Cycle wala Quotes
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"फल, फूल, और हरी भरी जवानी को पाकर -फूल मत जाना , बाप ने बचपन को खून पसीने से सींचा था , -उसे भूल मत जाना ।"

फल, फूल, और हरी भरी जवानी को पाकर 
-फूल मत जाना ,
बाप ने बचपन को खून पसीने से सींचा था ,
-उसे भूल मत जाना ।

@Lafz-e-faridi @MAHI @Jyoti Yadav @Harender Prasad @Anil Kumar
#nojoto #Love#father

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"humne v khoob samaan beche hai bachpan se lekar waqat jawan beche hai,bechi hai adhoori mohabbat,tute dil se lekar khule aasman beche hai"

humne v khoob samaan beche hai bachpan se lekar waqat jawan beche hai,bechi hai adhoori mohabbat,tute dil se lekar khule aasman beche hai

✍️a6.1 #nojoto #nojotohindi #Poetry#story#Quotes#erotica#Music#Video#song#Love#Life#parindey#udaan#honsle#chintiyan#pahad#salam#ranjha#majnu#heer#laila#TikTok#hindishayri#nojotoquotes#nojotopoetry#naam#manzil#asman#kavitagautam#divyajoshi#Aisha#aahnaverma#BinaBabi#achalsharma#chhayayadav#nishiignatius#dikshitagarg#AkashiParmar#aadarshasingh#DeepikaDubey#DeepaRajput#shalijas#HaimiKumari#madhukaur#EshaJoshi#KalavatiKumari#leelawatisharma#smrutirekhadash#parulsharma#rumagupta#roshnijangu#kusumlata#

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"kind word cost nothing"

kind word cost nothing

 

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"हर गम एक मुस्कान में लेती हूँ जो भी देना चाहें वो बस थोड़ा सा मुस्कुरा दे..... am your chintu"

हर गम एक मुस्कान में लेती हूँ जो भी देना चाहें वो बस थोड़ा सा मुस्कुरा दे..... 
am your chintu

i am paglu

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"सुबह से ही निकल जाते हैं बिना रोटी लिए, दो वक्त की रोटी के लिए । जिम्मेदारी के बोझ के आगे , साइकिल पर लादे सामान का बोझ भी कम लगता हैं । गांव गांव, गली मोहल्ले घुम कर , सारे दिन बेबसी की पुकार लगाते हैं । कई बार लचारी के कारण , कम कीमत में ही बोनी करा लेते हैं । कभी बिक जाता पुरा सामान , कभी बिना बेचे घर लौट आते हैं । शहर के लोगों को देख , कभी कभी अपनी जिंदगी को देख रोने लगते हैं । खुद मे ही कमी मान , सारी जिंदगी गरीबी का बोझ तले जीते हैं । सुबह से ही निकल जाते हैं , बिना रोटी लिए , दो वक्त की रोटी के लिए ।"

सुबह से ही निकल जाते हैं
बिना रोटी लिए, दो वक्त की रोटी के लिए ।
जिम्मेदारी के बोझ के आगे ,
साइकिल पर लादे सामान का बोझ भी कम लगता हैं ।
गांव गांव, गली मोहल्ले घुम कर ,
सारे दिन बेबसी की पुकार लगाते हैं ।
कई बार लचारी के कारण ,
कम कीमत में ही बोनी करा लेते हैं ।
कभी बिक जाता पुरा सामान ,
कभी बिना बेचे घर लौट आते हैं ।
शहर के लोगों को देख ,
 कभी कभी अपनी जिंदगी को देख रोने लगते हैं ।
खुद मे ही कमी मान ,
सारी जिंदगी गरीबी का बोझ तले जीते हैं ।
सुबह से ही निकल जाते हैं ,
बिना रोटी लिए , दो वक्त की रोटी के लिए ।

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