River Shore
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"जिंदगी की इस रफ्त्तार मे, धूल गए है सभी नाम... गैरों से क्या उम्मीद करे, ज़ब अपने ना आते काम, भूल जा तू, उस बात को, छोड़ दे, बेकार जिद्द, लौट कर आते नहीं थे फरिस्ते जो करीब... हर तरफ है, नफरतो का जल रहा है, दीप जो बुझ नहीं सकता कभी वो इस कलयुग संसार मे........."

जिंदगी की इस रफ्त्तार मे, 
धूल गए है सभी नाम... 
गैरों से क्या उम्मीद करे, 
ज़ब अपने ना आते काम, 
भूल जा तू,  उस बात को, 
छोड़ दे, बेकार जिद्द, 
लौट कर आते नहीं 
थे फरिस्ते जो करीब... 
हर तरफ है,  नफरतो का 
जल रहा है,  दीप जो 
बुझ नहीं सकता कभी वो 
इस कलयुग संसार मे.........

# jindagi

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"Just now it ends the life of disrespect, get a breath of peace. Raecive a bread,but give me some confession with love, just let the body and heart res in some world. बस अपमान कि जिंदगी ख़त्म हो अब, एक चैन की सांस मिल जाए। दिन में एक रोटी मिले मगर प्यार से हां कबूल है मुझे, बस अब किसी दुनिया में इस दिल और शरीर को ज़रा आराम मिल जाए। _satyprabha __my Life💕✍"

Just now it ends the life of disrespect,
get a breath of peace.
Raecive a bread,but give me some
confession with love,
just let the body and heart res
in some world.  

बस  अपमान कि जिंदगी ख़त्म हो अब,
एक चैन की सांस मिल जाए।
दिन में एक रोटी मिले मगर प्यार से
हां कबूल है मुझे,
बस अब किसी दुनिया में इस 
दिल और शरीर को ज़रा आराम 
मिल जाए।

_satyprabha
__my Life💕✍

wish

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"बक्त तो बदलता है पर प्यार नही, इंसान तो बदलता है पर जज़्बात नही, अल्फ़ाज़ बदलतें हैं खामोसी नहीं, हँसी रुकती है धड़कन नहीं।"

बक्त तो बदलता है
पर प्यार नही,
इंसान तो बदलता है
पर जज़्बात नही,
अल्फ़ाज़ बदलतें हैं
खामोसी नहीं,
हँसी रुकती है
धड़कन नहीं।

#बक्त#जज़्बात#अल्फ़ाज़#धड़कन

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"Meri Mahobbat Tumhare Leye Kbhi Kam Nahi Hogi.. Chaahe Waqt Badle, Ya Zamana Yaa Phir Khud Tum...."

Meri Mahobbat Tumhare Leye
 Kbhi Kam Nahi Hogi..

 Chaahe Waqt Badle, Ya Zamana
Yaa Phir Khud Tum....

Aisa Hi Hai Mera Pyar ....🧡

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"गज़ल मेरे अशआर सुनाना, ना सुनाने देना । जब मैं दुनिया से चला जाऊं, तो जाने देना। साथ इनके है,बहुत ख़ाक उड़ाई मैंने । इन हवाओं को मेरी खाक उड़ाने देना । रहूं ख़ामोश तो, ख़ामोश ही रखना मुझको । और अगर शोर मचाऊं,तो मचाने देना । अब तो बारिश मैं भी स्कूल खुला करते हैं । वहां ना भेजना, बच्चों को नहाने देना ।"

गज़ल
मेरे अशआर सुनाना, ना सुनाने देना ।
जब मैं दुनिया से चला जाऊं, तो जाने देना।
साथ इनके है,बहुत ख़ाक उड़ाई मैंने ।
इन हवाओं को मेरी खाक उड़ाने देना ।
रहूं ख़ामोश तो, ख़ामोश ही रखना मुझको ।
और अगर शोर मचाऊं,तो मचाने देना ।
अब तो बारिश मैं भी स्कूल खुला करते हैं ।
वहां ना भेजना, बच्चों को नहाने देना ।

# अमीर इमाम poetry#

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