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Best बाली Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"इत्तु-सी हँसी इत्तु सी हँसी, बचपन की मस्ती, जवानी की आशिकी, बुढ़ापे की लाठी, जून की गर्मी, दिसंबर की सर्दी, समुंदर की गहरायी, बेस्टी की शादी, चेहरे की सादगी, शायर की शायरी, चाय की चुस्की, कोयल की वाणी, क्लास में फस्ट आने की खुशी,दोस्तों की यारी, मंदिर की सीढी, शिव पार्वती की जोड़ी, ईद की ईदी, दिवाली की रोशनी, सावन की बदरी, फूलों की क्यारी स्कूल की डायरी, कॉलेज की क्रश, कानों की बाली, होठों की लाली, बहुत खास होती हैं..."

इत्तु-सी हँसी   इत्तु सी हँसी, बचपन की मस्ती,
जवानी की आशिकी, बुढ़ापे की लाठी,
जून की गर्मी, दिसंबर की सर्दी,
समुंदर की गहरायी, बेस्टी की शादी,
चेहरे की सादगी, शायर की शायरी,
चाय की चुस्की, कोयल की वाणी,
 क्लास में फस्ट आने की खुशी,दोस्तों की यारी,
 मंदिर की सीढी, शिव पार्वती की जोड़ी,
ईद की ईदी, दिवाली की रोशनी,
सावन की बदरी, फूलों की क्यारी
स्कूल की डायरी, कॉलेज की क्रश,
कानों की बाली, होठों की लाली,
बहुत खास होती हैं...

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108 Love

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"मैं गेंहूँ की बाली हूँ।। मैं गेंहूँ की बाली हूँ, हर खेतिहर की हरियाली हूँ। तेरी भूख मिटाने को, रोटी भरी मैं थाली हूँ। आज हरी हूँ, पर याद है मुझको, मुझको बोने से पहले, वो किसान क्यूँ रोया था। हल से हुआ श्रृंगार धरती का, पर पानी नहीं था खेतों में, कैसे उसने मुझको बोया था। गर्मी में हल पे हाथ रखे, दो बैलों के संग, धरती की मांग सजाया था। पतली उभरती क्यारियों में, डाल पसीना अपना, उसने मुझे उपजाया था। किसने उसकी बात सुनी, अर्धनग्न वो रहा मगर, कब हिम्मत उसने हारी थी। लगन लिए, निःस्वार्थ भाव, झुलसाती गर्म हवाओं में, लथपथ रोएं की क्यारी थी। साल दर साल रहे बीतते, सत्ता की सीढ़ी बन, इसने सबको सत्तासीन किया। नाम रहा नारों में इनका, इश्तेहार और कागज़ पर, सबने इनको दीनहीन किया। मेरे पालन पोषण को भी, खाद उर्वरक, कहाँ कब इसे मिले। सब्सिडी का नाम बड़ा था, इसने भी सुना, बस कागज़ पर इसे मिले। मैं बड़ी हुई, गदरायी थी, हुई कटाई, मंडी पहुंची बन्द बोरे में। दाम गिरा था, मोल नही था, बांध रहा, पसीना वो पाजामे के डोरे में। आंख का आंसू, माथे का पसीना, अद्भुत संगम, किससे कहता, क्या क्या कहता। उसकी मेहनत, बेमोल पड़ी, हर कोई, उसपे बन एक गिद्ध झपटता। लिया कर्ज़ था साहूकार से, मूल तो छोड़ो, फसल ब्याज भी दे न पायी। कर्जमाफी का शोर बड़ा था, पर सरकार, असल आज भी दे न पायी। हारा, सबसे हार गया वो, क्या करता, सब होकर भी नँगा पड़ा था। राहें बदलीं, किसी ओर चला, पेड़ में गमछा, गमछे में किसान टंगा पड़ा था। मैं एक गेंहूँ की बाली, क्या करती, मैंने पालनहार खोया था। तुम कहते इंसां ख़ुद को, तुम ही बोलो, क्या तेरा दिल ना रोया था। ©रजनीश "स्वछंद""

मैं गेंहूँ की बाली हूँ।।

मैं गेंहूँ की बाली हूँ,
हर खेतिहर की हरियाली हूँ।
तेरी भूख मिटाने को,
रोटी भरी मैं थाली हूँ।

आज हरी हूँ, पर याद है मुझको,
मुझको बोने से पहले,
वो किसान क्यूँ रोया था।
हल से हुआ श्रृंगार धरती का,
पर पानी नहीं था खेतों में,
कैसे उसने मुझको बोया था।

गर्मी में हल पे हाथ रखे,
दो बैलों के संग,
धरती की मांग सजाया था।
पतली उभरती क्यारियों में,
डाल पसीना अपना,
उसने मुझे उपजाया था।

किसने उसकी बात सुनी,
अर्धनग्न वो रहा मगर,
कब हिम्मत उसने हारी थी।
लगन लिए, निःस्वार्थ भाव,
झुलसाती गर्म हवाओं में,
लथपथ रोएं की क्यारी थी।

साल दर साल रहे बीतते,
सत्ता की सीढ़ी बन,
इसने सबको सत्तासीन किया।
नाम रहा नारों में इनका,
इश्तेहार और कागज़ पर,
सबने इनको दीनहीन किया।

मेरे पालन पोषण को भी,
खाद उर्वरक,
कहाँ कब इसे मिले।
सब्सिडी का नाम बड़ा था,
इसने भी सुना,
बस कागज़ पर इसे मिले।

मैं बड़ी हुई, गदरायी थी,
हुई कटाई,
मंडी पहुंची बन्द बोरे में।
दाम गिरा था, मोल नही था,
बांध रहा,
पसीना वो पाजामे के डोरे में।

