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Best प्रथा Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"#Pehlealfaaz जून की भरी दोपहर, सूरज से, आग की किरने निकल रही थी , इसी समय, एक गरीब घर में, विवाह की बात चल रही थी .. लड़की ओट में बैठी हुई, सारी बातें सुन रही थी और सुनकर मन ही मन, जल भुन रही थी लड़के वालों ने कहा,जी हमारी तरफ से तो, मामला बिल्कुल साफ है हम तो सदा से ही, दहेज के खिलाफ हैं लेकिन देखिए जी, आजकल गर्मी में सारी चीजें कैसे सड़ती हैं इसीलिए एक फ्रिज की तो जरूरत पड़ती है गर्मी में हवा लगे, मानो हो गए हैं सालों इसी बात पर एक, ए सी भी दे डालो बिन बिजली के ए सी का भी कैसे चलेगा काम तो कर दीजिए जरा एक, इनवर्टर का इंतजाम हमारे घर से शहर की, काफी अधिक है दूरी इसी कारण है एक, मोटरसाइकिल भी जरूरी.. ©drVats अजी आप की सुंदर लड़की, हो जाएगी और भी हसीन गर मेहरबानी करके दे दें, एक वॉशिंग मशीन , और दे दीजिए हमें, एक छोटा सा तोहफा मेहमानों के लिए हो, घर में एक मेज और सोफा आपकी लड़की और हमारी बहु, कहीं हो ना जाए तंग बेटी की खुशी के लिए दे दीजिए एक सुंदर सा पलंग आजकल बहुत जरूरी है खबर और मनोरंजन इसीलिए दे दीजिए एक रंगीन टेलीविजन इसी तरह कह कह कर उन्होंने लिस्ट में काफी नाम भर दिए एक गरीब मजबूर के दिल में, गहरे घाव कर दिए और जाते-जाते फिर कह गए, देखिए जी हमारी तरफ से तो मामला बिल्कुल साफ है हम तो सदा- सर्वदा से ही दहेज के खिलाफ हैं.. © drVats"

#Pehlealfaaz  जून की भरी दोपहर, सूरज से, आग की किरने निकल रही थी ,
इसी समय, एक गरीब घर में, विवाह की बात चल रही थी ..

लड़की ओट में बैठी हुई, सारी बातें सुन रही थी 
और सुनकर मन ही मन, जल भुन रही थी 

लड़के वालों ने कहा,जी हमारी तरफ से तो, मामला बिल्कुल साफ है 
हम तो सदा से ही, दहेज के खिलाफ हैं 

लेकिन देखिए जी, आजकल गर्मी में सारी चीजें कैसे सड़ती हैं 
इसीलिए एक फ्रिज की तो जरूरत पड़ती है

 गर्मी में हवा लगे,  मानो हो गए हैं सालों 
इसी बात पर एक, ए सी भी दे डालो 

बिन बिजली के ए सी का भी कैसे चलेगा काम 
तो कर दीजिए जरा एक, इनवर्टर का इंतजाम 

हमारे घर से शहर की, काफी अधिक है दूरी 
इसी कारण है एक, मोटरसाइकिल भी जरूरी..  ©drVats

अजी आप की सुंदर लड़की, हो जाएगी और भी हसीन 
गर मेहरबानी करके दे दें,  एक वॉशिंग मशीन
,
 और दे दीजिए हमें, एक छोटा सा तोहफा
 मेहमानों के लिए हो, घर में एक मेज और सोफा 

आपकी लड़की और हमारी बहु, कहीं हो ना जाए तंग 
बेटी की खुशी के लिए दे दीजिए एक सुंदर सा पलंग

आजकल बहुत जरूरी है खबर और मनोरंजन 
इसीलिए दे दीजिए एक रंगीन टेलीविजन 

इसी तरह कह कह कर उन्होंने लिस्ट में काफी नाम भर दिए 
एक गरीब मजबूर के दिल में, गहरे घाव कर दिए

 और जाते-जाते फिर कह गए,
 देखिए जी हमारी तरफ से तो मामला बिल्कुल साफ है 
हम तो सदा- सर्वदा से ही दहेज के खिलाफ हैं.. © drVats

#Pehlealfaaz दहेज प्रथा.. #दहेज #प्रथा the #First #Poetry i wrote for a #competition in school, I was in sixth class.. it is slight longer though.. but worth read it full.. I searched that copy n put it for u.. kindly react.. 🙏🙏 #kavita #Social #nojotohindi #drvats #Quotes #Thoughts #poem #Quote #Shayari #Poetry #विचार #कविता #कहानी #शायरी #कला #Stories

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"अजीब लगता है मुझको!! ( के कोई न है राम यहां , पर क्या शौक रावण के दहन का) जब हर साल लोगों में रावण दहन के शौक, उत्साह और उमंग देखती हूँ, उसे तो हर साल जश्न के साथ जलाते हो, जो सदियों पहले मर कर सिख दे गया!! अपने अंदर के रावण को क्यों न देख पाते हो, अपने घर पर मां, बहन को दबाते हो, और बाहर किसी और के घर की इज़्ज़त को गंदे शब्दों से तार-तार करते जाते हो!! सच में बेहद अजीब लगता है मुझको!! जहां हर रोज़ नारी की आबरू तबाह होती है, वहां साल में एक बार भीड़ जुटती भी है , तो जलाने उस सबक सिखा गए, रावण को.. ऐसी संगठन गर उन दानव के लिए जुटे जो नारी के जीवन मे रुकावट, दर्द और तबाही के कारण है, तब लगता सही जलते देख उस रावण को।।"

अजीब लगता है मुझको!! ( के कोई न है राम यहां , पर क्या शौक रावण के दहन का) 

जब हर साल लोगों में रावण दहन के 
शौक, उत्साह और उमंग देखती हूँ,

उसे तो हर साल जश्न के साथ जलाते हो, जो सदियों पहले मर कर सिख दे गया!!

