Alone
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کئ عیب نکالے کئ تہمتوں سے نوازا قدیر ہاں یہ دور بھی ہم پر آ کر گزرا 💔 ©Poet Abdul Qadeer

#alone  کئ عیب نکالے کئ تہمتوں سے نوازا

قدیر ہاں یہ دور بھی ہم پر آ کر گزرا

💔

©Poet Abdul Qadeer

#alone

10 Love

عشق میں ع کے عذاب سے لے کر 💔 قدیر ہم نے ق کے قہر تک جا کے دیکھا 💔 ©Poet Abdul Qadeer

#suspense #alone  عشق   میں    ع    کے   عذاب   سے  لے  کر
💔 

قدیر  ہم  نے   ق   کے  قہر  تک  جا  کے  دیکھا
💔

©Poet Abdul Qadeer

#alone

9 Love

तू मेरे साथ जिस्म का सौदा कर बैठी है ये बहुत गलत है तो गलत कर बैठी है तुझे ता उम्र मेरी नजर में कैद रहना था और तो है की किसी की बाहों में बैठी है रोहित राज़ ©Rohit Raaz

#alone  तू मेरे साथ जिस्म का सौदा कर बैठी है
ये बहुत गलत है तो गलत कर बैठी है

                      तुझे ता उम्र मेरी नजर में कैद रहना था
                       और तो है की किसी की बाहों में बैठी है


                   रोहित राज़

©Rohit Raaz

तुम मेरे साथ जिस्म का सौदा कर बैठी है #alone

6 Love

#विचार  जीवन में किसी को रुलाकर
हवन भी करवाओगे तो 
कोई फायदा नहीं
अगर रोज किसी एक को
भी हंसा दिया तो
आपको अगरबत्ती भी जलाने की जरूरत नहीं

©Rʌʋsʜʌŋ Kʋjʋʀ

# जीवन में किसी को रुलाकर हवन भी करवाओगे तो कोइ फ़ायदा नहीं।।

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S शुभप्रभात S दिल-ए-जाना में जो थोड़ी सी जगह.. .. मिल जाए... ग़म नहीं फिर कोई चाहें जान चाहें.. ..दिल जाए... उनको पाने का ख्याल था अंजाम-.. -.. मुहब्बत... चिरागे-उलफत तो हिज़्रे-यार ने दिल.. .. में जलाये... खोफे-कयामत से ढूंढे माहो-नजूम.. ..अमां-ए-अव्र... शव को दफअतन जो कभी उनसे नज़र.. .. मिल जाए... Surinder,, bismill,, क्रमशः हिज़्र=जुदाई।माहो-नजूम=चांद सितारे अमां-ए-अव्र= बादलों की पनाह। दफअतन=अचानक ©Surinder Modgill

#alone  S शुभप्रभात S
दिल-ए-जाना में जो थोड़ी सी जगह..
.. मिल जाए...
ग़म नहीं फिर कोई चाहें जान चाहें..
..दिल जाए...
उनको पाने का ख्याल था अंजाम-..
-.. मुहब्बत...
चिरागे-उलफत तो हिज़्रे-यार ने दिल..
.. में जलाये...
खोफे-कयामत से ढूंढे माहो-नजूम..
..अमां-ए-अव्र...
शव को दफअतन जो कभी उनसे नज़र..
.. मिल जाए...
Surinder,, bismill,, क्रमशः
हिज़्र=जुदाई।माहो-नजूम=चांद सितारे
अमां-ए-अव्र= बादलों की पनाह। दफअतन=अचानक

©Surinder Modgill

#alone

9 Love

 साम तक सुबह की नजरों से उतर जाते हैं,
इतने समझौतों पे जीते हैं हम की मर जाते हैं।

©प्रभाकर अजय शिवा सेन

साम तक सुबह की नजरों से उतर जाते हैं हम।

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