#OpenPoetry
  • Popular Stories
  • Latest Stories

"#OpenPoetry In the woods somewhere Fireflies finding their way to home illuminating the dark kept secrets Trees admiring the beauty of night sky Birds returning back home Night engulfed in silence Draped with a layer of Black Dangerous yet elegant Calm yet fierce Luring my thoughts with its beauty A beauty to die for My thoughts trapped in ocean of emotions from the day I have my first memory of to the things I will do tomorrow Falling in a vicious circle of thoughts and yet I enjoy doing nothing but recreating memories Memories that we cling to for a lifetime but dont live in it for that moment scrolling in our phones but value only when it is passed Ironic isnt it? A_tale_for_you"

#OpenPoetry  In the woods somewhere
Fireflies finding their way to home
illuminating the dark kept secrets 
Trees admiring the beauty of night sky
Birds returning back home
Night engulfed in silence
Draped with a layer of Black
Dangerous yet elegant
Calm yet fierce
Luring my thoughts with its beauty
A beauty to die for
My thoughts trapped in ocean of emotions
from the day I have my first memory of
to the things I will do tomorrow
Falling in a vicious circle of thoughts
and yet I enjoy doing nothing
but recreating memories
Memories that we cling to for a lifetime
but dont live in it for that moment 
scrolling in our phones 
but value only when it is passed
Ironic isnt it?

A_tale_for_you

#OpenPoetry #nojoenglish #Englishpoetry #Love #Ironic #Path #Nojoto

113 Love

"#OpenPoetry From, Ignoring everyone else just to be available to one To, Being available to everyone else just to forget the one It all changed...🖤"

#OpenPoetry From,
Ignoring everyone else just to
be available to one

To,
Being available to everyone else
just to forget the one

It all changed...🖤

Its all about matter of time🖤

#Love #Lovequotes #priority #Time #changes #brokenheart #lost #Dark #Deep #Thoughts #writer #sayings #Poet

36 Love

"#OpenPoetry तुझे अपने पास बुलाकर देखूँ क्या, बेवक़्त बेवजह तुझे सताकर देखूँ क्या... तुझसे बातें किये बिना दिल मानता नहीं, पर आज दिल को बेवकूफ बनाकर देखूँ क्या... अजमाइस हर दफा मोहब्बत ने की है मेरी, आज मोहब्बत को आजमाकर देखूँ क्या... जितने बरस बीते तन्हाइयों मे तेरे बिना, उन्हें अपनी यादों से मिटाकर देखूँ क्या... बारिश मे भीगकर जैसे फूलों को सुकूँ मिलता हैं, आज आँखों को तेरी मोहब्बत मे भिगाकर देखूँ क्या... जर्रा जर्रा बेसबर हैं मेरा तुझे छू जाने के लिए, खुद को थोड़ा और तड़पाकर देखूँ क्या... खुद को इस-कदर तैयार करता हूं के तुझे अच्छा लगूँ, तू जब भी देखे थोड़ा सरमाकर देखूँ क्या... लड़किया छेड़ती हैं परेशान करती हैं मुझे, मैं सिर्फ तेरा हु उन्हें बताकर देखूँ क्या..."

#OpenPoetry तुझे अपने पास बुलाकर देखूँ क्या, 
 बेवक़्त बेवजह तुझे सताकर देखूँ क्या...
तुझसे बातें किये बिना दिल मानता नहीं, 
 पर आज दिल को बेवकूफ बनाकर देखूँ क्या...
अजमाइस हर दफा मोहब्बत ने की है मेरी, 
 आज मोहब्बत को आजमाकर देखूँ क्या...
जितने बरस बीते तन्हाइयों मे तेरे बिना, 
 उन्हें अपनी यादों से मिटाकर देखूँ क्या...
बारिश मे भीगकर जैसे फूलों को सुकूँ मिलता हैं, 
 आज आँखों को तेरी मोहब्बत मे भिगाकर देखूँ क्या... 
जर्रा जर्रा बेसबर हैं मेरा तुझे छू जाने के लिए, 
 खुद को थोड़ा और तड़पाकर देखूँ क्या... 
खुद को इस-कदर तैयार करता हूं के तुझे अच्छा लगूँ, 
 तू जब भी देखे थोड़ा सरमाकर देखूँ क्या... 
लड़किया छेड़ती हैं परेशान करती हैं मुझे, 
 मैं सिर्फ तेरा हु उन्हें बताकर देखूँ क्या...

#OpenPoetry (part-1)

34 Love
1 Share

"#OpenPoetry सच्चाई यह है कि केवल ऊँचाई ही काफ़ी नहीं होती, सबसे अलग-थलग, परिवेश से पृथक, अपनों से कटा-बँटा, शून्य में अकेला खड़ा होना, पहाड़ की महानता नहीं, मजबूरी है। ऊँचाई और गहराई में आकाश-पाताल की दूरी है। जो जितना ऊँचा, उतना एकाकी होता है, हर भार को स्वयं ढोता है, चेहरे पर मुस्कानें चिपका, मन ही मन रोता है।"

#OpenPoetry सच्चाई यह है कि
केवल ऊँचाई ही काफ़ी नहीं होती,
सबसे अलग-थलग,
परिवेश से पृथक,
अपनों से कटा-बँटा,
शून्य में अकेला खड़ा होना,
पहाड़ की महानता नहीं,
मजबूरी है।
ऊँचाई और गहराई में
आकाश-पाताल की दूरी है।

जो जितना ऊँचा,
उतना एकाकी होता है,
हर भार को स्वयं ढोता है,
चेहरे पर मुस्कानें चिपका,
मन ही मन रोता है।

#OpenPoetry

24 Love

"ये रातें ! क्यूँ गुजरती नहीं । बादलों की आंखें क्यूँ बरसती नहीं । सिर्फ हम ही रहते हैं बेताब उन्हें देखने की खातिर ! क्यूँ कभी उनकी नजर भी ! हमे देखने को तरसती नहीं । - Ankit dhyani"

ये रातें ! क्यूँ गुजरती नहीं ।
बादलों की आंखें क्यूँ बरसती नहीं ।
सिर्फ हम ही रहते हैं बेताब उन्हें देखने की खातिर !
क्यूँ कभी उनकी नजर भी ! हमे देखने को तरसती नहीं ।

- Ankit dhyani

#OpenPoetry #nojoto #nojotohindi

22 Love