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तेरा रूठ कर आंसू बहाना भूलूं कैसे, तेरा खुद से दूर जाना भूलूं कैसे । मुझे भूख नहीं कहने पर तेरा भूखा रहना भूलूं कैसे, मेरे सिरहाने खड़े होकर पूरी रात जागना भूलूं कैसे । आखरी बार आंखे बंद की जब तुमने तो लगा तुम सोए हो , सोचता हूं आज भी तुम मेरे लिए आखरी रात भी कितना रोए हो । यह सोचकर कि मेरा बेटा अकेले रह जायेगा इस जहां में, कैसे रहेगा वो मतलबी इस दुनिया वाले लोगों के पनाह में । आंसुओं को देखकर मैं बेवकूफ सा खड़ा रहा वहां यूं, समझ ना सका की वो आसूंओं का सैलाब तेरे प्यार का निशानी था । अपने साथ छोड़ देते हैं यहां हर मुकां पे ऐसे, तू ना जाने किस मिट्टी की बनी थी मां । आज आंसू भी कुछ कह रहे हैं मुझसे, तेरे करीब होने को दिल तड़प रहा हो जैसे । सर पे हाथ रख कर एहसास तो दिला अपने होने का, मुझे अपने गोद में रख कर एहसास तो दिला चैन से सोने का । ©शिवम् सिंह भूमि

#शायरी #Light  तेरा रूठ कर आंसू बहाना भूलूं कैसे,
तेरा खुद से दूर जाना भूलूं कैसे ।
मुझे भूख नहीं कहने पर तेरा भूखा रहना भूलूं कैसे,
मेरे सिरहाने खड़े होकर पूरी रात जागना भूलूं कैसे ।
आखरी बार आंखे बंद की जब तुमने तो लगा तुम सोए हो ,
सोचता हूं आज भी तुम मेरे लिए आखरी रात भी कितना रोए हो ।
यह सोचकर कि मेरा बेटा अकेले रह जायेगा इस जहां में,
कैसे रहेगा वो मतलबी इस दुनिया वाले लोगों के पनाह में ।
आंसुओं को देखकर मैं बेवकूफ सा खड़ा रहा वहां यूं,
समझ ना सका की वो आसूंओं का सैलाब तेरे प्यार का निशानी था ।
अपने साथ छोड़ देते हैं यहां हर मुकां पे ऐसे,
तू ना जाने किस मिट्टी की बनी थी मां ।
आज आंसू भी कुछ कह रहे हैं मुझसे,
तेरे करीब होने को दिल तड़प रहा हो जैसे ।
सर पे हाथ रख कर एहसास तो दिला अपने होने का,
मुझे अपने गोद में रख कर एहसास तो दिला चैन से सोने का ।