अपने अंदर के रावण को क्यों न देख पाते हो,
अपने घर पर मां, बहन को दबाते हो,
और बाहर किसी और के घर की इज़्ज़त को 
गंदे शब्दों से तार-तार करते जाते हो!!

सच में बेहद अजीब लगता है मुझको!!
जहां हर रोज़ नारी की आबरू तबाह होती है,
वहां साल में एक बार भीड़ जुटती भी है , तो 
जलाने उस सबक सिखा गए, रावण को..

ऐसी संगठन गर उन दानव के लिए जुटे जो नारी के जीवन मे 
रुकावट, दर्द और तबाही के कारण है,
तब लगता सही जलते देख उस रावण को।।

"के कोई न है राम यहां, पर शौक़ से जलाते पुतले रावण का" #प्रथा #सबक #सच्चाई #जीत #अन्याय #विजय #रावण_दहन #nojoto #nojotolife #nojotohindi

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घूँघट
अपने मुँह को ओढ़नी से ढक लेना घुँघट कहलाता है।
आजकल के लोग घूँघट प्रथा को कुप्रथा मानने लगे हैं।
उन्हें लगता हैं घूँघट नही होना चाइए क्योंकि औरतों को पूरा अधिकार है खुल के जीने का ।
सभी को लगता हैं कि ये एक रूढ़ीवादी सोच है। जो औरतों पर थोपी जा रही हैं।

पर हमे ये नही लगता,

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"शहनाइयों की गूँज गर अरमानों के टूटने की, खनक से ही है तो, ये बेदी, ये सेहरा, ये मण्डप गर दिलों की ख़्वाहिशों के, कत्लगाह से ही है तो, ये जमाना तेरे रिवाज के खिलाफ हो रही हूँ मैं । ये हस्ती, ये इज्जत, ये शोहरत गर दिल-ए-नासूर के , जख्म से ही है तो, ऐसी शोहरत तुझे ख़ाक कह रही हूँ मैं । दिल अपना तो अपनी हाल पर है मगर कई दिलों का जमाने के रिवाज में दफ़न, अनसुनी है जो आवाज कह रही हूं मैं।। बृजेन्द्र 'बावरा, #NojotoQuote"

शहनाइयों की गूँज गर
अरमानों के टूटने की, खनक से ही है तो,
ये बेदी, ये सेहरा, ये मण्डप गर
दिलों की ख़्वाहिशों के, कत्लगाह से ही है तो,
ये जमाना तेरे रिवाज के खिलाफ हो रही हूँ मैं ।
ये हस्ती, ये इज्जत, ये शोहरत गर
दिल-ए-नासूर के , जख्म से ही है तो,
ऐसी शोहरत तुझे ख़ाक कह रही हूँ मैं ।
दिल अपना तो अपनी हाल पर है मगर
कई दिलों का जमाने के रिवाज में दफ़न,
अनसुनी है जो आवाज कह रही हूं मैं।। 
                                             बृजेन्द्र 'बावरा, #NojotoQuote

#दहेज #प्रथा #बाल #विवाह #बेबस #लड़की
http://www.facebook.com/bawraspoetry/

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"Safar पार्ट -2 अनाथा (विधवा) सबके वो ताने सहती सब से छुपकर वो रहती है। गलती से गर सुबह दिख जाए किसीको तो सबकी वो गाली सुनती है। न कोई रिश्ता उसका ,ना उसकी कोई सहेली होती है शुभ कामो से दूर रखते उसको सबको महनुस वो लगती है। पति के मर जाने पर उसे तो पलभर में जला आते है पर विधवा नारी का तिरस्कार कर हर रोज उसे जलाते हैं। ले आओ सति प्रथा को ले आओ सति प्रथा को तुम एक बार मे ही जल जाएगी जीवित रहकर रोज मरती है। एक बार में ही मर जाएगी।"

Safar पार्ट -2

अनाथा (विधवा)

सबके वो ताने सहती सब से छुपकर वो रहती है।
गलती से गर सुबह दिख जाए किसीको
तो सबकी वो गाली सुनती है।
न कोई रिश्ता उसका ,ना उसकी कोई सहेली होती है

शुभ कामो से दूर रखते उसको
सबको महनुस वो लगती है।
पति के मर जाने पर उसे तो पलभर में जला आते है
पर विधवा नारी का तिरस्कार कर हर रोज उसे जलाते हैं।
ले आओ सति प्रथा को 
ले आओ सति प्रथा को तुम एक बार मे ही जल जाएगी
जीवित रहकर रोज मरती है। एक बार में ही मर जाएगी।

पार्ट-2 अनाथा #bolteshabddimika
#story #Poetry #Stories #Vidhva

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