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सभा डूबे सागर में 
वाणी खोजे किनारा 
सही स्थान पर वार हो 
तो पूर्ण जगत तुम्हारा

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❣️❣️❣️.
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apni hr ibadt mai tuje manga hai
khud se zayada tuje chaha hai
bhul chuki thi khud ko teri Mohabbat kai nashe mai
pr utrte nashe kai sath
 tuje khud se dur hota paya hai 
.................

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कभी कागज़, कभी कश्ती, 
कभी दर्या हुए हो तुम,
न आशिक हो, न दीवाने,
न जाने क्या हुए हो तुम ।

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मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

मैं सच बोलूंगा और मैं ही सच की पुकार हूँ,
कुछ जयचंदी जुबानों की मैं ही तो दुत्कार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

तुमने लूटा, तुमने नोचा, मैं खामोश रहा देखता,
तुम हो गिनती के और बहुमत को स्वीकार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।

तेरे पुरखे मेरे पुरखे सब इस माटी के बेटे थे।
फिर क्यूँ मैं तिलक और ताज़िये का तलवार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।

तेरी कहानी सालों की मैं सदियों का द्योतक हूँ,
मैं तो सिंधु से लेकर हिन्दू तक कि ललकार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।

तुम क्या, किसके वंसज, कैसा है रिश्ता अपना,
मेरी संताने सजग खड़ी और मैं उनका हुंकार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।

गर है मज़हब अज़ीज़ तुम्हे, तुम मेरे हो पूत नहीं,
हर मज़हब हर धर्म मेरा और मैं ही उनका सार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।

मेरा बीज पड़ा तुममे, गज़नी गौरी कब बोलो तेरे थे,
मैं भगत हूँ, मैं महात्मा, मैं ही अशफ़ाक़ का प्यार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

लड़कपन छोड़ जरा अपनी अकल पर जोर करो,
मैं ही ताज, केदार नाथ, और मैं ही कुतुब मीनार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

मेरे टुकड़े का नारा जो बोलो मेरे ही बेटे बुलंद करें,
तुझसे और खुद से, मैं दोनों से हुआ बड़ा लाचार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

जिसने तुमको जना यहां, उसको गाली क्या जायज़ है,
फिर भी तुमको है माफ किया एक ऐसा मैं परिवार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

मेरे टुकड़े जो कर दोगे, कहो जमीं कहाँ तुम पाओगे,
स्वर्ग हूँ मैं, जन्नत मैं ही, और मैं ही तो तेरा संसार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

©रजनीश "स्वछंद"

मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

मैं सच बोलूंगा और मैं ही सच की पुकार हूँ,
कुछ जयचंदी जुबानों की मैं ही तो दुत्कार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

तुमने लूटा, तुमने नोचा, मैं खामोश रहा देखता,
तुम हो गिनती के और बहुमत को स्वीकार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।

तेरे पुरखे मेरे पुरखे सब इस माटी के बेटे थे।
फिर क्यूँ मैं तिलक और ताज़िये का तलवार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।

तेरी कहानी सालों की मैं सदियों का द्योतक हूँ,
मैं तो सिंधु से लेकर हिन्दू तक कि ललकार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।

तुम क्या, किसके वंसज, कैसा है रिश्ता अपना,
मेरी संताने सजग खड़ी और मैं उनका हुंकार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।

गर है मज़हब अज़ीज़ तुम्हे, तुम मेरे हो पूत नहीं,
हर मज़हब हर धर्म मेरा और मैं ही उनका सार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।

मेरा बीज पड़ा तुममे, गज़नी गौरी कब बोलो तेरे थे,
मैं भगत हूँ, मैं महात्मा, मैं ही अशफ़ाक़ का प्यार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

लड़कपन छोड़ जरा अपनी अकल पर जोर करो,
मैं ही ताज, केदार नाथ, और मैं ही कुतुब मीनार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

मेरे टुकड़े का नारा जो बोलो मेरे ही बेटे बुलंद करें,
तुझसे और खुद से, मैं दोनों से हुआ बड़ा लाचार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

जिसने तुमको जना यहां, उसको गाली क्या जायज़ है,
फिर भी तुमको है माफ किया एक ऐसा मैं परिवार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

मेरे टुकड़े जो कर दोगे, कहो जमीं कहाँ तुम पाओगे,
स्वर्ग हूँ मैं, जन्नत मैं ही, और मैं ही तो तेरा संसार हूँ।
मैं ही हिंदुस्तान हूँ।।

©रजनीश "स्वछंद"
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