Inspire Through Writing
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"महफिलों में बैठे कुछ गुनगुना रहा था, कि किसी ने पूछा, मैं क्या करता हूं? जवाब जो मिली उसे, लिखने के ऊपर, फिर उसने पूछा मैं क्या लिखता हूं? खड़े -खड़े मैंने सुनाया उन्हें - गर डूब जाऊं गहराई में, बस ख्वाब लिखता हूं। लिखने की है ललक मुझमें, कभी बंदिशें न हो गर, जज्बात लिखता हूं। मिलता जब दर्द मुझे, दर्द -ए -आवाज़ लिखता हूं। गर कोई कह दे कुछ लिखने को, फिर उस शख्स का ऐहसास लिखता हूं। अपनों के बीच में, अपनों का सौगात लिखता हूं। कभी -कभार अपने जीवन का प्यास लिखता हूं। हो गम या जुदाई, साथ -साथ लिखता हूं। पर प्यार भरे नगमें, बार - बार लिखता हूं। सुहाना हो मौसम गर, फिर मौसम-ए-बहार लिखता हूं। गज़ल न सही पर, गीत हर बार लिखता हूं। कोशिशें होती हमारी, लिख लूं जहान सारी, गर कोई मज़ाक भी उड़ाए, फिर भी हर बार लिखता हूं। लिखने की जो है ललक, इसीलिए बार-बार लिखता हूं।। हर बार लिखता हूं।। ©Kundan Kumar"

महफिलों में बैठे कुछ गुनगुना रहा था,
कि किसी ने पूछा, मैं क्या करता हूं?
जवाब जो मिली उसे, लिखने के ऊपर,
फिर उसने पूछा मैं क्या लिखता हूं?

खड़े -खड़े मैंने सुनाया उन्हें -
गर डूब जाऊं गहराई में, बस ख्वाब लिखता हूं।
लिखने की है ललक मुझमें, कभी बंदिशें न हो गर,
जज्बात लिखता हूं।
मिलता जब दर्द मुझे, दर्द -ए -आवाज़ लिखता हूं।
गर कोई कह दे कुछ लिखने को, 
फिर उस शख्स का ऐहसास लिखता हूं।
अपनों के बीच में, अपनों का सौगात लिखता हूं।
कभी -कभार अपने जीवन का प्यास लिखता हूं।
हो गम या जुदाई, साथ -साथ लिखता हूं।
पर प्यार भरे नगमें, बार - बार लिखता हूं।
सुहाना हो मौसम गर, फिर मौसम-ए-बहार लिखता हूं।
गज़ल न सही पर, गीत हर बार लिखता हूं।
कोशिशें होती हमारी, लिख लूं जहान सारी,
गर कोई मज़ाक भी उड़ाए, 
फिर भी हर बार लिखता हूं।
लिखने की जो है ललक,
इसीलिए बार-बार लिखता हूं।।
हर बार लिखता हूं।।

©Kundan Kumar

बार-बार लिखता हूं।।
हर बार लिखता हूं।।

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4 Love

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"चतुर्भुज दर्शन थांरा करणी, नगरी चन्दपुरा र माय। होती जोत जगामग आपरी,थांर भगत हजारो आय।। 🙏🙏🙏🙏 k.s. ©Karni Karpa Chandpura"

चतुर्भुज दर्शन थांरा करणी, नगरी चन्दपुरा र माय।
होती जोत जगामग आपरी,थांर भगत हजारो आय।।
🙏🙏🙏🙏
k.s.

©Karni Karpa Chandpura

#InspireThroughWriting

2 Love

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"प्रेमावली ------------ प्रेम नयन में जब बसै, दिव्य ज्योति मिलि जात ज्यौं ओढै तु प्रीति चुनर चौहू ओर प्रीति बढि जात । प्रेम का गागर जैसे सागर जितना बाटो उससे अधिक वापस होई जात प्रेम से सीचत नीर वृक्ष को प्रेमवशी होकर वृक्ष, तुम वारी जात। है प्रेम रूप अनेक, जो जग में बाटा जात करे प्रेम केहू मोह से, केहू प्रभु प्रेम होई जात ज्योंहू प्रेम होत प्रभु चरणन में, जीवन कलेश मुक्त होई जात। प्रेम नयन की रीति पुरानी, देखत प्रेम होई जात मन तरस -दरस प्रभु चरणों की, हेरत -फिरत -मिलत प्रभु चरणों से, जीवन सफल होई जात। प्रेम का धाँगा जग को बाँधा जग फलत -फूलत आगे बढि जात करत कर्म नित प्रेम क लाँगा जीवन श्रेष्ठ, लक्ष्य भेद होई जात। प्रेम श्रेष्ठ दिव्य शक्ति की जैसी करत प्रयोग बाँधा हर जात प्रेम बसाए मन में जैसी, तेहि भाँति जगत दिख जात। चिंता चिता समान हवैं, चिंतन से हल मिलि जात ज्यौं मन में तु प्रेम बसावैं, बाँधा सब मिटि जात । ©Raj Yaduvanshi"

