Cold Nights
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"जहां देखो देश मे सियासत चल रही है गंगा तट पर अनगिनत लाशें जल रही है धरती भी सहम गई बोझ ढोते ढोते तभी नदियां आजकल लाशें उगल रही है ©दक्ष आर्यन"

जहां देखो देश मे सियासत चल रही है
गंगा तट पर अनगिनत लाशें जल रही है
धरती भी सहम गई बोझ ढोते ढोते
तभी नदियां आजकल लाशें उगल रही है

©दक्ष आर्यन

नदिया लाशें उगल रही है
#Nojoto
#corona

#coldnights

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"किसी के जैसा एक दम बन जाना, बेअदब कुछ वक़्त के लिए किरदार मे ठन जाना । ©its@re D@mor"

किसी के जैसा एक दम बन जाना, बेअदब कुछ वक़्त के लिए किरदार मे ठन जाना ।

©its@re D@mor

#darkness
#coldnights

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"जिंदगी में सपने और अपने दोनो हमेशा parallel होने चाहिए नही तो, फिर वो unwanted angles बनने लगते हे फिर trangle बन जाता हे और अनंत तक जाने वाले का अंत आ जाता हे। • संदिग्ध ©Shreyashkumar Parekh"

जिंदगी में सपने और अपने दोनो हमेशा parallel होने चाहिए नही तो,
फिर वो unwanted angles बनने लगते हे फिर trangle बन जाता हे और अनंत तक जाने वाले का अंत आ जाता हे।

• संदिग्ध

©Shreyashkumar Parekh

#coldnights

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"ہم لفظ محبت لکھ کر بھی رو پڑے اور وہ نفرت لکھ کر بھی مُسکرا دیا...🔥 نداراٸٹس ©بے نام"

ہم لفظ محبت لکھ کر بھی رو پڑے
اور وہ نفرت لکھ کر بھی مُسکرا دیا...🔥


نداراٸٹس

©بے نام

#coldnights

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"राह में है मौत, न जाने दहलीज पे कब खड़ा मिलें,, डर तो नहीं मौत से, जो कुछ सफ़र हैं जिन्दगी के जी लिए।। न भिगोना पलकों को, कोई बाद मेरे......, हैं रित ऐ जिन्दगी का, जिसे निभाने चल दिए।। कुछ सपने हैं अधूरे , कुछ को पूरे किए.... हैं उम्र की कमाई ऐ , जो कारवां पीछे मेरे।। मिलें कुछ देर की मोहलत ... तो इस सेज़ से मैं उठ जाऊं, ओढ़े इस कफ़न को, तुम सब को आके चुप कराऊं, कुछ देर सबेर, कुछ वक्त लगेंगे, अभी बारी है मेरी, तुम को भी है आना.... फिर वहीं पे हम साथ मिलेंगे। कहना था बहुत कुछ, पर अब कहां कह सकूंगा... यूं जो पल दो पल में जल के राख बनूंगा ।। भूल जाना धीरे-धीरे जैसे बीते रात के अंधेरे.. खुद का ख़्याल रखना तुम सब बाद मेरे... --/"

राह में है मौत, न जाने दहलीज पे कब खड़ा मिलें,,
डर तो नहीं मौत से, जो कुछ सफ़र हैं  जिन्दगी के जी लिए।।
न भिगोना पलकों को, कोई बाद मेरे......,
हैं रित ऐ जिन्दगी का, जिसे निभाने चल दिए।।
कुछ सपने हैं अधूरे ,  कुछ को पूरे किए....
हैं उम्र की कमाई ऐ , जो कारवां पीछे मेरे।।
मिलें कुछ देर की मोहलत ...
तो इस सेज़ से मैं उठ जाऊं,
ओढ़े इस कफ़न को,
तुम सब को आके चुप कराऊं,
कुछ देर सबेर, कुछ वक्त लगेंगे,
अभी बारी है मेरी, तुम को भी है आना....
फिर वहीं पे हम साथ मिलेंगे।
कहना था बहुत कुछ, पर अब कहां कह सकूंगा...
यूं जो पल दो पल में  जल के राख बनूंगा ।।
भूल जाना धीरे-धीरे जैसे बीते रात के अंधेरे..
खुद का ख़्याल रखना तुम सब बाद मेरे...

                             --/

#TheLostSoul

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