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निशा

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Travel quotes in Hindi तुम को  राहे महोब्बत पे चलना नही आया 
इस पूरे सफर में मेरे कदमो के निशा ही है 
तुम्हरा कोई निशा नजर नही आया ।
।माही। #NojotoQuote

Ayat Khan King Puneet Bhadauriya Reshma Jabeen Samhita Nandi

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Travel quotes in Hindi उन लम्हो के निशा आज भी
उस रेत पर है जहाँ तुम कभी मेरे साथ घूमने जाया करती थी
shivam Dubey (cocki) #NojotoQuote

उन लम्हो के निशा आज भी
उस रेत पर है जहाँ तुम कभी मेरे साथ घूमने जाया करती थी
shivam Dubey (cocki)
#Miss_you
#khayal #Nojoto #Google #shivam_Dubey_cocki
उन लम्हो के निशा आज भी
उस रेत पर है जहाँ तुम कभी मेरे साथ घूमने जाया करती थी
shivam Dubey (cocki)

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Shaadi Ka matlb..?? (part-2)
छह बज चुके थे. मोहित ऑफिस से बहुत थका हरा हुआ घर पहुंचा. निशा ने उन्हें चाय-पानी दी और रसोई के काम निपटाने लगी. मोहित भी अपनी मां के पास बैठकर अपनी दिनभर की थकान मिटाने लगा. मां-बेटा बात कर ही रहे थे, तभी बच्चे भी ट्यूशन से आ गये. मोहित थोड़ी देर बच्चों के साथ में टाइम बिता कर अपने रूम पर चला गया.
काम ज्यादा होने की वजह से वह ऑफिस वर्क भी घर पर लेकर आया था. काम का बहुत प्रेशर होने की वजह से उसका सर दर्द से फटा जा रहा था. काम पर बैठने से पहले उसने सोचा कि सर दर्द की गोली खा लेनी चाहिए.
ज्यों ही उसने गोली के लिए अपना दराज खोला, उसकी नजर डायरी पर गई. वो सोचने लगा कि यह डायरी यहां कैसे.... और उसे उठाकर देखने लगा.
डायरी खोलते ही उसे उसमें एक खत मिला जो निशा ने लिख कर छोड़ा था. बात करने का तो उसे समय ही नहीं मिल पाता इसलिए उसने सोचा कि अब लिखकर ही अपने मन की बात बोलनी चाहिए.
पत्र पढ़ते ही मोहित बहुत भावुक हो उठा उसे अपनी गलती का हल्का सा एहसास हुआ, कि मैं सच में निशा को समय नहीं दे पाता. उसकी भी कई इच्छाएं हैं, जो मैं पूरा करने में असमर्थ हो रहा हूं. अपने काम और पैसे कमाने की दौड़ में मैं अपने रिश्ते को पीछे छोड़ता जा रहा हूं. जब भी उसे कोई तकलीफ होती है, मैं कभी उसके पास नहीं होता. निशा को मुझसे बहुत सी अपेक्षाएं हैं, मैं उन पर खरा नहीं उतर पा रहा हूं.
बस एक पैसा कमाना ही मेरी जिम्मेदारी नहीं है. जिसको मैं अपनी जिम्मेदारी पर यहां लेकर आया हूं, उसका ध्यान रखना भी मेरी एक सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. जब भी वह मुझसे बात करना चाहती है या अपनी कोई परेशानी बताना चाहती है, तो मैं उसे अपनी परेशानी और अपने काम का हवाला देकर चुप करवा देता हूं. उसे अनदेखा कर अपने काम को ही ज्यादा महत्व देता हूं. कभी भी मैंने उसको समझने की कोशिश ही नहीं की. मैं उससे बात करने तक का समय भी उसे नहीं दे पाता. हम एक साथ रहते हुए भी एक दूसरे से कितने दूर होते जा रहे हैं.
तभी आज उसे यह खत लिखने पर मजबूर होना पड़ा. मैं उसका बहुत बड़ा दोषी हूं. वो बहुत ही भावुक हो उठा...
निशा की आवाज आती है डिनर तैयार है. सभी डिनर करने आ जाओ.. मोहित भी आता है. और निशा की ओर गौर से देखता है, पर निशा इस बात से अनजान है कि मोहित पत्र पढ़ चुका है.
निशा बोलती है.. "बैठो जल्दी खाना ठंडा हो जाएगा. रोटिया ठंडी हो रही है, खाना खाओ.."
मोहित डिनर करता है. साथ में मां-पिताजी, भाई और बच्चे भी डिनर कर लेते हैं. बाद में निशा अपना सारा काम निपटा कर खुद ठंडी रोटियां खाती हैं.
मोहित अपने रूम पर जाकर सोचने लगता है कि किस तरीके से वह निशा को समझाए की वह उसकी बहुत परवाह करता है. लेटर में जो कुछ भी है, वह सच बात है लेकिन मैं उसके लिए अकेला जिम्मेदार नहीं हूं. सारी परिस्थितियां और हालात ही ऐसे होते हैं, जो मेरे हाथ की बात नही है....
हां.. मैं अपनी फीलिंग शब्दों में बयां नहीं कर पाता लेकिन मैं उसकी बहुत परवाह करता हूं... सोचते सोचते मोहित बहुत कुछ सोचने लगता है.
तभी अचानक निशा रूम पर आती हैं और मोहित से पूछती है.. "क्या बात आज ऑफिस का कोई काम नहीं है...?? आज आप बड़ी शांति से बैठे हो, बहुत समय बाद आपको इतनी फुर्सत में देखा है.."
मोहित हल्का सा मुस्कुराता है. निशा को अपने पास बैठता है और उसे बताता है कि उसने वह पत्र पढ़ा जो तुमने उसके लिए छोड़ा था...
निशा उसकी ओर बहुत उम्मीद से देखती हैं..
तब मोहित बोलता है की..
""क्या हुआ आज तुमने ऐसा खत क्यों लिखा मैं तो हमेशा तुम्हारे साथ ही हूं, चाहे कोई कुछ भी करे मैं हरदम तुम्हरे साथ खड़ा हूँ... इतना सरदर्द जो मैं रोज करता हूँ ऑफिस में वो सब तुम्हरे लिए, इतनी मेहनत करता हूं, दिन रात मेहनत कर कमा रहा हूं. यह सब तुम्हारे लिए ही तो है... तुम्हारी परवाह ना होती तो मैं इतनी मेहनत ही क्यों करता....मैं तुम्हे समझता हूँ पर मुझे बताना नहीं आता..""
निशा चुप होकर सुनती है और सोचती है कि मेरा पॉइंट ही कुछ ओर है.. पर वो कुछ नहीं बोलती, चुपचाप सुनती है...

