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Best बनारस Shayari, Status, Quotes, Stories, Poem

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"तुम बिल्कुल बनारस की शाम सी हो, जिसका इंतेजार मैं हर रोज करता हूँ..."

तुम बिल्कुल बनारस की शाम सी हो, 
जिसका इंतेजार मैं हर रोज करता हूँ...

#बनारस #महाकाल #प्यार
#Nojoto #nojotohindi #nojotonews #sayari #story #Song #Love #Pyar #Prem #thought #poem #Quotes @Priya Gour @smita✍️ishu @Sheetal Pandya @Pratibha Tiwari(smile)🙂 @JYOTI AWASTHI (Jiya) 🌸 Dreamy Shahjahan(Youtuber)

100 Love

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"महादेव की प्रीत में...... दिवानी हो गयी..... समझ खुद को गंगा की लहर, भोले की सुध में..... बेसुध-सी हो गयी । #बनारस"

महादेव की प्रीत में......
दिवानी हो गयी.....
समझ खुद को गंगा की लहर,
भोले की सुध में.....
बेसुध-सी हो गयी ।

#बनारस

महादेव
#nojotohindi #nojotoshayari #Banarasi_Chhori

98 Love

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"मेरा तो पूरा शहर ही ख़ास है क्योकि वो मेरे दिल के बहुत ही पास है नाम है, जिसका बनारस और बनारसी उसके ठाट बाट है महादेव के इस नगरी में बहती गंगा की घाट है इसीलिए मेरे शहर की शाम बाकी शहरों से ख़ास है"

मेरा तो पूरा शहर ही ख़ास है
क्योकि वो मेरे दिल के बहुत ही पास है
नाम है, जिसका बनारस और
 बनारसी उसके ठाट बाट है
महादेव के इस नगरी में बहती गंगा की घाट है
इसीलिए मेरे शहर की शाम बाकी शहरों से 
ख़ास है

#shehar #varanasi
#बनारस #sandhyaraw

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"आज मेरे शहर में बहुत बड़ा हादशा हुआ राज्य सेतु निगम का लापरवाही की वजह से निर्माणाधीश Overbridge गिरा| शहर बनारस"

आज मेरे शहर में बहुत बड़ा हादशा हुआ
राज्य सेतु निगम का लापरवाही की वजह 
से निर्माणाधीश Overbridge गिरा|
शहर बनारस

#बनारस #काशी
#varanasi #Nojoto
#nojotohindi #nojotonews Priya Gour smita✍️ishu Pratibha Tiwari(smile)🙂 JYOTI AWASTHI (Jiya) 🌸 indira