©शिवम् सिंह भूमि

मां 😢 #Light

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इतिहास एक महान मां ने कमजोर दिमाग वाले बच्‍चे को एड‍िसन 'द ग्रेट' साइंटिस्‍ट कैसे बनाया:- thomas alva edison (Scientist and inventor of bulb):- 1/8 दुनिया को बल्‍ब की रौशनी का तोहफा देने वाले मशहूर वैज्ञानिक थॉमस एल्‍वा एड‍िसन का आज जन्‍मदिन है. उन्‍होंने सिर्फ बल्‍ब ही नहीं हजारों पेटेंट अपने नाम कराए. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि कभी ऐसा भी दौर आया था जब उन्‍हें स्‍कूल ने पढ़ाने से मना कर द‍िया था. लेकिन यह बात उन्‍हें पता तब चली जब वो फोनोग्राम और इलेक्‍ट्रिक बल्‍व जैसे अव‍िष्‍कार कर चुके थे. उन्‍होंने अपनी जीवनी में अपनी मां से जुड़ी इस घटना का जिक्र भी किया है. आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें... 2/8 महान अमेरिकन आविष्कारक और व्यवसायी थॉमस एल्वा एडिसन का जन्म 11 फरवरी 1847 को हुआ था. उनके नाम 1,093 पेटेंट हैं. जो उनकी मेहनत को दर्शाते हैं. आज दुनिया उनके आविष्कार का लोहा मानती है. बिजली के बल्ब की खोज इनकी सबसे बड़ी खोज मानी जाती है. बिजली के बल्ब के आविष्कार करने में उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी. एडिसन बल्ब बनाने में 10 हजार बार से अधिक बार असफल हुए. जिसपर उन्होंने कहा 'मैं कभी नाकाम नहीं हुआ बल्कि मैंने 10,000 ऐसे रास्ते निकाले लिए जो मेरे काम नहीं आ सके.' 3/8 एडिसन ने अपनी पहली प्रयोगशाला सिर्फ 10 साल की आयु में ही बना ली थी. उनकी मां ने उन्हें एक ऐसी पुस्तक दी जिसमें कई सारे रसायनिक प्रयोग दिए हुए थे. एडिसन को यह पुस्तक भा गई और उन्होंने अपने सारे पैसे रसायनो पर खर्च करके यह सारे प्रयोग कर डाले. थॉमस एडिसन का कोई प्रयोग पूरा होने को होता तो वह बिना सोए लगातार 4- 4 दिन इस प्रयोग के खत्म होने तक लगे रहते. साथ ही काम करते समय कई बार अपना खाना खाना ही भूल जाते थें। 4/8 उनके बचपन से जुड़े कई ऐसे किस्‍से हैं जो हमें बहुत कुछ स‍िखाते हैं. उनमें से एक क‍िस्‍सा बहुत प्रचलन में है. जिसके अनुसार उन दिनों की बात है जब थॉमस अल्वा एडिसन प्राइमरी स्कूल में पढ़ते थे. एक दिन स्कूल में टीचर ने एडिसन को एक कागज दिया और कहा कि यह ले जाकर अपनी मां को देना. एडिसन ने मां को दिया तो उनकी मां नैंसी मैथ्‍यू इलिएट जो क‍ि सुश‍िक्षि‍त डच परिवार से थीं, वह कागज पढ़ते-पढ़ते तकरीबन रो पड़ीं. 5/8 मां को रोते देख एड‍िसन ने पूछा क‍ि ऐसा क्‍या लिखा है कि आप रो पड़ीं तो मां ने कहा कि यह खुशी के आंसू हैं, इसमें लिखा है क‍ि आपका बेटा बहुत होशियार है और हमारा स्कूल निचले स्तर का है. यहां टीचर भी बहुत शिक्षित नहीं हैं इसलिए हम इसे नहीं पढ़ा सकते. इसे अब आप स्वयं पढ़ाएं. एडिसन भी इस बात से खुश हुए और घर पर मां से ही पढ़ना और सीखना शुरू कर दिया. 6/8 कई साल बीत गए, वो पढ़-ल‍िखकर एक स्‍थापित वैज्ञानिक बीत चुके थे. मां उन्‍हें छोड़कर दुनिया से जा चुकी थीं. तभी एक दिन घर में कुछ पुरानी यादों को तलाशते उन्‍हें अपनी मां की अल्‍मारी से वही पत्र म‍िला जो उनकी स्‍कूल टीचर ने द‍िया था, वो पत्र पढ़कर एड‍िसन अपने आंसू नहीं रोक सके. क्‍योंकि उस पत्र में लिखा था कि आपका बच्चा बौद्धिक तौर पर काफी कमजोर है इसलिए उसे अब स्कूल न भेजें. इसे एड‍िसन ने अपनी डायरी में लिखा क‍ि एक महान मां ने बौद्धिक तौर पर काफी कमजोर बच्चे को सदी का महान वैज्ञानिक बना दिया. 7/8 थॉमस एडिसन ने 14 साल की आयु में एक 3 साल के बच्चे को ट्रेन के नीचे आने से बचाया. उस बच्चे के पिता ने एडिसन का बहुत धन्यवाद किया. साथ ही एडिसन को टेलीग्राम मशीन चलानी सिखाई. बाद में एडिसन को कहीं पर टेलीग्राम चलाने के विषय में एक स्टेशन पर नौकरी भी मिल गई. उन्होंने अपनी नौकरी का समय रात को करवा लिया, ताकि प्रयोगों के लिए ज्यादा समय मिल सके. 8/8 बता दें क‍ि एड‍िसन ने 40 इलेक्ट्रि‍क लाइट बल्ब जलते देखने के लिए 3 हजार लोगों का हुजूम जुटा था. जिसके बाद न्यूयॉर्क सिटी में पर्ल स्ट्रीट पावर स्टेशन खोलने के बाद ग्राहकों को बिजली पहुंचानी शुरू की गई. पहली बार बल्ब बनाने में 40 हजार डॉलर की लागत आई थी. लेकिन बता दें क‍ि साल 1879 से 1900 तक ही एडिसन अपनी सारी प्रमुख खोजें कर चुके थे और वह एक वैज्ञानिक के साथ-साथ एक अमीर व्यापारी भी बन चुके थे. उनका न‍िधन 18 अक्टूबर 1931 को हुआ. ©Subham Krishna

