Cactus
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सुख क्या है? —दुःख का शेष। शेष क्या है? —धैर्य। संकट क्या है? —प्रकृति की इच्छा। प्रकृति क्या है? —आश्चर्य। आश्चर्य क्या है? —युधिष्ठिर ने यक्ष से कहा था : ‘‘सब तरफ़ सब मर रहे हैं, लेकिन बचे हुए सब जीने की इच्छा से भरे हैं।’’ ... . ©sandeep Singh

#cactus  सुख क्या है?
—दुःख का शेष।
शेष क्या है?
—धैर्य।
संकट क्या है?
—प्रकृति की इच्छा।
प्रकृति क्या है?
—आश्चर्य।

आश्चर्य क्या है?
—युधिष्ठिर ने यक्ष से कहा था :

‘‘सब तरफ़ सब मर रहे हैं, लेकिन बचे हुए सब जीने की इच्छा से भरे हैं।’’





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©sandeep Singh

#cactus

8 Love

आज ये लिखने से पहले , जरा इतिहास टटोला था , जो हो चुके पुराने है उन पन्नों को खोला था सन 47 से पहले देखा एक बूढ़ा कुछ बोला था , आंख के बदले आंख दिखाना सबको अंधा कर जायेगी , बिना शांति ये आजादी तो बहुत खून पी जायेगी आजादी का नशा चढ़ाकर न जाने कितने आए थे आजाद देश का सपना अपनी आंखों में सजाए थे न जाने कितने भगत सिंह शेखर फांसी पर झूले थे गिनने में न आए तब इतने लश्कर टूटे थे फिर सन 47 आजादी का तोहफा साथ में लाया था वीरों ने उस रोज नया इतिहास बनाया था आजाद धरा पर उस दिन सबने वंदे मातरम गाया था हिंदुस्तान है देश हमारा सीना थोक बताया था हरे रंग की घाटी उपर श्वेत बर्फ की चादर फैली हमने दुश्मन का लहू गिराकर तिरंगे को सजाया था फिर उसको न जाने कितने बलिदानों पर फहराया था यू ही नही देश हमारा विश्वगुरु कहलाया था पूतो का लहू पिलाकर इसको सोने की चिड़िया बनाया था कभी नही किसी पे हमने पहला वार किया पर जब भी कोई ऐंठा है तब मुहतोड़ जवाब दिया अब देश के पूतों ने अपना वतन संभाला है बुरी नजर के हर दुश्मन को सीमा से ही धुतकारा है। इंकलाब जिंदाबाद By- हिमांशु शुक्ला✍️✍️ ©himanshu shukla

#कविता #cactus  आज ये लिखने से पहले ,
जरा इतिहास टटोला था ,
जो हो चुके पुराने है उन पन्नों को खोला था
सन 47 से पहले देखा एक  बूढ़ा कुछ बोला था 
 , आंख के बदले आंख दिखाना सबको अंधा कर जायेगी
 , बिना शांति ये आजादी तो बहुत खून पी जायेगी  
आजादी का नशा चढ़ाकर न जाने कितने आए थे  
आजाद देश का सपना अपनी आंखों में सजाए थे 
न जाने कितने भगत सिंह शेखर फांसी पर झूले थे  
गिनने में न आए तब इतने लश्कर टूटे थे
फिर सन 47 आजादी का तोहफा साथ में लाया था
 वीरों ने उस रोज नया इतिहास बनाया था
आजाद धरा पर उस दिन सबने 
वंदे मातरम गाया था
हिंदुस्तान है देश हमारा सीना थोक बताया था 
हरे रंग की घाटी उपर श्वेत बर्फ की चादर फैली
 हमने दुश्मन का लहू गिराकर तिरंगे को सजाया था
फिर उसको न जाने कितने बलिदानों पर फहराया था
यू ही नही देश हमारा विश्वगुरु कहलाया था
पूतो का लहू पिलाकर इसको सोने की चिड़िया बनाया था
कभी नही किसी पे हमने पहला वार किया
पर जब भी कोई ऐंठा है तब मुहतोड़  जवाब दिया
अब देश के पूतों ने अपना वतन संभाला है
बुरी नजर के हर दुश्मन को सीमा से ही धुतकारा है।

             इंकलाब जिंदाबाद
    
             By- हिमांशु शुक्ला✍️✍️

©himanshu shukla

#cactus

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चुप हूँ कि लवों को जमीर ने सिल दिया है, गर खुल गए तो बहुत से चेहरों के नकाब उतर जाएंगे। ©aarav

#शायरी #cactus  चुप हूँ कि लवों को जमीर ने सिल दिया है,
गर खुल गए तो बहुत से चेहरों के नकाब उतर जाएंगे।

©aarav

#cactus

5 Love

🌷🌺🌷 इंसान खुद की गलती पर एक अच्छा वकील बनता हैं, मगर जहां गलती सामने वाले की हो वह सीधा जज बन जाता है.! 🙂🖤 ं ©दो अल्फाज

#शायरी #cactus  🌷🌺🌷
इंसान खुद की गलती पर 
एक अच्छा वकील बनता हैं,
मगर जहां गलती सामने वाले की हो
वह सीधा जज बन जाता है.!
🙂🖤

ं

©दो अल्फाज

#cactus

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मैं जिन्हें आप कहता हूँ वो मुझे तुम कहते है जिन्हें तुम कहता हूँ वो मुझे आप कह देते हैं नोट- ये आप और तुम के बीच सामंजस्य बैठाना बहुत मुश्किल है किसे आप कहूँ और किसे तुम ? DEAR COMRADE ©Ankur Mishra

#असमंजस  मैं जिन्हें आप कहता हूँ वो मुझे तुम कहते है
जिन्हें तुम कहता हूँ वो मुझे आप कह देते हैं

नोट- ये आप और तुम के बीच सामंजस्य बैठाना बहुत मुश्किल है

किसे आप कहूँ और किसे तुम  ?
DEAR COMRADE

©Ankur Mishra

मैं जिन्हें आप कहता हूँ वो मुझे तुम कहते है जिन्हें तुम कहता हूँ वो आप कह देते हैं नोट- ये आप और तुम के बीच सामंजस्य बैठाना बहुत मुश्किल है किसे आप कहूँ और किसे तुम 🙂🙏 #असमंजस

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Sukuriya tumhe kamse kam bewafa kahen to bachaliya ©Abhiram Mohanty

#ଶାୟାରି #cactus  Sukuriya tumhe 
kamse kam
bewafa kahen to
bachaliya

©Abhiram Mohanty

#cactus

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