प्रेम मज़ाक की वस्तु है
प्रेम की क्या विषयवस्तु है
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"प्रेम मज़ाक की वस्तु है प्रेम की क्या विषयवस्तु है विषय प्रेम तो है ही नही बस एक ऐसा कुछ है जिसे बस वस्तु बना कर बेचा जा रहा है जिसे लेकर भ्रमित किया जा रहा है विज्ञापन और ज्ञापन हो गया प्रेम निविदा भरते है आजकल प्रेम में प्रेमी प्रेमिका मिल बाजार चलाते है बाजार से प्रेम चलता है ,पलता है उपहार प्रचलन में है कपड़े बदलते दर्पण है दर्पण में हमाम है हमाम में कुछ है,जो सब देख रहे है पर कपड़ा मुँह पर ढंक कर बस महक रहे है....क्या कहे हम भी न बेपर्दा होकर प्रेम पर ही लिख रहे है प्रेम मज़ाक की वस्तु है प्रेम की क्या विषयवस्तु है विषय प्रेम तो है ही नही बस एक ऐसा कुछ है जिसे बस वस्तु बना कर बेचा जा रहा है Kunwarsurendra"

प्रेम मज़ाक की वस्तु है
प्रेम की क्या विषयवस्तु है
विषय प्रेम तो है ही नही
बस एक ऐसा कुछ है जिसे बस 
वस्तु बना कर बेचा जा रहा है
जिसे लेकर भ्रमित किया जा रहा है
विज्ञापन और ज्ञापन हो गया प्रेम
निविदा भरते है आजकल प्रेम में
प्रेमी प्रेमिका मिल बाजार चलाते है
बाजार से प्रेम चलता है ,पलता है
उपहार प्रचलन में है
कपड़े बदलते दर्पण है
दर्पण में हमाम है
हमाम में कुछ है,जो सब देख रहे है
पर कपड़ा मुँह पर ढंक कर
बस महक रहे है....क्या कहे
हम भी न बेपर्दा होकर 
प्रेम पर ही लिख रहे है
प्रेम मज़ाक की वस्तु है
प्रेम की क्या विषयवस्तु है
विषय प्रेम तो है ही नही
बस एक ऐसा कुछ है जिसे बस 
वस्तु बना कर बेचा जा रहा है
Kunwarsurendra

प्रेम मज़ाक की वस्तु है
प्रेम की क्या विषयवस्तु है
विषय प्रेम तो है ही नही
बस एक ऐसा कुछ है जिसे बस
वस्तु बना कर बेचा जा रहा है
जिसे लेकर भ्रमित किया जा रहा है
विज्ञापन और ज्ञापन हो गया प्रेम
निविदा भरते है आजकल प्रेम में

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