#Light  इतिहास
एक महान मां ने कमजोर दिमाग वाले बच्‍चे को एड‍िसन 'द ग्रेट' साइंटिस्‍ट कैसे बनाया:-

thomas alva edison (Scientist and inventor of bulb):- 

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दुनिया को बल्‍ब की रौशनी का तोहफा देने वाले मशहूर वैज्ञानिक थॉमस एल्‍वा एड‍िसन का आज जन्‍मदिन है. उन्‍होंने सिर्फ बल्‍ब ही नहीं हजारों पेटेंट अपने नाम कराए. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि कभी ऐसा भी दौर आया था जब उन्‍हें स्‍कूल ने पढ़ाने से मना कर द‍िया था. लेकिन यह बात उन्‍हें पता तब चली जब वो फोनोग्राम और इलेक्‍ट्रिक बल्‍व जैसे अव‍िष्‍कार कर चुके थे. उन्‍होंने अपनी जीवनी में अपनी मां से जुड़ी इस घटना का जिक्र भी किया है. आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें...

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महान अमेरिकन आविष्कारक और व्यवसायी थॉमस एल्वा एडिसन का जन्म 11 फरवरी 1847 को हुआ था. उनके नाम 1,093 पेटेंट हैं. जो उनकी मेहनत को दर्शाते हैं. आज दुनिया उनके आविष्कार का लोहा मानती है. बिजली के बल्ब की खोज इनकी सबसे बड़ी खोज मानी जाती है. बिजली के बल्ब के आविष्कार करने में उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी. एडिसन  बल्ब बनाने में 10 हजार बार से अधिक बार असफल हुए. जिसपर उन्होंने कहा 'मैं कभी नाकाम नहीं हुआ बल्कि मैंने 10,000 ऐसे रास्ते निकाले लिए जो मेरे काम नहीं आ सके.'

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एडिसन ने अपनी पहली प्रयोगशाला सिर्फ 10 साल की आयु में ही बना ली थी. उनकी मां ने उन्हें एक ऐसी पुस्तक दी जिसमें कई सारे रसायनिक प्रयोग दिए हुए थे. एडिसन को यह पुस्तक भा गई और उन्होंने अपने सारे पैसे रसायनो पर खर्च करके यह सारे प्रयोग कर डाले. थॉमस एडिसन का कोई प्रयोग पूरा होने को होता तो वह बिना सोए लगातार 4- 4 दिन इस प्रयोग के खत्म होने तक लगे रहते. साथ ही काम करते समय कई बार अपना खाना खाना ही भूल जाते थें।

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उनके बचपन से जुड़े कई ऐसे किस्‍से हैं जो हमें बहुत कुछ स‍िखाते हैं. उनमें से एक क‍िस्‍सा बहुत प्रचलन में है. जिसके अनुसार उन दिनों की बात है जब थॉमस अल्वा एडिसन प्राइमरी स्कूल में पढ़ते थे. एक दिन स्कूल में टीचर ने एडिसन को एक कागज दिया और कहा कि यह ले जाकर अपनी मां को देना. एडिसन ने मां को दिया तो उनकी मां नैंसी मैथ्‍यू इलिएट जो क‍ि सुश‍िक्षि‍त डच परिवार से थीं, वह कागज पढ़ते-पढ़ते तकरीबन रो पड़ीं.

