Bachpan and Rain quotes
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"बचपन और बारिश Achi lagti thi baarish bachpan main... ab jawani main sapno ke bheeg jaane ka darr lagta hai"

बचपन और बारिश Achi lagti thi baarish bachpan main...
ab jawani main sapno ke
bheeg jaane ka darr lagta hai

#Tour

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"बचपन और बारिश थोड़ा सुकून ठंडे पानी का तो उससे कही ज्यादा सकून स्कूल जल्दी छूट जाने का। थोड़ा मज़ा छप छप का थोड़ा दूसरों को भीगने का दुनिया की खुशियां हथेली की बूंदों में सजानें का। वो खुशी किताबें भींग जाने की वो खुशी एक दिन किताबों से और बच जानें की छतरी वो भींगती हुए उसके क्या कहने बचपन और बारिश जाने कहां गए वो गहनें। _pratibha's writting 🌧☔🌈🌧🌂"

बचपन और बारिश थोड़ा सुकून ठंडे पानी का 
तो उससे कही ज्यादा सकून
स्कूल जल्दी छूट जाने का।

थोड़ा मज़ा छप छप का 
थोड़ा दूसरों को भीगने का
दुनिया की खुशियां 
हथेली की बूंदों में सजानें का।

वो खुशी किताबें भींग जाने की
वो खुशी एक दिन किताबों से और बच जानें की
छतरी वो भींगती हुए उसके क्या कहने
बचपन और बारिश 
जाने कहां गए वो गहनें।

_pratibha's writting 🌧☔🌈🌧🌂

#nojoto
#nojoto हिंदी
#poem
//बचपन और बारिश//
🌂🌧🌈☔🌂🌧🌈☔🌂🌧🌈 Dev Faizabadi Ashok Dabad Er. Pramod kumar Nishad reena uikey Abhishek Rajhans

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"बचपन और बारिश Baarish aur bachpan ki bus itni hi kahani hai.... bheeg jaate the kuch apni marzi se bhi ye smajh kar ki ye jannat ka paani hai"

बचपन और बारिश Baarish aur bachpan ki bus itni hi
kahani hai....
bheeg jaate the kuch apni marzi se bhi
ye smajh kar ki ye jannat ka paani 
hai

#Tour

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"बचपन और बारिश कविता देखो चमकी दामिनी चम -चम परिंदों के पंख भी चमके चमकीले पवन ले आयी झोंका आंधी का झूम रहे सरसों के फूल पीले धीमे धीमे गिरीं जो बूंदें मन बर्षा संग लहराया देखो हरियाली का नजारा बच्चों के मन को भाया बाग बगीचे पवन संग देखो कैसे झूम रहे हैं एक गुट बनाकर बच्चे देखो कैसे बर्षा मे भीग रहे हैं बच्चों अपने वस्त्र तो देखो हो गये सारे गीले सारे गलियारों मे बस्ती के बर्षा का पानी भरा हुआ है बच्चे छम छम करते दौड़ रहे हैं कागज की नाव बनाकर देखो पानी में छोड़ रहे हैं बच्चों के ये दिन भी हैं,कितने रंगीले मारुफ आलम"

बचपन और बारिश कविता
देखो चमकी दामिनी चम -चम
परिंदों के पंख भी चमके चमकीले
पवन ले आयी झोंका आंधी का
झूम रहे सरसों के फूल पीले
धीमे धीमे गिरीं जो बूंदें
मन बर्षा संग लहराया
देखो हरियाली का नजारा
बच्चों के मन को भाया
बाग बगीचे पवन संग
देखो कैसे झूम रहे हैं
एक गुट बनाकर बच्चे
देखो कैसे बर्षा मे भीग रहे हैं
बच्चों अपने वस्त्र तो देखो 
हो गये सारे गीले
सारे गलियारों मे बस्ती के
बर्षा का पानी भरा हुआ है
बच्चे छम छम करते दौड़ रहे हैं
कागज की नाव बनाकर 
देखो पानी में छोड़ रहे हैं
बच्चों के ये दिन भी हैं,कितने रंगीले

मारुफ आलम

बचपन और बारिश/कविता

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"बचपन और बारिश बारिश की वो पहली खुशबू के साथ जोर से बारिश होना और उसी समय स्कूल की छुट्टी होना दोस्तों के साथ बारिश में खेल खेलते कपडों को मिटट्ी में लठेरते घर में जाना फिर मम्मी का डात लगाना याद है मुझे।"

बचपन और बारिश बारिश की वो पहली खुशबू के साथ जोर से बारिश होना
और उसी समय स्कूल की छुट्टी होना
दोस्तों के साथ बारिश में खेल खेलते कपडों को मिटट्ी में लठेरते घर में जाना फिर मम्मी का डात लगाना याद है मुझे।

##बारिश में खेलते घर जाना याद है मुझे...

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