82 Love

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"भारत की पावन धरती का स्वर्ग बनारस काशी है, गंगा घाट पर बसते स्वयं शिव शंभू अविनाशी है टिकती नहीं अमावस्या यहाँ, सदा रहती पूर्णमासी है, भव्य है दिव्य करिश्मा इसकी, नयनो में बस जाती है सूर्य की किरणें इसे प्राय: दुल्हन की भांति सजाती है, शाम की पावन आरती इस धरा को दिव्य बनाती है, जात धर्म से परे ये नगरी, अखिल विश्व अपनाती हैं, धर्म, प्रेम की नगरी है ये, सदा आनंद लुटाती है काशी पुण्य की नगरी और सकल विश्व का पारस है, मंत्रमुग्ध कर लेता सबको ये रंगरेज बनारस है बम बम लहरी के दर्शन के निखिल जगत अभिलाषी है, गंगा जी की लहरें भी नारी सी बलखाती हैं बनारसी बाबू के मुख से झरती मीठी वाणी है, पग पग पर जलपान यहां और घाट घाट का पानी है वरुणा -अस्सी के बीच बसा सुंदर सा भूभाग यहां, ईश्वर का आवास है ये, देवों का विभाग यहां भगवा रंग के ध्वजा पताका का अनुपम है शान यहां, लाल लंगोटी पहन के साधु देते सबको ज्ञान है पवन के पग में सदा नूपुर बजते है , दिन रात यहां, कई धर्म के लोग प्रेम से करते हैं निवास यहां धूप दीप फूलों से तनुरागमय स्थान यहां, संध्या आरती, भोर के सूर्य का देखो भव्य श्रृंगार यहां गंगा की लहरों की हिलोरे, छुती मन का तार यहां, सृष्टि की शोभा का मिलता, अनुपम रमणीय सार यहां देवलोक सी अनुपम नगरी, वसुधा महिमावान यहां, मुख से जाती नहीं बखानी, महिमा अपरंपार यहां शंख मंत्र की दिव्य ध्वनि से, तन मन होता स्वच्छ यहां, सकल नगर कर्मों में अपने सदा ही होता व्यस्त यहां पग-पग पर घंट, मंत्र की ध्वनि सुनाई देती है, खुशियों की एक जीवित छवि हर ओर दिखाई देती है कदम कदम पर रंग-बिरंगे मिलते मोहक घाट यहां, सभी घाट के अपने-अपने मिलते अनुपम ठाठ यहां बाट बाट पर मिलता है चिलम धतूरा और भांग यहां, चिलमभांग के रंग में बसा ,संतों का वैराग्य यहां गलियों की सुंदरता है नगरी का श्रृंगार यहां, गलियों की भूलभुलैया देखो, मिलते हैं अपार यहां सड़कों से ज्यादा गलियों का मिलता है विस्तार यहां, गलियों में चलने से होता कसरत का आभास यहां काल भैरव गली में मिलता भैरव का प्रताप यहां, रेशम कटरा गली में होता आभूषण का व्यापार यहां बनारसी साड़ियों से अलंकृत कुंजगली का बाजार यहां , थकता नहीं कभी कोई, हरदम कारोबार यहां अन्नपूर्णा मां भारती हैं स्वयं, हर घर का भंडार यहां, गोयठे की सेकी लिट्टी का साधु खाते आहारे यहाँ घाट घाट के जल में मिलता अमृत का प्रसाद यहां, वेद पुराण महाभारत का मिलता सच्चा ज्ञान यहाँ सूर्य को देती अर्ध्य ये नगरी जब होता प्रभात यहाँ, मोह माया से मुक्ति पाने आता सकल संसार यहाँ जन्म मरण से परे यह नगरी, होता सबका कल्याण यहाँ, होली दिवाली दशहरे का रोज-रोज त्योहार यहां पंडा संत मनीषी का, घाट घाट पर राज यहां, पंछी गाते करुण स्वर में जीवन का हर राग यहाँ सभ्यता संस्कृति भक्ति साधना, का मिलता विस्तार यहां, शिक्षा शासन राजनीति पर होता वाद-विवाद यहां नित्य संगीत कला जादू संग बजता ढोल सितार यहाँ, धर्मशास्त्र उपनिषद ग्रंथ है विद्या का आधार यहां गंगा वरुणा चंद्रप्रभा का वैभव है वरदान यहां, गलियों की खुशबू में बसता खुशियों का संसार यहां नहीं ठहर पाता कभी, गम का भी घनश्याम यहां, सुबह शाम का होता, इक क्षण न एहसास यहां साधु संत करते, इसकी महिमा का गुणगान यहां, कण कण में औढरदानी शिव शंभू का प्रताप यहां तुलसी के मानस का मिलता, सबको भव्य उपहार यहाँ , तुलसी की चौपाई में रामायण का अनुपम सार यहां घट घट बसते हैं जटाधारी, करते देव विहार यहां, देव बनारसी में बसते 24 जिनपट संग विश्वनाथ यहां चाट कचौड़ी गरम जलेबी का बिकता जलपान यहां, मघई पान की बीड़ा का बहुत अनूठा स्वाद यहां रामलीला की झांकी, अखाड़े, रामनगर दरबार यहां, मोक्ष धाम की नगरी है ये, पुण्य का विस्तार यहां दिव्य प्रकृति स्वयं है करती, अतिथि का सत्कार यहां, मिश्री घुली है मौसम में, मिलता मधुर अनुराग यहां सड़क गली और घाटों पर, लगते हैं सुंदर हाट यहां, समस्त पापों को धोती गंगा, पापी भी होते पाक यहां अभिशापों से मुक्ति का मनमोहक है द्वार यहां, पाप स्वार्थ धुल जाते हैं, करते सब भव पार यहां गंगा पार से दिखती है, नगरी चंद्राकार यहां, मनमोहक छवि घाटों की दिखती धनुषाकार यहां रसिया रस रंगरेज ये नगरी करता दिल पर राज बनारस अपने रंग में सबको रंगता सबके मन का हास बनारस ©✍️verma priya"

