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जो शब्द है उनको भुलना नही,
जो सच्चाइ है उसपे कभी झुलना नही,!
जिसकी जितनी अहमियत है उतना देना,
किसी के खातर अपने वजूद से डुलना नही!

#nojotohindi #hindipoetry #Love #Life #hurt #feelings

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जगह मिलने पर पास देंगे।।

हमने मलाई काटी है, तोहफा तुमको खास देंगे,
पीछे पीछे लगे रहो, जगह मिलने पर पास देंगे।

तुम मूर्खों की आदत ऐसी, सबने मूर्ख बनाया है,
पांच साल में एक बार तेरे सम्मुख भी घास देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

कब वादे भी पूरे होते हैं, इतिहास गवाही देता है,
फिर आकर दर पर तेरे नया नया कोई आस देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

तेरी ख़ातिर कौन लड़ेगा, तुम तो एक सिपाही हो,
हाथों में झंडा और बैनर मन मे नया विश्वास देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

तेरी मौत पे तांडव होता, रोटियां भी सेंकीं जाएंगी,
राजनीत की गर्मी तक कैसे ठंढी होने ये लाश देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

मैं मुआवजा रहा बांटता, तू अपनो को खोता जा,
नई नौकरी घर भी नया और बस रेल का पास देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

तेरे घर जो बैठ मैं खाता, राजनीत का तकाजा है,
मेरे दर आ देख जरा तू, गाली और उपहास देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

कोई दलित सवर्ण, कोई हिन्दू कोई मुस्लिम है,
लड़ते रहे तुम आपस मे, नेता तो अट्टहास देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

देता दिखाई सब है, ऐन वक़्त पर दिखता नहीं,
जो आज बिके हो, जीवन भर भूख प्यास देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

©रजनीश "स्वछंद"

जगह मिलने पर पास देंगे।।

हमने मलाई काटी है, तोहफा तुमको खास देंगे,
पीछे पीछे लगे रहो, जगह मिलने पर पास देंगे।

तुम मूर्खों की आदत ऐसी, सबने मूर्ख बनाया है,
पांच साल में एक बार तेरे सम्मुख भी घास देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

कब वादे भी पूरे होते हैं, इतिहास गवाही देता है,
फिर आकर दर पर तेरे नया नया कोई आस देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

तेरी ख़ातिर कौन लड़ेगा, तुम तो एक सिपाही हो,
हाथों में झंडा और बैनर मन मे नया विश्वास देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

तेरी मौत पे तांडव होता, रोटियां भी सेंकीं जाएंगी,
राजनीत की गर्मी तक कैसे ठंढी होने ये लाश देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

मैं मुआवजा रहा बांटता, तू अपनो को खोता जा,
नई नौकरी घर भी नया और बस रेल का पास देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

तेरे घर जो बैठ मैं खाता, राजनीत का तकाजा है,
मेरे दर आ देख जरा तू, गाली और उपहास देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

कोई दलित सवर्ण, कोई हिन्दू कोई मुस्लिम है,
लड़ते रहे तुम आपस मे, नेता तो अट्टहास देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

देता दिखाई सब है, ऐन वक़्त पर दिखता नहीं,
जो आज बिके हो, जीवन भर भूख प्यास देंगे।
जगह मिलने पर पास देंगे।।

©रजनीश "स्वछंद"
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कैसा पथिक मैं।।

जागे जागे ही मैं देखो ऊंघ चला,
जीवित रहा पर आंखें मूंद चला।

जलस्रोत नही बस फैला पानी हूं,
रस्ता अपना कहां कब ढूंढ चला।

कैसी कहानी है क्या ये कहानी,
सच कहते ही गला ये रुंध चला।

राह दिखाने निकला था घर से,
हर लौ ज्योति की मैं फूंक चला।

मैं सच के साथ खड़ा कब था,
फैलाये बस झूठ की धुंध चला।

किसको समझाऊं क्या कह दूं,
जो लिए विचार मैं कुंद चला।

कब सोचा कुछ भी हटकर मैंने,
बढ़ा उधर जहां ये झुंड चला।

क्या हुई थी चिंता मानवजन की,
बस धड़ पे लिए नरमुंड चला।

क्या सार्थक, सब रहा निरर्थक,
बासी जीवन का लिए फफूंद चला।

बस चाहा, पर क्या कर पाया मैं,
पी अपने ही लहु का घूंट चला।

तुम बारिश हो, जाना बरस तुम,
मैं तो बस हो पानी का बून्द चला।

©रजनीश "स्वछंद"

कैसा पथिक मैं।।

जागे जागे ही मैं देखो ऊंघ चला,
जीवित रहा पर आंखें मूंद चला।

जलस्रोत नही बस फैला पानी हूं,
रस्ता अपना कहां कब ढूंढ चला।

कैसी कहानी है क्या ये कहानी,
सच कहते ही गला ये रुंध चला।

राह दिखाने निकला था घर से,
हर लौ ज्योति की मैं फूंक चला।

मैं सच के साथ खड़ा कब था,
फैलाये बस झूठ की धुंध चला।

किसको समझाऊं क्या कह दूं,
जो लिए विचार मैं कुंद चला।

कब सोचा कुछ भी हटकर मैंने,
बढ़ा उधर जहां ये झुंड चला।

क्या हुई थी चिंता मानवजन की,
बस धड़ पे लिए नरमुंड चला।

क्या सार्थक, सब रहा निरर्थक,
बासी जीवन का लिए फफूंद चला।

बस चाहा, पर क्या कर पाया मैं,
पी अपने ही लहु का घूंट चला।

तुम बारिश हो, जाना बरस तुम,
मैं तो बस हो पानी का बून्द चला।

©रजनीश "स्वछंद"
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