अक़्सर कुछ ऐसे लफ़्ज़ उतर आते हैं हाथों पे,
 जिन्हें
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"अक़्सर कुछ ऐसे लफ़्ज़ उतर आते हैं हाथों पे, जिन्हें हम बार-बार उँगलियों से समेटते हैं, और बोते हैं उन अक्षरों को दिल की ज़मीन पर, इस उम्मीद से कि शायद कोई नज़्म उग जाएगी... पर प्रेम से बोए और सींचे शब्द सिर्फ़ प्रेम की ज़मीन पर ही उगते हैं। असल में हमें प्रेम की पीड़ा नहीं चाहिए, न ही प्रेम में उगे शब्द... हमें चाहिए वो साथ, वो स्पर्श जो हमारे एकाकीपन को भर दे और हमें यक़ीन दिलाए कि वो हमारे साथ उन क्षणों में भी है जब सारी दुनिया हमें अकेला छोड़ देगी। बेशक़ मेरे लिए वो शायद भी हो पर उसके लिए मैं यक़ीन हूँ इस बात का यक़ीन हो। एक ऐसा रिश्ता जिसमें दूरियों पर भी यक़ीन हो। ~शिखाS"

अक़्सर कुछ ऐसे लफ़्ज़ उतर आते हैं हाथों पे,
 जिन्हें हम बार-बार उँगलियों से  समेटते हैं,
और बोते हैं उन अक्षरों को दिल की ज़मीन पर,
इस उम्मीद से कि शायद कोई नज़्म उग जाएगी...
पर प्रेम से बोए और सींचे शब्द सिर्फ़ प्रेम की ज़मीन पर ही उगते हैं।
असल में हमें प्रेम की पीड़ा नहीं चाहिए, न ही प्रेम में उगे शब्द...
हमें चाहिए वो साथ, वो स्पर्श जो हमारे एकाकीपन को भर दे और हमें यक़ीन दिलाए कि वो हमारे साथ उन क्षणों में भी है जब सारी दुनिया हमें अकेला छोड़ देगी।
बेशक़ मेरे लिए वो शायद भी हो
पर उसके लिए मैं यक़ीन हूँ इस बात का यक़ीन हो।
एक ऐसा रिश्ता जिसमें दूरियों पर भी यक़ीन हो।
       
                             ~शिखाS

#प्रेम #दूरी #यक़ीन ❤️

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