Mountain
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"हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी, शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए। हर सड़क पर, हर गली में,हर नगर, हर गांव में, हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए। सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए। ©Aakanksha Tripathi"

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, 
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर, हर गली में,हर नगर, हर गांव में, 
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, 
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। 

 मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए।

©Aakanksha Tripathi

#पर्वत-सी पीर

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"यह अलग बात है की, चुपचाप खड़े होते हैं। बड़े लोग तो... बड़े होते हैं।। ©kavi Bhajanlal panwar"

यह अलग बात है की,
 चुपचाप खड़े होते हैं।

बड़े लोग तो...
 बड़े होते हैं।।

©kavi Bhajanlal panwar

#Mountains

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"कुछ अजीब सा लगता है आजकल और साँसे भी कम होती जा रही हैं, कैसे बयाँ करूँ इन कागज के पन्नों पर कि आज तुम्हारी बहुत याद आ रही है, मेरे हाथ की रेखाओं में कुछ खास नहीं है जनाब ये तो तुम भी मुझे याद कर रही हो इसलिए बरसात आ रही हैं ॥ ©Ritik Nehra"

कुछ अजीब सा लगता है आजकल और साँसे भी कम होती जा रही हैं, 
कैसे बयाँ करूँ इन कागज के पन्नों पर कि आज तुम्हारी बहुत याद आ रही है,
मेरे हाथ की रेखाओं में कुछ खास नहीं है जनाब
ये तो तुम भी मुझे याद कर रही हो इसलिए बरसात आ रही हैं ॥

©Ritik Nehra

RITIK NEHRA

#Mountains

@mansi sahu @Sandhya @pooja @pratibha sharma

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"कुछ देखकर नहीं आज तुझे कुछ दिखाकर जाना चाहती हूँ, आँखों पर जो पट्टी बंधी है तेरे, वो अपने हाथों से हटाना चाहती हूँ, इस कदर मोहब्बत है Nehra, मुझे तुमसे कि एक सिर्फ तुझे छोड़कर, मैं पूरी दुनिया को अजनबी बताना चाहती हूँ ॥ ©Ritik Nehra"

कुछ देखकर नहीं आज तुझे कुछ दिखाकर जाना चाहती हूँ,
आँखों पर जो पट्टी बंधी है तेरे, वो अपने हाथों से हटाना चाहती हूँ,
इस कदर मोहब्बत है Nehra, मुझे तुमसे
 कि एक सिर्फ तुझे छोड़कर, मैं पूरी दुनिया को अजनबी बताना चाहती हूँ ॥

©Ritik Nehra

RITIK NEHRA

#Mountains

mansi sahu Sandhya

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"पेड़ा वाले पत्ते वांगू, मेरा शरीर हिल गया, ओदा नां लेते - लेते आज, मेरा होंठ छिल गया, खींच के तां वेखो एक डाल पेड़ दी जेड़ी वो टूट के गिरदी है, ओस तों वी छेती मेरा दिल टूट के गिर गया ॥ ©Ritik Nehra"

पेड़ा वाले पत्ते वांगू, मेरा शरीर हिल गया,
ओदा नां लेते - लेते आज, मेरा होंठ छिल गया,
खींच के तां वेखो एक डाल पेड़ दी
जेड़ी वो टूट के गिरदी है, ओस तों वी छेती मेरा दिल टूट के गिर गया ॥

©Ritik Nehra

RITIK NEHRA

#Mountains #SAD #Nojoto

@mansi sahu @Sandhya

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