वो धतूरा समझ के खेत के अनार बेच डालेगा, 
रद्दी समझ
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"वो धतूरा समझ के खेत के अनार बेच डालेगा, रद्दी समझ के आज के अख़बार बेच डालेगा ! उलझा के हमें हिन्दू और मुसलमान के बातों में, चंद लोगों के हाथों में रोजगार बेच डालेगा !!_ ________________________________________ स्टेशन बेच रहा है घर भी बेच डालेगा, किला बेच डाला है शहर भी बेच डालेगा ! बनें रहें हम अगर ऐसे हीं धर्म के पुजारी, उद्योगपतियों के हाथों में सरकार बेच डालेगा !! ___________________________________________ हिन्दू बेच डालेगा मुसलमान बेच डालेगा, शमशान बेच डालेगा कब्रिस्तान बेच डालेगा ! उसे बेचने में महारत हासिल है मेरे दोस्त, वो एक दिन मेरा हिंदुस्तान बेच डालेगा !! :- संतोष 'साग़र'"

वो धतूरा समझ के खेत के अनार बेच डालेगा, 
रद्दी समझ के आज के अख़बार बेच डालेगा !
उलझा के हमें हिन्दू और मुसलमान के बातों में, 
चंद लोगों  के हाथों में रोजगार बेच डालेगा !!_
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 स्टेशन बेच रहा है घर भी बेच डालेगा, 
किला बेच डाला है शहर भी बेच डालेगा !
 बनें रहें हम अगर ऐसे हीं धर्म के पुजारी, 
उद्योगपतियों के हाथों में  सरकार बेच डालेगा !!
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हिन्दू बेच डालेगा मुसलमान बेच डालेगा, 
शमशान बेच डालेगा कब्रिस्तान बेच डालेगा !
उसे  बेचने में महारत हासिल है मेरे दोस्त, 
वो एक दिन मेरा हिंदुस्तान बेच डालेगा !!
                    :- संतोष 'साग़र'

#निजीकरण
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