भारत की पावन धरती का स्वर्ग बनारस काशी है,  गंगा घाट पर बसते स्वयं शिव शंभू अविनाशी है
  टिकती नहीं अमावस्या यहाँ, सदा रहती  पूर्णमासी है,  भव्य है दिव्य करिश्मा इसकी, नयनो में बस जाती है
 सूर्य की किरणें इसे प्राय: दुल्हन की भांति सजाती है, शाम की पावन आरती इस  धरा को दिव्य बनाती है, 
 जात धर्म से परे ये  नगरी, अखिल विश्व अपनाती हैं, धर्म, प्रेम की नगरी है ये, सदा आनंद लुटाती है
 काशी पुण्य की नगरी और सकल विश्व का पारस है, मंत्रमुग्ध कर लेता सबको ये रंगरेज बनारस है
 बम बम लहरी के दर्शन के  निखिल जगत अभिलाषी है, गंगा जी की लहरें भी नारी सी बलखाती हैं
 बनारसी बाबू के मुख से झरती मीठी वाणी है,  पग पग पर जलपान यहां और घाट घाट का पानी है
 वरुणा -अस्सी के बीच बसा सुंदर सा भूभाग यहां, ईश्वर का आवास है ये, देवों का विभाग यहां
 भगवा रंग के ध्वजा पताका का अनुपम है शान यहां, लाल लंगोटी पहन के साधु देते सबको ज्ञान है
 पवन के पग में सदा नूपुर बजते है , दिन रात यहां, कई धर्म के लोग प्रेम से करते हैं निवास यहां
 धूप दीप फूलों से तनुरागमय स्थान यहां, संध्या आरती, भोर के सूर्य का देखो भव्य श्रृंगार यहां
 गंगा की लहरों की हिलोरे, छुती मन का तार यहां, सृष्टि की शोभा का मिलता, अनुपम रमणीय सार यहां
 देवलोक सी अनुपम नगरी, वसुधा महिमावान यहां, मुख से जाती नहीं बखानी,  महिमा अपरंपार यहां
 शंख मंत्र की दिव्य ध्वनि से, तन मन होता स्वच्छ यहां, सकल नगर कर्मों में अपने सदा ही होता व्यस्त यहां
 पग-पग पर घंट, मंत्र की ध्वनि सुनाई देती है, खुशियों की एक जीवित छवि हर ओर दिखाई देती है
कदम कदम पर रंग-बिरंगे मिलते मोहक घाट यहां, सभी घाट के अपने-अपने मिलते अनुपम ठाठ यहां
बाट बाट पर मिलता है चिलम धतूरा और भांग यहां,  चिलमभांग के रंग में बसा ,संतों का वैराग्य यहां
 गलियों की सुंदरता है नगरी का श्रृंगार यहां,  गलियों की भूलभुलैया देखो,  मिलते हैं अपार यहां
सड़कों से ज्यादा गलियों का मिलता है विस्तार यहां,  गलियों में चलने से होता कसरत का आभास यहां
 काल भैरव गली में मिलता भैरव का प्रताप यहां,  रेशम कटरा गली में होता आभूषण का व्यापार यहां
 बनारसी साड़ियों से अलंकृत कुंजगली का बाजार यहां , थकता नहीं कभी कोई, हरदम कारोबार यहां
 अन्नपूर्णा मां भारती हैं स्वयं, हर घर का भंडार यहां, गोयठे की सेकी लिट्टी का साधु खाते आहारे यहाँ 
 घाट घाट के जल में मिलता अमृत का प्रसाद यहां, वेद पुराण महाभारत का मिलता सच्चा  ज्ञान यहाँ 
 सूर्य को देती अर्ध्य ये  नगरी जब होता प्रभात यहाँ, मोह माया से मुक्ति पाने आता सकल संसार यहाँ 
 जन्म मरण से परे यह नगरी, होता सबका कल्याण यहाँ, होली दिवाली दशहरे का रोज-रोज त्योहार यहां
 पंडा संत मनीषी का,  घाट घाट पर राज यहां, पंछी गाते करुण स्वर में जीवन का हर राग यहाँ 
 सभ्यता संस्कृति भक्ति साधना, का मिलता विस्तार यहां, शिक्षा शासन राजनीति पर होता वाद-विवाद यहां
 नित्य संगीत कला जादू संग बजता ढोल सितार यहाँ, धर्मशास्त्र उपनिषद ग्रंथ है विद्या का आधार यहां
 गंगा  वरुणा चंद्रप्रभा का वैभव है वरदान यहां, गलियों की खुशबू में बसता खुशियों का संसार यहां
 नहीं ठहर पाता कभी, गम का भी घनश्याम  यहां, सुबह शाम का होता,  इक क्षण न एहसास यहां
 साधु संत करते, इसकी महिमा का गुणगान यहां,  कण कण में औढरदानी शिव शंभू का प्रताप यहां
 तुलसी के मानस का मिलता, सबको भव्य उपहार यहाँ , तुलसी की चौपाई में रामायण का अनुपम सार यहां
 घट घट बसते हैं जटाधारी, करते देव विहार यहां, देव बनारसी में  बसते 24 जिनपट संग विश्वनाथ यहां
 चाट कचौड़ी गरम जलेबी का बिकता जलपान यहां, मघई पान की बीड़ा का बहुत अनूठा स्वाद यहां
 रामलीला की झांकी, अखाड़े, रामनगर दरबार यहां, मोक्ष धाम की नगरी है ये,  पुण्य का विस्तार यहां
 दिव्य प्रकृति स्वयं है करती, अतिथि का सत्कार यहां, मिश्री घुली है मौसम में, मिलता मधुर अनुराग यहां
 सड़क गली और घाटों पर,  लगते हैं सुंदर हाट यहां, समस्त पापों को धोती गंगा, पापी भी होते पाक  यहां 
 अभिशापों  से मुक्ति का मनमोहक है द्वार यहां, पाप स्वार्थ धुल जाते हैं, करते सब भव पार यहां
 गंगा पार से  दिखती  है, नगरी चंद्राकार यहां, मनमोहक छवि घाटों की दिखती धनुषाकार यहां
रसिया रस रंगरेज ये नगरी करता दिल पर राज बनारस
 अपने रंग में सबको रंगता सबके मन का हास  बनारस

©✍️verma priya

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