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Best हरी Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"ऐसी लागि लगन मीरा हो गयी मगन वो तो हरी, हरी नाम जप ने लगी !!"

ऐसी लागि लगन  मीरा हो गयी मगन 
वो तो हरी, हरी 
नाम जप ने लगी !!

 

57 Love

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"ओऊ मेरी प्यारी मिठ्ठी, मिट्ठू की मिठ्ठी। भोली मिठ्ठी,गुड़िया मिठ्ठी। थोड़ी मिर्ची खालों, हरी हरी मिर्ची खालों। थोड़ी मिट्ठू को खिला दो,थोड़ी चाबी घूमा दो(मिट्ठू की)।"

ओऊ  मेरी प्यारी मिठ्ठी, मिट्ठू की मिठ्ठी।
भोली मिठ्ठी,गुड़िया मिठ्ठी।
थोड़ी मिर्ची खालों, हरी हरी मिर्ची खालों।
थोड़ी मिट्ठू को खिला दो,थोड़ी चाबी घूमा दो(मिट्ठू की)।

इत्तु सा पैग़ाम मिठ्ठी के नाम।
#Nojoto #Diduuu
ओऊ मेरी प्यारी मिठ्ठी, मिट्ठू की मिठ्ठी।
भोली मिठ्ठी,गुड़िया मिठ्ठी।

थोड़ी मिर्ची खालों, हरी हरी मिर्ची खालों।
थोड़ी मिट्ठू को खिला दो,थोड़ी चाबी घूमा दो(मिट्ठू की)।
Swetapadma Mishra

42 Love

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"सूर्य एक सत्य है  जिसे झुठलाया नहीं जा सकता  मगर ओस भी तो एक सच्चाई है  यह बात अलग है कि ओस क्षणिक है  क्यों न मैं क्षण क्षण को जिऊं?  कण-कण में बिखरे सौन्दर्य को पिऊं सूर्य तो फिर भी उगेगा,  धूप तो फिर भी खिलेगी,  लेकिन मेरी बगीची की  हरी-हरी दूब पर,  ओस की बूंद  हर मौसम में नहीं मिलेगी। #NojotoQuote"

सूर्य एक सत्य है 
जिसे झुठलाया नहीं जा सकता 
मगर ओस भी तो एक सच्चाई है 
यह बात अलग है कि ओस क्षणिक है 
क्यों न मैं क्षण क्षण को जिऊं? 
कण-कण में बिखरे सौन्दर्य को पिऊं

सूर्य तो फिर भी उगेगा, 
धूप तो फिर भी खिलेगी, 
लेकिन मेरी बगीची की 
हरी-हरी दूब पर, 
ओस की बूंद 
हर मौसम में नहीं मिलेगी।

 #NojotoQuote

ये कविता पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी द्वारा लिखी गयी है

ओस की बून्द = DewDrop
My new pen name inspired by this poem

कुछ समय के लिए ही सही पर ओस की बून्द भी एक हकीकत है

#नोजोटो #Nojoto #atalbiharibajpaye

32 Love

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"ऐ बारिश के बूंदें कुछ मेरा भी सुन ले तपती जमी से तप रहा मेरा तन बैचेन है प्यासे हरी हरी मैदान के घांसे आ आके मेरे सुखे कंठों में शीतल जल दे जा ऐ बारिश के बूंदें कुछ मेरा भी सुन ले त्रस्त उठी है कल कुआं वीरान है पोखर मूर्छित हो चुकी है बैसाखी फसल छम छमा जा आके दरार पड़ी खेतों में ऐ बारिश के बूंदें कुछ मेरा भी सुन ले।"

ऐ बारिश के बूंदें कुछ मेरा भी सुन ले
तपती जमी से तप रहा मेरा तन
बैचेन है प्यासे हरी हरी मैदान के घांसे
आ आके मेरे सुखे कंठों में शीतल जल दे जा
ऐ बारिश के बूंदें कुछ मेरा भी सुन ले
त्रस्त उठी है कल कुआं वीरान है पोखर
मूर्छित हो चुकी है बैसाखी फसल
छम छमा जा आके दरार पड़ी खेतों में
ऐ बारिश के बूंदें कुछ मेरा भी सुन ले।

 

27 Love

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"" सावन मे तुझे प्रेयसी कुछ याद दिलाने आया हूँ " Read in Caption.."

" सावन मे तुझे प्रेयसी कुछ याद दिलाने आया हूँ "
Read in Caption..

तेरी बाहों में आज फिर से सिमटने आया हूँ,
जो याद नही तुझे,मगर मुझे याद है वो सब कुछ,
तुम बारिश की बूंदों से भीगती थी मेरे संग,
उसी बूंदों से भीगोने आया हूँ।
जो याद नही है तुझे सावन में प्रेयसी
वो याद दिलाने आया हूँ।

आँगन में तेरे बारिश के तेज धार में

21 Love