लिखने का शौक, 
और पढ़ने की मजबूरी। 
दोनो मांगते है
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"लिखने का शौक, और पढ़ने की मजबूरी। दोनो मांगते हैं " वक्त", दोनो मांगते हैं " लहु " ।। खुद के लिए जीना हो, तो लिखना है जरूरी। आजीविका की खातिर, पढ़ना है जरूरी। मैं एक अकेला, सीमित है "वक्त " सीमित है " लहू" ।। दोनो मांगते हैं " वक्त" , दोनो मांगते हैं "लहू "।। अजीब बवंडर है जिंदगी, अजीब सी इनमे फांसे हैं । चाहतें होती कुछ हैं , हम कुछ और करते जाते हैं।। पैसे तो कमाते हैं, पर खुश रह नही पाते हैं। हर शाम घर लौटने पर, एक ही सवाल में उलझ जाते हैं।। क्या कर रहे हैं ??? क्या यही करना है जिंदगी में ???? फिर रात बेचैनी में बिताते हैं। मैं एक अकेला, सीमित है "वक्त " सीमित है " लहू" ।। दोनो मांगते हैं " वक्त" , दोनो मांगते हैं "लहू "।। - शिवम् कुमार"

लिखने का शौक, 
और पढ़ने की मजबूरी। 
दोनो मांगते हैं " वक्त", 
दोनो मांगते हैं " लहु " ।। 

खुद के लिए जीना हो, 
तो लिखना है जरूरी। 
आजीविका की खातिर, 
पढ़ना है जरूरी। 
मैं एक अकेला,
सीमित है "वक्त "
सीमित है " लहू" ।। 

दोनो मांगते हैं " वक्त" , 
दोनो मांगते हैं "लहू "।। 

अजीब बवंडर है जिंदगी, 
अजीब सी इनमे फांसे हैं । 
चाहतें होती कुछ हैं , 
हम कुछ और करते जाते हैं।। 
पैसे तो कमाते हैं, 
पर खुश रह नही पाते हैं। 
हर शाम घर लौटने पर, 
एक ही सवाल में उलझ जाते हैं।। 

क्या कर रहे हैं ??? 
क्या यही करना है जिंदगी में ????
फिर रात बेचैनी में बिताते हैं। 

मैं एक अकेला,
सीमित है "वक्त "
सीमित है " लहू" ।। 
दोनो मांगते हैं " वक्त" , 
दोनो मांगते हैं "लहू "।।

  - शिवम् कुमार

वक्त और लहु!

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