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"प्रिये दादा जी @seema kapoor याद आते बहुत हो आँखो में कभी आँसू बनकर सताते बहुत हो चले गए दूर बहुत /पर/आखरी समय में भी याद तो करते होगे बहुत मायूसी सी हैं के मिल ना पाई मैं अब अफसोस हैं किसी से कहं भी ना पाई मैं लम्बे अर्से से साथ रहे हम उम्र के आखरी पडा़व में रिश़्ते ही संजो ना पाई मैं कभी कभी एक टीस सी रह रह कर उठती हैं की क्यूँ हुई ,,(पोती बनकर)पराई मैं😔"

प्रिये दादा जी                                            @seema kapoor
याद आते बहुत हो
आँखो में कभी आँसू बनकर सताते बहुत हो

चले गए दूर बहुत /पर/आखरी समय में भी याद तो करते होगे बहुत

मायूसी सी हैं के मिल ना पाई मैं
अब अफसोस हैं किसी से कहं भी ना पाई मैं

लम्बे अर्से से साथ रहे हम उम्र के आखरी पडा़व में 
रिश़्ते ही संजो ना पाई मैं

कभी कभी एक टीस सी रह रह कर उठती हैं
की क्यूँ हुई ,,(पोती बनकर)पराई मैं😔

 

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"प्रिये दादा जी Jinki ungli pakad kar maine chalna seekha....unhi ko apne hatho se jala kar aaya hun.... jinhone mujhe duniya dikhai...unhi ko is duniya se bhej kar aaya hun"

प्रिये दादा जी  Jinki ungli pakad kar maine chalna seekha....unhi ko apne hatho se jala kar aaya hun....
jinhone mujhe duniya dikhai...unhi ko
is duniya se bhej kar aaya hun

#Oldpeople

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"प्रिये दादा जी मेरी स्वत्रंत सोच के हमेशा एक अडिग स्तम्भ रहे मेरे दादाजी !! , पौराणिक कथाए ,शौर्य-पराक्रम से लबरेज गाथाएँ सुनाना उनका और उनके मुख से सुनना मेरा शौक़ था , हमेशा हम दोनों मिलकर घर पर बनी सब्जी में कमियां ढूंढते थे !! उनका स्वभाव काफी उग्र था मगर मुझे कभी महसूस नही होने दिया !! आज वो मेरे साथ नही है मगर उनकी यांदे आज भी मुझे आंतरिक सदृढता देती है !!"

प्रिये दादा जी  मेरी स्वत्रंत सोच के हमेशा एक अडिग स्तम्भ रहे मेरे दादाजी !! ,
पौराणिक कथाए ,शौर्य-पराक्रम से लबरेज गाथाएँ सुनाना उनका 
और उनके मुख से सुनना मेरा शौक़ था , 
हमेशा हम दोनों मिलकर घर पर बनी सब्जी में कमियां ढूंढते थे !!
 उनका स्वभाव काफी उग्र था मगर
 मुझे कभी महसूस नही होने दिया !!
आज वो मेरे साथ नही है मगर 
उनकी यांदे आज भी मुझे आंतरिक सदृढता देती है !!

#पूज्य_दादाजी
#nojotonews @nojotonews #nojotoapp @nojotoapp

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"प्रिये दादा जी उन्हें देखकर खेलने के लिए हम खो देते थे आपा तभी तो अपने दादाजी को हम कहते थे बड़े पापा उन्हीं से जाकर चिपके जब भी मम्मी ने मारा या फिर पापा ने डाटा और जाते भी क्यों न उन्हीं के पास दादा पोते का जुड़ा हुआ था जो इतना गहरा नाता समय भी अजीब है जब हम साथ थे और जब हम खूब हंसे थे आज उसी समय को याद करके आंखे नम हो जाती हैं miss uhh Bade Papa"

प्रिये दादा जी    उन्हें देखकर खेलने के लिए हम खो देते थे आपा
तभी तो अपने दादाजी को हम कहते थे बड़े पापा
उन्हीं से जाकर चिपके जब भी मम्मी ने मारा
या फिर पापा ने डाटा
और जाते भी क्यों न उन्हीं के पास 
दादा पोते का जुड़ा हुआ था जो इतना गहरा नाता
समय भी अजीब है
जब हम साथ थे और जब हम खूब हंसे थे
आज उसी समय को याद करके आंखे नम हो जाती हैं
miss uhh Bade Papa

बड़े पापा

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"प्रिये दादा जी Dosto mere dada ji sayer the... ushke kuch word aaj muje yadh wo hi m aapko sunana raha hu.. ......... ye lalo ghor h jo bikhre huwe... jami se bhi bade h inme akser bade.. wo mahnat ka parida ... jo andre aata h andre jata h ... nirjal rukha sukha bhojan khata h ... wo hi amrit lagta h..."

प्रिये दादा जी  Dosto mere dada ji sayer the...
ushke kuch word aaj muje yadh wo hi m aapko sunana raha hu..
.........
ye lalo ghor h jo bikhre huwe...
jami se bhi bade h inme akser bade..
wo mahnat ka parida ...
jo andre aata h andre jata h ...
nirjal rukha sukha bhojan khata h ...
wo hi amrit lagta h...

ishme taro ko dekh k btaya gya h...
ye jo chamakdar tare h ...
inme se kuch tare pirthvi se bhi bade h...
fir chamkadar taro se majdur ki tulna ki gai h ...
jab koi majdur subah andre hone se pahle kam pe jata h or sam bhukha pyasha khtore mehnat karke lot aata h ...
fir wo pani pita h or mitha bhojan khata h ...
yani ushko itni tej bhukh lagi hoti h ...
byasi roti bhi amrit k saman lagti h ..

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