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मां को रोते देख एड‍िसन ने पूछा क‍ि ऐसा क्‍या लिखा है कि आप रो पड़ीं तो मां ने कहा कि यह खुशी के आंसू हैं, इसमें लिखा है क‍ि आपका बेटा बहुत होशियार है और हमारा स्कूल निचले स्तर का है. यहां टीचर भी बहुत शिक्षित नहीं हैं इसलिए हम इसे नहीं पढ़ा सकते. इसे अब आप स्वयं पढ़ाएं. एडिसन भी इस बात से खुश हुए और घर पर मां से ही पढ़ना और सीखना शुरू कर दिया.

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कई साल बीत गए, वो पढ़-ल‍िखकर एक स्‍थापित वैज्ञानिक बीत चुके थे. मां उन्‍हें छोड़कर दुनिया से जा चुकी थीं. तभी एक दिन घर में कुछ पुरानी यादों को तलाशते उन्‍हें अपनी मां की अल्‍मारी से वही पत्र म‍िला जो उनकी स्‍कूल टीचर ने द‍िया था, वो पत्र पढ़कर एड‍िसन अपने आंसू नहीं रोक सके. क्‍योंकि उस पत्र में लिखा था कि आपका बच्चा बौद्धिक तौर पर काफी कमजोर है इसलिए उसे अब स्कूल न भेजें. इसे एड‍िसन ने अपनी डायरी में लिखा क‍ि एक महान मां ने बौद्धिक तौर पर काफी कमजोर बच्चे को सदी का महान वैज्ञानिक बना दिया.


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थॉमस एडिसन ने 14 साल की आयु में एक 3 साल के बच्चे को ट्रेन के नीचे आने से बचाया. उस बच्चे के पिता ने एडिसन का बहुत धन्यवाद किया. साथ ही एडिसन को टेलीग्राम मशीन चलानी सिखाई. बाद में एडिसन को कहीं पर टेलीग्राम चलाने के विषय में एक स्टेशन पर नौकरी भी मिल गई. उन्होंने अपनी नौकरी का समय रात को करवा लिया, ताकि प्रयोगों के लिए ज्यादा समय मिल सके.

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बता दें क‍ि एड‍िसन ने 40 इलेक्ट्रि‍क लाइट बल्ब जलते देखने के लिए 3 हजार लोगों का हुजूम जुटा था. जिसके बाद न्यूयॉर्क सिटी में पर्ल स्ट्रीट पावर स्टेशन खोलने के बाद ग्राहकों को बिजली पहुंचानी शुरू की गई. पहली बार बल्ब बनाने में 40 हजार डॉलर की लागत आई थी. लेकिन बता दें क‍ि साल 1879 से 1900 तक ही एडिसन अपनी सारी प्रमुख खोजें कर चुके थे और वह एक वैज्ञानिक के साथ-साथ एक अमीर व्यापारी भी बन चुके थे. उनका न‍िधन 18 अक्टूबर 1931 को हुआ.

©Subham Krishna

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वक्त , के साथ ,चलने वाला,,, परिंदा ‌हु,,,ख्खाबो ,,और दुखो का,,, पिटारा हु,,, और ,वक्त का ,,,मारा हु ,,, ©Ravindra Yewale

#शायरी #Light  वक्त , के साथ ,चलने वाला,,,
परिंदा ‌हु,,,ख्खाबो  ,,और  दुखो का,,,
पिटारा हु,,,
और ,वक्त का ,,,मारा हु ,,,