फिर मोहित बोलता है.. ""काम तो ससुराल में बहू को करना ही होता है. मैं बाहर से कमाकर लाता हूं तो तुम घर संभालती हो. यह तो सारी औरतें करती हैं. कुछ वर्किंग भी होती है लेकिन कुछ गृहणी होती है. गृहणियों को घर पर ये सारे काम तो करने ही होंगे ना.... ये सब कुछ मेरी मां ने भी किया है और बाकी औरतें भी यही सब कर रही है. पूरा समाज यह सब कर रहा है.."

""हाँ अगर तुम्हें कभी कोई तकलीफ होती है तो तुम निःसंकोच मुझे बोल सकती हो.. मैं आज के बाद तुम्हे कभी अनसुना नहीं करूंगा. हमेशा साथ दूंगा. मैं तो अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहता हूं, लेकिन मेरी मां तो हमेशा घर पर ही रहती है. तुम मेरी मां को अपनी परेशानीयां बता सकती हो. वो तुम्हे जरूर समझेगी आखिर वो भी तो एक औरत ही है ना...

ऐसा हो तो बात ही कुछ ओर हो अफ़सोस!! निशा कुछ नहीं कहना चाहती थी....

निशा ने जो भी कुछ उस पत्र के द्वारा उसे समझाना चाहा था वह एक पल के लिए उसे बहुत अच्छे से समझ गया था. पर जैसे ही उसने अपने परिवार और समाज के विषय में सोचा तो उसे लगा कि यह तो हर घर में होता है. औरतों को यही सब करना होता है. इसमें कोई बड़ी बात नहीं है. कोई नई बात नहीं है. उसकी अपनी सोच समाज की बनाई हुई सोच के ढांचे में परिवर्तित हो गई.
वह फिर से वही मोहित बन गया. उसने अपने अंदर की भावना को दबा कर उस भावुक मोहित को समझा दिया, कि हमारा समाज ऐसा ही है.
हमें बस ऐसे ही आंखों में पट्टी बांधे हुए चलते रहना है.
निशा के पास अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अब कोई शब्द नहीं थे. वह चुप होकर सब समझने का नाटक करने लगी. और उसकी हां में हांमी भरने लगी.
उसे बस इस बात की संतुष्टि हुई की आगे से ये मेरी भी बात सुनेंगे...
वो इस बार देखना चाहती थी की मोहित अपने कहे हुए शब्दों पे कितना अमल करता है. इसी बात ने उसे थोड़ा और सबर करने के लिए प्रेरित किया. उसे पूरी उम्मीद है की अब मोहित उसे निराश नहीं करेंगे...!!

