मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारा सब जगह तू अपनाया है। मूर्ति पूजा व्यर्थ है,जो मां बाप को ठुकराया है।। पैसे की कीमत जो बता रहा तू वह मां बाप से पाया है।। धौष उन्हें तू दिखा रहा,जिसने तुझे......... इस काबिल बनाया है। मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारा सब जगह तू अपनाया है। मूर्ति पूजा व्यर्थ है,जो मां बाप को ठुकराया है।। सोच अगर मां...तुझे खिला ना..खा कर सोती तेरी जिंदगी क्या होती । पिता अगर ना...पैदल चलता... तेरी हर शौक अधूरी रहती ।। जिस कंधे पर तू बैठा कभी। उनसे हाथ छुड़ाया है। मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारा सब जगह तू अपनाया है। मूर्ति पूजा व्यर्थ है,जो मां बाप को ठुकराया है।। उम्मीद उन्हें बस इतनी थी तू भी उन्हें खिलाएगा, लडखड़ाए जो कदम उनके कभी....। तू उनकी ढाल बन जायेगा। किस्मत के मारे फिरते आज नसीब समझ अपनाया है। तेरी दुआओं के लिए जिसने,आखिरी सांस बचाया है। मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारा सब जगह तू अपनाया है। मूर्ति पूजा व्यर्थ है,जो मां बाप को ठुकराया है।। #हमारी आवाज़ ©pt.विकास kumar शर्मा #hmari aawaj #chaand