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Best अनजान Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"मैं तेरे पूरी जिंदगी की अभिलाषा नहीं रखता मुझे बस अपने आँसुओं का वो हिस्सा देदे जो अक्सर बह जाता है तेरी आँखों से और लौट जाता है तेरी किसी ख्वाहिश के टूटने पर। मैं अनजान बन के रह लूँगा तेरी यादों को अपनी आँखों मैं बसाकर। और तू जी लेना मुझे भूला कर। पारुल शर्मा"

मैं तेरे पूरी जिंदगी की अभिलाषा नहीं रखता
मुझे बस अपने आँसुओं का वो हिस्सा देदे
जो अक्सर बह जाता है तेरी आँखों से 
और लौट जाता है
 तेरी किसी ख्वाहिश के टूटने पर।
मैं अनजान बन के रह लूँगा
 तेरी यादों को अपनी आँखों मैं बसाकर।
और तू जी लेना मुझे भूला कर।
          पारुल शर्मा

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"अनजान ज़िन्दगी में अनजान साथी हो तुम अनजान रास्ते में अनजान मुसाफिर हो तुम अनजान तो सब हे यहा लेकिन अनजान सफर में अनजान हमसफ़र हो तुम"

अनजान ज़िन्दगी में अनजान साथी हो तुम 
अनजान रास्ते में अनजान मुसाफिर हो तुम
अनजान तो सब हे यहा लेकिन 
अनजान सफर में अनजान हमसफ़र हो तुम

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@shreshtha @Sambhav jain(महफूज़_जनाब) @Suyashi Vinit @Sanjay Sanju Panwar

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"#OpenPoetry कुछ पल जो मिले सुकून के कर लूँ बंद मुट्ठी में इन्हें संभाल लूँ ख़ुद को थोड़ा सँवार लूँ इन लम्हों को जी लूँ जी भर मैं पी लूँ इत्मीनान से कभी ....... सुबह की पहली गर्म चाय बैठूँ कुछ पल जब कोइ मिलने आए कर लूँ गुफ़्तगू किसी अनजान से कोइ टोकेगा नही ये जान के कभी ...... बंद कर लूँ पलकें खुली हवा में मैं खुल के कभी ख़ुद को निहार लूँ भीग जाऊ बारिश की बूँदों में बेफिक्र ना चिंता हो बीमारी लेगी जकड़ कभी ..... घूम आऊँ अनजान रास्तो में कुछ पल सुबह और रात ना हो ज़माने का डर ना फ़िक्र किसी काम की ना जिम्मेदारी कुछ पल किसी नाम की बस कुछ पल मिल जाये सुकून के अमन चैन और जुनून के सुन लूँ पँछीयों का कलरव देख लूँ फ़िर तितलियों को जी भर बना के ख़ुद को छोटा बच्चा खेल लूँ संग उनके बस कुछ पल कुछ पल बस कोई गम ना हो किसी रिश्ते , किसी के नाम की परछाई संग ना हो"

#OpenPoetry कुछ पल जो मिले सुकून के 
कर लूँ बंद मुट्ठी में इन्हें 
संभाल लूँ ख़ुद को थोड़ा 
सँवार लूँ इन लम्हों को 
जी लूँ जी भर मैं 
पी लूँ इत्मीनान से 
कभी .......
सुबह की पहली गर्म चाय 
बैठूँ कुछ पल जब कोइ मिलने आए 
कर लूँ गुफ़्तगू किसी अनजान से 
कोइ टोकेगा नही ये जान के 
कभी ......
बंद कर लूँ पलकें खुली हवा में मैं 
खुल के कभी ख़ुद को निहार लूँ 
भीग जाऊ बारिश की बूँदों में बेफिक्र 
ना चिंता हो बीमारी लेगी जकड़ 
कभी .....
घूम आऊँ अनजान रास्तो में कुछ पल 
सुबह और रात ना हो ज़माने का डर 
ना फ़िक्र किसी काम की 
ना जिम्मेदारी कुछ पल किसी नाम की 
बस कुछ पल मिल जाये सुकून के 
अमन चैन और जुनून के 
सुन लूँ पँछीयों का कलरव 
देख लूँ फ़िर तितलियों को जी भर 
बना के ख़ुद को छोटा बच्चा 
खेल लूँ संग उनके बस कुछ पल 
कुछ पल बस कोई गम ना हो 
किसी रिश्ते , किसी के नाम की परछाई संग ना हो

