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"You can never cross the river by standing on the bank of the river until you give it a try"

You can never cross the river by standing on the bank of the river until you give it a try

 

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"लहरों से टकराना है रेत में घर बनाना है काफिले से अलग चल मुझे कुछ कर दिखाना है बुलंद इरादों के साथ कदम बढ़ाना है बिन कदम बढ़ाये हार मान लिया तो जीवन जीने की हकदार नही क्योंकि मैं मुसाफिर हूँ मुझे भवसागर में लहरों से लड़ना होगा पहुचना है मंजिल तक तो हर परिस्थिति से गुजरना होगा"

लहरों से टकराना है
रेत में घर बनाना है
काफिले से अलग चल
मुझे कुछ कर दिखाना है
बुलंद इरादों के साथ कदम बढ़ाना है
बिन कदम बढ़ाये हार मान लिया
तो जीवन जीने की हकदार नही
क्योंकि मैं मुसाफिर हूँ
मुझे भवसागर में लहरों से लड़ना होगा
पहुचना है मंजिल तक
तो  हर परिस्थिति से गुजरना होगा

#Sea

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"Wahi ek shaam dubara aa jae.... chaar purane dost aa jae..... mehfil besak nayi ho.... jaam purane aa jae"

Wahi ek shaam dubara aa jae....
chaar purane dost aa jae.....
mehfil besak nayi ho....
jaam purane aa jae

 

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"आज तो ये चाँद 🌛भी मगरूर हुआ बैठा है वो👰 इंतज़ार में है और ये रूठा😡 हुआ बैठा है उसकी बेकरारी 🤗का इसे कहाँ अहसास है शायद ये अपनी चांदनी👸 को साथ लिए बैठा है इसे कहाँ फिक्र होगी वक़्त की आज ये सितारों🌟 से मोहब्बत की होड़ लगाए बैठा है ऐ चाँद🌝..... ज़रा सा अपना ध्यान चांदनी 👸से हटा देख मेरी मासूम सी मोहब्बत👰 तेरे इंतज़ार में है एक पल ही सही मेरे चाँद 👰🏻को नज़र तू आजा उसकी इबादत को मुकम्मल तो कर जा💖 माना की मोहब्बत👰 मेरी है पर रुखसार तेरा जरूरी है आज मेरे चाँद 👰🏻को तू दीदार दे...... ऐ चाँद🌝...Micku"

आज तो ये चाँद 🌛भी मगरूर हुआ बैठा है
वो👰 इंतज़ार में है और ये रूठा😡 हुआ बैठा है
उसकी बेकरारी 🤗का इसे कहाँ अहसास है
शायद ये अपनी चांदनी👸 को साथ लिए बैठा है
इसे कहाँ फिक्र होगी वक़्त की आज
ये सितारों🌟 से मोहब्बत की होड़ लगाए बैठा है
ऐ चाँद🌝.....
ज़रा सा अपना ध्यान चांदनी 👸से हटा
देख मेरी मासूम सी मोहब्बत👰 तेरे इंतज़ार में है
एक पल ही सही मेरे चाँद 👰🏻को नज़र तू आजा 
उसकी इबादत को मुकम्मल तो कर जा💖
माना की मोहब्बत👰 मेरी है 
पर रुखसार तेरा जरूरी है
आज मेरे चाँद 👰🏻को तू दीदार दे......
ऐ चाँद🌝...Micku

hashtag chaand

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"जानेमन,क़माल लगती हो! जब तुम अज़ीब सी हो जाती हो...... दीवारों से उचककर देखती हो बंद दरवाज़ों से झांकती हो खिड़कियों की चटखनी हटाती हो बेसुआदी के चटखारे लेती हुई ज़िंदगी लिखती हो जानेमन,क़माल लगती हो! जब तुम अज़ीब सी हो जाती हो"

जानेमन,क़माल लगती हो!
जब तुम अज़ीब सी हो जाती हो......
दीवारों से उचककर देखती हो
बंद दरवाज़ों से झांकती हो
खिड़कियों की चटखनी हटाती हो
बेसुआदी के चटखारे लेती हुई
ज़िंदगी लिखती हो
जानेमन,क़माल लगती हो!
जब तुम अज़ीब सी हो जाती हो

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