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Best कविता Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"Bhakti ka majhaar tum. Ishwar ka akaar tum. Tumhari bhakti hamaari shakti. Kun kun mai tu jun jun mai tu."

Bhakti ka majhaar tum.
Ishwar ka akaar tum.
Tumhari bhakti hamaari shakti.
Kun kun mai tu jun jun mai tu.

@Ajay choudhary @Svarup Charan @shiva Singh @Sachin Kumar Singh #nojoto #nojotohindi #nojotoenglish

13 Love

"रिश्ते "पल में टुटा पल में बना, हुआ अजब सा किस्सा हूँ खेल बन गया जो लोगो का, हाँ .... मैं वही अधूरा रिश्ता हूँ.... ©✍🏻Poonam Bagadia "Punit""

रिश्ते  "पल में टुटा पल में बना, हुआ अजब सा किस्सा हूँ
खेल बन गया जो लोगो का, हाँ .... मैं वही अधूरा रिश्ता हूँ....

©✍🏻Poonam Bagadia "Punit"

अधूरा रिश्ता....
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18 Love
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"नफ़रत न करना मेरे दोस्त -2 कोई कितना भी बुरा कर ले तुम्हारे साथ। नफ़रत के बदले प्यार से बात ख़तम करना पर नफ़रत न करना। नफ़रत के नियम है बड़े ही अजीब। निभा न सकोगे नफ़रत का रिश्ता क्योंकि इसके रिवाज है बड़े सटीक नफ़रत को न देना अपने दिल में जगह वो आपके दिल के मकान में कब्जा कर बैठे गी। फिर खाली कराते रहना वो खाली न करेगी। दादा गीरी से वो तुम्हारे दिल में ही रह जाएगी। पालना न नफ़रत को वो एक दिन बड़ी हो जाएगी। फिर तुम चाह कर भी कुछ न कर पाओगे। चुप चाप से घुटते जाओगे। हैरान और परेशान से हो जाओगे कुछ नहीं रहेगा हाथ में बस खाली हाथ रह जाओगे। नफ़रत का बीज बोया है जो तुम ने वो एक दिन बहुत बड़ा हो जाएगा। फिर तुम कुछ नहीं कर पाओगे। काटोगे भी नफ़रत के पेड़ को तो कहीं न कहीं नफ़रत के पेड़ की जड़ रह जाएगी। तुम नफ़रत के बंदी बन जाओगे। आजाद न जिन्दगी भर हो पाओगे। ऐसे ही नफ़रत में मर जाओगे। सब होगा लेकिन तुम और तुम्हारी नफ़रत धरी की धरी रह जाएगी। तुम तो मर जाओगे यह नफ़रत का महल बना जाओगे। कोई नहीं रहेगा उस महल में बस खाली ही डाला रह जाएगा। नफ़रत न करना मेरे दोस्त -2 कोई कितना भी बुरा कर ले तुम्हारे साथ।"

नफ़रत न करना मेरे दोस्त -2
कोई कितना भी बुरा कर ले तुम्हारे साथ। नफ़रत के बदले प्यार से बात ख़तम करना पर नफ़रत न करना।

नफ़रत के नियम है बड़े ही अजीब। निभा न सकोगे नफ़रत का रिश्ता क्योंकि इसके रिवाज है बड़े सटीक नफ़रत को न देना अपने दिल में जगह वो  आपके दिल के मकान में कब्जा कर बैठे गी। फिर खाली कराते रहना वो खाली न करेगी। दादा गीरी से वो तुम्हारे दिल में ही रह जाएगी। पालना न नफ़रत को वो एक दिन बड़ी हो जाएगी। फिर तुम चाह कर भी कुछ न कर पाओगे। चुप चाप से घुटते जाओगे। हैरान और परेशान से हो जाओगे कुछ नहीं रहेगा हाथ में बस खाली हाथ रह जाओगे। नफ़रत का बीज बोया है जो तुम ने वो एक दिन बहुत बड़ा हो जाएगा। फिर तुम कुछ नहीं कर पाओगे। काटोगे भी नफ़रत के पेड़ को तो कहीं न कहीं नफ़रत के पेड़ की जड़ रह जाएगी। तुम नफ़रत के बंदी बन जाओगे। आजाद न जिन्दगी भर हो पाओगे। ऐसे ही नफ़रत में मर जाओगे। सब होगा लेकिन तुम और तुम्हारी नफ़रत धरी की धरी रह जाएगी। तुम तो मर जाओगे यह नफ़रत का महल बना जाओगे। कोई  नहीं रहेगा उस महल में बस खाली ही डाला रह जाएगा। 

नफ़रत न करना मेरे दोस्त  -2
कोई कितना भी बुरा कर ले तुम्हारे साथ।

 

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"ज़िंदगी और जंग ए ज़िन्दगी खेल न तू मुझसे ऐसे -2 मैं कोई खिलौना नहीं। आखिरकार इंसान हूं कोई पत्थर नहीं। सता न इतना- सता न इतना कहीं मेरी सांस ही न निकल जाए। आजमा न इतना कि वे वस और लाचार हो जाऊ। इतनी न सजा दे ए ज़िन्दगी -2 कहीं मेरी अर्थी न सज जाए। बस कर अब न रुला। अब तो आंखो के आंशू भी सूख गए है। अब सूखी आंखो में दर्द न दिला।"

ज़िंदगी और जंग   ए ज़िन्दगी खेल न तू मुझसे ऐसे -2
 मैं कोई खिलौना नहीं। आखिरकार इंसान हूं कोई पत्थर  नहीं।

  सता न इतना- सता न इतना कहीं मेरी सांस ही न निकल जाए।
  आजमा न इतना कि वे वस और लाचार हो जाऊ। 

  इतनी न सजा दे ए ज़िन्दगी  -2
  कहीं मेरी अर्थी न सज जाए। बस कर अब न रुला। 
 अब तो आंखो के आंशू भी सूख गए है।
 अब सूखी आंखो में दर्द न  दिला।

 

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"अल्फ़ाज़ मेरे अंदर झांकने की कोशिश न करना - 2 बहुत गहरी खाई है मेरे अंदर। गिर जाओ तो फिर सिकायत न करना। गिर कर खाई में फिर निकलने कि कोशिश न करना। उसी खाई में समा जाओगे निकल न पाओगे कभी। फिर हम से कोई उमीद न रखना। गहरी है बहुत खाई निकलने का रास्ता नहीं है। भटकते रहोगे पर निकलने का रस्ता न मिलेगा। मेरे अंदर कभी झांकने की कोशिश न करना - 2 खुद केलिए खड़ी ये परेशानी न करना। गिर के खाई में निकलने की आशा न करना। मेरे अंदर कभी झांकने की कोशिश न करना -2"

अल्फ़ाज़ मेरे अंदर झांकने की कोशिश न करना - 2

बहुत गहरी खाई है मेरे अंदर।
गिर जाओ तो फिर सिकायत न करना।
गिर कर खाई में फिर निकलने कि कोशिश न करना।
उसी खाई में समा जाओगे निकल न पाओगे कभी।
 फिर हम से कोई उमीद न रखना। 
गहरी है बहुत खाई निकलने का रास्ता नहीं है। 
भटकते रहोगे पर निकलने का रस्ता न मिलेगा।

मेरे अंदर कभी झांकने की कोशिश न करना - 2

खुद केलिए खड़ी ये परेशानी न करना।
गिर के खाई में निकलने की आशा न करना।

मेरे अंदर कभी झांकने की कोशिश न करना  -2

 

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