Roshni shayari
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"ऊपर वाला भी क्या करामात किए बैठा है,वहाँ ख़ुद मेरी कहानी लिखता है यहाँ क़लम मुझे दिए बैठा है. ख़ुद तो लिखता है खुश हो हो के,यहाँ दर्द मुझे हज़ार दिए बैठा है. ख़ुद तो लगाता है मेरी सांसों पे दाम,यहाँ फिक्र मुझे मौत की बेवज़ह दिए बैठा है. हिजर की यादों में तड़पता हूं मैं,वो खुद मेरा निक़ाह बेवफ़ा से किये बैठा है. लोग तो ढूंढते हैं उसे दर दर जा के,वो तो ख़ुद अमन की किताब पे क़लम लिए बैठा है।"

ऊपर वाला भी क्या करामात किए बैठा है,वहाँ ख़ुद मेरी कहानी लिखता है यहाँ क़लम मुझे दिए बैठा है.

ख़ुद तो लिखता है खुश हो हो के,यहाँ दर्द मुझे हज़ार दिए बैठा है.

ख़ुद तो लगाता है मेरी सांसों पे दाम,यहाँ फिक्र मुझे मौत की बेवज़ह दिए बैठा है.

हिजर की यादों में तड़पता हूं मैं,वो खुद मेरा निक़ाह बेवफ़ा से किये बैठा है.

लोग तो ढूंढते हैं उसे दर दर जा के,वो तो ख़ुद अमन की किताब पे क़लम लिए बैठा है।

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168 Love
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"प्यास लगे पे पानी नसीब नही हुया दर्दो में मुझे शराब पीनी पढ़ी है कुछ दिनों से, दिल पगला अब तक डर रहा है प्यार में दूरी से सालो हुए है तुझे गए इंतज़ार कर रही हूं कुछ दिनों से, तेरी आहट हर वक़्त बसी रहती थी मेरी नगरी में तुम आये नही बस अब कुछ दिनों से, तेरे होते हुए हम कभी रोते नही थे आँसुओ में डूबे है बस कूछ दिनों से, तेरे चेहरे की चमक ही काफी थी मेरे लिए वो चिराग भुझ गए अब कुछ दिनों से, चांद सा चेहरा अब मर्झा गया है मेरा मौसम बदल गए है शायद कुछ दिनों से, तूने तो खबर नही पूछी मेरी चोट तो अब सह ली है मैंने कुछ दिनों से,"

प्यास लगे पे पानी नसीब नही हुया
दर्दो में मुझे शराब पीनी पढ़ी है कुछ दिनों से,

दिल पगला अब तक डर रहा है प्यार में दूरी से
सालो हुए है तुझे गए इंतज़ार कर रही हूं कुछ दिनों से,

तेरी आहट हर वक़्त बसी रहती थी मेरी नगरी में
तुम आये नही बस अब कुछ दिनों से,

तेरे होते हुए हम कभी रोते नही थे
आँसुओ में डूबे है बस कूछ दिनों से,

तेरे चेहरे की चमक ही काफी थी मेरे लिए
वो चिराग भुझ गए अब कुछ दिनों से,

चांद सा चेहरा अब मर्झा गया है मेरा
मौसम बदल गए है शायद कुछ दिनों से,

तूने तो खबर नही पूछी मेरी
चोट तो अब सह ली है मैंने कुछ दिनों से,

@aman6.1 @aamil Qureshi @Mr. MANEESH @Neetu_SharmA_POET✒ @vishakha Varun

162 Love
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"We build What we dream"

We build
What we dream

 

125 Love
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"एक हिस्से में खुशियां,एक में गम रखकर देखते हैं । जख्म पर मरहम नहीं, चलो मरहम पर जख्म रखकर देखते हैं । azeem khan"

एक हिस्से में खुशियां,एक में गम रखकर देखते हैं ।

जख्म पर मरहम नहीं, चलो मरहम पर जख्म रखकर देखते हैं ।


azeem khan

# जख्म मरहम#

120 Love
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"इक मकां में, ऐसे बसेरा किया गया । चराग बुझाए गए, और अंधेरा किया गया । azeem khan"

इक मकां में, ऐसे बसेरा किया गया ।


चराग बुझाए गए, और अंधेरा किया गया ।


azeem khan

# इक मकां में ऐसे #

118 Love
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