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Saadi ka matlab..???(part-1)
मेरे प्रिय,
मैं आपसे आज कुछ कहना चाहती हूं, जो मैंने आज तक कभी नहीं कहा. आप मुझे एक बात बताइए आपकी नजरिए से शादी का मतलब क्या है..????
सबकी सोच अलग होती है,सब का नजरिया अलग होता है ना जाने लोग शादी के बाद क्या उम्मीद कर के दूसरे को अपनी जिम्मेदारी पर ले आते हैं. आप शादी के विषय में अपने विचार जरूर बताइएगा....
परंतु यहां जो हमारी शादी का मतलब निकल कर आ रहा है प्रैक्टिकली देखा जाए तो वह यह है कि शादी का मतलब बस पत्नी को पति की सारे काम करने होते हैं और परिवार के सभी लोगों की जरूरतों का ध्यान रखना होता है. पति को कोई कार्य या किसी बात का तनाव ना देना, पति से किसी सहायता या प्यार व केयर की उम्मीद ना करना. पति को अपनी तरफ से हर तरीके का शारीरिक व मानसिक सहयोग देना...
घर के हर एक सदस्य को उसके कामों में सहयोग देना, सहयोग ही नहीं पूरा का पूरा कार्य ही अपने सर ले लेना.. किसी को कुछ ना करने देना.
खुद के कामों के लिए किसी से कोई उम्मीद या सहयोग की भावना ना रखना. मन दुखी है तो किसी से ना कहना, ना मायका ना ससुराल खुद ही सह लेना... और बाहर खुश होने का दिखावा करना.
ससुराल में कोई परेशानी है तो मायके वाले कुछ नहीं कर सकते क्योंकि अब शादी हो चुकी है, यह ससुराल है यहां यही सब होता है. चुप रहकर सहना होता है. क्योंकि यहां कोई बहू को इंसान समझने को तैयार नहीं होता. वह मशीन है, ना थकती है ना बुरा भला समझती है...
यह बात में पूछना चाहती हूं आपसे क्या आपको भी ऐसा लगता है??
क्या मैं इंसान नहीं हूं..
क्या मेरे पास दिल नहीं है, कि किसी की बात कभी मुझे भी फील हो सकती है..???
क्या आप भी कभी ऐसा नहीं सोचते कि मेरी भी किसी से सहयोग और प्यार की कोई उम्मीद होती होगी..???
घर का हर एक काम मैं करती हूं और जब मेरी तबीयत खराब होती है, जब मैं बीमार होती हो या कोई भी तकलीफ हो तब भी वह काम मुझे ही करना होता है.. लेकिन अगर मैंने घर में किसी बात को लेकर अपनी बात रख दी, किसी को एक भी सुझाव दे दिया चाहे वह बहुत जरूरी और काम का ही क्यों ना हो... परन्तु परिवार वाले उसे नकारते हुए चार बातें और सुनाने में भी कोई कमी नहीं छोड़ते कि अपने को बहुत होशियार मत समझो..!!
घर पर काम का सारा हक तो बहुओं का है पर कोई घर के विषय पर बोलने का हक नहीं है, जैसे कि वह घर की नौकरानी है. सब यही चाहते हैं कि वह बिना कुछ बोले बिना कोई तकलीफ बताए घर के कामों में मणि रहे, उसकी यही जिंदगी है.
उसका यही कर्तव्य भी बनता है तभी वह संस्कारी बहू कहलाएगी अगर उसने कभी अपना मत रखा, अपनी परेशानी बता दी या अपने मन की बात बोलनी चाही तो वही बहू बदतमीज बहू बन जाती है. मुझे तो शादी का असली मतलब अब समझ आया है शादी का मतलब आपकी एक इंसानी जिंदगी खत्म और मशीनीकृत जिंदगी शुरू....
इतना लिखते हुए निशा ने पेन और कॉपी पटकी और अपनी पति की ड्रॉर में डाल दी. शाम को पति के आने के बाद सोचा कि पति आए तो उसे जरूर पड़ेंगे और मन ही मन सोचने लगी काश वो इस बार मुझे थोड़ा समझने की कोशिस कर ले... शायद इस बार वो मुझे निराश नहीं करेंगे!!

तब तक हम भी इंतज़ार करते हैं की आगे क्या होगा?? क्या निशा का पती उसे समझेगा...??
यही सब जानने के लिए मेरा next ब्लॉग जरूर पढ़िए तब तक के लिए अलविदा.....

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मेरी  आदतों  में  काफ़ी   हद  तक तू  भी शामिल है
रात की सिलवटों में तेरी चाहतों के निशा शामिल है

मेरी आदतों में काफ़ी हद तक तू भी शामिल है
रात की सिलवटों में तेरी चाहतों के निशा शामिल है

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