प्रेमावली 
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प्रेम नयन में जब बसै, 
दिव्य ज्योति मिलि जात 
ज्यौं ओढै तु प्रीति चुनर 
चौहू ओर प्रीति बढि जात ।

प्रेम का गागर जैसे सागर 
जितना बाटो उससे अधिक वापस होई जात 
प्रेम से सीचत नीर वृक्ष को 
प्रेमवशी होकर वृक्ष, तुम वारी जात। 

है प्रेम रूप अनेक, जो जग में बाटा जात 
करे प्रेम केहू मोह से, केहू प्रभु प्रेम होई जात 
ज्योंहू प्रेम होत प्रभु चरणन में, 
जीवन कलेश मुक्त होई जात। 

प्रेम नयन की रीति पुरानी, 
देखत प्रेम होई जात 
मन तरस -दरस प्रभु चरणों की, 
हेरत -फिरत -मिलत प्रभु चरणों से, जीवन सफल होई जात। 

प्रेम का धाँगा जग को बाँधा 
जग फलत -फूलत आगे बढि जात 
करत कर्म नित प्रेम क लाँगा 
जीवन श्रेष्ठ, लक्ष्य भेद होई जात। 

प्रेम श्रेष्ठ दिव्य शक्ति की जैसी 
करत प्रयोग बाँधा हर जात 
प्रेम बसाए मन में जैसी, 
तेहि भाँति जगत दिख जात। 

चिंता चिता समान हवैं, 
चिंतन से हल मिलि जात 
ज्यौं मन में तु प्रेम बसावैं, 
बाँधा सब मिटि जात ।

©Raj Yaduvanshi

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#InspireThroughWriting Priya Gour Priya dubey Shweta Dayal Srivastava Yogendra Nath mansi sahu RJ_Keshvi

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"आज कल लिखने लगी हूँ मैं... हां... शायद लिखनें लगीं हूँ मैं... बिन बात की परवाह आज कल करनें लगीं हूँ मैं कुछ किस्से, कुछ कहानियां गढ़ने लगीं हूँ मैं आख़िर क्यों परेशां हो मुझे देख कर इतना मासूमियत का चेहरा भी पढ़ने लगीं हूँ मैं हां आज कल कुछ ख़ास करनें लगीं हूँ मैं शायद लिखने लगीं हूँ मैं.. ©Garima"

आज कल लिखने लगी हूँ मैं...

हां... शायद लिखनें लगीं हूँ मैं...
बिन बात की परवाह आज कल करनें लगीं  हूँ मैं
कुछ किस्से, कुछ कहानियां गढ़ने लगीं 
हूँ मैं
आख़िर क्यों परेशां हो मुझे देख कर इतना
मासूमियत का चेहरा भी पढ़ने लगीं
 हूँ मैं
हां आज कल कुछ ख़ास करनें लगीं हूँ मैं
शायद लिखने लगीं हूँ मैं..

©Garima

शायद..लिखने लगी हूँ मैं.....

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"आज उनकी बातो में बड़ी बेरुखी थी डर लग रहा है मोत कही गले न लगा ले, हमारी सांसें उनकी बातो पर आ कर रुकी है। काश जी भर कर ले वो हमसे अपने दिल की बात, की हमारी सांसें उनकी बातो पर आ कर रुकी है। ©meena"

आज उनकी बातो में बड़ी बेरुखी थी
डर लग रहा है  मोत कही गले न लगा ले,
हमारी सांसें उनकी 
बातो पर आ कर रुकी है।
काश जी भर कर ले वो हमसे अपने दिल की बात,
की हमारी सांसें उनकी 
बातो पर आ कर रुकी है।

©meena

# उनकी बातों पर आ कर रुकी है।

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