आंख का आंसू, माथे का पसीना,
अद्भुत संगम,
किससे कहता, क्या क्या कहता।
उसकी मेहनत, बेमोल पड़ी,
हर कोई,
उसपे बन एक गिद्ध झपटता।

लिया कर्ज़ था साहूकार से,
मूल तो छोड़ो,
फसल ब्याज भी दे न पायी।
कर्जमाफी का शोर बड़ा था,
पर सरकार,
असल आज भी दे न पायी।

हारा, सबसे हार गया वो,
क्या करता,
सब होकर भी नँगा पड़ा था।
राहें बदलीं, किसी ओर चला,
पेड़ में गमछा,
गमछे में किसान टंगा पड़ा था।

मैं एक गेंहूँ की बाली,
क्या करती,
मैंने पालनहार खोया था।
तुम कहते इंसां ख़ुद को,
तुम ही बोलो,
क्या तेरा दिल ना रोया था।

©रजनीश "स्वछंद"

मैं गेंहूँ की बाली हूँ।।

मैं गेंहूँ की बाली हूँ,
हर खेतिहर की हरियाली हूँ।
तेरी भूख मिटाने को,
रोटी भरी मैं थाली हूँ।

आज हरी हूँ, पर याद है मुझको,

31 Love

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"🤦एक नीली आँखों बाली लड़की🤦 एक नीली आँखों बाली लड़की मेरे दिल को बहुत भाती है कितना भी मैं जताऊं उसको फिर भी बो मेरे जज्बात ना समझ पाती है मेरा दिल ये भी जनता है कि बो इसकी ना हो पाएगी फिर भी ना जाने क्यों बो मेरा दिल को इतना भाती है मनोहर मेला लग जाता है जब बो मेरी गली से होकर गुजरती है आँखे बन्द कर जब भी मैं बैठू तब वही नजर आती है एक नीली आँखो बाली लड़की मेरे दिल को बहुत भाती है..… #NojotoQuote"

🤦एक नीली आँखों बाली लड़की🤦
एक नीली आँखों बाली लड़की मेरे दिल को बहुत भाती है कितना भी मैं जताऊं उसको फिर भी बो मेरे जज्बात ना समझ पाती है मेरा दिल ये भी जनता है कि बो इसकी ना हो पाएगी फिर भी ना जाने क्यों बो मेरा दिल को इतना भाती है मनोहर मेला लग जाता है जब बो मेरी गली से होकर गुजरती है आँखे बन्द कर जब भी मैं बैठू तब वही नजर आती है एक नीली आँखो बाली लड़की मेरे दिल को बहुत भाती है..… #NojotoQuote

🤦एक नीली आँखों बाली लड़की🤦
एक नीली आँखों बाली लड़की मेरे दिल को बहुत भाती है कितना भी मैं जताऊं उसको फिर भी बो मेरे जज्बात ना समझ पाती है मेरा दिल ये भी जनता है कि बो इसकी ना हो पाएगी फिर भी ना जाने क्यों बो मेरा दिल को इतना भाती है मनोहर मेला लग जाता है जब बो मेरी गली से होकर गुजरती है आँखे बन्द कर जब भी मैं बैठू तब वही नजर आती है एक नीली आँखो बाली लड़की मेरे दिल को बहुत भाती है शिवम दुबे
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9 Love

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"#OpenPoetry मुझे मुझसे बेहतर जानने बाली दुनिया में दो है मेरी चाहने बाली एक माँ जिसके लिए बच्चा ही रहूंगा उम्र भर एक है मुझको मेरी उम्र बताने बाली।। - विनीत सिंह "विनी""

#OpenPoetry मुझे मुझसे बेहतर जानने बाली
दुनिया में दो है मेरी चाहने बाली
एक माँ जिसके लिए बच्चा ही रहूंगा उम्र भर
एक है मुझको मेरी उम्र बताने बाली।।

- विनीत सिंह "विनी"

#माँ
#maa
#Love
#Shayari

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"हे ईस्वर , ज़िन्दगी अगर कठिन दी है, तो मौत को सरल कर देना । प्यासे के सामने पी लूँ जो पानी , तो उस पानी को गरल कर देना । बढ़ा जटिल न बनाना मुझे कभी , एक मुस्कान से ही हल कर देना । माटी का बनाया है घर मैंने जो , उसे मेरा ख़्वाब महल कर देना । तपती धूप में मुसाफ़िर के लिए सहरा की रेत को जल कर देना । जो भी मिले उसका दूना दूँ मैं औरो को , मुझमें ऐसा बाली सा बल कर देना । रजकण जो मिले माँ के पैरों के "राणा" पूजूँ उसे मैं यु ब्रह्मकमल कर देना ।"

हे ईस्वर ,

ज़िन्दगी अगर कठिन दी है,
तो मौत को सरल कर देना ।

प्यासे के सामने पी लूँ जो पानी ,
तो उस पानी को गरल कर देना ।

बढ़ा जटिल न बनाना मुझे कभी ,
एक मुस्कान से ही हल कर देना ।

माटी का बनाया है घर मैंने जो ,
उसे मेरा ख़्वाब महल कर देना ।

तपती धूप में  मुसाफ़िर के लिए
सहरा की रेत को जल कर देना ।

जो भी मिले उसका दूना दूँ मैं औरो को ,
मुझमें ऐसा बाली सा बल कर देना ।

रजकण जो मिले माँ के पैरों के "राणा"
पूजूँ उसे मैं यु ब्रह्मकमल कर देना ।

अर्जी
हे
#ईस्वर ,

#ज़िन्दगी अगर #कठिन दी है,
तो #मौत को सरल कर देना ।

#प्यासे के सामने पी लूँ जो #पानी ,
तो उस पानी को #गरल कर देना ।

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