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"तेरी धरोहर को, ऐ धरती माँ.. हर इंसान ने उजाड़ दिया.. नया युग कह- कह कर, हर जुर्म वक्त पर डाल दिया... आज हर अल्फाज बच्चों के, तुच्छ भाषा से व्यक्त होती है, और कुछ मर्दो की आँखों से तो सिर्फ हैवानियत झलकती है, ऐ धरती माँ, ये बात जानकार तू खुद से भी घबराएगी, इस धरती की लाज बेचकर दुनिया ख़ुशी से खायेगी, माँ इस युग को सब कलयुग कहकर अपना राज चलाएगी.."

तेरी धरोहर को, ऐ धरती माँ.. 
हर इंसान ने उजाड़ दिया.. 
नया युग कह- कह कर, 
हर जुर्म वक्त पर डाल दिया... 
आज हर अल्फाज बच्चों के, 
तुच्छ भाषा से व्यक्त होती  है, 
और कुछ  मर्दो की आँखों से तो 
सिर्फ हैवानियत झलकती है, 
ऐ धरती माँ, ये बात जानकार 
तू खुद से भी घबराएगी,
इस धरती की लाज बेचकर 
दुनिया ख़ुशी से खायेगी,  
माँ इस युग को सब कलयुग कहकर 
अपना राज चलाएगी..

# धरती माँ
plzz इस कविता को गलत तरीके से मत लेना..

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"हमें एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां सुंदरता को रंग से देखा जाता है शिक्षा को marks से देखा जाता है और सम्मान तो पैसा देखकर किया जाता है 🙏🙏 धन्य है समाज🙏🙏"

हमें एक ऐसे समाज में रहते हैं
जहां सुंदरता को रंग से देखा जाता है
 शिक्षा को marks से देखा जाता है
 और सम्मान 
   तो पैसा देखकर किया जाता है
🙏🙏 धन्य है  समाज🙏🙏

#samaj #dikave ka🙏🙏

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"हमारे शेर हैं, जो हमारी इबारत है । दर्द की नींव पर खड़ी इक इमारत है । जिस जुर्म की सजा काट रही हैं आंखें । कुछ नहीं है, बस इस दिल की शरारत है । azeem khan"

हमारे शेर हैं, जो हमारी इबारत है ।

दर्द की नींव पर खड़ी इक इमारत है ।

जिस जुर्म की सजा काट रही हैं आंखें ।

कुछ नहीं है, बस इस दिल की शरारत है ।

azeem khan

# जुर्म, सजा, आंखें#

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"जहाँ अत्याचार, ज्यादती हो, वहां पर समाज के ठेकेदार खामोश होते है ..!. वहां अच्छे, काम की बात हो, समाज के /हितैषी,चिल्लाते हैं..!! 🙏सैनी🙏"

जहाँ अत्याचार, ज्यादती हो, वहां पर समाज के ठेकेदार खामोश होते है ..!.
वहां अच्छे, काम की बात हो, समाज  के /हितैषी,चिल्लाते  हैं..!!

🙏सैनी🙏

#samaj @Satendra Shah @gourav roy @Shubham Hathi @Bhagchand Thekla @Kanchan Tiwari

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"I am against religion because it teaches us to be satisfied with not understanding the world."

I am against religion because it teaches us to be satisfied with not understanding the world.

#Religion

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