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124 Love

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"याद है वो दिन जो हम साथ बिताया करते थे, हर पल जिंदगी के मजे में उड़ाया करते थे। ना था रिश्तों का बंधन, गमों के एहसास ना थे, हर शाम बस बेमतलब बातों में ज़ाया करते थे। ना मैं सोचता था, ना तुम सोचते थे, मुट्ठी भर मोती साथ में लुटाया करते थे। मैं बैठता था गंगा के तीरे, तुम भी बैठते थे, हर शाम घंटों वहीं बिताया करते थे। कभी मेरे घर पे, तो कभी तुम्हारे घर पे, सारा दिन सिर्फ फालतू की गप्पे लड़ाया करते थे। कभी मैं सोचता था, तो कभी तुम भी सोचते थे, की आगे कुछ करना है, या यूं ही विचरना है, चिंता होती थी, पर फिर उन्हीं बेकार की बातों में खो जाया करते थे। मैं भी अनजान था, तुम भी अनजान थे, हर लम्हें जिंदगी के गुमनामियों में बिताया करते थे। कभी चक्कर लगाते थे, तो कभी थक कर बैठ जाते थे, फिर ठंडे पानी के दो घूंट गले में उतारा करते थे। याद है वो दिन जो हम साथ बिताया करते थे, हर पल जिंदगी के मजे में उड़ाया करते थे।।"

याद है वो दिन जो हम साथ बिताया करते थे,
हर पल जिंदगी के मजे में उड़ाया करते थे।
 ना था रिश्तों का बंधन, गमों के एहसास ना थे,
हर शाम बस बेमतलब बातों में ज़ाया करते थे।
 ना मैं सोचता था, ना तुम सोचते थे,
मुट्ठी भर मोती साथ में लुटाया करते थे।
 मैं बैठता था गंगा के तीरे,  तुम भी बैठते थे,
हर शाम घंटों वहीं बिताया करते थे।
 कभी मेरे घर पे, तो कभी तुम्हारे घर पे,
सारा दिन सिर्फ फालतू की गप्पे लड़ाया करते थे।
कभी मैं सोचता था, तो कभी तुम भी सोचते थे,
की आगे कुछ करना है, या यूं ही विचरना है, चिंता होती थी, 
पर फिर उन्हीं बेकार की बातों में खो जाया करते थे।
मैं भी अनजान था, तुम भी अनजान थे, 
हर लम्हें जिंदगी के गुमनामियों में बिताया करते थे।
कभी चक्कर लगाते थे, तो कभी थक कर बैठ जाते थे,
फिर ठंडे पानी के दो घूंट गले में उतारा करते थे।

याद है वो दिन जो हम साथ बिताया करते थे,
हर पल जिंदगी के मजे में उड़ाया करते थे।।

#tourdelhi
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120 Love

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"अनजान से सफर में एक दोस्त सेतु के पुल की तरहा काम करता है नहीं तो फिर हमें ठोकर लगना ही लगना है क्योंकि हर कोई एक जैसा नहीं होता है और हमें ऐ खुद से पहचानना होता है कौन अपना है और कौन पराया।"

अनजान से सफर में एक दोस्त  सेतु के पुल की तरहा काम करता है
नहीं तो फिर हमें ठोकर लगना ही लगना है
क्योंकि हर कोई एक जैसा नहीं 
होता है और हमें ऐ खुद से पहचानना होता है
कौन अपना है और कौन 
पराया।

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