©Ravindra Yewale

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अपने हक़ की लड़ाई के लिए जनता को ही घरों से बाहर निकलना पड़ेगा, चाहे वो स्त्री हो या पुरुष..... ईरान में हो रहे संघर्ष का मैं समर्थन करता हूँ, ईरान जैसे देश में महिलाएं अपने हक़ की लड़ाई के लिए सड़कों पर हैं, हमारे देश में तो महिलाओं की स्थिति वैसे ही नाजुक हैं, रेपिस्ट खुले आम घूम रहे हैं, लोकतंत्र सीधे तौर पर खतरे में है और हम मसीहा के इन्तेज़ार में हैं, कुछ लोगों को फेंकूँ के रूप में एक मसीहा मिल चुका है। हमारे देश को मीडिया अपने आप को बेच चुकी है, न्यायपालिका की भी स्वतंत्रता खतरे में है... हमें ईरान की महिलाओं से सीखने की जरूरत है, लेकिन हमारी चर्चा हिज़ाब तक ही सीमित है, वहां कानून बनाकर हिज़ाब महिलाओं पर थोपा गया है, संघर्ष इसी लिए हो रहा है, आप महिलाओं को सलाम है, मैं चाहता हूँ कि हमारे देश में भी महिलाओं पर किसी भी तरह से कुछ थोपा जाता है तो उसको लेकर सड़कों पर संघर्ष करें, हम आपके साथ हैं। ये संगठनें व सत्ताधारी दल व विपक्ष कोई भी हमारे हक़ के लिए संघर्ष नहीं करेगा बल्कि हमारी मजबूरियों व कमियों को चुनाव में भुनाएंगे.... लोकतंत्र की आत्मा है स्वराज, धरना प्रदर्शन, विरोध प्रदर्शन, आंदोलन..... आज हमारे देश में हर प्रकार के आंदोलनों को कुचला जा रहा है।।। ©हेसाम

#हेसाम #समाज #Light  अपने हक़ की लड़ाई के लिए जनता को ही घरों से बाहर निकलना पड़ेगा, चाहे वो स्त्री हो या पुरुष.....
ईरान में हो रहे संघर्ष का मैं समर्थन करता हूँ,
ईरान जैसे देश में महिलाएं अपने हक़ की लड़ाई के लिए सड़कों पर हैं,
हमारे देश में तो महिलाओं की स्थिति वैसे ही नाजुक हैं, रेपिस्ट खुले आम घूम रहे हैं, लोकतंत्र सीधे तौर पर खतरे में है और हम मसीहा के इन्तेज़ार में हैं,
कुछ लोगों को फेंकूँ के रूप में एक मसीहा मिल चुका है।
हमारे देश को मीडिया अपने आप को बेच चुकी है,
न्यायपालिका की भी स्वतंत्रता खतरे में है...
हमें ईरान की महिलाओं से सीखने की जरूरत है,
लेकिन हमारी चर्चा हिज़ाब तक ही सीमित है,
वहां कानून बनाकर हिज़ाब महिलाओं पर थोपा गया है, संघर्ष इसी लिए हो रहा है, आप महिलाओं को सलाम है,
मैं चाहता हूँ कि हमारे देश में भी महिलाओं पर किसी भी तरह से कुछ थोपा जाता है तो उसको लेकर सड़कों पर संघर्ष करें, हम आपके साथ हैं।
ये संगठनें व सत्ताधारी दल व विपक्ष कोई भी हमारे हक़ के लिए संघर्ष नहीं करेगा बल्कि हमारी मजबूरियों व कमियों को चुनाव में भुनाएंगे....
लोकतंत्र की आत्मा है स्वराज, धरना प्रदर्शन, विरोध प्रदर्शन, आंदोलन.....
आज हमारे देश में हर प्रकार के आंदोलनों को कुचला जा रहा है।।।

©हेसाम

जमाना तो वो पुराना ही बेहतर था , " जब जेब में रुपए बेशक कम थे , मगर प्यार बेशुमार भरा था "........ और एक जमाना आज का है , जहां दौलत तो हर कोई कमा रहा है ...... मगर प्यार......... " उसकी तलाश आज भी जारी है" ©MEGHA Sharma

#कविता #Change #people #Light #Money  जमाना तो वो पुराना ही बेहतर था ,

 " जब जेब में रुपए बेशक कम थे , मगर प्यार बेशुमार भरा था "........
और एक जमाना आज का है ,

जहां दौलत तो हर कोई कमा रहा है ......

मगर  प्यार.........

" उसकी तलाश आज भी जारी है"

©MEGHA Sharma

इंसानों की सबसे बुरी आदत है इंसान भगवान को तो मानता है पर भगवान की एक नहीं मानता 🚶Awara Amber ©Awara Amber,M

#ज़िन्दगी #Light  इंसानों की सबसे बुरी आदत है
इंसान भगवान को तो मानता है
पर भगवान की एक नहीं मानता
🚶Awara Amber

©Awara Amber,M

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