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Best मुँह Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"नफ़रतों के शहर में,चालाकियों के डेरे हैं.... यहां वो लोग रहते हैं जो तेरे मुँह पर तेरे है,मेरे मुँह पर मेरे हैं....!! $Rana..✍"

नफ़रतों के शहर में,चालाकियों के डेरे हैं.... 
यहां वो लोग रहते हैं जो तेरे मुँह पर तेरे है,मेरे मुँह पर मेरे हैं....!!

$Rana..✍

#चालकी #नफरत#हमरे#प्रिये
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"मेरे तकलीफों के दिनों में वो ठहाके मार-मार कर हँस रहे थे। आज मेरी सफलता पर वही लोग मुँह लटकाए बैठे थे।। -Mintu kumar"

मेरे तकलीफों के दिनों में वो ठहाके मार-मार कर हँस रहे थे।
आज मेरी सफलता पर वही लोग मुँह लटकाए बैठे थे।।

-Mintu kumar

#मुँह लटकाए बैठे थे

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"#DearZindagi 👉नफ़रतों के शहर में, 🤔चालाकियों के डेरे हैं! यहां वो लोग रहते हैं, 👉जो तेरे मुँह पर तेरे और मेरे मुँह पर मेरे हैं।,,,,😔"

#DearZindagi 👉नफ़रतों के शहर में, 
            🤔चालाकियों के डेरे हैं!
 यहां वो लोग रहते हैं, 
👉जो तेरे मुँह पर तेरे 
और मेरे मुँह पर मेरे हैं।,,,,😔

नफ़रतों के शहर में, चालाकियों के डेरे हैं! यहां वो लोग रहते हैं, जो तेरे मुँह पर तेरे और मेरे मुँह पर मेरे हैं।,,,,

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"तू हँसते-हँसते रोया क्यों, अपना आपा खोया क्यों। हम तो तुम्हारे अपने हैं, मुँह आँसुओं से भिगोया क्यों।। Mintu kumar"

तू हँसते-हँसते रोया क्यों,
अपना आपा खोया क्यों।
हम तो तुम्हारे अपने हैं,
मुँह आँसुओं से भिगोया क्यों।।
Mintu kumar

#मुँह आँसुओं से भिगोया क्यों#onlinestory
#NightPath

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"डर लगता है हमें कुछ बताते हुवे कुछ छिपाते हुवे कुछ फासले कुछ मजबूरी को दर्शाते हुवे डर लगता है हमें कुछ बताते हुवे कुछ छिपाते हुवे वो उनका बडे करीब से गुजरना, देखकर हमे मुँह घुमाते हुवे सारे शिकवे गिले हम दिल में अपने ही छिपाते हुवे डर लगता है हमें कुछ बताते हुवे कुछ छिपाते हुवे तेरी नजरों का टकराना और फिर मेरे पलके भीग जाते हुवे कपकपाते होठों से मोहब्बत का जाम छलकाते हुवे डर लगता है हमें कुछ बताते हुवे कुछ छिपाते हुवे वो अपने हो दुपट्टे से अपना मुँह छिपाते हुवे रोड पर चलते आधा रोते आधा मुसकुराते हुवे डर लगता है हमें कुछ बताते हुवे कुछ छिपाते हुवे उन जज्बातो को कागज पर सजाते हुवे तुझपर अपना अधिकार जताते हुवे डर लगता है हमें कुछ बताते हुवे कुछ छिपाते हुवे"

डर लगता है हमें कुछ बताते हुवे कुछ छिपाते हुवे
कुछ फासले कुछ मजबूरी को दर्शाते हुवे 
डर लगता है हमें कुछ बताते हुवे कुछ छिपाते हुवे 

वो उनका बडे करीब से गुजरना, देखकर हमे मुँह घुमाते हुवे
सारे शिकवे  गिले हम दिल में अपने ही छिपाते हुवे
डर लगता है हमें कुछ बताते हुवे कुछ छिपाते हुवे 

तेरी नजरों का टकराना और फिर मेरे पलके भीग जाते हुवे
कपकपाते होठों से मोहब्बत का जाम छलकाते हुवे 
डर लगता है हमें कुछ बताते हुवे कुछ छिपाते हुवे 

वो अपने हो दुपट्टे से अपना मुँह छिपाते हुवे 
रोड पर चलते आधा रोते आधा मुसकुराते हुवे
डर लगता है हमें कुछ बताते हुवे कुछ छिपाते हुवे 

उन जज्बातो को कागज पर सजाते हुवे 
तुझपर अपना अधिकार जताते हुवे
डर लगता है हमें कुछ बताते हुवे कुछ छिपाते हुवे

 

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