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Best धर Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"Happy Holi The Festival Of Colours To All 🤗🤗"

Happy Holi
The Festival Of Colours
To All 
🤗🤗

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🖤 . 🖤 . 🖤 . 🖤 . 🖤 . 🖤 . 🖤 . 🖤 . 🖤 . 🖤 . 🖤

कैसे
#बताऊँ - कैसे #सुनाऊँ #तुमको मैं ,, मेरी इस #होली का हाल रे
उसने मुझे #चुपके से #धर #दबोचा ,, और रगड़ - #रगड़ किया #गाल #लाल रे

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"दिवारो से मिलकर रोना अच्छा लगता है धर मे एक कोना सच्चा लगता है कितना भी सामान ईकटठा कर लू मै यहा तेरे बिना ये दिल ये धर सूना लगता है"

दिवारो से मिलकर रोना अच्छा लगता है

धर मे एक कोना सच्चा लगता है

कितना भी सामान ईकटठा कर लू मै यहा
 
तेरे बिना ये दिल ये धर सूना लगता है

#Av

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"हल्की बुंदे ,गरम चाय, पकोडो के साथ आई है। लो इस बरसात मुझे फिरसे धर की याद आई है। कि वो टपकती छत, कागज की नाँव, दीवार की सिड़न के साथ आई है। लो इस बरसात मुझे फिरसे धर की याद आई हैं। "

हल्की बुंदे ,गरम चाय, पकोडो के साथ आई है। लो इस बरसात मुझे फिरसे धर की याद आई है। 
कि वो टपकती छत, कागज की नाँव, दीवार की सिड़न के साथ आई है। लो इस बरसात मुझे फिरसे धर की याद आई हैं।

#monsoon for middle class... #Stay happy #sapnepoetry

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"धर क्या है धर वो हें जहाँ हम चलना सीखते हैं जिंदगी में सभलना सीखते है जहाँ हम जी भरकर मुसकुराते है जहाँ हम अपनों के साथ बैठ गपपे लगाते हैं जहाँ हम हर त्योहार अपनो के साथ मनाते है । #NojotoQuote"

धर क्या है
धर वो हें जहाँ हम 
चलना सीखते हैं  जिंदगी में सभलना सीखते है जहाँ हम जी भरकर मुसकुराते है  जहाँ हम अपनों के साथ  बैठ  गपपे लगाते हैं जहाँ हम हर त्योहार अपनो के साथ मनाते है ।
 #NojotoQuote

 

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"सूरत पाया घर बार । शब्द भरतार, राधास्वामी भारी । बच गई अब उसकी ख्वारी ।।टेर।। बहु भटकी सूरत घर घर । चौरासी चोले धर धर ।। अज्ञान अवस्था बहकर । लुट गई भारी (1) अब धुर का जागा भागा । सतगुरू से नाता लागा । कर दया उन दिया सुहाग । स्वामी पाया री (2) सतगुरू ने किरपा धारी । मोहिं अन्तर दीन्ह सहारी ।। कर्मों का छुट गया भारी । सत्तदेश पाया री (3) सत्तपुरुष का पाया दरशा । चेतन्य अंग से परसा ।। सत्त शब्द की होती बरषा । अमृत धारी (4) राधास्वामी धाम समाई । राधास्वामी द्याल को पाई ।। हरदम उनके गुण गाई । पिव पाया री (5) "राधास्वामी" राधास्वामी प्रीति बानी 3-53"

सूरत पाया घर बार । शब्द भरतार, राधास्वामी भारी ।
             बच गई अब उसकी ख्वारी ।।टेर।।

बहु भटकी सूरत घर घर । चौरासी चोले धर धर ।।
अज्ञान अवस्था बहकर । लुट  गई  भारी (1)

अब धुर का जागा भागा । सतगुरू से नाता लागा ।
कर दया उन दिया सुहाग । स्वामी      पाया री (2)

सतगुरू ने किरपा धारी । मोहिं अन्तर दीन्ह सहारी ।।
कर्मों का छुट गया भारी । सत्तदेश पाया  री (3)

सत्तपुरुष का पाया दरशा । चेतन्य अंग से परसा ।।
सत्त शब्द की होती बरषा । अमृत   धारी (4)

राधास्वामी धाम समाई । राधास्वामी द्याल को पाई ।।
हरदम उनके गुण गाई । पिव  पाया री (5)
                   "राधास्वामी"               
राधास्वामी प्रीति बानी 3-53

निज्ज घर अपने चालिए ।

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