श्री गणेश और देवी गौरी की पूजा करें।*

*पूजन के लिए 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की आयु वाली छोटी कन्याओं को देवी गौरी और एक बालक को बटुक भैरव के रूप में अपने घर आमंत्रित करें। मान्यता है कि बटुक भैरव को शक्ति पीठ में माता की सेवा हेतु वरदान प्राप्त है। इसी लिए भक्त शक्‍ति पीठ में माँ के दर्शन के बाद भैरव के दर्शन करना अनिवार्य होता है।*

*कन्‍या पूजन से पूर्व घर को साफ कर स्वच्छ करें और कन्‍या रूपी माताओं को स्‍वच्‍छ परिवेश में ही आमंत्रित करे। चूँकि कन्‍याओं को माता रानी का रूप माना जाता है। ऐसे में उनके घर आने पर माता रानी के जयकारे लगाना शुभ होता है।*

*कन्‍याओं के घर आने पर उन्हें बैठने के लिए आसन दें।*

*फिर एक-एक कर सभी कन्‍याओं के पैर धोएं।*

*अब उन्‍हें रोली, कुमकुम और अक्षत का टीका लगाकर उनके हाथ में मौली बाधें।*

*अब सभी कन्‍याओं और बालक की आरती करें।*

*आरती के बाद सभी कन्‍याओं को यथाशक्ति भोग लगाएं। गौरतलब है कि कन्‍या पूजन के दिन पूरी, चना और हलवा प्रसाद में बनाया जाता है।*

*भोजन के बाद कन्‍याओं को भेंट और उपहार दें।*

*इसके बाद कन्‍याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें और उन्‍हें विदा करें।*

*रामनवमी*

*🗣13 अप्रैल, शनिवार को भगवान राम के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में देशभर में रामनवमी का पर्व भी मनाया जाएगा। हिन्दू कैंलेडर के अनुसार प्रत्येक साल चैत्र मास की नवमी तिथि को राम नवमी के रूप में मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को भगवान विष्णु के 7वें अवतार के रूप में पूजा जाता था। इसी लिए रामनवमी के विशेष दिन भक्तगण रामायण का पाठ करते हैं।*

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नया सवेरा लेकर आई 
नव संवत्सर की वेला
रंग बसंती चहूं ओर है 
कोयल कूक रही मतवाली 
नव श्रंगार मिला तरुओं को 
महक उठी डाली डाली 
प्रकृति के आवाहन पर 
खेतों में छाई हरियाली 
स्वच्छ हुआ वातावरण सारा 
मौसम में फैली खुशहाली 
स्वागत में नव संवत्सर के 
प्रकृती जाए बलिहारी 
सुखद रहे यह वर्ष हमारा 
जीवन में आए खुशहाली 
शांत सुखद हो सृष्टि सारी 
कुछ शेष रहे ना दुखकारी 
नया सवेरा लेकर आई 
नव संवत्सर की वेला
                - राजेश कुमार
भारतीय नव वर्ष २०७६ की 
आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं #NojotoQuote

#कविता

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नव ख्वाब आँखों मे सजोकर
डगर कोई चुन लो यारो
कलुषित भाव मिटाकर सारे
कुछ अर्जन कर लो यारो
नव वर्ष जोश उत्थान की ओर
नव सृजन कर लो यारो
नींदो मे सवारे गये स्वप्न का
सत्य घटनाक्रम कर लो यारो
किसी भी उज्ज्वलता की
उजियारी राह. चुन लो यारो
.. .
....
भारतीय हिन्दी नव वर्ष विक्रम संवत 2076आप और आपके परिवार के
 लिए सुख-समृद्धि लाए एवं कल्याणकारी हो
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ
कवि कुमार गिरीश
9 6 6 7 7 1 3 5 2 2

नव वर्ष

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